26/04/2024
the_ved_of_aayu_ayurveda
आयुर्वेद चिकित्सा के प्रचार प्रसार हेतु , प्रयासरत
26/04/2024
जलौका आपके त्वचा के सभी रोगों का नाश कर सकती है ।
08/12/2023
गृध्रसी= साइटिका का आयुर्वेद से सफल चमत्कारी इलाज...
◾लक्षण-: एक पैर मे पंजे से लेकर कमर तक दर्द होना गृध्रसी या रिंगण बाय कहलाता है। प्रायः पैर के पंजे से लेकर कूल्हे तक दर्द होता है जो लगातार होता रहता है। मुख्य लक्षण यह है कि दर्द केवल एक पैर मे होता है। दर्द इतना अधिक होता है कि रोगी सो भी नहीं पाता।
हारसिंगार = पारिजात के 10-15 कोमल पत्ते को कटे फटे न हों तोड़ लाएँ। पत्ते को धो कर मिक्सी मे या कैसे ही थोड़ा सा कूट ले या पीस ले। बहुत अधिक बारीक पीसने कि जरूरत नहीं है। लगभग 200-300 ग्राम पानी (2 कप) मे धीमी आंच पर उबालें। तेज आग पर मत पकाए... चाय की तरह पकाए। चाय कि तरह छान कर गरम गरम पानी (काढ़ा) पी ले। पहली बार मे ही 10% फायदा होगा।
प्रतिदिन 2 बार पिए...यदि आप ऑफिस जाते हैं तो दोगुना पानी उबाले। थर्मस मे भरकर ले जाएँ। इस हरसिंगार के पत्तों के काढ़े से 15 मिनट पहले और बाद तक ठंडा पानी न पीए...दही लस्सी और आचार न खाएं।
25/11/2023
गुड़ कितना गुणकारी है......
रोजाना गुड़ की चाय पिएं स्वस्थ रहे..... 🤗
दोस्तों, क्या आपको पता है कि गुड़ का सेवन सर्दी के मौसम में कितना गुणकारी होता है......?
घर में किसी को भी खांसी जुकाम हो जाता है तो डेली 3 दिन तक अजवायन, तुलसी के पत्ते और गुड़ का काढ़ा बनाकर पीए यह स्वादिष्ट भी होता है और बहुत फायदा भी करता है मेरी दादी हम सब भाई बहनों को यही बनाकर देती थी.....
आइये जानते हैं गुड़ के फायदे...
1- गुड़ खाने से नहीं होती गैस
की दिक्कत
2- खाना खाने के बाद अक्सर
मीठा खाने का मन करता हैं।
इसके लिए सबसे बेहतर है
कि आप गुड़ खाएं।
गुड़ का सेवन करने से आप
HEALTHY रह सकते हैं
3 - पाचन क्रिया को सही रखना
4 - गुड़ शरीर का रक्त साफ
करता है और मेटाबॉल्जिम
ठीक करता है।
रोज एक गिलास पानी या दूध
के साथ गुड़ का सेवन पेट को
ठंडक देता है। इससे गैस की
दिक्कत नहीं होती.....
जिन लोगों को गैस की परेशानी है,
वो रोज़ लंच या डिनर के बाद
थोड़ा गुड़ ज़रुर खाएं......
5 - गुड़ आयरन का मुख्य स्रोत है।
इसलिए यह एनीमिया के मरीज़ों
के लिए बहुत फायदेमंद है।
खासतौर पर महिलाओं के
लिए इसका सेवन बहुत
अधिक ज़रुर है.....
6 - त्वचा के लिए, गुड़ ब्लड से
खराब टॉक्सिन दूर करता है,
जिससे त्वचा दमकती है और
मुहांसे की समस्या नहीं होती है।
7 - गुड़ की तासीर गर्म है,
इसलिए इसका सेवन जुकाम
और कफ से आराम दिलाता है।
जुकाम के दौरान अगर आप
कच्चा गुड़ नहीं खाना चाहते हैं
तो चाय या लड्डू में भी
इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
8 - एनर्जी के लिए -बुहत
ज़्यादा थकान और कमजोरी
महसूस करने पर गुड़ का
सेवन करने से आपका एनर्जी
लेवल बढ़ जाता है।
गुड़ जल्दी पच जाता है, इससे
शुगर का स्तर भी नहीं बढ़ता.
दिनभर काम करने के बाद
जब भी आपको थकान हो,
तुरंत गुड़ खाएं।
9 - गुड़ शरीर के टेंपरेचर को
नियंत्रित रखता है।
इसमें एंटी एलर्जिक तत्व हैं,
इसलिए दमा के मरीज़ों के
लिए इसका सेवन काफी
फायदेमंद होता है।
10 - जोड़ों के दर्द में आराम--
रोज़ गुड़ के एक टुकड़े के
साथ अदरक का सेवन करें,
इससे जोड़ों के दर्द की
दिक्कत नहीं होगी।
11- गुड़ के साथ पके चावल
खाने से बैठा हुआ गला व
आवाज खुल जाती है।
12 - गुड़ और काले तिल के
लड्डू खानेसे सर्दी में अस्थमा
की परेशानी नहीं होती है।
13 - जुकाम जम गया हो, तो
गुड़ पिघलाकर उसकी पपड़ी
बनाकर खिलाएं।
14 - गुड़ और घी मिलाकर खाने
से कान का दर्द ठीक हो जाता है।
15 - भोजन के बाद गुड़ खा
लेने से पेट में गैस नहीं बनती.
16 - पांच ग्राम सौंठ दस ग्राम
गुड़ के साथ लेने से पीलिया
रोग में लाभ होता है।
17 - गुड़ का हलवा खाने से
स्मरण शक्ति बढती है।
18 - पांच ग्राम गुड़ को इतने ही
सरसों के तेल में मिलाकर खानेसे
श्वास रोग से छुटकारा मिलता है।
एक बहुत ही जरुरी बात... गुड़ हमेशा...देशी गुड़ का ही प्रयोग करें... देशी गुड़ यानि जिसका रंग डार्क (गहरा) होता है... क्योकि गुड़ जितना सफेद या साफ़ रंग वाला होगा वो उतना ही नुक़सान दायक होगा क्योंकि इस गुड़ को कई तरह के केमिकल के द्वारा साफ़ किया जाता है...
तो दोस्तों... अब से हमेशा देशी गुड़ ही काम में लीजिये और इस देशी गुड़ का स्वाद बहुत ही उम्दा होता है और इस देशी गुड़ से जो भी रेसिपी बनाएंगे वो भी स्वाद में लाज़वाब होगी...!
तो देखा आपने दोस्तों, गुड़ के सेवन के कितने फायदे हैं सर्दी के मौसम में ... इसे रोज़ इस्तेमाल करें और लाभ लें...
🕉️कर भला तो हो भला🕉️
जय श्री कृष्ण 🚩 🙏
25/11/2023
हल्दी को हल्के में मत लेना, इसके चमत्कारी गुणो के आगे ये 30 रोग घुटने टेक देते है.. जरूर पढ़ें
◾हल्दी के 30 चमत्कारी फायदे ◾
मधुमेह के रोग : 1 चम्मच पिसी हुई हल्दी को फांककर पानी पीने से मधुमेह में हो रहे बार-पेशाब से आराम मिलता है। या 8 ग्राम पिसी हल्दी रोजाना दो बार पानी के साथ फंकी लें। इससे, बार-बार और अधिक मात्रा में पेशाब का आना, ज्यादा प्यास लगना, आदि मधुमेह के रोगों से आराम मिलता है।
त्वचा के रोग : हल्दी को पीसकर तिल के तेल में मिलाकर मालिश करें इससे चर्म रोग खत्म हो जाएगा। याअगर शरीर में खुश्की (चमड़ी सूख) गई हो तो सरसों के तेल में हल्दी को मिलाकर शरीर पर उसकी मालिश करने से लाभ होता है।
हाथ-पैर फटना : कच्चे दूध में पिसी हुई हल्दी मिलाकर त्वचा पर मालिश करने से त्वचा मुलायम होती है। इससे हाथ-पैर भी नहीं फटते हैं और यदि फट भी गये हों तो उनमें हल्दी भर दें तो फायदा होगा।
चेहरे की झांइयां : 10-10 ग्राम हल्दी और तिल को पीसकर पानी में मिलाकर रात को सोते समय चेहरे पर लगाएं और सुबह गर्म पानी से धो लें। इससे चेहरा चमक उठता है।
टांसिल का बढ़ना : 2 चुटकी पिसी हुई हल्दी, आधी चुटकी पिसी हुई कालीमिर्च और 1 चम्मच अदरक के रस को मिलाकर आग पर गर्म कर लें और फिर शहद में मिलाकर रात को सोते समय पीने से 2 ही दिन में टांसिल की सूजन दूर हो जाती है।
शरीर को शक्तिशाली बनाना : लगभग 500 ग्राम की मात्रा में हल्दी की गांठे और एक किलो बुझा हुआ चूना लेकर इसको एक मिट्टी के बर्तन में डालकर इसमें ऊपर से 2 लीटर पानी डालें। पानी डालते ही चूना पकने लगता है और जब यह ठण्डा हो जाए तो बर्तन को ढककर रख दें।
इसके बाद 2 महीने बाद हल्दी की गांठों को निकालकर पीसकर चूर्ण बना लें। हल्दी की गांठों के चूर्ण को 3 ग्राम की मात्रा में लेकर 10 ग्राम शहद के साथ मिलाकर लगातार 4 महीने तक रोजाना खाने से शरीर का खून साफ हो जाता है और इससे शरीर में भरपूर ताकत आती है।
चोट लगने पर : चोट लगने पर एक चम्मच हल्दी गर्म दूध के साथ पीने से दर्द और सूजन दूर हो जाती है। चोट लगी जगह पर हल्दी को पानी में मिलाकर उसका लेप लगाएं और अगर चोट ज्यादा गहरा हो तो उसमें हल्दी भर दें इससे चोट जल्द भर जाएगी। आंख में चोट लगने पर भी हल्दी को खाया जा सकता है। घी, आधा चम्मच सेंधानमक, थोड़ा-सा पानी मिलाकर हलुवा सा बनाकर चोट पर रखकर बांधें।
आधा लीटर उबलते हुए गर्म पानी में आधा चम्मच सेंधानमक डालकर हिलाएं फिर इसमें एक चम्मच हल्दी डालें और बर्तन को उतारकर रख दें जब पानी सेक करने लायक हो जाये तो कपड़ा भिगोकर चोट वाले अंग पर इससें सेंक करें। इससे दर्द में आराम मलेगा।
हड्डी के टूटने पर : हड्डी के टूटने पर रोज हल्दी का सेवन करने से लाभ मिलता है। एक प्याज को पीसकर एक चम्मच हल्दी मिलाकर कपड़े में बांध लें। इसे तिल के तेल में रखकर गर्म करें और इससे फिर सेंक करें। कुछ देर सेंकने के बाद पोटली खोलकर दर्द वाले स्थान पर बांध दें।
दांत दर्द : हल्दी, नमक और सरसों का तेल मिलाकर रोज मंजन करें। इससे दांत मजबूत बनेंगे।
पेट की गैस : पेट में जब गैस भर जाती है तो बहुत दर्द होता है। ऐसी स्थित में पिसी हुई हल्दी और सेंधानमक 5-5 ग्राम की मात्रा में पानी से लें।
गठिया : गठिया के रोग में हल्दी के लड्डू खाने से लाभ होता है।
खुजली : शरीर के पीले रंग के दाने जिसमें मवाद भरी हो और उनमें खुजली हो तो, एक चम्मच हल्दी, एक कप गर्म दूध, चौथाई चम्मच देशी घी, स्वाद के लिए शक्कर डालकर सुबह शाम पियें।
चेचक : हल्दी और इमली के बीज समान मात्रा में पीसकर चुटकी भर प्रतिदिन 7 दिनों तक लेने से माता (चेचक) नहीं निकलती है। चेचक के निकलने पर इमली के बीज का चूर्ण हल्दी में मिलाकर लेने से चेचक जल्द ही ठीक हो जाता है। चेचक के दानों में अगर घाव हो जाये तो पान के कत्थे को हल्दी के संग सूखा ही छिड़के तो वह ठीक हो जायेगा।
सौन्दर्यवर्धक : पिसी हुई हल्दी, चंदन का बुरादा, पिसे हुए हरे नीम के पत्ते प्रत्येक 2-2 चम्मच में लेकर मिला लें और चेहरे पर मलें। इससे चेहरा चमक उठेगा और इस प्रयोग से चेहरे के कील मुंहासें, दाग-धब्बे दूर हो जाएंगे। कुछ हफ्ते लगातार इसे मलने से चेहरे का रंग भी साफ हो जाता है।
आंखों के रोग : हल्दी को अरहर की दाल में पकायें और छाया में सुखा लें उसे पानी में घिसकर, शाम होने से पहले ही दिन में दो बार जरूर लगायें इससे झामर रोग, सफेद फूली और आंखों की लालिमा में लाभ होता है।
पथरी : हल्दी और पुराना गुड़ छाछ में मिलाकर सेवन करने से पथरी नष्ट हो जाती है।
मस्से : हल्दी की गांठ को अरहर की दाल में पकायें फिर छाया में सुखाकर, गाय के घी में पीसकर (मस्सों) पर उसका लेप करें, इससे मस्से तुरन्त नर्म हो जाते हैं और दर्द दूर होता है।
06/09/2023
नाडी परीक्षा...
नाडी परीक्षा के बारे में शारंगधर संहिता, भावप्रकाश, योगरत्नाकर आदि ग्रंथों में वर्णन है। महर्षि सुश्रुत अपनी योगिक शक्ति से समस्त शरीर की सभी नाड़ियाँ देख सकते थे।
ऐलोपेथी में तो पल्स सिर्फ दिल की धड़कन का पता लगाती है; पर ये इससे कहीं अधिक बताती है। आयुर्वेद में पारंगत वैद्य नाडी परीक्षा से रोगों का पता लगाते है।
इससे ये पता चलता है की कौन सा दोष शरीर में विद्यमान है।
ये बिना किसी महँगी और तकलीफदायक डायग्नोस्टिक तकनीक के बिलकुल सही निदान करती है। जैसे कि शरीर में कहाँ कितने साइज़ का ट्यूमर है, किडनी खराब है या ऐसा ही कोई भी जटिल से जटिल रोग का पता चल जाता है। दक्ष वैद्य हफ्ते भर पहले क्या खाया था ये भी बता देतें है। भविष्य में क्या रोग होने की संभावना है ये भी पता चलता है।
- महिलाओं का बाया और पुरुषों का दाया हाथ देखा जाता है।
- कलाई के अन्दर अंगूठे के नीचे जहां पल्स महसूस होती है तीन उंगलियाँ रखी जाती है।
- अंगूठे के पास की ऊँगली में वात, मध्य वाली ऊँगली में पित्त और अंगूठे से दूर वाली ऊँगली में कफ महसूस किया जा सकता है।
- वात की पल्स अनियमित और मध्यम तेज लगेगी।
- पित्त की बहुत तेज पल्स महसूस होगी।
- कफ की बहुत कम और धीमी पल्स महसूस होगी।
- तीनो उंगलियाँ एक साथ रखने से हमें ये पता चलेगा कि कौन सा दोष अधिक है।
- प्रारम्भिक अवस्था में ही उस दोष को कम कर देने से रोग होता ही नहीं।
- हर एक दोष की भी 8 प्रकार की पल्स होती है; जिससे रोग का पता चलता है, इसके लिए अभ्यास की ज़रुरत होती है।
- कभी कभी 2 या 3 दोष एक साथ हो सकते है।
- नाडी परीक्षा अधिकतर सुबह उठकर आधे एक घंटे बाद करते है जिससे हमें अपनी प्रकृति के बारे में पता चलता है। ये भूख प्यास, नींद, धुप में घुमने, रात्री में टहलने से, मानसिक स्थिति से, भोजन से, दिन के अलग अलग समय और मौसम से बदलती है।
- चिकित्सक को थोड़ा आध्यात्मिक और योगी होने से मदद मिलती है। सही निदान करने वाले नाडी पकड़ते ही तीन सेकण्ड में दोष का पता लगा लेते है। वैसे 30 सेकण्ड तक देखना चाहिए।
- मृत्यु नाडी से कुशल वैद्य भावी मृत्यु के बारे में भी बता सकते है।
- आप किस प्रकृति के है? वात प्रधान, पित्त प्रधान या कफ प्रधान या फिर मिश्र?
खुद कर के देखे या किसी वैद्य से पता कर देखिये।
जय श्री राम जय गोविंदा जय सनातन संस्कृति 🙏
10/08/2023
भोपाल नगर में अनुभवी वैद्य से परामर्श प्राप्त करने हेतु स्वर्णिम अवसर
आयुर्वेद चिकित्सा परामर्श निशुल्क प्राप्त करें ।
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09/08/2023
nasya karma , ayurved panchkarma क्या है नस्य चिकित्सा?नस्य एक आयुर्वेदिक चिकित्सा है, जिसका उपयोग कान, नाक और गले की स्वास्थ्य जटिलताओं को ठीक करन.....
26/06/2023
धन्यवाद सर जी 😊
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