हम छपरा से हैं

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एक गौरवान्वित भारतीय, एक मुसलमान, एक इतिहास प्रेमी, एक क्रिकेट और अन्य खेल प्रेमी, एक अलीगेरियन, एक सूफी संगीत प्रशंसक, एक बॉलीवुड प्रशंसक, राजनीतिक टिप्पणीकार, मानवतावादी, क्लासिक उर्दू कविता का एक उत्साही प्रशंसक,

09/07/2026

जॉनी वॉकर: हँसी की वो पहचान, जिसने हर पीढ़ी को मुस्कुराना सिखाया!!! जॉनी वॉकर — असली नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन काज़ी — एक ऐसा नाम जिसने हिंदी सिनेमा में हास्य अभिनय को गरिमा, मासूमियत और सामाजिक व्यंग्य से सजाया। 11 नवम्बर 1926 को इंदौर में जन्मे जॉनी वॉकर जी ने बस कंडक्टर से लेकर 300 से अधिक फिल्मों तक का सफर तय किया। उनकी पतली मूंछें, नाक में आवाज़ और शराबी की मासूमियत ने उन्हें हास्य का पर्याय बना दिया।
प्रमुख पहचान:
- खोज: गुरु गुरुदत्त ने उन्हें एक शराबी की एक्टिंग करते देखा और 'बाज़ी' (1951) में मौका दिया
- हिट फ़िल्में:
- 'प्यासा', 'सीआईडी', 'चौदहवीं का चाँद', 'मिस्टर एंड मिसेज 55', 'नया दौर', 'मधुमती', 'मुनीमजी', 'ज्वेल थीफ', 'शराबी'
- विशेषता:
- शराबी किरदारों में हास्य और करुणा का अनोखा मेल
- संवादों में उर्दू की मिठास और अभिनय में आत्मीयता
- कभी भी अश्लीलता या फूहड़ता का सहारा नहीं लिया
संक्षिप्त आंकड़े:
- जन्म: 11 नवम्बर 1926, इंदौर
- निधन: 29 जुलाई 2003, मुंबई (उम्र 76 वर्ष)
- करियर अवधि: 1951–1997
- फ़िल्में: 300+
- पुरस्कार:
- फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता — 'शराबी' (1955)
- परिवार: पत्नी नूरजहाँ (पूर्व अभिनेत्री), 6 संतानें, जिनमें नासिर खान (अभिनेता)
- उपनाम: 'जॉनी वॉकर' — शराबी की भूमिका से मिला नाम, जो बाद में पहचान बन गया
जॉनी वॉकर का हास्य सिर्फ हँसी नहीं, बल्कि इंसानियत और समाज की गहराई से जुड़ा था। वे गुरुदत्त की फिल्मों में कविता की तरह आते थे — हल्के, लेकिन असरदार। उन्होंने हास्य को गरिमा दी, और कभी भी अपनी कला को सस्ते मनोरंजन में नहीं बदला।
जॉनी वॉकर हमें याद दिलाते हैं कि हँसी सिर्फ मज़ाक नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने और समाज को आईना दिखाने की ताकत है — जब वह आत्मा से निकले।
#जॉनीवॉकर #हिंदीसिनेमा #हास्यकीशान #शराबी_की_मासूमियत

09/07/2026

सुहास जोशी: अभिनय, गरिमा और मराठी रंगमंच की सजीव आत्मा!!! अगर मराठी रंगमंच और सिनेमा में शुद्ध अभिनय, भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक गरिमा की कोई मिसाल चाहिए, तो वह हैं सुहास जोशी — एक ऐसी अभिनेत्री जिन्होंने थिएटर, टेलीविज़न और फिल्मों में पाँच दशकों से अधिक समय तक अपनी अमिट छाप छोड़ी। सुहास जोशी का जन्म 12 जुलाई 1947 को महाराष्ट्र में हुआ।
उन्होंने कॉलेज के दिनों में नाटकों से अभिनय की शुरुआत की और फिर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD), दिल्ली से तीन वर्षीय अभिनय डिप्लोमा किया — जहाँ उन्हें इब्राहीम अलकाज़ी जैसे महान रंग निर्देशक से प्रशिक्षण मिला।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1972 में मराठी नाटक "बॅरिस्टर" से की, जिसे विजया मेहता ने निर्देशित किया था।
इसके बाद उन्होंने "Tu Tithe Mee", "Nishpaap", "Ek Packet Umeed", "Munjya" जैसी फिल्मों और धारावाहिकों में माँ, शिक्षिका और सामाजिक स्त्री के किरदारों को गरिमा और संवेदना से निभाया।
उन्हें 2018 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2023 में फिल्मफेयर मराठी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया — जो उनके दीर्घकालीन योगदान का प्रमाण है।
संक्षिप्त आंकड़े:
- जन्म: 12 जुलाई 1947, महाराष्ट्र
- शिक्षा: NSD डिप्लोमा (तीन वर्ष), प्रशिक्षक – इब्राहीम अलकाज़ी
- रंगमंच शुरुआत: Barrister (1972), लेखक – जयवंत दळवी
- प्रमुख फिल्में: Tu Tithe Mee, Nishpaap, Munjya
- प्रमुख टीवी शो: Prapancha (1999), Ek Packet Umeed (2008)
- पुरस्कार:
- संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (2018)
- फिल्मफेयर मराठी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (2023)
- स्क्रीन अवॉर्ड – Tu Tithe Mee (1999)
- गंगा-जमुना पुरस्कार (2011)
- वैवाहिक स्थिति: पति — सुभाष जोशी
- सक्रियता: 1972–वर्तमान
सुहास जोशी की कहानी बताती है कि अभिनय सिर्फ़ प्रदर्शन नहीं, संस्कृति और संवेदना का विस्तार है।
वे आज भी हर रंगकर्मी और अभिनेत्री के लिए प्रेरणा हैं — मराठी रंगमंच की गरिमामयी आवाज़।
#सुहासजोशी #मराठीसिनेमा #भारतीयरंगमंच

09/07/2026

एन. आर. नारायण मूर्ति: भारतीय आईटी क्रांति के शिल्पकार, जिन्होंने सपनों को कोड में बदला!!! 20 अगस्त 1946 को कर्नाटक के सिदलघट्टा में जन्मे नगवारा रामाराव नारायण मूर्ति भारतीय उद्यमिता और तकनीकी नेतृत्व के सबसे प्रेरणादायक चेहरों में से एक हैं।
वे इन्फोसिस (Infosys) के संस्थापक और चेयरमैन एमेरिटस हैं — एक ऐसी कंपनी जिसने भारत को वैश्विक आईटी मानचित्र पर स्थापित किया।
मूर्ति जी ने National Institute of Engineering, मैसूर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और फिर IIT कानपुर से M.Tech किया।
उन्होंने 1981 में छह दोस्तों के साथ मिलकर ₹10,000 की पूंजी से Infosys की शुरुआत की, और इसे $70 बिलियन से अधिक मूल्य वाली कंपनी बना दिया।
उनका नेतृत्व नैतिकता, पारदर्शिता और नवाचार पर आधारित रहा।
उन्होंने कॉर्पोरेट गवर्नेंस, सामाजिक उत्तरदायित्व, और युवाओं के लिए प्रेरणा के नए मानक स्थापित किए।
📌 संक्षिप्त आँकड़े और उपलब्धियाँ:
- जन्म: 20 अगस्त 1946, सिदलघट्टा, कर्नाटक
- शिक्षा: B.E. (NIE, Mysore), M.Tech (IIT Kanpur)
- संस्थापक: Infosys Technologies Ltd. (1981)
- पद: CEO (1981–2002), Chairman (2002–2011), Chairman Emeritus (2011–वर्तमान)
- परिवार:
- पत्नी: सुधा मूर्ति — लेखिका और समाजसेविका
- पुत्र: रोहन मूर्ति, पुत्री: अक्षता मूर्ति — UK प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की पत्नी
- प्रमुख सम्मान:
- पद्म श्री (2000)
- पद्म विभूषण (2008)
- Legion of Honour (France, 2008)
- Honorary Commander of the British Empire (UK, 2007)
- अन्य भूमिका: United Nations Foundation, Ford Foundation, कॉर्पोरेट नैतिकता के वैश्विक प्रवक्ता
नारायण मूर्ति ने दिखाया कि एक विचार, एक टीम और एक मूल्य आधारित दृष्टिकोण से भारत को वैश्विक नेतृत्व दिलाया जा सकता है।
उनकी कहानी आज भी हर युवा उद्यमी के लिए कोड से करियर तक की प्रेरणा है।

09/07/2026

जयप्रकाश नारायण: लोकनायक, जिन्होंने व्यवस्था नहीं, क्रांति को चुना!!! 11 अक्टूबर 1902 को उत्तर प्रदेश के सिताब दियारा गाँव में जन्मे जयप्रकाश नारायण — जिन्हें देश "लोकनायक" के नाम से जानता है — भारतीय राजनीति, समाज और जनआंदोलनों के सबसे प्रेरणादायक चेहरों में से एक रहे।
उन्होंने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन से समाजशास्त्र की पढ़ाई की और भारत लौटकर महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े।
JP ने 1934 में कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना की और भारत छोड़ो आंदोलन (1942) में अग्रणी भूमिका निभाई।
स्वतंत्रता के बाद उन्होंने सत्ता की राजनीति से दूरी बनाई और "संपूर्ण क्रांति" का नारा देते हुए 1974 में बिहार आंदोलन का नेतृत्व किया — जिसने आगे चलकर आपातकाल (1975–77) के खिलाफ देशव्यापी जनआंदोलन का रूप लिया।
📌 संक्षिप्त आँकड़े और उपलब्धियाँ:
- जन्म: 11 अक्टूबर 1902, सिताब दियारा, उत्तर प्रदेश
- शिक्षा: University of Wisconsin, Ohio State University, University of Iowa, UC Berkeley
- प्रमुख आंदोलन: भारत छोड़ो आंदोलन, बिहार आंदोलन (1974), संपूर्ण क्रांति
- राजनीतिक विचारधारा: समाजवाद, गांधीवाद, सर्वोदय
- सम्मान: रैमन मैगसेसे पुरस्कार (1965), भारत रत्न (1999, मरणोपरांत)
- निधन: 8 अक्टूबर 1979, पटना, बिहार
जयप्रकाश नारायण ने दिखाया कि राजनीति सिर्फ़ सत्ता का खेल नहीं, बल्कि जनसेवा और नैतिक नेतृत्व का माध्यम हो सकती है।
उनकी आवाज़ आज भी हर उस युवा के दिल में गूंजती है जो बदलाव चाहता है।

09/07/2026

पी. टी. उषा — ‘पय्योली एक्सप्रेस’ जिसने भारतीय ट्रैक को स्वर्णिम गति दी!!! अगर भारतीय एथलेटिक्स में गति, गरिमा और गौरव की कोई मिसाल है, तो वह हैं पिलावुल्लाकांडी थेक्केपरम्बिल उषा, जिन्हें दुनिया ‘पय्योली एक्सप्रेस’ के नाम से जानती है। 27 जून 1964 को कोझिकोड, केरल में जन्मी उषा जी ने 1976 से 2000 तक भारत के लिए दौड़ते हुए एशिया की रानी का दर्जा हासिल किया।
मुख्य उपलब्धियाँ और आँकड़े:
- स्पर्धाएँ: 100m, 200m, 400m, 400m हर्डल्स
- एशियाई खेल:
- 1982 दिल्ली — रजत
- 1986 सियोल — 4 स्वर्ण, 1 रजत (100m, 200m, 400m, 400m हर्डल्स)
- एशियन चैंपियनशिप: कुल 23 पदक — जिनमें 14 स्वर्ण
- ओलंपिक:
- 1980 मास्को — भारत की सबसे युवा प्रतिभागी
- 1984 लॉस एंजेलेस — 400m हर्डल्स में 0.01 सेकंड से पदक चूकीं, लेकिन भारतीय महिला एथलेटिक्स का इतिहास रच दिया
- सम्मान:
- अर्जुन पुरस्कार (1983), पद्मश्री (1985)
- 2022 में भारतीय ओलंपिक संघ की पहली महिला अध्यक्ष
- राज्यसभा सदस्य (2022–वर्तमान)
- अन्य भूमिका:
- उषा स्कूल ऑफ एथलेटिक्स की संस्थापक — केरल में युवा प्रतिभाओं को प्रशिक्षण
- राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी — 400m हर्डल्स: 55.42 सेकंड (1984)
पी. टी. उषा का जीवन संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक दौड़ है।
उन्होंने गरीबी, स्वास्थ्य समस्याओं और संसाधनों की कमी के बावजूद विश्व मंच पर भारत का नाम रोशन किया।
उनकी गति और धैर्य ने उन्हें भारत की गोल्डन गर्ल बना दिया।
उनका जीवन इस बात का प्रतीक है कि अगर हौसला हो, तो हर बाधा सिर्फ़ एक हर्डल बन जाती है — जिसे पार किया जा सकता है।
#क्रिकेट_नहीं_दौड़_की_गाथा #पीटी_उषा ा_दिन #भारत_का_गौरव #महिला_शक्ति

09/07/2026

टुन टुन : हिंदी सिनेमा की पहली महिला हास्य कलाकार, जिसने हँसी को नई आवाज़ दी!!! टुन टुन — असली नाम उमा देवी खत्री — एक ऐसा नाम जिसने हिंदी सिनेमा में हास्य अभिनय को नारी दृष्टिकोण और आत्मीयता से सजाया। 11 जुलाई 1923 को अमरोहा, उत्तर प्रदेश में जन्मी उमा देवी ने 1940 के दशक में पार्श्व गायिका के रूप में शुरुआत की और फिर हास्य अभिनेत्री के रूप में 300 से अधिक फिल्मों में अपनी छाप छोड़ी। वे हिंदी सिनेमा की पहली महिला कॉमेडियन मानी जाती हैं।
प्रमुख पहचान:
- गायिका के रूप में:
- 'अफसाना', 'बड़ी बहन', 'दर्द', 'चांदनी रात', 'दिल', 'बाबुल' — नौशाद के निर्देशन में कई हिट गाने
- अभिनेत्री के रूप में:
- 'बाबुल', 'मिस्टर एंड मिसेज 55', 'प्यासा', 'कश्मीर की कली', 'अमर अकबर एंथनी', 'नमक हलाल', 'कुली', 'शराबी', 'कर्मा' — हास्य और आत्मीयता का संगम
- विशेषता:
- भारी शरीर, चुलबुला अंदाज़ और संवादों में देसी मिठास
- हर दृश्य में हास्य के साथ गरिमा और अपनापन
- टुन टुन नाम उन्हें दिलीप कुमार ने दिया — जो बाद में उनकी पहचान बन गया
संक्षिप्त आंकड़े:
- जन्म: 11 जुलाई 1923, अमरोहा, उत्तर प्रदेश
- निधन: 24 नवम्बर 2003, मुंबई (उम्र 80 वर्ष)
- करियर अवधि: 1946–1990
- फ़िल्में: 300+
- गाने: 40+
- उपलब्धियाँ:
- हिंदी सिनेमा की पहली महिला हास्य कलाकार
- गायिका से अभिनेत्री बनने की प्रेरणादायक यात्रा
- व्यक्तिगत जीवन: बचपन में माता-पिता और भाई की हत्या के बाद अनाथ, संघर्ष से भरा जीवन, लेकिन कभी हार नहीं मानी
टुन टुन का जीवन संगीत, संघर्ष और मुस्कान की कहानी है। उन्होंने नारी हास्य कलाकारों के लिए राह बनाई और हर वर्ग के दर्शकों को हँसी और अपनापन दिया। उनका अभिनय आज भी सिनेमा के स्वर्ण युग की पहचान है।
टुन टुन हमें याद दिलाती हैं कि हँसी सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मबल, संघर्ष और आत्मसम्मान की अभिव्यक्ति है — जब वह दिल से निकले।
#टनटन #हिंदीसिनेमा #हास्यकीपहलीनायिका #गायिकासेअभिनेत्री #संघर्षसेसफलता

09/07/2026

सुनीत टंडन: दूरदर्शन की गंभीर आवाज़ और भारतीय रंगमंच का सशक्त चेहरा!!! अगर 90 के दशक में दूरदर्शन की अंग्रेज़ी समाचार प्रस्तुति की बात हो, तो सुनीत टंडन का नाम गंभीरता, गरिमा और स्पष्टता का पर्याय है।उनकी आवाज़ ने अंग्रेज़ी न्यूज़ को भारतीय दर्शकों के लिए विश्वसनीय और प्रभावशाली बना दिया। सुनीत टंडन ने दूरदर्शन के प्रमुख अंग्रेज़ी न्यूज़ एंकर के रूप में वर्षों तक काम किया और लोकसभा टीवी के CEO के रूप में भी अपनी भूमिका निभाई।
उनकी प्रस्तुति शैली में शुद्ध उच्चारण, आत्मविश्वास और संयम का ऐसा मेल था, जिसे आज भी न्यूज़ एंकरिंग की कसौटी माना जाता है।
🎭 वे सिर्फ़ न्यूज़ तक सीमित नहीं रहे — उन्होंने 150 से अधिक नाटकों में अभिनय किया और 25 से अधिक नाटकों का निर्देशन भी किया।
वे Akshara Theatre, Primetime, Natwa जैसे प्रतिष्ठित मंचों से जुड़े रहे और भारतीय रंगमंच को नई ऊँचाई दी।
📚 सुनीत टंडन ने St. Stephen’s College, दिल्ली से BA (Economics) और MA (History) किया।
उन्होंने National Film Development Corporation में भी जनरल मैनेजर के रूप में काम किया और फिल्म निर्माण, वितरण और सेवाओं में योगदान दिया।
📊 संक्षिप्त आंकड़े:
- जन्म: भारत
- शिक्षा: BA (Economics), MA (History) — St. Stephen’s College, दिल्ली
- प्रमुख भूमिकाएँ: दूरदर्शन न्यूज़ एंकर, CEO – लोकसभा टीवी, रंगमंच निर्देशक
- रंगमंच योगदान: 150+ नाटकों में अभिनय, 25+ नाटकों का निर्देशन
- संस्थान: Akshara Theatre, NFDC, Lok Sabha TV
- फ़िल्मों में अभिनय: Dil Bechara (2020), Bellbottom (2021), Ghost Stories (2020), Axone (2019)
- अन्य पहचान: TEDx वक्ता, मीडिया प्रशिक्षक
🎯 सुनीत टंडन की कहानी बताती है कि एक आवाज़, एक मंच और एक दृष्टि मिलकर संवाद और संस्कृति को नया रूप दे सकते हैं।
#सुनीटटंडन #दूरदर्शनकीआवाज़

09/07/2026

शिक्षा और सौहार्द्र के प्रतीक: डॉ. ज़ाकिर हुसैन की प्रेरक गाथा!!! “शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, चरित्र निर्माण का माध्यम है।” — डॉ. ज़ाकिर हुसैन,,, डॉ. ज़ाकिर हुसैन (जन्म: 8 फ़रवरी 1897, हैदराबाद) भारत के तीसरे राष्ट्रपति और पहले मुस्लिम राष्ट्रपति थे। वे शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के प्रबल समर्थक थे। उनका जीवन ज्ञान, सेवा और सौहार्द्र का प्रतीक रहा।
🔹 संक्षिप्त आंकड़े:
- पूरा नाम: डॉ. ज़ाकिर हुसैन
- जन्म: 8 फ़रवरी 1897, हैदराबाद
- निधन: 3 मई 1969, नई दिल्ली
- शिक्षा: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ़ बर्लिन (PhD)
- प्रसिद्धि: राष्ट्रपति (1967–1969), उपराष्ट्रपति (1962–1967), जामिया मिलिया इस्लामिया के सह-संस्थापक
- सम्मान: भारत रत्न (1963), शिक्षा सुधारों में योगदान
- विशेष योगदान: जामिया मिलिया इस्लामिया को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ा, शिक्षा को समाज सेवा का माध्यम बनाया
उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया को गांधीवादी मूल्यों पर आधारित स्वतंत्र शिक्षण संस्थान के रूप में विकसित किया। वे शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का आधार मानते थे और धार्मिक सहिष्णुता के पक्षधर थे।
उनका जीवन हमें सिखाता है कि ज्ञान, सेवा और एकता से ही राष्ट्र की आत्मा मजबूत होती है।

09/07/2026

धूमधड़ाका के धूमल: एक हँसी जो आज भी गूंजती है!!! मराठी रंगभूमि से लेकर हिंदी सिनेमा तक, धूमल (वास्तविक नाम: अन्नासाहेब धूमल) ने हास्य अभिनय को एक नई ऊँचाई दी। 29 मार्च 1914 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में जन्मे धूमल ने अपने करियर की शुरुआत मराठी नाटकों से की, लेकिन जल्द ही वे हिंदी फिल्मों के दर्शकों के दिलों में बस गए।
उनकी कॉमिक टाइमिंग, विशिष्ट आवाज़ और सहज अभिनय ने उन्हें 1950 और 60 के दशक के सबसे चहेते चरित्र अभिनेताओं में शुमार किया। चाहे वह "जॉनी मेरा नाम" में उनका मज़ाकिया अंदाज़ हो या "प्रोफेसर" में उनका मासूम किरदार—हर रोल में उन्होंने जान डाल दी।
कुछ यादगार फिल्में:
- जॉनी मेरा नाम (1970)
- प्रोफेसर (1962)
- दिल ही तो है (1963)
- गूंज उठी शहनाई (1959)
धूमल ने लगभग 150 से अधिक फिल्मों में काम किया और अक्सर महमूद, ओम प्रकाश और किशोर कुमार जैसे दिग्गजों के साथ मंच साझा किया। उनकी जोड़ी महमूद के साथ दर्शकों को खूब हँसाती थी।
आज जब हम कॉमेडी की बात करते हैं, तो धूमल जैसे कलाकारों की याद आना स्वाभाविक है—जिन्होंने बिना अश्लीलता के, केवल अभिनय और संवाद अदायगी से लोगों को हँसाया।
धूमल को हमारी श्रद्धांजलि। उनकी हँसी आज भी हमारे दिलों में गूंजती है।
#धूमल #महाराष्ट्राचेरत्न #हास्यसम्राट

09/07/2026

लक्ष्मी मित्तल: इस्पात के सम्राट, जिन्होंने भारतीय उद्यमिता को वैश्विक ऊँचाइयों तक पहुँचाया!!! 15 जून 1950 को राजस्थान के सादुलपुर में जन्मे लक्ष्मी निवास मित्तल विश्व के सबसे प्रभावशाली उद्योगपतियों में से एक हैं।
वे ArcelorMittal के कार्यकारी अध्यक्ष हैं — जो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इस्पात निर्माण कंपनी है।
उनका जीवन एक मिसाल है कि दृढ़ संकल्प, वैश्विक दृष्टि और नवाचार से कोई भी भारतीय उद्यमी विश्व मंच पर छा सकता है।
मित्तल जी ने सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज, कोलकाता से वाणिज्य में स्नातक किया और अपने पिता के इस्पात व्यवसाय से प्रेरणा लेकर 1976 में इंडोनेशिया में पहला स्टील प्लांट शुरू किया।
इसके बाद उन्होंने कई देशों में अधिग्रहण और विस्तार के ज़रिए ArcelorMittal को वैश्विक इस्पात उद्योग का नेतृत्वकर्ता बना दिया।
📌 संक्षिप्त आँकड़े और उपलब्धियाँ:
- जन्म: 15 जून 1950, सादुलपुर, राजस्थान
- शिक्षा: B.Com – St. Xavier’s College, कोलकाता
- प्रमुख पद:
- कार्यकारी अध्यक्ष – ArcelorMittal
- अध्यक्ष – Aperam (स्टेनलेस स्टील निर्माता)
- प्रमुख उपलब्धियाँ:
- ArcelorMittal – विश्व की दूसरी सबसे बड़ी स्टील कंपनी
- 38% हिस्सेदारी ArcelorMittal में
- Queens Park Rangers F.C. में 3% हिस्सेदारी
- सम्मान:
- 🏅 पद्म विभूषण (2008)
- 🏅 Forbes द्वारा विश्व के शीर्ष अरबपतियों में स्थान
- 🏅 Time Magazine – 100 प्रभावशाली व्यक्तियों में शामिल
- परिवार:
- पत्नी: उषा मित्तल
- पुत्र: आदित्य मित्तल – ArcelorMittal के CEO
- भाई: प्रमोद मित्तल (उद्योगपति)
- परोपकार:
- Lakshmi Mittal South Asia Institute – Harvard University
- शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल में योगदान
लक्ष्मी मित्तल ने दिखाया कि भारतीय उद्यमिता केवल देश तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की क्षमता रखती है।
उनकी विरासत आज भी हर स्टील संयंत्र, हर युवा उद्यमी और हर वैश्विक भारतीय में जीवित है।

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