21/02/2022
हिन्दुस्तान गौरव पुरस्कार में आपके चयन पर आपको बधाई ! यह पुरस्कार आपके जीवन में नई उप्लधियाँ लिखेगा ऐसी प्रभु से कामना है !
02/02/2022
वीवो आई पी एल - 2022 मे पहली बार बिहार के 6 खिलाड़ियों को चयन होने पर बिहार क्रिकेट संघ के अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी एवं सभी चयनित खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई .....
22/09/2021
SGFI :- Regarding Age & Class classification for the “66th National school Games -2021-2022”
22/09/2021
जय श्री राम .....
22/02/2021
HINDUSTAN GAURAV AWARDS CEREMONY - 2021
आपके हुनर व समाज सेवा को देखते हुए हमने आपको हिंदुस्तान गौरव अवार्ड - 2021 देने का फैसला किया है !
जिसके लिए आपको अपना डॉक्युमेंट भेजना होगा ... डॉक्युमेंट को भेजने के लिए हमे ऑनलाइन या वाट्सएप पर भेज सकते है !
अधिक जानकारी के ऑफिशियल वेबसाईट को चेक करे !
धन्यवाद
!! अपने हुनर को दें सपनो का पंख !!
Nomination Open
Hindustan Gaurav Awards – हिंदुस्तान गौरव अवार्ड्स
Previous Next Recommendation Letters of Member of Parliament (MP), District Collector (IAS) and Superintendent of Police (IPS) is with the Application TOLL FREE NUMBER - 1800 891 3822 Registration & Nomination Open - 2021 Nomination Closed On 15th February 2021 Registration Fee - Rs. 51500/- DONATE....
16/01/2021
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Shri Ram Mandir Trust, Aayodhya
http://hindustangauravawards.org/
Hindustan Gaurav Awards – हिंदुस्तान गौरव अवार्ड्स
Previous Next Recommendation Letters of Member of Parliament (MP), District Collector (IAS) and Superintendent of Police (IPS) is with the Application Registration & Nomination Open - 2021 Nomination Closed On 15th February 2021 Registration Fee - Rs. 51500/- Why us Hindustan Gaurav Awards are the M...
02/07/2020
भारत के सबसे सफ़ल पहलवानों में से एक, विरेंदर सिंह जिन्हें ज़्यादातर लोग ‘गूंगा पहलवान’ के नाम से जानते हैं। विरेंदर सिंह ने चार डेफलिम्पिक्स गेम्स और दो वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में भाग लिया है, जिनमें अब तक उन्होंने 3 गोल्ड, 1 सिल्वर और 2 ब्रोंज मेडल अपने नाम किये हैं। खेलों में उनके योगदान के लिए उन्हें ‘अर्जुन अवॉर्ड’ से भी नवाजा गया है।
34 वर्षीय दिग्गज पहलवान ने अब साल 2021 में होने वाले अपने पांचवें डेफलिम्पिक्स गेम्स में खेलने के लिए कमर कस ली है। इससे पहले वीरेंदर ने साल 2005 में अपना पहला डेफलिम्पिक्स मैडल जीता और जीत का शानदार आगाज किया, जिसके बाद उन्होंने साल 2009, 2013 और 2017 में भी देश को डेफलिम्पिक्स गेम्स में मैडल दिलाया। वीरेंदर पहलवान का अगला लक्ष्य साल 2021 में होने वाले डेफलिम्पिक्स गेम्स है जिसमे वो अपने विजय रथ को रुकने नहीं देने चाहते।
“साल 2005 मेल्बर्न में पहला डेफ़ ओलंपिक जीता था और एक सुंदर यात्रा की शुरुआत थी। जीतने की लकीर 2009,2013 और 2017 में जारी रही, भगवान मुझ पर 3 स्वर्ण और एक कांस्य के लिए दयालु रहे है, मैं अभी रुकना नही चाहता …मेरा अगला लक्ष्य 2021 डेफलिम्पिक्स है” वीरेंदर पहलवान ने अपने इंस्टग्राम पर लिखा।
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कैसे हुई कुश्ती की शुरुआत
वीरेंद्र सिंह का जन्म हरियाणा के झज्जर के पास ससरोली गाँव में किसानों के परिवार में हुआ था। उनके पिता, अजीत सिंह एक CISF जवान थे। अपने पिता और चाचा से प्रेरित होकर वीरेंद्र कुश्ती में चले गए। उनके चाचा सुरिंदर पहलवान उन्हें CISF अखाड़े में रहने के लिए दिल्ली ले आए जहाँ उन्होंने अपने पिता और चाचा को कुश्ती करते देख रेसलिंग में इंटरेस्ट लेना शुरू किया। जिसके बाद उन्होंने 9 साल की उम्र में उन्होंने कुश्ती के दाव-पेंच सिखने शुरू किए।
पहलवान ने प्रमुख कुश्ती अखाड़ों – छत्रसाल स्टेडियम और गुरु हनुमान अखाड़े में प्रशिक्षण लिया। बाद में उन्होंने द्रोणाचार्य अवार्डी कोच महा सिंह राव और रामफल सिंह के साथ ट्रेनिंग करना शुरू किया।
मज़ाक उड़ाते थे लोग
शुरुआत में अखाड़े में दूसरे पहलवान ना बोलने और सुनने के कारण उनका मज़ाक उड़ाते थे। वो जब वर्जिश करते तो लोग ताना कसते- ‘देख गूंगा भी पहलवान बनेगा’। लेकिन वो अखाड़े में कोच के होठों की फड़कन और पहलवानों को देखकर दांव-पेंच के पैंतरे सीखने लगे।
2005 में आया पहला इंटरनेशनल गोल्ड मैडल
वीरेंद्र ने पहली बार 2002 में विश्व कैडेट कुश्ती चैंपियनशिप में सफलता का स्वाद चखा, जहां उन्होंने गोल्ड मैडल जीता। 2005 में, ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में समर डिफ्लैम्पिक्स में, उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना पहला स्वर्ण पदक जीता था और तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा था। उन्होंने 2008 में आर्मेनिया में वर्ल्ड डेफ रेसलिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। 2009 के समर डिफाइम्पिक्स में उन्होंने ताइपे, चीन में ब्रॉन्ज जीता।
2012 वर्ल्ड डेफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में, उन्होंने सोफिया, बुल्गारिया में ब्रोंज मैडल जीता। फिर से, 2013 के समर डफ़लिम्पिक्स में, उनके शानदार प्रदर्शन ने उन्हें स्वर्ण पदक दिलाया। उन्होंने ईरान के तेहरान में 2016 वर्ल्ड डेफ चैंपियनशिप में एक और गोल्ड मैडल जीता।
गूंगा पहलवान ने 2017 के समसून, टर्की के समर डिफ्लैम्पिक्स में स्वर्ण पदकों की हैट्रिक बनाई।
साल 2015 में अर्जुन अवार्ड से नवाजा गया
जुलाई 2015 में, उन्हें भारतीय खेलों में योगदान के लिए अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें दिल्ली सरकार, भारत द्वारा सम्मानित राजीव गांधी राज्य खेल पुरस्कार भी मिला है।
रेसलर सुशील कुमार को भी दे चुके हैं कड़ी टक्कर
डबल ओलंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वो वीरेंद्र से पांच बार भिड़े है , पर हरा नहीं पाया सभी मैच ड्रॉ ही रहे। बता दें कि वीरेंद्र के कारण ही भारत के लिए डीफगेम्स ने दरवाज़े खोल दिए। वीरेंद्र पर एक “गूंगा पहलवान” नाम से छोटी फिल्म भी बनाई गई है।
‘गूंगा पहलवान’ डॉक्यूमेंटरी
पहलवान पर एक डॉक्यूमेंटरी भी बन चुकी है जो की उनकी लाइफ पर आधारित है इस डॉक्यूमेंटरी को युवा फिल्म निर्माताओं – विवेक चौधरी, मीत जानी और प्रतीक गुप्ता ने बनाया। जिसका नाम गूंगा पहलवान रखा गया। 45 मिनट की डॉक्यूमेंटरी दुनिया भर के विभिन्न फिल्म समारोहों में दिखाई गई। इसे साल 2015 में सर्वोच्च भारतीय फिल्म सम्मान, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।