29/07/2026
गुरु पूर्णिमा पर आपको सादर प्रणाम। 🙏
मुझे आज भी वह दिन याद है जब मैं पहली बार आपके घर आया था। आपने मुझसे एक गीत गाने के लिए कहा, और फिर मेरे टूटे-फूटे सुरों को अपने बाजे से संवारकर मुझे संगीत की पहली शिक्षा दी। आपने न केवल तालीम की शुरुआत कराई, बल्कि संगीत से मेरा परिचय कराया, अच्छा संगीत सुनने और समझने की दृष्टि दी, और संगीत का आनंद लेना भी सिखाया। आज ख़ुद को जहाँ भी पाता हूँ, वह सब आपके प्यार और आशीर्वाद से ही संभव हो पाया है।
और मैम मैं आपका भी शुक्रगुज़ार हूँ, जिन्होंने हर समय छाया बनकर बराबर प्यार दिया, हमारा ध्यान रखा। भरी सर्दी में चूल्हे पर बना आपके हाथों का लज़ीज़ खाना, इतनी सारी यादों में से एक अनमोल याद है।
प्रभु आपको हमेशा स्वस्थ रखे और लंबी उम्र दे। और जो भी थोड़ा-बहुत, टूटा-फूटा सीख पाया हूँ, आज गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर यह गीत आपको समर्पित कर रहा हूँ।
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