03/09/2026
हज़रत उमर फ़ारूक़ رضي الله عنه का इंसाफ़
एक बार मिस्र में एक मुक़ाबले के दौरान मिस्र के गवर्नर के बेटे ने एक आम आदमी को कोड़ा मार दिया। वह आदमी अपने हक़ के लिए मदीना पहुँचा और अमीरुल मोमिनीन हज़रत उमर फ़ारूक़ رضي الله عنه के सामने अपनी शिकायत रखी।
उसने कहा:
“ऐ अमीरुल मोमिनीन! मैं दौड़ में उससे आगे निकल गया था। इस बात पर गवर्नर के बेटे ने मुझे घमंड और ग़ुस्से में मार दिया और कहा कि मैं बड़े लोगों का बेटा हूँ।”
हज़रत उमर رضي الله عنه ने शिकायत को गंभीरता से लिया और मिस्र के गवर्नर अम्र बिन आस رضي الله عنه और उनके बेटे को मदीना बुलवाया।
जब वे सामने आए तो हज़रत उमर رضي الله عنه ने उस मज़लूम व्यक्ति को अपना हक़ लेने का मौक़ा दिया। फिर वह मशहूर जुमला कहा:
“तुमने लोगों को कब से अपना गुलाम बना लिया, जबकि उनकी माँओं ने उन्हें आज़ाद पैदा किया था?”
इसके बाद हज़रत उमर رضي الله عنه ने उस व्यक्ति को इंसाफ़ दिलाया और गवर्नर के बेटे को उसके किए की सज़ा दी।
फिर हज़रत उमर رضي الله عنه ने अम्र बिन आस رضي الله عنه को समझाया कि हुकूमत का मतलब लोगों पर ज़ुल्म करना नहीं, बल्कि उनकी हिफ़ाज़त और उनके हक़ की अदायगी करना है।
इस वाक़िये से सबक़
हज़रत उमर رضي الله عنه के इंसाफ़ की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि उनके सामने अमीर और ग़रीब, ताक़तवर और कमज़ोर—सब कानून और इंसाफ़ के लिहाज़ से बराबर थे।
इसीलिए उन्हें “फ़ारूक़” कहा गया—यानी वह जो हक़ और बातिल में फ़र्क़ करने वाला हो।
अल्लाह तआला हमें भी इंसाफ़ करने और किसी पर ज़ुल्म न करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।