Janmashtami
BrahmaJanmavali Vedant
Advait Vedanta
सत्य में स्थापित होने हेतु केवल मन का आत्मा में लय होना पर्याप्त नहीं,साथ साथ शक्ति की परिपूर्णता होना अति आवश्यक है तभी हम "पूर्ण श्री" को प्राप्त हो अपने परम विस्मयकारी अद्वितीय अप्रतिम अवर्णनीय शाश्वत पूर्ण ब्रह्म नारायण स्वरूप में स्थापित हो पाते है,वही श्री कृष्ण है,वही त्रिपुर सुंदरी राजराजेश्वरी ललिता देवी है,वही सत्य है,वही हम है और ये मानव जीवन हमे मिला है उसी में लय होने हेतु,जीते जी जीवन मुक्त होने हेतु,और जीवन मुक्ति में स्थापित हो जग कल्याण करने हेतु।
इसी परम सौभाग्य का दाता है सनातन धर्म।
जय जय सत्य सनातन धर्म।जय मनुष्य जीवन। ॐ नराय नम:, ॐ नरोत्तमाय नम:।
जब सबकुछ नष्ट हो जाता है,इस धरा से ऋण रूप में लिया शरीर तक,कर्म भी फल रूप में भोग लिए जाते है तब जीवात्मा के साथ जो शाश्वत रूप से बचता है वो है संस्कार याने अंतः करण की गहराई में छुपा बीज और सनातन के सत्य ज्ञान(ब्रह्म ज्ञान) व श्रृष्टि के ज्ञान(तंत्र) के रंग में रंगा अंत: करण जन्म जन्मांतर पुन: पुन: जागृत हो जीवन मुक्ति को प्राप्त हो जीवन आनंद को पाता है और इस नारायणी श्रृष्टि को नारायण के रंग में रंग इसे स्वर्ग बनाने का कारक बन जाता है,पुन: पुन:।
अत: सनातन धर्म ही वो बागबान है जो जीवात्मा रूपी बीज को शाश्वत सत्य के रंग में रंगकर उसे परिपूर्णता प्रदान कर देता है।
15/08/2022
सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
10/05/2022
जब शंकराचार्य भगवान जी के ऊपर तांत्रिक क्रिया हुई तभी उन्हें भगवती की साधना का महत्व समझ में आया(लीला)!
अत: हमारी साधना से हमारी कुणालिनी ऊपर उठती है,मन चुप होता हैं,और पूर्ण चुप मन(मनो लय) और शक्ति की पूर्ण जागृति से आत्म साक्षात्कार और उसमे लीन रहा जाता है।(जीवन मुक्ति)
मगर तंत्र का दुरुपयोग अहम वश करने वाले दुष्टों की अगर आप नजर में आजाओ जैसा मेरे साथ हो रहा हैं तो तंत्र के माध्यम से प्रेत भेजकर आपके ऊर्जा कोष को दूषित और बाधित कर दिया जाता है।
इसलिय योग साधना के साथ साथ भगवती साधना तंत्र साधना अति आवश्यक है।
तंत्र का विशुद्ध ज्ञान होना आवश्यक है साधना शुरू करने से पहले। इसका हर जन मानस को ज्ञान और इसके लिए कानून ,दोनो जरूरी है।
और तंत्र की प्रोपर यूनिवर्सिटी डिग्री और नियम भी होना जरूरी है।बिना लाइसेंस के तंत्र के प्रयोग करने वालो पर कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए।
तंत्र का दुरुपयोग करने वालो के लिय कानून बनाना नितांत आवश्यक है क्योंकि तंत्र में बहुत बल है।
न जाग्रन् न मे स्वप्नको वा सुषुप्तिः
न विश्वो न वा तैजसः प्राज्ञको वा ।
अविद्यात्मकत्वात् त्रयाणां तुरीयः
तदेकोऽवशिष्टः शिवः केवलोऽहम् ॥ ८॥
Neither the state of waking nor that of dream nor that of deep-sleep is for me; neither the Visva nor the Taijasa nor the Prajna (am I). Since the three are of the nature of nescience, I am the Fourth. That one which remains (after the sublation of all else) - that auspicious absolute (Self) I am.
21/03/2022
Truth and vibrating higher are two interconnected yet different things, vibrating higher and still being divines's expression needs one to be really compassionate and free from single bit of selfishness and ego while when one is established in truth even if one vibrates highest (akhandta) one needs not to worry about anything as in that purn brahm jagmag akhand Satya there is only Dharma or love(mind dissolves completely)!🌼
Some insight into Truth ❤️
19/03/2022
Just like when Sun shines the darkness gets vanished, similarly when one gets established in truth or guru kripa all the avidhya vanishes.🌹
Some insight into truth.🌼
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