Dream Movies Creation

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Engaged in movie production; talent acquisition & management; task oriented training & guidance on team work.Watch out this page for films, poems, stories.

21/03/2023

बड़ा ऊंचा है तेरा द्वार / मां दुर्गा भजन

25/01/2023

हिन्द देश के निवासी, सभी जन एक हैं !

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !!

29/12/2022

सुना है यह दुनियाँ बहुत ही खूबसूरत है !
मेरे मन के कोने में सजी उसकी एक मूरत है !

रंग बिरंगी तितलियों का उड़ना कितना अच्छा होगा,
रातों को जुगनुओं का चमकना कितना प्यारा होगा!
अलग-अलग फूलों से सजे बाग कैसे मनमोहक होंगे,
उन फूलों पे भवरों का इठलाना कितना प्यारा होगा !
सुना है यह दुनियाँ बहुत ही खूबसूरत है !

आसमान में वो चाँद सितारे कैसे दिखते होंगे,
धरती पे वो नदियाँ, वो पहाड़ कैसे लगते होंगे!
कैसे कुछ जानवर हमसे अलग चलते होंगे,
कैसे कुछ पंछी आसमान में भी उड़ते होंगे !
सुना है यह दुनियाँ बहुत ही खूबसूरत है !

कुछ लोग दुनियाँ की खूबसूरती देख पाते होंगे,
हर दिन वो उसे और भी खूबसूरत बनाते होंगे !
हर किसी से वो आँखों से प्यार भी जताते होंगे,
हर शाम को वो एक अच्छी याद बनाते होंगे !
सुना है यह दुनियाँ बहुत ही खूबसूरत है !

---- संतोष झा

07/07/2021

"A life full of inspirations. May your soul get divine place in another world."

DREAM | Social Awareness Short Film | Written & Directed By-Govind Mishra 08/02/2019

Watch Our Production's New Short Film "DREAM"

Written & Directed By-Govind Mishra
Produced By-Dream Movies Creation
Dop-Narayan K Sahu
Editor-Prince Khan
Story-Santosh Jha
Background Score-Ajay Singh

DREAM | Social Awareness Short Film | Written & Directed By-Govind Mishra The film revolves around a girl child who see strange dream while sleeping. She wakes up and explains the dream to her father who was lost in her music world...

19/11/2018

हमारा शिक्षा व्यवस्था एक ढोंग है ! वो हमें यह नहीं सिखाते जो जीवन और मानवता के लिए आवश्यक है बल्कि वो सिखाते हैं जो हमें आदर्श मानव बनने से रोक ले ! हम बच्चों से यह अपेक्षा करते हैं कि उसके नंबर रटते हुए भी अच्छे आएं भले ही वो चारित्रिक विकास में शून्य रहे !

शिक्षा का उद्देश्य मानवता के विकास से है, सहयोग से है, दूसरों के लिए सम्मान से है, नैतिकता से है ! जैसे विज्ञान इसलिए पढ़ाया जाना चाहिए कि बच्चे अपने औऱ पर्यावरण के कार्यशैली को समझ सके और भविष्य में उसके संतुलन का ख्याल रखे ! उसी तरह सामाजिक विज्ञान से अपने और समाज के पारस्परिक संबंध को समझ कर उसकी बेहतरी के लिए जीवन लगाए !

शिक्षा का उद्देश्य आज समाज ने बस डिग्री और जीवनयापन के कार्य तक सीमित रख दिया है !

हम दिन रात बस अर्थ के साधन जुटाने में लगे रहते हैं, यह जानते हुए भी कि वो भी क्षणभंगुर है ! हम इस क्षणिक उद्देश्य की पूर्ति के लिये न जाने कितने लोगों से झूठ बोलते हैं, कितनो का अपमान करने से भी नहीं चूकते, कितनो को अपना आदर्श मान बैठते हैं और कितनो को नीचता की दृष्टि से देखते हैं !

हमें पर्यावरण की चिंता नहीं है, हमें अन्य जीव जंतुओं का ख्याल नहीं है, हम प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं ! हमें अगली पीढ़ी के भविष्य का भी तो ख्याल नहीं है, वो कैसा जल पीयेंगे, कैसी वायू में सांस लेंगे, कैसे कृषि कार्य कर पाएंगे रासायनिक भूमि पर ! शायद हमें भविष्य में एक अच्छे उदाहरण के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाएगा !

हमें एक अच्छे इंजीनियर, डॉक्टर, नेता, कलाकार, इत्यादि बनने से पहले एक अच्छा मानव बनना चाहिए ! मानवता के विकास पे ज्यादा ध्यान देना चाहिए, व्यक्तिगत रूप से भी और सामाजिक रूप से भी ! आज के व्यावसायिक शिक्षा से बाहर निकलकर सामाजिक और नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए !
Santosh Jha

14/11/2018

बाल दिवस की अनंत शुभकामनाएं ! आज के दिन को हमने देश के बच्चों को समर्पित किया है ! हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई बच्चा भूखा न रहे, कोई बच्चा विद्यालय जाने से वंचित न रह जाए, कोई बच्चा काम के बोझ में अपना बचपन न खो दें और कहीं कोई जन्म से पहले ही न मार दिया जाए !

हमें यह भी देखना चाहिए कि प्राथमिक शिक्षा का स्तर सुधरे, नैतिक शिक्षा पे ध्यान दिया जाए, बच्चों को मशीन बनाने से रोका जाए, उन्हें जाति धर्म का पाठ न पढ़ाया जाए !

बच्चे देश के भविष्य हैं, यह हम दशकों से सुनते आ रहे हैं ! जरूरत है तो भविष्य को संवारने की, सही राह दिखाने की !

...संतोष झा

03/11/2018

जो अपने कदमों का इख़्तियार किया करते हैं,
वो कहाँ अपने जज्बों का इश्तेहार किया करते हैं !

जीवन में कठिनाइयां तो आती ही है, पर जो उन कठनाइयों को अपने संघर्ष से बौना बना दे वही जीवन का विजेता माना जाता है ! कुछ लोगों को समाज ने दिव्यांगता का दर्जा दे रखा है, कहते हैं वो हमारी तरह सामान्य नहीं हैं ! मेरा मानना है कि ऐसे लोग असामान्य प्रतिभा के धनी होते हैं !

सुश्री प्रांजल पाटिल जी ऐसी प्रतिभा की धनी हैं जिन्होंने अपनी दृष्टि दिव्यांगता को अपनी कमजोरी न बनने दिया और प्रथम प्रयास में ही देश की प्रतिष्ठित आईएएस अधिकारी का दर्जा प्राप्त किया ! वर्तमान में वो केरल के एर्नाकुलम शहर में अपना सेवा प्रदान कर रहीं हैं ! हमें उनसे मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ! हम उनके जज्बों को सलाम करते हैं और आशा करते हैं कि देश के करोड़ों ऐसे मित्र उनसे प्रेरणा लेंगे !

उनका जीवन चुनौतियों से भरा है पर ये उन करोड़ों लोगों के लिए एक आदर्श हैं जो किसी न किसी रूप में दिव्यांगता का शिकार हैं और साथ ही उन अरबों लोगो के लिए एक उदारहण कि 'मन के हारे हार है मन के जीते जीत' !

सब कुछ होते हुए भी कुछ न कुछ बहाना ढूंढ़ना खुद के जीवन से बेईमानी है ! संघर्ष तो हर जगह है, जीना सीखिए !

ऐसे ही दृष्टि दिव्यांगता के लोगों के संघर्षों से प्रेरित फ़िल्म " I am not blind- only my eyes can't see" बनाई गई है ! यह एक शानदार संदेश परक फ़िल्म है ! हम सबको अवश्य देखनी चाहिए !

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