20/01/2026
गौतम गंभीर दो बार भारत की विश्व विजेता टीम का हिस्सा रह चुके हैं। अगर ये कम हो तो वे दोनों ही फाइनल मुकाबले में भारत के सबसे सफल बल्लेबाज भी रहे हैं। क्रिकेट प्रेमियों के लिए इस बात को समझ पाना बहुत मुश्किल नही होगा कि गंभीर एक ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जिनके लिए भारत की जीत ही सर्वोपरि रही।
लेकिन आज परिस्थिति बदल चुकी है। वे भारत पुरूष टीम के कोच हैं और पिछले कुछ सीरीज में भारत की हार परेशान कर रही है। अब इस बीच गंभीर और सेलेक्टर्स ने कुछ ऐसे फैसले लिए हैं जिसपर सवाल उठाना बनता है?
सबसे पहला, क्या शुभमन गिल T20 वर्ल्ड कप खेलना नही चाहते हैं या प्रदर्शन के आधार पर उन्हें टीम से बाहर किया गया है? और अगर आधार प्रदर्शन है तो जो खिलाड़ी एक फॉरमेट में अपनी जगह तक सुनिश्चित कर पा रहा हो उसे दूसरे फॉरमेट में टीम का कप्तान नियुक्त करना किस हद तक उचित है?
दूसरा, अगर टीम में जसप्रीत बुमराह उपलब्ध नही हैं तो भारत की गेंदबाजी किसके नेतृत्व में उतर रही है, क्योंकि अवसर तो आप अर्शदीप को भी नही दे रहे हो?
तीसरा, अगर रोहित शर्मा टीम के कप्तान के रूप में इतना शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं तो टीम उनके अनुभव का फायदा क्यों नही उठा रही है?
चौथा, अगर रविन्द्र जडेजा से बौलिंग नही कराना है तो उन्हें टीम में रखने का क्या फायदा?
पांचवा, यशस्वी जायसवाल एकदिवसीय टीम का हिस्सा क्यों नही हैं?
अब इन सवाल का देने के लिए कोच या सेलेक्टर्स तो यहाँ बैठे नही हैं इसलिए कम से कम आप सभी रीडर्स अपनी राय अवश्य रखें।
वैसे गंभीर को यह तो मानना पड़ेगा कि इस एकदिवसीय एकादश में दो ऐसे खिलाड़ी हैं जो सिर्फ 2027 विश्व कप के लिए खेल रहे हैं और यही दोनों गंभीर का तुरूप का इक्का बन सकते हैं, न सिर्फ अपने बल्लेबाजी कौशल से बल्कि अपने अनुभव और नेतृत्व की क्षमता से भी।
17/01/2026
Sachin tendulkar fan art.
15/01/2026
Rahul dravid celebrating indian T20 world cup victory in 2024 as a coach. The joy on his face, his expressions, celebrating like a young kid. That was a moment after celebrating, when we saw a shade of satisfaction on his face. Nothing will beat that.
Indian Cricket Team
15/01/2026
अगर सचिन अच्छी बल्लेबाजी करे तो भारत चैन की नींद सोता है।
12/01/2026
हर्षित राणा भारतीय एकादश का एक महत्वपूर्ण अंग बनते जा रहे हैंl निश्चित रूप से गौतम गंभीर का कोच होना ही एकमात्र कारण था कुछ दिन पहले तक, लेकिन अब नहीl हर्षित के आत्मविश्वास में कोच का भरोसा साफ झलकता है l
अब स्थिति धीरे धीरे बदलती जा रही हैl हर्षित स्वयं को एक भरोसेमंद आलराउंडर के रूप में अपने आप को ढालते जा रहे हैं l एक दो नही बल्कि कई मौकों पर उन्होंने अपनी काबिलियत को साबित किया हैl
कल के मुकाबले में भी न सिर्फ गेंद से बल्कि बल्ले से भी उन्होंने टीम की जीत में एक अहम योगदान दियाl बस उन्हें आवश्यकता है "गौतम गंभीर के पसंदीदा खिलाडी" की अपनी छवि बदलने कीl
भारत को एक सुलझे हुए आलराउंडर की सख्त आवश्यकता हैl जडेजा का टीम में अंतिम कुछ वर्ष या महीना शेष हैl अश्विन जा चुके हैं l भारत को जरूरत है किसी मजबूत आल राउंडर खिलाडी की जो हार्दिक के साथ बराबरी में खड़े हो सकेl
11/01/2026
विराट कोहली की एक और विराट पारी !
थोड़े आसान लेकिन प्रभावी शब्दों में,
"झुकेगा नही साला" ।
विराट कोहली भले ही एक शानदार शतक से चूक गए लेकिन आज उन्होंने एक और मील का पत्थर पर कर लिया। महान सचिन तेंदुलकर के बाद अब विराट कोहली का नाम लिखा है अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रनों की सूची में।
आज बड़ोदरा में खेले गए पहले मुकाबले में लक्ष्य का पीछा करते हुए विराट ने 93 रनों की शानदार पारी खेला। इसी पारी के साथ विराट ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 28000 रन पूरा करने के साथ साथ श्रीलंका के कुमार संगकारा को भी पीछे छोड़ दिया है।
इंटरनेट और सोशल मीडिया विराट-मय हो गया है।
विराट के लिए सचिन के 100 शतक और सर्वाधिक रनों का रिकॉर्ड तो बहुत दूर है लेकिन जाहिर है विराट की नजर सिर्फ 2027 विश्व कप पर टिकी है। जबसे विराट ने टेस्ट क्रिकेट और T20 को अलविदा कहा है, प्रसंशकों में विराट की एक झलक देखने की बेताबी देखने योग्य है।
11/01/2026
5⃣0⃣9⃣ Intl matches
2⃣4⃣,2⃣0⃣8⃣ Intl runs
4️⃣8️⃣ Intl centuries
Winning Head Coach of ICC Men's T20 World Cup 2⃣0⃣2⃣4⃣ 🏆
Here's wishing great Rahul Dravid, a very Happy Birthday 🎂🥳
भारतीय क्रिकेट के दीवार को जन्मदिन की शुभकामनाएं!
ऐसे तो राहुल द्रविड़ के भारतीय क्रिकेट में योगदान को शब्दों में बयां करना उतना ही मुश्किल है जैसे सागर को हथेली में उठाना।
इसलिए ये संकलन हैं उन पंक्तियों का जो क्रिकेट के कुछ महान खिलाड़ियों ने राहुल द्रविड़ के लिए लिखा है,-
1. अगर मुझे अपनी ज़िन्दगी के लिए किसी से बैटिंग करानी होती तो वो कैलिस या द्रविड़ होता। - ब्रायन लारा
2. द्रविड़ मेरी तरह अटैकिंग क्रिकेट खेल सकता है लेकिन मैं कभी भी उसकी तरह नहीं खेल सकता।- क्रिस गेल
3. अगर तुम सचमुच AGGRESSION देखना चाहते हो तो द्रविड़ की आँखों में देखो.- हेडन
4. पहले 15 मिनट में उसका विकेट ले लो. अगर नहीं ले सकते तो बाकी के विकेट्स लेने की कोशिश करो.- स्टीव वा
5. सचिन भगवान् है. सौरव ऑफ साइड का भगवान् है. लक्ष्मण चौथी इन्निंग्स का भगवान् है. लेकिन जब मंदिर के दरवाजे बंद हो जाते हैं, तब भगवान् भी दीवार के पीछे चले जाते हैं.- अज्ञात
6. वो भेड़िया जो झुण्ड के लिए जिया.- हर्षा भोगले
7. राहुल द्रविड़ एक ऐसा खिलाड़ी है जो टूटे हुए कांच पर चल देगा अगर उसकी टीम उससे ऐसा करने को कहती है.- नवजोत सिंह सिद्धू
8. द्रविड़ नए खिलाड़ियों के लिए एक परफेक्ट रोल मॉडल है. उसने हम सभी के लिए एक महान उदाहरण पेश किया है. हम सभी इस मार्ग पर चलने की कोशिश कर रहे हैं.- सचिन तेंदुलकर
10/01/2026
क्या सौरभ गांगुली भारत के सर्वश्रेष्ठ कप्तान हैं? (भाग-2)
2007 विश्व कप में करारी शिकस्त के बाद महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में टीम T20 विश्व कप के लिए दक्षिण अफ्रीका में थी। भारत का सफर ऐसा था कि हर मैच do or die मुकाबले थे। स्कॉटलैंड के खिलाफ पहला मैच बारिश के कारण रद्द हो गया। दूसरे मैच में पाकिस्तान के खिलाफ जीतना जरूरी था लेकिन रनगति और जीत के मार्जिन का भी ध्यान रखना था ताकि सुपर 8 में जगह पक्की हो।
सुपर 8 में पहला मुकाबला न्यूज़ीलैंड से था और भारत को एक और हार का सामना करना पड़ा। अब आगे हार का विकल्प समाप्त हो चुका था। युवराज के एक ओवर में 6 छक्कों से सजी पारी के दम पर भारत ने इंग्लैंड पर जीत हासिल की।फिर मेजबान अफ्रीका सामने आई। भारत ने पहले खेल कर 153 बनाए। सेमीफाइनल खेलने के लिए अफ्रीका को सिर्फ 126 बनाना था, लेकिन RP singh की धारदार गेंदबाजी ने मेजबान अफ्रीका को संभलने का अवसर भी नही दिया।
सेमीफाइनल में भारत ने 188 रनों के पहाड़ खड़ा किया लेकिन हेडन और साईमंड्स ने खूंटा गाड़ दिया। मुकाबला हाथ से निकलने ही वाला था। लेकिन श्रीसंथ का हेडन को बोल्ड करना, फिर हरभजन का क्लार्क को आउट करना किसी चमत्कार से कम नही था। अंतिम 3 ओवर में 30 का लक्ष्य एक ओवर में 22 में बदल गया। और अंत में भारत को जीत भी मिली। क्रिकेट पंडित आज भी इस मुकाबले में धोनी के गेंदबाजी में परिवर्तन के फैसलों की चर्चा करते हैं।
फाइनल की कहानी के लिए अंतिम एक ओवर की चर्चा पर्याप्त है। धोनी के पास हरभजन का विकल्प था लेकिन उन्होंने गेंद थमाई एक अंजान को। बाकी जो हुआ वो इतिहास बन गया।
ये जीत किसी परियों की कहानी जैसा था, लेकिन धोनी का गेंदबाजी परिवर्तन, अपने खिलाड़ियों में भरोसा दिखाना , अपने खिलाड़ियों के पीछे खड़े रहना एक मिसाल बन गया।
दूसरी कहानी है 2002 के नेटवेस्ट ट्रॉफी के फाइनल की। पूरे टूर्नामेंट में सचिन एक बेहतरीन फॉर्म में थे। फाइनल से पहले क्या शानदार त्रिकोणीय मुकाबले हुए थे उस सीरीज में। तीनों टीम में एक से बढ़कर एक खिलाड़ी थे। एक फर्क था, भारत की बल्लेबाजी क्रम विश्व की सर्वश्रेष्ठ इकाई थी।
फाइनल में इंग्लैंड ने क्या अद्भुत खेल दिखाया। ट्रेसकोथिक और नासिर हुसैन ने शानदार शतक जमाया। लक्ष्य 325 का था और भारत हार चुकी थी। उस दौर में 325 के लक्ष्य मतलब सिर्फ था, टीम में सचिन जैसे खिलाड़ी का होना भी उम्मीद नही दे रहा था। फाइनल की लगातार हार की टीस चुभ रही थी।सिर्फ ट्रॉफी इंग्लैंड को सौंपना शेष था। TV रेडियो बंद हो चुके थे।
पूरी दुनिया में बस 11 व्यक्ति थे जो जीत के लिए खेल रहे थे और उन 11 का नेतृत्व दादा कर रहे थे। दादा की बल्लेबाजी देखकर ऐसा लगा जैसे हाथ में बल्ला नही कोई तलवार हो। सहवाग भी सहमे नजर आ रहे थे दादा का रौद्र रूप के सामने। दादा का स्ट्राइक रेट सिर्फ 139 का ही था, जो शायद उस दौर में भी कोई बहुत खतरनाक नही था , जयसूर्या जैसे बल्लेबाज उसी श्रृंखला में खेले थे। असली वजह थी दादा का आक्रामक बॉडी लैंग्वेज, चेहरे का वो भावहीन तेज जिसमें जीत के अलावा और कुछ नही दिख रहा था। दादा जैसे ये ठान कर उतरे थे कि अकेले ही लक्ष्य पार कर लेंगे। ऐसा हुआ नही, ये तेज अधिक समय न टिका। एक एक कर सारे दिग्गज पवेलियन लौट गए। जब सचिन आउट हुए तब तक उन 11 में से 9 समर्पण कर चुके थे। एक क्रिकेट प्रसंशक के रूप में मैं इस बात से परहेज नही करूंगा कि सचिन के आउट होने के बाद शायद दादा ने भी हार मान लिया गया होगा।
तो फिर क्या खास है दादा में और फिर वे कैसे भारत के सर्वश्रेष्ठ कप्तान हो सकते हैं। महेंद्र सिंह धोनी के क्रिकेट माइंड की तुलना दादा से करना भी उचित नही है। मैंदान में धोनी के फैसलों पर पूरी की पूरी बाइबिल लिखी जा सकती है। धोनी के लिए क्रिकेट एक शतरंज की बिसात थी और उस बिसात के बेताज बादशाह थे धोनी। तो क्या धोनी ही सर्वश्रेष्ठ हैं, शायद हाँ या शायद नही!
क्योंकि नेटवेस्ट के फाइनल की कहानीअभी शेष है।
कप्तान सिर्फ एक खिलाड़ी नही होता, सिर्फ एक बल्लेबाज या गेंदबाज या रणनीतिकार नही होता । सर्वश्रेष्ठ वो नही जो दूसरों से बेहतर हो, सर्वश्रेष्ठ वह है जो अपने टीम के हर एक खिलाड़ी को अजेय बना दे। दादा को शायद खुद भी अंदाजा नही होगा कि कप्तान बनने के बाद युवाओं की जो फौज तैयार की थी उन्होंने, आज उसकी अग्निपरीक्षा थी।
बल्लेबाजों की आखिरी जोड़ी मैंदान में थी। और उस दिन मोहम्मद कैफ और युवराज, सचिन और सौरभ से भी बड़े बल्लेबाज थे। क्योंकि वे खड़े थे अपनी टीम को एक असंभव जीत दिलाने के लिए। टीम के एक एक खिलाड़ी में यही विश्वास भरना ही दादा को सर्वश्रेष्ठ कप्तान बनाता है। कैफ और युवराज उस मैच में दो युवा रणबांकुरों की तरह खेले कि चाहे असंभव ही क्यों न लगे, जब तक आखिरी विकेट भी शेष है, लक्ष्य सिर्फ जीत होगा।
लॉर्ड्स के मैंदान में फाइनल मुकाबले की उस जंग ने दुनिया को भारतीय क्रिकेट की असली औकात से परिचय कराया। युवराज सिंह और मोहम्मद कैफ ने इतिहास के पन्ने पर अपनी जिद्द की कलम से लिखा " भारत : नेटवेस्ट ट्रॉफी 2002 विजेता। जीत के बाद बंगाल टाइगर की दहाड़ पूरी दुनिया ने देखी। लॉर्ड्स की बालकनी में शर्ट हाथ में लेकर नचाना कोई साधारण कप्तान कर ही नही सकता था। क्रिकेट के मैंदान पर जीत का वह जुनून ही दादा को असाधारण और अजेय बनाता है। ये जुनून हार और जीत के परिभाषा से बहुत ऊपर है। ये जुनून रिकॉर्ड और ट्रॉफी की सरहदों में सिमटने वाला नही है। ये जुनून जिद्द का जुनून है, हार के अन्तिम क्षण में भी, जीत का ख्वाब देखने का जुनून है। और भारतीय क्रिकेट में उस जुनून का नाम है "सौरव चंडीदास गाँगुली"।
धोनी भारत के सबसे सफल कप्तान हैं। निःसंदेह उनकी गिनती दुनिया के सबसे सफल कप्तान में भी की जाएगी। लेकिन जब भी बात भारत के सर्वश्रेष्ठ के सर्वश्रेष्ठ कप्तान की होगी, जुबान पर सिर्फ एक ही नाम आएगा।
09/01/2026
2003 विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ 98 रनों की ताबड़तोड़ पारी निःसंदेह एकदिवसीय क्रिकेट में सचिन की सर्वश्रेष्ठ पारी है।
क्या तोप गेंदबाजी थी पाकिस्तान टीम की। वसीम अकरम, वकार यूनुस, शोएब अख्तर जैसे तीन तबाही गेंदबाज और ऐसे खतरनाक गेंदबाजी आक्रमण के सामने सचिन ने ऐसी बल्लेबाजी की जिसे देख क्रिकेट जगत भौचक्का रह गया।
सचिन जब दूसरी पारी में लक्ष्य का पीछा करने के लिए उतरे तो गार्ड लेते समय ही उन्होंने अपने इरादे जाहिर कर दिया था। लेकिन तबाही का अंदाजा कितना भी लगा लो, जब आती है तो क्षति तो होना ही है।
सईद अनवर के शानदार शतक और 273 रन का लक्ष्य ने पाकिस्तान की जीत पक्की ही कर दी थी। सिर्फ एक सचिन खड़े थे अपना बल्ला हाथ में लिए। दूसरे ओवर में जब शोएब अख्तर की को पॉइंट के ऊपर से छक्का जड़ा सचिन ने, ऐसा लग रहा था जैसे सेंचूरियन में तूफान आ गया हो।
उस मुकाबले को TV पर देखने का अनुभव की कुछ अलग था। कमेंटेटर की चीख, दर्शकों का शोर खून में उबाल ला रहा था। और ये शोर कुछ मिनटों का नहीं था। जब तक सचिन मैदान में रहे, शोर कम न हुआ।
सचिन जब आउट हुए तब भारत को 134 गेंदों में मात्र 97 बनाने थे। तारीफ करनी होगी द्रविड़ और युवराज की भी जिन्होंने ऐसे दवाब वाले क्षण में ही बड़े आराम से टीम को लक्ष्य तक पहुंचाया।
सचिन की उस बेखौफ बल्लेबाजी के दम पर भारत ने विश्व कप के मुकाबले में पाकिस्तान को एक बार फिर पराजित किया।
09/01/2026
क्यों है सचिन तेंदुलकर आज भी पूरे भारत के रोल मॉडल?
1996 विश्व कप के दौरान पूरी भारतीय टीम में एकमात्र सचिन ही थे जिनके पास बैट का कोई स्पॉन्सर नही था।
पूरी टीम के बल्ले पर विल्स या फोर स्क्वायर का स्टीकर था लेकिन सचिन का बल्ला खाली था। कारण यह था कि सचिन तेंदुलकर ने अपने पिता से यह वादा किया था कि वे कभी भी शराब या गुटखा ब्रांड्स का प्रचार नही करेंगे।
जबकि उस दिन के लगभग 30 साल होने को हैं और आज तो बड़े बड़े क्रिकेटर और फिल्मस्टार नशे से जुड़े उत्पादों का प्रचार करते हैं। सच्चाई यह है कि कोई भी बड़ा खिलाड़ी या प्रसिद्ध व्यक्तित्व ये नही कहता है कि आम जनता या युवा उनके जैसा बने।
हम स्वयं चुनते हैं अपना रोल मॉडल, उस व्यक्तित्व के आचरण और आदर्शों से प्रभावित होकर। और निश्चित रूप से सचिन उन महान खिलाड़ियों में से एक हैं जिन्हें करोड़ो युवा आज भी अपना आदर्श मानती है।