01/09/2026
इस 47 वर्षीय विधवा महिला का नाम "रमाबाई रणवीर" इनकी 2 बेटी भी है।
घर की हालत कमजोर है। यह रसोई में खाना पकाने का काम करती है। इनकी एक बेटी Bsc कर रही है, दूसरी पुलिस की तैयारी में लगी है। बेटियों की फीस और घर का खर्च चलाने के लिए रामाबाई दिन-रात मेहनत करती हैं।
30 अगस्त को आयोजित अमृत दौड़ मैराथन में इन्होंने हिस्सा लिया। न स्पोर्ट्स शूज, न ट्रैक सूट… साड़ी पहनकर और नंगे पैर ही बारिश, कीचड़ और पथरीली सड़क पर दौड़ती रहीं।
आखिरकार उन्होंने प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया और रमाबाई को पुरस्कार में 3 हजार रुपए दिए गए।
जब उनसे पूछा गया कि इन पैसों का क्या करेंगी, तो उनका जवाब सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि— इन पैसों से बेटियों की फीस भरूंगी।
उन्होंने यह भी कहा — बेटियों की पढ़ाई के लिए जितना संघर्ष करना पड़े, पीछे नहीं हटूंगी। घर के खर्च के लिए हर रोज दौड़ती रहूंगी।