Balkrishna Shastri "Nikunj Sabha"

Balkrishna Shastri "Nikunj Sabha"

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अत्यंत आभार आप के हर पुरुषार्थ, पराक्रम परिदृश्य को नमन
Jay shri Radharaman lal ju....🙏🌸
परम पुज्य चाचा जी अंतरराष्ट्रीय कथा प्रवक्ता श्री मनोज मोहन शास्त्री जी के द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का आनंद।
Om Namah Shivaya

we welcoming to all Devotees and Yogis in this page�

Operating as usual

04/10/2021

ईसाई महिला का पुरी शंकराचार्य जी से वाममार्गी अघोर शैव संप्रदाय को लेकर प्रश्न

04/10/2021

✍ *इस तस्वीर में लोहे की रॉड पर बिना किसी आसन के जो वयोवृद्ध ज्ञानवृद्ध सन्यासी बैठे हैं, क्या आप इन्हें जानते हैं?*

✍ *ये हैं सनातन धर्म के हृदय सम्राट.. हिन्दु धर्म में ज्ञान का सबसे बड़ा दिव्य ज्योतिपुंज!! ऐसे युग पुरुष, जिनसे आधुनिक युग के सर्वोच्च वैधानिक संगठनो, संयुक्त राष्ट्र संघ और विश्व बैंक तक ने मार्गदर्शन प्राप्त किया है।*

✍ *ऐसे अवतरित पुरुष जिन्होंने वैदिक गणित आदि विषयो पर अनेक ग्रन्थ लिख दिए हैं.. जिनसे इसरो, नासा के वैज्ञानिक, यूनिवर्सिटी आदि के संशोधक-प्राध्यापक भी ज्ञान प्राप्त करते हैं।*

*जी हाँ! ये हैं– ऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय गोवर्धनमठ पुरी पीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामीश्री निश्चलानंद सरस्वतीजी महाराज*! 🚩

✍ *आपने ऐसे अनेक तथाकथित कथावाचकों, स्वयंभू गुरुओं, स्वयम्भू सन्तों को देखा होगा, जो अनेक सेवक/सुविधा लेकर घूमते हैं। उन्होंने कहीं विराजना हो तो सुंदर से सुंदर आसन, आवागमन के लिए हवाईजहाज तक उनके लिये लगा दिया जाते है।*

✍ *परन्तु ये स्वामीजी कितने विलक्षण हैं! किसी रेलवे स्टेशन का चित्र है। ट्रेन आने में समय होगा। लगभग 80 वर्ष की आयु के स्वामी श्री जगद्गुरु पुरी शंकराचार्य महाराज जी को खड़े रहने में थोड़ी दिक्कत है तो लोहे की रॉड पर ही बैठ गये*?

✍ *क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसे सन्त किसके लिए जीवन जी रहे हैं? इन्हें अपने लिए किस चीज की चाह होगी? गेरुआ वस्त्र और खड़ाऊं ही इन्हें पहनने के लिये चाहिये। किसी अन्य चीज की अभिलाषा नहीं। इतनी आयु में भी अभी वैदिक गणित आदि विषय पर ग्रन्थ लिख रहे हैं। तो क्या इन्हें उचित सम्मान देना हमारा दायित्व नहीं है?*

✍ *क्या हम भारतवासी ऐसे सन्तों के ऋणी नहीं हैं? तो हम इनके लिये क्या कर रहे हैं? यदि हम वास्तव में धर्म, राष्ट्र और संस्कृति को बचाना चाहते हैं तो हमें ऐसे पूज्यचरण महापुरूष की की शरण आना ही होगा।*
✍✍✍✍✍✍✍✍

माया के फंदे से कैसे छूटें | नामस्मरण में मन कैसे लगे | भगवत महिमा | डॉ बालकृष्ण शास्त्री जी महारा 03/10/2021

माया के फंदे से कैसे छूटें | नामस्मरण में मन कैसे लगे | भगवत महिमा | डॉ बालकृष्ण शास्त्री जी महारा

नामस्मरण की इससे बड़ी महिमा नही हो सकती।

माया के फंदे से कैसे छूटें

एक बार अवश्य सुने🙏

#नामस्मरण #माया #महिमा #कथा #प्रसंग #भागवत #वेद #पुराण #उपनिषद #श्रीकृष्ण #श्रीराधे #राधे #जयश्रीराम #जयश्री #वृन्दावन #कान्हा #गोपाल #नटखट #प्रभु #की #भक्ति #रास #चर्चा #devotional #storytelling #story #shrikrishna #JaiShriKrishna #JayShriRam #bhakti #bhagwatgeeta #bhagwatkatha #veda #vedicwisdom #vedicknowledge #VedicScience #gopal #krishnaconsciousness #krishnalove #krishnaquotes #devotionalservice #devotionalthoughts

माया के फंदे से कैसे छूटें | नामस्मरण में मन कैसे लगे | भगवत महिमा | डॉ बालकृष्ण शास्त्री जी महारा माया के फंदे से कैसे छूटें | नामस्मरण में मन कैसे लगे | भगवत महिमा | डॉ बालकृष्ण शास्त्री जी महाराजमाया के फंदे से छूट...

21/09/2021

अब कश्मीर में दिख रही है 370 और 35A की ताकत

अब कश्मीर में दिख रही है 370 और 35A की ताकत

17/09/2021

70 हजार वेतन है मेडम का... साभार

70 हजार वेतन है मेडम का...
साभार

17/09/2021

21 मंजिला 251 फीट ऊंचा माँ भद्रकाली मंदिर, संगरिया, हनुमानगढ़, राजस्थान, भारत।

21 मंजिला 251 फीट ऊंचा माँ भद्रकाली मंदिर, संगरिया, हनुमानगढ़, राजस्थान, भारत।

Balkrishna Shastri "Nikunj Sabha" updated their website address. 16/09/2021

Balkrishna Shastri "Nikunj Sabha" updated their website address.

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Photos from Balkrishna Shastri "Nikunj Sabha"'s post 16/09/2021

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क्या होता है निधिवन में राधाष्टमी के रात | राधाष्टमी महोत्सव 2021 | वृन्दावन | श्री बांकेबिहारी जी 16/09/2021

क्या होता है निधिवन में राधाष्टमी के रात | राधाष्टमी महोत्सव 2021 | वृन्दावन | श्री बांकेबिहारी जी

क्या होता है निधिवन में राधाष्टमी के रात | राधाष्टमी महोत्सव 2021 | वृन्दावन | श्री बांकेबिहारी जी

आप सभी को श्री राधारानी जी के प्राकट्य उत्सव की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

जबसे वृन्दावन में आना जाना हो गया
मैं राधारानी का श्री बाँके बिहारी का दीवाना हो गया।

#nidhivan #vrindavan #radhashtami #radhashtamispecialvideo #radhakrishna #shrikrishnajanmashtami #barsana
#राधाष्टमी #वृन्दावन #निधिवन #श्रीबाँकेबिहारी जी #love #spiritual #devotion #dedication #भक्ति #भक्तिरस #bhakti #bhaktisongs

क्या होता है निधिवन में राधाष्टमी के रात | राधाष्टमी महोत्सव 2021 | वृन्दावन | श्री बांकेबिहारी जी क्या होता है निधिवन में राधाष्टमी के रात | राधाष्टमी महोत्सव 2021 | वृन्दावन | श्री बांकेबिहारी जीआप सभी को श्री राधार.....

31/05/2021

जब यह पेड़ काटा गया होगा कितने परिंदे और जानवर चीखे होंगे,
प्रकृति ने सुना था उस दिन,आज हम सब हिसाब दे रहे हैं ।

#savetrees #saveenvironment #nature #NaturesBeauty #environment

जब यह पेड़ काटा गया होगा कितने परिंदे और जानवर चीखे होंगे,
प्रकृति ने सुना था उस दिन,आज हम सब हिसाब दे रहे हैं ।

#savetrees #saveenvironment #nature #NaturesBeauty #environment

22/04/2021

कोरोना से मरने वालों का सच देख लो अपनी आंखों से।

क्या सच में हॉस्पिटल जाके बच सकते हो?

मुझे नही पता ये वीडियो कहा का है।

[08/04/20]   बिना परेशान हुए, लाभ नहीं मिलता।

[08/02/20]   रामकथा का सबसे मार्मिक प्रसंग जो भारत की त्याग और समर्पण की परंपरा का संवाहक है...!!
रामभक्त ले चला रे राम की निशानी

25/07/2020

हमारा #देश #भारत 1400 साल तक #मुगलों का #गुलामी सहता रहा, फिर #ब्रिटिशर्स का #गुलाम बना रहा और जैसे ही देश को #वीर #क्रांतिकारियों ने #आजादी दिलाई उसके बाद भी #महात्मा_गांधी जो कर्म से कभी महात्मा न बन सका किन्तु खुद ही वो #राष्ट्र का पिता कहलाने लगा और #जवाहरलाल_नेहरु जिसे #बच्चे चाचा कटे थे जो #नवयुवतियों के साथ रंगरेलियां मानता था इन दोनों ने मुगलों के #वंसजों के लिए अपने ही देश मे नया #भूमि #खंड विभाजित करते हुए नया राष्ट्र बना दिया, जिसे #पाकिस्तान नाम दिया।

21/07/2020

कभी आपने सोचा है सेक्युलरिज्म के नाम पर हम क्या कर रहे हैं..?

Pic 1- औरंगजेब को 6 फीट के मकबरे में दफनाया गया था, जो अब भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा पूरी देखभाल के साथ मल्टी स्टोरी मार्बल बिल्डिंग में बदल दिया गया है

Pic 2- यह महान हिंदू राजा राणा सांगा की समाधि है, जिन्होंने जिहादी आक्रमणकारियों के खिलाफ वीरतापूर्वक लड़ाई लड़ी थी।

जो सभ्यता अपना इतिहास भूल जाती है उसे इतिहास बनने में देर नहीं लगती ।

13/07/2020

रेलवे प्लेटफार्म को मस्जिद की शक्ल देने का इरादा

इन मजारों और मस्जिदों में जिसके पार्थिव शरीर के सामने सर झुखाते हो मूर्ख हिंदुओं क्या उस इंसान की मृत्यु वहां हुआ था या मरने से पहले जमीन उसने खरीदा था?

ऐसे दृश्य सभी बड़े रेलवे स्टेशनों पर मिल जाएंगे।

जितने भी बड़े रेलवे स्टेशन हैं पूरे भारत में, हर स्टेशन पर कोई न कोई मस्जिद है।
जौनपुर सिटी, वाराणसी, नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, निजामुद्दीन, इलाहाबाद इत्यादि हर जगह मिल जाएंगे।

ये कब बन्द होगा...रेलवे प्लेटफार्म पर अवैध कब्जा कब हटेगा...ये रेलवे का प्लेटफ़ॉर्म है या किसी मस्जिद की जमीन... इनके खिलाफ कब कार्रवाई होगी ?
कुछ ईंटे रखकर पहले छोटी सी मजार बना देते है फिर
मजारो से शुरू होते होते वो मजारे मस्जिदे बना दी जाती है ।
क्या रेलवे इस अतिक्रमण के खिलाफ कारवाई करेगा

10/07/2020

चतुर्भुजदास 'राधावल्लभ सम्प्रदाय' के प्रसिद्ध भक्त थे। इनका वर्णन नाभादास जी ने अपने 'भक्तमाल' में किया है। उसमें जन्मस्थान, सम्प्रदाय, छाप और गुरु का भी स्पष्ट संकेत है। ध्रुवदास ने भी 'भक्त नामावली' में इनका वृत्तान्त लिखा है। इन दोनों जीवनवृत्तों के आधार पर चतुर्भुजदास गोंडवाना प्रदेश, जबलपुर के समीप गढ़ा नामक गाँव के निवासी थे।

चतुर्भुजदास का जीवन चरित्र आजीवन चमत्‍कारों और अलौकिक घटनाओं से सम्‍पन्‍न स्‍वीकार किया जाता है। उनका जन्‍म संवत 1575 (1518 ई.) विक्रमी में जमुनावतो ग्राम में हुआ था। वे 'पुष्टिमार्ग' के महान भगवद्भक्‍त महात्‍मा कुम्भनदास जी के सबसे छोटे पुत्र थे। कुम्भनदास जी ने बाल्‍यावस्‍था से ही उनके लिये भक्‍तों का सम्‍पर्क सुलभ कर दिया था। वे उनके साथ श्रीनाथ जी के मन्दिर में दर्शन करने भी जाया करते थे। पारिवारिक वातावरण का उनके चरित्र-विकास पर बड़ा प्रभाव पड़ा था।

श्रीनाथ जी की सेवा

कुम्भनदास के सत्‍प्रयत्‍न से गोसाईं वि‍ट्ठलनाथ जी ने चतुर्भुजदास को जन्‍म के इकतालीस दिनों के बाद ही ब्रह्म-सम्‍बन्‍ध दे दिया था। वे वाल्‍यावस्‍था से ही पिता की देखा-देखी पद-रचना करने लगे थे। घर पर अनासक्तिपूर्वक रहकर खेती-बारी का भी काम संभालते थे। श्रीनाथ जी की सेवा में उनका मन बहुत लगता था। बाल्‍यावस्‍था से ही भगवान की अन्‍तरंग लीलाओं की उन्‍हें अनुभूति होने लगी थी। उन्‍हीं के अनुरूप वे पद-रचना किया करते थे।

अष्टछाप के कवि

चतुर्भुजदास की काव्‍य और संगीत की निपुणता से प्रसन्‍न होकर श्रीविट्ठलनाथ जी ने उनको 'अष्टछाप' में सम्मिलित कर लिया था। वृद्ध पिता के साथ अष्टछाप के कवियों में एक प्रमुख स्‍थान प्राप्‍त करना उनकी दृढ़ भगवद्भक्ति, कवित्‍वशक्ति और विरक्ति का परिचायक है।

सखाभाव भक्ति

ब्रह्म-सम्‍बन्‍ध से गौरवान्वित होने के बाद चतुर्भुजदास अपने पिता के साथ जमुनावतो में ही रहा करते थे। नित्‍य उनके साथ श्रीनाथ जी की सेवा और कीर्तन तथा दर्शन के लिये गोवर्धन आया करते थे। कभी-कभी गोकुल में नवनीतप्रिय के दर्शन के लिये भी जाते थे, पर श्रीनाथ जी का विरह उनके लिये असह्य हो जाया करता था। श्रीनाथ जी में उनकी भक्ति सखाभाव की थी। भगवान उन्‍हें प्रत्‍यक्ष दर्शन देकर साथ में खेला करते थे। भक्‍तों की इच्‍छापूर्ति के लिये ही भगवान अभिव्‍यक्‍त होते हैं। श्रीविट्ठलनाथ महाराज की कृपा से चतुर्भुजदास को प्रकट और अप्रकट लीला का अनुभव होने लगा। एक समय श्रीगोसाईं जी भगवान का श्रृंगार कर रहे थे, दर्पण दिखला रहे थे। चतुर्भुजदास जी रूप-माधुरी का आस्‍वादन कर रहे थे। उनके अधरों की भारती मुसकरा उठी-

"सुभग सिंगार निरखि मोहन कौ ले दर्पन कर पियहि दिखावैं।।"

भक्त की वाणी का कण्‍ठ पूर्णरूप से खुल चुका था। उनका मन भगवान के पादारविन्‍द-मकरन्‍द के मद से उन्‍मत्‍त था। उनके नयनों ने विश्‍वासपूर्वक सौन्‍दर्य का चित्र उरेहा-

"माई री आज और, काल और, छिन छिन प्रति और और।।"

भगवान के नित्‍य सौन्‍दर्य में अभिवृद्धि की रेखाएं चमक उठीं। भगवान का सौन्‍दर्य तो क्षण-क्षण में नवीनता से अलंकृत होता रहता है। यही तो उसका वैचित्र्य है। लीला-दर्शन करने वाले को भगवान सदा नये-नये ही लगते हैं।

भक्ति प्रसंग एक समय गोसाईं विट्ठलनाथ गोकुल में थे। गोसाईं जी के पुत्रों ने पारसोली में 'रासलीला' की योजना की। उस समय श्रीगोकुलनाथ जी ने चतुर्भुजदास से पद गाने का अनुरोध किया। चतुर्भुजदास तो रससम्राट श्रीनाथ जी के सामने गाया करते थे। भक्त अपने भगवान के विरह में ही लीन थे। श्रीनाथ जी ने चतुर्भुजदास पर कृपा की। श्रीगोकुलनाथ ने उनसे गाने के लिये फिर कहा और विश्‍वास दिलाया कि आपके पद को भगवान प्रकटरूप से सुनेंगे। चतुर्भुजदास ने पद गाना आरम्‍भ किया। भक्‍त गाये और भगवान प्रत्‍यक्ष न सुनें, यह कैसे हो सकता है। उनकी यह दृढ़ प्रतिज्ञा है कि मेरे भक्‍त जहाँ गाते हैं, वहाँ में उपस्थित रहता हूँ। भगवान प्रकट हो गये, पर उनके दर्शन केवल चतुर्भुजदास और श्रीगोकुलनाथ को ही हो सके। गोकुलनाथ जी को विश्‍वास हो गया कि भगवान भक्‍तों के हाथ में किस तरह नाचा करते हैं। चतुर्भुजदास ने गाया-

"अद्भुत नट वेष धरें जमुना तट। स्‍यामसुन्दर गुननिधान।। गिरिबरधरन राम रैंग नाचे।"

रात बढ़ती गयी, देखने वालों के नयनों पर अतृप्ति की वारुणी चढ़ती गयी।

भक्त की प्रसन्‍नता और संतोष के लिये भगवान अपना विधान बदल दिया करते हैं। एक समय श्रीविट्ठलनाथ जी ने विदेश-यात्रा की। उनके पुत्र श्रीगिरिधर ने श्रीनाथ जी को मथुरा में अपने निवास स्‍थान पर पधराया। चतुर्भुजदास श्रीनाथ जी के विरह में सुध-बुध भूलकर गोवर्धन पर एकान्‍त स्‍थान में हिलग और विरह के पद गाया करते थे। श्रीनाथ जी संध्‍या समय नित्‍य उन्‍हें दर्शन दिया करते थे। एक दिन वे पूर्णरूप से विरहविदग्‍ध होकर गा रहे थे-

"श्रीगोबर्धनवासी सांवरे लाल, तुम बिन रह्यौ न जाय हो।"

भगवान भक्‍त की मनोदशा से स्‍वयं व्‍याकुल हो उठे। उन्‍होंने गिरिधरजी को गोवर्धन पधारने की प्रेरणा दी। चतुर्दशी को एक पहर रात शेष रहने पर कहा कि- "आज राजभोग गोवर्धन पर होगा"। भगवान की लीला सर्वथा विचित्र है। 'नरसिंह चतुर्दशी' को वे गोवर्धन लाये गये। राजभोग में विलम्‍ब हो गया, राजभोग और शयन-भोग साथ-ही-साथ दोनों उनकी सेवा में रखे गये। 'नरसिंह चतुर्दशी' को वे उसी दिन से दो राजभोग की सेवा से पूजित होते हैं।

रचनाएँ

चतुर्भुजदास के बारह ग्रन्थ उपलब्ध हैं, जो 'द्वादश यश' नाम से विख्यात हैं। सेठ मणिलाल जमुनादास शाह ने अहमदाबाद से इसका प्रकाशन कराया था। ये बारह रचनाएँ पृथक-पृथक नाम से भी मिलती हैं। 'हितजू को मंगल' , 'मंगलसार यश' और 'शिक्षासार यश' इनकी उत्कृष्ट रचनाएँ हैं। इनकी भाषा चलती और सुव्यवस्थित है। इनके बनाए निम्न ग्रंथ मिले हैं-

द्वादशयश
भक्तिप्रताप
हितजू को मंगल
मंगलसार यश
शिक्षासार यश

प्रेरक प्रसंग

गोंडवाना प्रदेश में जनता काली जी की उपासना करती थी और पशुबलि से देवी को प्रसन्न करने में ही अपनी समस्‍त साधना और उपासना की फलसिद्धि समझती थी। भयंकर पशुबलि ने भक्त चतुर्भुज के सीधे-सादे हृदय को क्षुब्‍ध कर दिया। वे परम भागवत थे। उन्‍होंने धीरे-धीरे लोगों में भगवान की भक्ति का प्रचार करना आरम्‍भ किया। जनता को अपनी मूर्खताजन्‍य पशुबलि और गलत उपासना-पद्धति की जानकारी हो गयी। भक्त चतुर्भुज के निष्‍कपट प्रेम और उदार मनोवृत्ति ने जनता के मन में उनके प्रति सहानुभूति की भावना भर दी, उनके दैवी गुणों का प्रभाव बढ़ने लगा। भक्त चतुर्भुज नित्‍य भागवत की कथा कहते थे और संत-सेवा में शेष समय का उपयोग करते थे। भागवती कथा की सुधा-माधुरी से भक्ति की कल्‍पलता फूलने-फलने लगी। लोग अधिकाधिक संख्‍या में उनकी कथा में आने लगे। भक्त का चरित्र ही उनके सत्‍कार्यके लिये विशाल क्षेत्र प्रस्‍तुत कर देता है। वे अपने प्रचार का ढिंढोरा नहीं पीटा करते। एक समय इनकी कथा में एक उचक्‍का चोर आया। उसके पास चोरी का धन था। सौभाग्‍य से उसमें वह व्‍यक्ति भी उपस्थित था, जिसके घर उसने चोरी की थी। कथा-प्रसंग में चोर ने सुना कि ‘जो भगवत-मंत्र की दीक्षा लेता है, उसका नया जन्‍म होता है।' चोर भक्त का दर्शन कर चुका था, भगवान की कथा-सुधा का माधुर्य उसके हृदय-प्रदेश में पूर्णरूप से प्रस्‍फुटित हो रहा था, चोरी के कुत्सित कर्म से उसका सहज ही उद्धार होने का समय सन्निकट था। कथा सुनने का तो परम पवित्र फल ही ऐसा होता है। उसने चोरी का धन कथा की समाप्ति पर चढ़ा दिया। वह निष्‍कलंक, निष्‍कपट और पापमुक्त हो चुका था, भगवान का भक्त बन चुका था। धनी व्‍यक्ति ने उसे पकड़ लिया, उस पर चोरी का आरोप लगाया पर उसका तो वास्‍तव में नया जन्‍म हो चुका था; उसने हाथ में जलता फार लेकर कहा कि इस जन्‍म में मैंने कुछ नहीं चुराया है। बात ठीक ही तो थी, अभी कुछ ही देर पहले उसे नया जन्‍म मिला था। धनी व्‍यक्ति बहुत लज्जित हुआ। राजा ने संत पर चोरी का आरोप लगाने के अपराध में धनी को मरवा डालना चहा, पर संत तो परहित चिन्‍तन की ही साधना में रहते हैं। चोर ने, जो पूर्ण संता हो चुका था, सारी बात स्‍पष्‍ट कर दी। भक्त चतुर्भुज की कथा का प्रभाव उस पर ऐसा पड़ा था कि धनी व्‍यक्ति को दण्डित होते देखकर उसके नयनों से अश्रुपात होने लगा, राजा को उसने अपनी साधुता और स्‍पष्‍टवादिता से आकृष्‍ट कर लिया। राजा के मस्तिष्‍क पर चतुर्भुज की कथा का अमिट रंग चढ़ चुका था; वह भी उनका शिष्‍य हो गया और भागवत धर्म के प्रचार में उसने उनको पूरा-पूरा सहयोग दिया।[1] एक बार कुछ संत इनके खेत के निकट पहुँच गये। चने और गेहूँ के खेत पक चुके थे, संतों ने बालें तोड़कर खाना आरम्‍भ किया। रखवाले ने उन्‍हें ऐसा करने से रोका और कहा कि ‘ये चतुर्भुज के खेत हैं।' संतों ने कहा, ‘तब तो हमारे ही खेत हैं।' रखवाला जोर-जोर से चिल्‍लाने लगा कि साधु लोग बालें तोड़-तोड़कर खा रहे हैं और कहते हैं कि ये खेत तो हमारे ही हैं। भक्त चतुर्भुज के कान में यह रहस्‍यमयी मधुर बात पड़ी ही थी कि उनके रोम-रोम में आनन्‍द का महासागर उमड़ आया। उन्‍होंने अपने सौभाग्‍य की सराहना की कि ‘आज संतों ने मुझको अपना लिया, मेरी वस्‍तु को अपनाकर मेरी जन्‍म-जन्‍म की साधना सफल कर दी।' उनके नेत्रों में प्रेमाश्रु छा गये, वे गुड़ तथा कुछ मिष्‍ठान्‍न लेकर खेत की ओर चल पड़े। संतों की चरण-धूलि मस्‍तक पर चढ़ाकर अपनी भक्तिनिष्‍ठा का सिन्‍दूर अमर कर लिया उन्‍होंने।[1]

देहावसान

चतुर्भुजदास का देहावसान संवत 1642 विक्रमी (1585 ई.) में रुद्रकुण्‍ड पर एक इमली के वृक्ष के नीचे हुआ। वे श्रृंगार मिश्रित भक्ति-प्रधान कवि, रसिक और महान भगवद्भक्‍त थे।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

पुस्तक- भक्त चरितांक | प्रकाशक- गीता प्रेस, गोरखपुर | विक्रमी संवत- 2071 (वर्ष-2014) | पृष्ठ संख्या- 711

11/06/2020
31/05/2020

Aarikya Yoga

अब तक आपने सुना होगा आज ऊनी आंखों से देख लीजिए।

23/04/2020

शब्दों का उपयोग विचार कर के ही करें अन्यथा आपका हानि अवश्य होगा।

https://twitter.com/Balkrishnaji1/status/1253173934997991424?s=19

[04/19/20]   भारत में 31 मुख्यमंत्री हैं
👇
आपका पसंदीदा मुख्यमंत्री कौन है ❓

18/04/2020

उन हिन्दुओं से प्रश्न है जिनको औरंगजेब और बाबर समेत कई समाज के दुस्टों ने जबरदस्ती धर्मपरिवर्तन कराया और मुश्लिम बनाया।

आज वे पुनः हिन्दू धर्म को क्यों नही अपनाते? अब तो कोई औरंगजेब अभी पैदा नही हुआ...
या आरक्षण के कारण आप लोग हिन्दू नही बनना चाहते? क्यों कि मुफ्त में सब कुछ मिल रहा है।

हिन्दू विरोधी इस पोस्ट को न लाइक करें और न कमेंट करें।
अगर मिर्ची लगे तो आगे बढ़ जाएं।

17/04/2020

एक आदमी ❄बर्फ बनाने वाली कम्पनी में काम करता था___
एक दिन कारखाना बन्द होने से पहले अकेला फ्रिज करने वाले कमरे का चक्कर लगाने गया तो गलती से दरवाजा बंद हो गया
और वह अंदर बर्फ वाले हिस्से में फंस गया..
छुट्टी का वक़्त था और सब काम करने वाले लोग घर जा रहे थे
किसी ने भी अधिक ध्यान नहीं दिया की कोई अंदर फंस गया है।
वह समझ गया की दो-तीन घंटे बाद उसका शरीर बर्फ बन जाएगा अब जब मौत सामने नजर आने लगी तो
भगवान को सच्चे मन से याद करने लगा।
अपने कर्मों की क्षमा मांगने लगा और भगवान से कहा कि
प्रभु अगर मैंने जिंदगी में कोई एक काम भी मानवता व धर्म का किया है तो तूम मुझे यहाँ से बाहर निकालो।
मेरे बीवी बच्चे मेरा इंतज़ार कर रहे होंगे। उनका पेट पालने वाला इस दुनिया में सिर्फ मैं ही हूँ।
मैं पुरे जीवन आपके इस उपकार को याद रखूंगा और इतना कहते कहते उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे।
एक घंटे ही गुजरे थे कि अचानक फ़्रीजर रूम में खट खट की आवाज हुई।
दरवाजा खुला चौकीदार भागता हुआ आया।
उस आदमी को उठाकर बाहर निकाला और 🔥 गर्म हीटर के पास ले गया।
उसकी हालत कुछ देर बाद ठीक हुई तो उसने चौकीदार से पूछा, आप अंदर कैसे आए ?
चौकीदार बोला कि साहब मैं 20 साल से यहां काम कर रहा हूं। इस कारखाने में काम करते हुए हर रोज सैकड़ों मजदूर और ऑफिसर कारखाने में आते जाते हैं।
मैं देखता हूं लेकिन आप उन कुछ लोगों में से हो, जो जब भी कारखाने में आते हो तो मुझसे हंस कर
*राम राम* करते हो
और हालचाल पूछते हो और निकलते हुए आपका
*राम राम काका*
कहना मेरी सारे दिन की थकावट दूर कर देता है।
जबकि अक्सर लोग मेरे पास से यूं गुजर जाते हैं कि जैसे मैं हूं ही नहीं।
आज हर दिनों की तरह मैंने आपका आते हुए अभिवादन तो सुना लेकिन
*राम राम काका*
सुनने के लिए इंतज़ार
करता रहा।
जब ज्यादा देर हो गई तो मैं आपको तलाश करने चल पड़ा कि कहीं आप किसी मुश्किल में ना फंसे हो।
वह आदमी हैरान हो गया कि किसी को हंसकर
*राम राम* कहने जैसे छोटे काम की वजह से आज उसकी जान बच गई।
*राम कहने से तर जाओगे*
मीठे बोल बोलो,
संवर जाओगे,
सब की अपनी जिंदगी है
यहाँ कोई किसी का नही खाता है।
जो दोगे औरों को,
वही वापस लौट कर आता है।
तो बोलो जय श्रीराम राम ।

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अब कश्मीर में दिख रही है 370 और 35A की ताकत
70 हजार वेतन है मेडम का... साभार
कोरोना से मरने वालों का सच देख लो अपनी आंखों से।
श्री कृष्ण कथा से तृप्ति संभव है?
अपना-अपना तर्क है
Coronavirus Game over
#लोक_डाउन में #ढकेल वाले का #खुला_दिल देखकर आपका #मन_प्रसन्न हो जाएगा #भारतीय
Must listen Feelings of this men
#janta karfwe
आप सभी को सुप्रभात एवं जय श्री राधे कृष्ण🙏
Santolanasana by Balkrishna Shastri Ji SM Yoga Research Institute, India YOGA IN VRINDAVAN
SM YOGA RESEARCH INSTITUTE, VRINDAVAN

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