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Astrology question answer
सम्पुर्ण जीवन(भविष्य) का हाल कुंडली के साथ
राहु और ज्योतिष ।
कुंडली में हम राहु को मोह माया , भोग , विलास , छल कपट , राजनीति, हद से ज्यादा चलाकि, अचानक से बनने वाले काम । इत्यादि से देखते हैं क्योंकि राहु एक पापी ग्रह होता है इसलिए यह ग्रह इंसान को पाप क्यों ढक लेता है और आपसे वह हर तरीके से पाप करवाते हैं ग्रह प्रभाव कभी नहीं बदलता चाहे कुछ भी हो जाए अगर। शनि पापी ग्रहों का राजा हैं तो राहु उसका सेनापति क्योंकि राहु हमेशा मंगल, गुरु , सूर्य ,चंद्रमा से दुश्मनी ही निकलता है इसलिए अगर ऐसे ग्रहों के साथ बैठ जाएं या दृष्टि पड़ जाए तो इंसान की जिंदगी तबाह कर देता है । राहु अक्सर इंसान को जब भी मंगल गुरु सूर्य चंद्रमा की महादशा अंतर्दशा आती है तो उसके हर काम में असफलता ही रहता है । कष्ट ही देता है और किए जा रहे । हर प्रयास में इंसान को पीछे की ओर धकेलने का काम करता है क्योंकि राहु नहीं चाहता इंसान उसकी महादशा अंतर्दशा जैसे सूर्य चंद्रमा मंगल गुरु में सफल हो । राहु को रात का अंधेरा बहुत पसंद आता है हो भी क्यों ना दिन में सूर्य और रात में चंद्रमा उसका साथ नहीं देता बस यह होता है । जिस दिन चंद्रमा नहीं निकलता या जिस दिन ग्रहण होता है । उस दिन राहु की ताकत सबसे ज्यादा होती हैं अगर हम राहु के मित्रों की बात करें तो इसके मित्र शनि, बुध,केतु, शुक्र इसको बहुत फायदा करते हैं और यह अपनी ऐसे मित्रों की सहायता भी बहुत करता है अगर हम किसी तरीके से राहु को कंट्रोल कर ले जाएं । तो शनि जैसे ग्रह अपने आप कंट्रोल हो जाते हैं बस शर्त यह है शनि और राहु एक दूसरे को देख रहे हो या साथ में बैठे हो या महादशा , अंतर्दशा में एक दूसरे के साथ हो
काम ना बन रहा हो तो एकबार अवश्य सिद्ध उपाय प्राप्त करे ।
बृहस्पति और अष्टम भाव
अष्टम भाव में बैठा बृहस्पति आमतौर पर जातक को दीर्घायु बनाता है , चिकित्सा शिक्षा के लिए बेहतर योग होता है ऐसा जातक स्वस्थ निरोग दीर्घायु होता है ।।
अष्टम भाव शोध का होता है यहां बैठा बृहस्पति जातक को गुढ़ विषय का ज्ञाता बनाता है ।।
अष्टम भाव में बैठे बृहस्पति की पूर्ण दृष्टि द्वितीय भाव पर होती है तो ऐसा जातक बड़ा अचल संपत्ति बड़ा कुटुंब का स्वामी होता है ।।
बृहस्पति अष्टम भाव बैठे तो इसकी पूर्ण दृष्टि द्वादश भाव पर होती है तो ऐसा जातक धार्मिक प्रवृत्ति का होता है, द्वितीय भाव पर होती है धनवान होता है और चतुर्थ भाव पर होती है तो वाहन मकान का सुख प्राप्त करता है ।।।
बृहस्पति अष्टम भाव में हो तो आम तौर पर जातक बेहद धार्मिक होता है, बृहस्पति की महादशा उत्कृष्ट फल देती है ।।
यहां बैठे बृहस्पति की पूर्ण दृष्टि द्वितीय भाव पर होती है तो बृहस्पति की महादशा में जातक बड़ा अचल संपत्ति खड़ा करता है ।।
ऐसा जातक वाणी के द्वारा धन कमाता है, बहुत अच्छा सलाहकार बनता है, बहुत अच्छा वकील ,ज्योतिष या डॉक्टर बन सकता है ।।।
अष्टम भाव ससुराल का भी होता है और यहां बैठा बृहस्पति बड़ा और धनी ससुराल देता है , धनवान परिवार में विवाह होता है ।।।
व्यक्ति को वसीयत, बीमा, और अन्य स्रोतों से धन लाभ हो सकता है ।।
दूसरा भाव में बृहस्पति की दृष्टि होने से व्यक्ति की वाणी संयमित होती है ।।
अष्टम भाव में बैठे बृहस्पति का अशुभ प्रभाव से पेट संबंधी समस्या ,अपच ,गैस एसिडिटी की समस्या होती है ।।
अष्टम भाव में बृहस्पति की स्थिति जातक को भाग्यशाली और संपन्न बना सकती है, लेकिन साथ ही कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है ।।
कुन्डली ' में नक्षत्र का बहुत महत्व होता है । और ज़्यादातर इसको अनदेखा कर दिया जाता है । अगर आप भी अपनी जिन्दगी सवारना चाहते है। तो आज ही अपनी कुन्ड्ली दिखाएँ । और अपनी जिन्दगी मे अच्छा बदलाव महसूस करे।
नोटः हमारे द्वारा दिए हुए उपाय बहुत कारगर और solid होते है। और हमारे द्वारा दिया हुआ धन वृद्धि यन्त्र बहुत ही कारगर सिद्ध हुआ है । बहुत ही लोगो ने लाभ उठाया आप भी लाभ उठाए ।
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मूलांक 1
जिनका जन्म 1-10-28 तारीक को हुआ है ।
अंक ज्योतिष में मूलांक 1 वालों का स्वामी सूर्य को माना जाता है। सूर्य को ग्रहों का राजा बताया गया है इस वजह से मूलांक 1 वालों के अंदर इसी तरह के गुण देखे जाते हैं।
मूलांक 1 वालों के अंदर लीडरशिप क्वालिटी भरी होती हैं। साथ ही इस मूलांक के जातकों का कम्यूनिकेशन काफी अच्छा होता है।
मूलांक 1 वालों का सामाजिक दायरा काफी अच्छा होता है। समाज में उनके आसपास लोग हमेशा देखने को मिलते हैं। साथ ही इनके सहयोग के लिए भी बाकी लोग हमेशा तैयार रहते हैं।
मूलांक 1 वाले जातक राजनीति में काफी अच्छा प्रदर्शन करते हैं। इनके अंदर ऊर्जा भी काफी ज्यादा देखी जाती है। अपनी कम्युनिकेशन स्किल के बल पर यह सभी का दिल जीत लेते हैं।
मूलांक 1 वालों की किन लोगों के साथ अधिक बनती है
1,20,19 और 28 तारीख को जन्मे लोगों का तालमेल मूलांक 5 वालों के साथ सबसे अच्छा देखने को मिलता है। इसके अलावा इनकी मूलांक 3 वालों के साथ भी अच्छा तालमेल रहता है। अंक ज्योतिष में मूलांक 3 को मंत्री बताया गया है। मूलांक 1 और मूलांक 3 एक दूसरे के पूरक माने जाते हैं। इसके अलावा मूलांक 1 वालों को मूलांक 9 वालों का भी पूरा सपोर्ट मिलता है।
मूलांक 1 वाले जातक बहुत ही डिसिप्लिन में रहना पसंद करते हैं। हालांकि, कभी कभी अपनी इस आदत की वजह से यह एग्रेसिव हो जाते हैं। साथ ही थोड़े जिद्दी स्वभाव के होते हैं। यह चाहते हैं हमेशा चीजें इनके हिसाब से ही होनी चाहिए।
मूलांक 1 वालों की मूलांक 8 वालों के साथ कम ही बनती है। दरअसल, मूलांक 8 शनि का अंक है और सूर्य और शनि के संबंध अच्छे नहीं होते हैं। इसके अलावा मूलांक 4 वालों के साथ भी इनके संबंध अच्छे नहीं होते हैं क्योंकि, मूलांक 4 राहु का अंक है।
30/04/2025
राहू शनि युति 29 मार्च से 18 मई से तक कई उतार -चढाव देगी भुचाल आना कीमत का घटना बढ़ना । युद्ध लड़ाई आकमण ' विस्फोट
बाद आना इत्यादि घटनाएँ होना । ऊपरी हवा इत्यादि का होना ।
सभी बच के रहे।
किसी को ये काफी ऊपर भी ले जायेग । ज्यादा तर नुकसान हो सकता है। कही किसी क्षेत्र मे
सभी लोग नारियल को काले कपड़े में बाधकर अपने सिर से उतारकर बहाये
शनि राहू के मन्त्रो का जाप कर के प्रार्थाना करे। जरूरत मंद लोगो की आशिष ले
Rahu Shani conjunction
May give sudden fall and ups till 18 May
As Share Market, Gold Price ups and downs
Astrology question answer सम्पुर्ण जीवन(भविष्य) का हाल कुंडली के साथ
ग्यारहवां घर
आपके जीवन में जब कभी ग्यारहवें घर के स्वामी की महादशा या अंतर्दशा या प्रत्यन्तर्दशा आएगी तब आपके पैसा कमाने के या जीवकोपार्जन के मौके बनने की सम्भावना होती हैं ।
Lottery, Sahre Market, अचानक धन लाभ के लिये।
कुछ योग कुड़ली मे जरुर होते है।
अगर आठवे भाव का स्वामी गयारवे भाव के साथ राशि परिवर्तन करे। तब अचानक धन लाभ होता है। या पंचम भाव का मलिक ग्यारहवें मे बैठ कर पंचम को देखे तब इसके लिये कुंडली के और भी भावो को देखना पडता है।
For Lottery, Share Market Or Sudden Gain.
There will be a combiton among 2nd, 5th, 8th, 9th, 11th house and their lord.
IF U WANT TO KNOW THAT DO U HAVE ANY YOGA OF LOTTERY WINNING. TOU CAN SHOW ME YOUR BIRTH CHART.
चन्द्रमा लग्न व वाले पे पैसा नहीं टिकता या फिर चचल स्वभाव का होता है।
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