27/05/2025
एक बिन माँ बाप की लड़कीं थी। अपने ननिहाल में पल पोश कर बड़ी हो रही थी। कुछ ही क्लास पढ़ा लिखा कर घर में ननिहाल वाले सारा काम करवाते थे। कभी कभी साग सब्जी लेने बाजार जाती रहती थी। एक दिन उस के लड़की से कही रुपया गिर गया।
वह लड़कीं घबरा कर, कई सब्जी वालो से कहने लगी। कि आप सब्जी उधार दे दीजिये। मैं दो चार दिन में आप को पैसे दे दूँगी। लेकिन कोई सब्जी वाला उधार देने को तैयार नही था। यह बात एक लड़का सुन कर बोला कि, मैडम! आप को कितने पैसों की जरूरत हैं। उसने ₹५०० की नोट निकाल कर देते हुएबोला कि, आप के पास जब हो जाएगा। तो वापस कर देना।
लड़कीं बोली कि सर! आप को कहाँ खोजूँगी। लड़का बोला कि, मैं बहुत बड़ा आदमी नही हूँ। प्रतिदिन हम इसी समय सब्जी या फल लेने बाजार आया करता हूँ। लड़कीं जब भी बाजार आती थी। लड़का भी संयोग से मिल जाता था।
लड़कीं मिल कर बहुत शर्मिंदगी महसूस करती थी। लड़का भी कुछ नही कहता था। जब एक हप्ता हो गया। तो लड़कीं पूरी बात बताई की सर! मैं अपने ननिहाल में रहती हूँ। सब्जी में से रोज कुछ पैसे बचाती हूँ। तो वही इकठ्ठा कर के दे दूँगी।
लड़का बोला कि, हमे आप से कोई पैसे नही चाहिये। अगर कभी भी जरूरत पड़े तो हम आप की मदद और कर देंगे। उस दिन से वह लड़कीं जब देखती थी। तो सर! नमस्ते कहती थी। वह लड़का भी नमस्ते कर के चल देता था। लेकिन उस लड़के से वह मिल कर बहुत खुश होती थी। लड़का भी उस लड़की से मिलने के बहाने आया करता था। कभी कभी लड़कीं के ननिहाल वाले ताने मारते थे।
कि जवान हो गयी हैं। मर भी नही गयी। अब तो शादी का सारा खर्च हम लोग को ही उठाना हैं। एक दिन उस लड़की ने उस लड़के से बोली कि, सर! क्या आप अपने घर झाड़ू पोछा मारने के लिये, मुझे रख लेंगे। हमे अब ननिहाल में घुटन महसूस होता हैं।
लड़का हँसते हुए बोला कि, ठीक हैं। हमको अपने मम्मी पापा से पूछ लेने दीजिये। संयोग देखिये, वह एक जरुरी काम से बाहर चला गया। लड़कीं जब भी बाजार आती। उसी लड़के को, उसकी नजरे ढूढ़ती थी। वह लड़कीं निराश हो गयी।
किसी ने शिकायत भी कर दी। सब्जी लेने के बहाने किसी लड़के से मिलती हैं। अब रोज ननिहाल वाले प्रताड़ित करने लगे थे। लड़कीं उब कर मन में सोच ली। कि आज अगर वह लड़का नही मिला तो आत्महत्या कर लूँगी। अजीब संयोग देखिये। उस दिन वह लड़का तब तक दिखाई दे दिया।
लड़कीं उस लड़के को देख कर अपने आँसुओं को रोक न सकी। और नम आँखों से बोली कि सर! आप कहाँ चले गए थे। लड़कीं के नम आंखों को, देख लड़का बोला कि, आप से एक बात बोलूँ! आप नाराज तो नही होंगी। लड़कीं कही कि सर बोलिये! लड़का बोला कि, क्या आप मुझसे शादी करेंगी। कोई दबाव नही हैं।
यह सुन लड़कीं फफक कर रोने लगी। लड़का हाथ को बढ़ाते हुए गले लगा लिया। वह खुद अपनी आँसुओं को रोक न सका। लड़कीं को ऐसा लग रहा था। कि दुनिया ही मिल गयी। लड़के ने कहा कि, कल अपने हम मम्मी पापा को लेकर आप के ननिहाल आएंगे।
हमें कुछ नही चाहिये। बस लोग आप को ताने न मार सके कि, आप ने भाग कर शादी की। घर सबको जाकर बता देना। फिर भी लड़कीं घर कुछ नही बताई।
अचानक एक बहुत कीमती कार खड़ी होती हैं। उसमे से वह लड़का व उसके मम्मी पापा निकलते हैं। लड़कीं के ननिहाल वाले चौक गए। वह बोले कि आप सब! लड़के की मम्मी पापा बोले कि, आप की भांजी का हाथ माँगने आये हैं। हमने मुहूर्त निकाल कर सब इन्तजाम कर लिया हैं। आप केवल लड़कीं लेकर आ जाना।
हमारे बारे में अगर जानकारी करना चाहते हो तो पता कर लेना। शहर का सबसे बड़ा रहीस हूँ। मुझे कुछ नही चाहिये। हमारे लिये दुल्हन ही दहेज हैं। लड़के के मम्मी पापा अपने सारे खर्च से बड़ी धूमधाम से विवाह की। वह लड़कीं ससुराल पहुँच कर घर में अपने सास ससुर के मरते वक्त तक बहुत सेवा व देखभाल की।
27/05/2025
वो रेलवे स्टेशन पर अकेला बैठा फोन पर बिजी था कि उसके बगल में कोई सुंदर सी औरत आकर बैठ गयी .. औरत के चेहरे पर नजर पङी तो वो अचानक ठिठक सा गया।
ये तो वही लङकी थी जो उसकी जिंदगी थी...
औरत ने जसकी तरफ देखा भी नहीं वो चेहरे पर से पसीना पोछतें हुए अपना टिकट देख रही थी।
अचानक से वो बोल पङा "दिव्या"....
किसी ने नाम लिया तो लङकी ने अपनी बङी बङी आंखें से उस शख्स पर टिका दी और आंखो ही आंखो में पुछा "कौन?...
वो बोला " अरे मैं राहुल हुं पहचाना नही क्या?
हाँ, पहचान लिया मगर ये क्या बाबाओ जैसी दाङी रख रखी है?
वो बोला हाँ बहुत बदल गया हुं, मगर तुम तो जरा भी नहीं बदली। इतने साल बाद देख रहा हुं अकेली यहां क्या कर रही हो?
तुम्हारे पति ,और बच्चे कहां हैं?
वो उदास हो गयी और बोली बच्चे हुए ही नहीं। पति से शादी के 5 साल बाद तलाक हो गया था। अकेली ही रहती हुं। तुम सुनाओ अपनी तुम्हारी बीवी कैसी और बच्चे कितने हैं? कहां रहते हो?
मेरी शादी के बाद तुमने गांव ही छोङ दिया ?
वो बोला....
तुम तो मिली नहीं इसलिये शादी की नहीं, माँ के साथ इसी शहर में रहता हुं...
प्राईवेट जाॅब करता हुं, और मैंने गांव नही छोङा था , तेरे भाईयों ने छोङने पर मजबूर कर दिया था।
ये सब सुनकर लङकी के आंखों में आँसू आ गये ...
उसी समय उसकी ट्रेन भी आ गयी और वो उठकर जाने लगी...
राहुल ने उठकर आगे बङकर उसका हाथ पीछे पकङ लिया और बोला..
ये ट्रेन मिस कर दो ना , अगली ट्रेन से चली जाना ...
वो बिना पीछे मुङे बोली...
थक गयी हुं अकेले चलते चलते हमेंशा के लिये क्यों नहीं रोक लेते ?
फिर दोनो रो कर एक दुसरे से लिपट गये ..
27/05/2025
एक पति ने अपने गुस्सैल पत्नी से तंग आकर उसे कीलों से भरा एक थैला देते हुए कहा ,"तुम्हें जितनी बार क्रोध आए तुम थैले से एक कील निकाल कर बाड़े में ठोंक देना !"
🙂पत्नी को अगले दिन जैसे ही क्रोध आया उसने एक कील बाड़े की दीवार पर ठोंक दी। यह प्रक्रिया वह लगातार करती रही।
☺धीरे धीरे उसकी समझ में आने लगा कि कील ठों
कने की व्यर्थ मेहनत करने से अच्छा तो अपने क्रोध पर नियंत्रण करना है और क्रमशः कील ठोंकने की उसकी संख्या कम होती गई।
😊एक दिन ऐसा भी आया कि पत्नी ने दिन में एक भी कील नहीं ठोंकी।
🤷🏻♂उसने खुशी खुशी यह बात अपने पति को बताई। वे बहुत प्रसन्न हुए और कहा, "जिस दिन तुम्हें लगे कि तुम एक बार भी क्रोधित नहीं हुई, ठोंकी हुई कीलों में से एक कील निकाल लेना।"
👱♀️पत्नी ऐसा ही करने लगी। एक दिन ऐसा भी आया कि बाड़े में एक भी कील नहीं बची। उसने खुशी खुशी यह बात अपने पति को बताई।
पति उस पत्नी को बाड़े में लेकर गए और कीलों के छेद दिखाते हुए पूछा, "क्या तुम ये छेद भर सकती हो?"
😋पत्नी ने कहा,"नहीं जी"
🥲पति ने उसके कन्धे पर हाथ रखते हुए कहा,"अब समझी, क्रोध में तुम्हारे द्वारा कहे गए कठोर शब्द, दूसरे के दिल में ऐसे छेद कर देते हैं, जिनकी भरपाई भविष्य में तुम कभी नहीं कर सकते !"
👉सन्देश : जब भी आपको क्रोध आये तो सोचिएगा कि कहीं आप भी किसी के दिल में कील ठोंकने तो नहीं जा रहे 😀😀
27/05/2025
मैं प्रिया, 19 साल की एक साधारण लड़की हूँ। मेरे लिए ये सब बातें किताबों में पढ़ी थीं या दोस्तों की गपशप में सुनी थीं। पर मेरी शादी के बाद ये सब असलियत बन गया। मेरी शादी अरविंद से हुई—31 साल के एक सफल बिजनेसमैन। उम्र का ये फासला मेरे लिए शुरू में अजीब था।
शादी की पहली रात मेरी धड़कनें तेज़ थीं। मैं जानती थी कि अरविंद मुझसे उम्र में बड़ा है, पर उसने मेरे डर को समझा। उस रात उसने न मुझे छूने की कोशिश की और न ही कोई दबाव डाला। बस मेरे हाथ को थामकर कहा, "तुम्हें जितना समय चाहिए, मैं दूंगा।" उसकी ये बात मेरे दिल को छू गई।
लेकिन शादी केवल पहली रात तक सीमित नहीं होती। असली परीक्षा तो उसके बाद शुरू होती है।
शुरुआती दिक्कतें
अरविंद के साथ तालमेल बैठाना मेरे लिए आसान नहीं था। उसकी जिंदगी पूरी तरह अनुशासित थी—सुबह जल्दी उठना, काम पर जाना, समय पर खाना, फिर वापस काम में डूब जाना। और मैं? मैं तो अभी कॉलेज की लड़की थी जिसे देर तक सोना और दोस्तों के साथ मस्ती करना पसंद था।
कई बार मुझे गुस्सा आता। मैं चिढ़कर कहती, "आपको बस काम से प्यार है। मेरे लिए कभी समय नहीं होता!"
अरविंद मुस्कुराता और प्यार से कहता, "प्यार का मतलब सिर्फ बातें करना नहीं होता, प्रिया।"
अरविंद की समझदारी
अरविंद ने कभी मुझसे झगड़ा नहीं किया। बल्कि उसने धीरे-धीरे हमारी जिंदगी में बदलाव लाना शुरू किया। वह वीकेंड पर मेरे लिए समय निकालने लगा। कभी लॉन्ग ड्राइव पर ले जाता, तो कभी मेरी पसंदीदा पिज्जा पार्टी प्लान करता।
धीरे-धीरे मैंने भी उसकी ज़िम्मेदारियों को समझना शुरू किया। मैंने उसके काम में दिलचस्पी लेनी शुरू की। कभी उसके प्रोजेक्ट्स के बारे में पूछती, तो कभी उसकी टेंशन दूर करने के लिए चाय बना देती।
हमारी जीत
एक दिन अरविंद ने मेरी ओर देखते हुए कहा, "तुमने मुझे बदल दिया, प्रिया। अब मैं काम के साथ जीने का भी मज़ा ले रहा हूँ।"
मैं मुस्कराई और कहा, "और आपने मुझे समझाया कि प्यार सिर्फ रोमांस नहीं, समझदारी भी है।"
आज हमारी जिंदगी में तालमेल है, प्यार है, दोस्ती है। शायद उम्र का फासला पहले बड़ी बात लगती थी, लेकिन अब नहीं। अरविंद की सूझ-बूझ और मेरा विश्वास हमारे रिश्ते की ताकत बन गए हैं।