11/06/2026
यहाँ एक छोटीसी नैतिक कहानी एकादशी के संदेश के लिए :
"एक बार एक व्यक्ति ने एकादशी का व्रत रखा, लेकिन पूरे दिन वह दूसरों की गलतियाँ ढूँढता रहा और क्रोध करता रहा। शाम को जब उसने उपवास खोला, तो उसे कोई शांति महसूस नहीं हुई। तब उसे समझ आया कि एकादशी का असली अर्थ केवल भोजन का त्याग करना नहीं, बल्कि मन से द्वेष, क्रोध और अहंकार को त्यागकर पवित्र विचारों को अपनाना है।
🙏 एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🙏
एकादशी का व्रत हमें सिखाता है कि केवल अन्न का त्याग ही पर्याप्त नहीं है।
सच्चा उपवास तब है जब हम अपने मन के विकारों—जैसे क्रोध, ईर्ष्या और अहंकार—का त्याग करें और सेवा व प्रेम को अपनाएँ।
आइए, आज के दिन हम अपने विचारों को शुद्ध रखें और प्रभु की भक्ति में लीन रहें।
शुभ एकादशी! ✨🕉️"
.. ॐ शान्ति ...
🧘
~ गुरुश्री
(संकल्प सिद्धि योग)
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03/06/2026
✨ बचपन की सबसे खूबसूरत सौगात:
आंतरिक शांति और संतुलन ✨
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, जहाँ बच्चे स्क्रीन और पढ़ाई के तनाव के बीच घिरे हैं... क्या हम उन्हें एक ऐसा पल दे पा रहे हैं जहाँ वे खुलकर सांस ले सकें? 🧘♂️✨
योग सिर्फ शरीर को लचीला नहीं बनाता, बल्कि बच्चों के कोमल मन को थामना सिखाता है। यह उन्हें सिखाता है कि जब बाहर की दुनिया में हलचल हो, तो अपने भीतर शांति कैसे ढूंढनी है।
जब एक बच्चा आँखें बंद करके ध्यान लगाता है, तो वह केवल शांत नहीं बैठता, बल्कि अपनी आत्मा के पंखों को खोल रहा होता है ताकि वो भविष्य की हर चुनौती का सामना मजबूती और संतुलन के साथ कर सके।
'संकल्प सिद्धि योग' (SSY) के साथ अपने बच्चे को शारीरिक शक्ति, मानसिक संतुलन और एक खुशहाल जीवन का अनमोल उपहार दें।
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.. ॐ शान्ति ...
🧘
~ गुरुश्री
(संकल्प सिद्धि योग)
24/04/2025
मत छीनो मेरे खिलौने,
मेरी हँसी मेरा बचपन।
( "मत छीनो मेरे खिलौने…"
ये सिर्फ एक कविता नहीं,
एक चीख है उस बच्चे की
जिसने बारूद में रंग खोजे।)
मत छीनो मेरे खिलौने,
मेरी हँसी, मेरा बचपन।
मत करो तुम वीरान,
मेरी जगह मेरा आंगन।
पहलगाम की सड़कों पर
टूटे हैं रंगों के सपने,
काँच की तरह बिखरे हैं
काग़ज़ की नावों के वचन।
बारूद की महक में अब
चॉकलेट भी लगती है सज़ा सी,
हर मोड़ पे मौत बैठी है
कहती है — "अब खेलो मुझसे।"
मेरी किताबें भी सहमी हैं,
हर अक्षर काँपता है डर से।
“अ से अमन” पढ़ने वाला मैं
अब “अ से आतंक” लिखता हूँ।
स्कूल की घंटी भी ख़ामोश है,
रंग-बिरंगे बस्ते — अब
बस गवाह हैं गोली की गूंज के।
जो मासूम कलियाँ थे कल तक,
आज सवाल बन गए हैं — “मैं क्यों?”
मेरे आँगन की मिट्टी अब
गुलाब नहीं उगाती,
सिर्फ़ माँ की दुआओं में
बची है ज़िंदगी की लौ।
जहाँ हर शाम “आओ खेलें” की सदा थी,
अब हर रोज़ “भागो” की गूंज है।
मैं नहीं चाहता टैंक को खिलौना बनाना,
मैं चाहता हूँ गुड्डे-गुड़ियों का जहाँ।
ओ ज़माने! सुनो मेरी सिसकी,
ये कोई एक बच्चे की पुकार नहीं,
पूरे कश्मीर का बचपन चीख रहा है।
हम नहीं चाहते बंदूक की भाषा,
हम चाहते हैं — लोरी, कहानियाँ,
और शाम को लौटता सूरज
जो डर से नहीं, उम्मीद से भरा हो।
ये मेरी लड़ाई नहीं, ये मानवता की जंग है।
जो आया था अमन लाने,
वही छीन रहा है चैन,
जो कहता था "ज़िंदाबाद",
वो ही बन गया है दहशत का नाम।
मत करो ऐसा इल्म का सौदा,
जहाँ बंदूकें पढ़ाई से भारी हो जाएँ।
खिलौने लौटाओ, ख़ुशियाँ लौटाओ,
वरना ये मासूम आँसू
तुम्हारी नींदें भी लूट लेंगे।
_____________________
करीब 30 साल पहले किसी आतंकवादी घटना पर ही मैंने ये कविता लिखी थी अब वैसी ही एक बड़ी घटना हुई है।
इस कविता को इसलिए अब की घटना को समावेश करके मैंने दोबारा लिखा है।
.. ॐ शान्ति ...
🧘
~ गुरुश्री
(संकल्प सिद्धि योग)
21/04/2025
"जब काम बोझ लगे, तो भाव बदल दो..."
कई बार हम अपने कर्तव्यों को निभाते हैं सिर्फ इसलिए क्योंकि
लोग हमसे उम्मीद करते हैं।
या
समाज का डर होता है कि लोग क्या कहेंगे?
धीरे-धीरे मन में ये भाव आने लगते हैं —
"मैं सबके लिए करता हूंँ, कोई मेरी कद्र नहीं करता..."
"मैंने इतना कुछ किया, फिर भी कोई सराहना नहीं करता..."
ऐसे में काम बोझ बन जाते हैं।
मन थकने लगता है। भावनाएं उलझने लगती हैं।
लेकिन जब वही काम हम अपने मन की सच्चाई,
अपने प्रेम और
आंतरिक खुशी से करते हैं,
तो वो बोझ नहीं, मुक्ति का माध्यम बन जाते हैं।
अब मैं कोई भी काम अपेक्षा से नहीं,
बल्कि इसलिए करता हूंँ क्योंकि
मुझे करने में आनंद आता है।
नज़रिया बदलिए, अनुभव बदल जाएगा।
काम वही रहेगा, पर अब वो प्रेम का रूप ले लेगा।
यही है सच्ची आत्म-स्वतंत्रता का रास्ता।
.. ॐ शान्ति ...
🧘
~ गुरुश्री
(संकल्प सिद्धि योग)
#योगिकजीवन
20/04/2025
"प्रभाव आता है परिस्थिति से,
स्वभाव आता है स्थिति से।"
बाहरी दुनिया की हलचल हमें प्रभावित कर सकती है — सुख, दुख, सफलता, असफलता...
लेकिन हमारा असली स्वभाव — हमारी शान्ति, स्थिरता और करुणा — यह सब हमारी आंतरिक स्थिति से जन्म लेते हैं।
यदि हम भीतर से संतुलित हैं, तो कोई भी परिस्थिति हमें हिला नहीं सकती।
परिस्थिति चाहे जैसी भी हो,
जब स्थिति भीतर मजबूत हो, तो स्वभाव दिव्य हो जाता है।
योग, ध्यान और आत्म-चिंतन से अपनी "स्थिति" को इतना स्थिर बनाइएं,
कि कोई भी "परिस्थिति" आपको सिर्फ छूकर निकल जाए।
.. ॐ शान्ति ...
🧘
~ गुरुश्री
(संकल्प सिद्धि योग)
#योग #स्वभाव #परिस्थिति
14/04/2025
सुबह का mindful breathing रुटीन
दिन की शुरुआत 5–10 मिनट की गहरी साँसों (गहरी श्वास-प्रश्वास) के साथ करना शरीर को शांत करता है और मस्तिष्क को clarity देता है।
इससे पूरा दिन centered और खुशमिज़ाज बना रहता है।
.. ॐ शान्ति ...
🧘
~ गुरुश्री
(संकल्प सिद्धि योग)