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Yogesh Yogaasna Yog
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07/05/2022
ताड़ासन योग के फायदे
ताड़ासन मुद्रा के जितने भी फायदे गिनाए जाए कम है। यहाँ इसके कुछ महत्वपूर्ण लाभ के बारे में जिक्र किया जा रहा है।
ताड़ासन वजन कम करने के लिए: अगर इस आसन को सही तरह से अभ्यास किया जाए तो बहुत हद तक पेट की चर्बी को कम करने में मदद मिल सकती है। पेट की चर्बी ही नहीं यह पुरे शरीर के अतरिक्त वसा को कम करने में बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है। इस आसन को सही तरीके से करने से पुरे बॉडी में खिंचाव आता है और आपके शरीर को एक सुडौल दिशा में ले जाता है।
ताड़ासन हाइट बढ़ाने के लिए: यह आसन बच्चों की हाइट बढ़ाने के लिए अतिउत्तम योगाभ्यास है। उचाई बढ़ाने के लिए 6 से 20 साल के बच्चों को यह आसन करवाया जाता है। अगर आप इसको किसी योग विशेषज्ञ के सामने करते है तो परिणाम की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है।
ताड़ासन पीठ की दर्द के लिए: यह आसन पीठ की दर्द के लिए बहुत लाभकारी है। अगर इसका सही तरह से अभ्यास किया जाए तो पीठ की दर्द से हमेशा हमेशा के लिए छुटकारा पाया जा सकता है। इसमें आप ऊपर की ओर अपने आप को खिंचते है और जहाँ पर दर्द है वहां खिंचाव को महसूस करने की कोशिश करते हैं।
ताड़ासन नसों एवं मांसपेशियों की दर्द के लिए : अगर आप नसों की दर्द से परेशान हैं तो आपको पर्वतासन करनी चाहिए। यह नसों की दर्द को ही कम नहीं करता बल्कि मांसपेशियों के साथ नसों को मजबूत और सबल बनाता है। मांसपेशियों की ऐंठन और मरोड़ जैसी समस्याओं को भी दूर करने मेीं मदद करता है।
घुटने की दर्द से राहत: अगर आप घुटने की दर्द से परेशान हैं तो आपको इस आसन का अभ्यास करनी चाहिए। लेकिन ध्यान रहे इसमें आपको अपने तलवे को जमीन पर ही रखनी है और पैर की अंगुलियों पर आकर इस आसन को नहीं करनी है।
चलने की कला सिखाता है: बहुत सारें लोगों को पता नहीं है की चलना कैसे चाहिए। खास कर इस पर विशेष ध्यान डॉ. बी के अयंगर के योगभ्यास में मिलता है। इस आसान की प्रैक्टिस करने से आपको चलने की आर्ट आती है और साथ ही साथ आप बहुत सारी परेशानियों से दूर हो जाते हैं।
ताड़ासन एकाग्रता और संतुलन के लिए: इस योग को ठीक तरह से करने से आपकी एकाग्रता में बढ़ोतरी होती है। नियमित रूप से इसका अभ्यास करने से शरीर में संतुलन का अच्छा खासा प्रभाव देखा जा सकता है।
ताड़ासन पैरों को मजबूती देता है : ताड़ासन योग पैरों की समस्यां जैसे सूजन, दर्द, सुन्न, जलन और झनझनाहट के लिए काफी लाभदायक है है।
ताड़ासन सायटिका के लिए: इस आसन को नियमित रूप से किया जाए तो सायटिका का दर्द बहुत हद तक कम किया जा सकता है।
ताड़ासन दर्द और पीड़ा के लिए: इसके अभ्यास करने से पुरे शरीर का दर्द व पीड़ा को कम किया जा सकता है।
ताड़ासन की सावधानियाँ
ताड़ासन वैसे साधक को नहीं करनी चाहिए जिनके घुटने में बहुत ज्यादा दर्द हो।
यह आसन गर्ववती महिला के लिए वर्जित है।
इसका अभ्यास उस वक्त नहीं करनी चाहिए जब आपको सिर दर्द हो।
अगर आप इस आसन को करना सीख रहें हैं तो पैरों की अंगुलियों पर आकर इस योगाभ्यास को मत करें।
अगर रक्तचाप ज्यादा या कम हो तब भी इस आसन को करने से बचना चाहिए।
09/07/2021
प्रतिदिन सुबह योग करें प्राणायाम करें व ध्यान करें। 🙏🙏🙏
बाह्य प्राणायाम करने की विधि :
1- सबसे पहले किसी समतल और स्वस्छ जमीन पर चटाई बिछाकर उस पर पद्मासन, सुखासन की अवस्था में बैठ जाएं।
2- सबसे पहले मध्यपट को नीचे झुकाये और फेकडो को फुलाने की कोशिश करे।
3- अब तेजी से अपना स्वास छोड़ें ऐसा करते समय अपने पेट पर भी थोडा जोर दे।
4- अब धीरे-धीरे अपनी छाती को ठोड़ी लगाने की कोशिश करे और अपने पेट को हल्के हाथो से दबाकर साँस बाहर निकलने की कोशिश करते रहे।
5- इसी अवस्था में कुछ देर तक रुकें।
6- अब धीरे-धीरे अपने पेट और मध्यपट को छोड़े और उन्हें हल्का महसुस होने दे।
7- अब इसी प्रिक्रिया को कम से कम 5-7 बार दोहरायें।
बाह्य प्राणायाम करने की समय और अविधि:
इसका अभ्यास हर रोज़ करेंगे तो आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे। सुबह के समय और शाम के समय खाली पेट इस प्राणायाम का अभ्यास करना अधिक फलदायी होता हैं। एक सामान्य व्यक्ति को बाह्य प्राणायाम शुरुआत में तीन से पांच बार करना चाहिए। कुछ समय तक निरंतर अभ्यास करते रहने के बाद इसे बढ़ा देना चाहिए।
बाह्य प्राणायाम के लाभ :
1-पेट के सभी रोग से मुक्ति :- इस प्राणायाम का अभ्यास करने से पेट के सभी रोग समाप्त हो जाते हैं। पेट के रोग कई सारे और रोगों का कारण बन सकते हैं। पेट के कुछ आम रोग हैं एसिडिटी, जी मिचलाना और अल्सर इन सभी रोगों से निजत पायी जा सकती है।
2- एकाग्रता को बढाता है :- मन और मष्तिष्क की एकाग्रता को बढ़ाना एक मुश्किल काम है, पर यह नामुमकिन नहीं है. एकाग्रता को बढ़ाने के लिए ढृढ़ता बेहद जरूरी है।
3-सुगर की बीमारी में फायदेमंद :- सुगर के रोगियों के लिए यह प्राणयाम बहुत ही लाभदायक है। डायबिटीज या मधुमेह उस चयापचय बीमारी को कहा जाता है, जहाँ व्यक्ति जिसमे व्यक्ति के खून में शुगर (रक्त शर्करा) की मात्रा जरुरत से ज्यादा हो जाती है।
4- पाचन शक्ति मजबूत होती है :- इसके नियमित अभ्यास से पाचन शक्ति को मजबूत किया जा सकता है। हमारा पाचन तंत्र अपनी तय की गई समय सीमा के अनुसार चलता है। इस समय सीमा के कारण हमें दिन के अलग-अलग पहर में भूख लगती है। खाने के बाद हमारा पचान तंत्र अपना काम करना आरंभ करता है।
5-कब्ज व् एसिडिटी में फायदेमंद :- इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से कब्ज व् एसिडिटी से मुक्ति पायी जा सकती है। कब्ज, पाचन तंत्र की उस स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई व्यक्ति (या जानवर) का मल बहुत कड़ा हो जाता है तथा मलत्याग में कठिनाई होती है। कब्ज अमाशय की स्वाभाविक परिवर्तन की वह अवस्था है, जिसमें मल निष्कासन की मात्रा कम हो जाती है।
6-पौरुष ग्रंथि में फायदेमंद :- इस प्राणायाम के नियमित अभ्यास से पौरुष ग्रंथि की समस्या दूर हो जाती है। मनुष्य के शरीर में पौरुष ग्रंथि या प्रोस्टेट ग्रंथि ही एक मात्र अंग है जिसे पुरुषार्थ का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि पुरुष की परम श्रेष्ठ धातु शुक्र या वीर्य पौरुष ग्रंथि में ही बनती है।
7-हर्निया रोग में लाभ होता है :- हर्निया के रोगियों के लिए यह प्राणायाम अत्यंत लाभदायी होता है। मानव शरीर के कुछ अंग शरीर के अंदर खोखले स्थानों में स्थित है। इन खीखले स्थानों को “देहगुहा” (body cavity) कहते हैं। देहगुहा चमड़े की झिल्ली से ढकी रहती है। इन गुहाओं की झिल्लियाँ कभी-कभी फट जाती हैं और अंग का कुछ भाग बाहर निकल आता है। ऐसी विकृति को हर्निया (Hernia) कहते हैं।
8-मूत्रमार्ग से संबन्धित समस्या में लाभ :- इसके नियमित अभ्यास से मूत्रमार्ग से संबन्धित सारे रोग समाप्त हो जाते हैं। मूत्र पथ का संक्रमण (यूटीआई) एक बैक्टीरिया जनित संक्रमण है जो मूत्रपथ के एक हिस्से को संक्रमित करता है। जब यह मूत्र पथ निचले हिस्से को प्रभावित करता है तो इसे सामान्य मूत्राशयशोध (मूत्राशय का संक्रमण) कहा जाता है।
9-इन सबकी निवृत्ति करता है :- वीर्य की उधर्व गति करके स्वप्न-दोष, शीघ्रपतन आदि धातु-विकारों की निवृत्ति करता है।
10-शरीर में फुर्ती लाता है :- इसको करने से शरीर की थकान दूर होकर शरीर में फुर्ती आती है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार थकान, रुचि और इच्छा कम होने की अवस्था है। शारीरिक थकान का सामान्य अर्थ मन अथवा शरीर की सामथ्र्य के घट जाने से लिया जाता है। ऐसी हालत में आदमी से काम नहीं होता या बहुत कम होता है। थका हुआ व्यक्ति निष्क्रिय पड़ा रहता है।
बाह्य प्राणायाम करने में सावधानी :-
यह प्राणायाम सुबह -सुबह खाली पेट करना चाहिए। हृदय व् उच्च रक्तचाप के रोगी भी बाह्य प्राणायाम का अभ्यास ना करें। गर्भवती महिलाओं को बाह्य प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए। पीरियड के समय में महिलाये इस प्राणायाम को ना करे।
🙏🏻🙏🏻सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत् ॥
अर्थ - "सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े।"
25/05/2021
# #
daily
# # yogeshfalwaria
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16/05/2021
#पद्मासन
🙏🏻🙏🏻सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत् ॥
अर्थ - "सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े।"
16/05/2021
(पद्मासन)
🧘♂️🧘♂️🙏🏻🙏🏻सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत् ॥
अर्थ - "सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े।"
🧘♂️🧘♂️जल..नेति......कैंसर,डायबटीज जैसी गंभीर बीमारिया,गैस,कब्ज,एसिडिटी जैसे अनेको रोग आंतो की मेटाबोलिक प्रक्रिया (स्पंदन प्रक्रिया) सही न होने की वजह से उत्पन्न होते है हमारी आंतो की मेटाबोलिक प्रक्रिया हमारी सांसो की प्रक्रिया पर निर्भर करती है।नासिका व् फेफड़ो में श्लेष्मा जमा होने के कारण हम गहरी साँस नही ले पाते। सांसो को गति प्रदान करने में नेति अत्यंत लाभदायक सिद्ध होती है।कण्ठ से लेकर मस्तिस्क तक की सभी नाड़ियाँ इस क्रिया से शुद्ध हो जाती है। आँख,नाक,कान आदि के सभी दोष नेति क्रिया से दूर हो जाते है।नेत्र ज्योति बढ़ती है।बहरापन ठीक होता है।जमा हुआ कफ बहार निकलता है इससे कपाल की शुद्धि होती है।दांत स्वस्थ होते है।मसूड़े मजबूत रहते है।टाँसिल, साइनस,दिप्थिरिया,खांसी,दमा, कण्ठमाला जैसे रोग नेति से ठीक हो जाते है। सिर का दर्द दूर हो जाता है।मोतियाबिंद भी रुक जाता है।नाक के अंदर जमा धूल के कण, धुँआ,विषैली गैसों के कण उखड कर बहार आ जाते है।नासिका छिद्र स्वच्छ होने से स्वसन क्रिया सुन्दर बनती है । फलस्वरूप रक्त कोषाणुओं की गुणवत्ता तथा रक्त भ्रमण प्रणाली ,पाचन प्रणाली, नाड़ी मंडल, व् अन्य सभी प्रणालियों पर इसका अच्छा प्रभाव पड़ता है।यहाँ जल नेति की वीडियो दिखा रहे है।
योगासन करते हैं, तो फिर आपको खाने पर निंयत्रण करना भी जरूरी होता है। अगर आप अत्यधिक कैलोरी और अत्यधिक वसा युक्त वाला खाद्य पदार्थ या फिर तेज मिर्च-मसाले वाला खाना खाते रहेंगे तो फिर योग का कोई खास असर नहीं होने वाला है।
#जब भी बीमारी से छुटकारा पाने के लिए योगासन करें, तो विशेषज्ञ से पूछकर ही करें। योग का असर तुरंत नहीं होता है। ऐसे में दवाएं भी तुरंत बंद न करें। जब बेहतर लगे, जॉच भी कराते रहें, फिर उसके बाद ही डॉक्टर की सलाह से दवा बंद करें।
🧘♂️योगासन का असर होने में थोड़ा वक्त लगता है। फौरन नतीजों की उम्मीद नहीं करें। कम-से-कम खुद 6 माह का समय दें। फिर देखें- असर हुआ या नहीं।
#योग वस्तुतः जीवनशैली और जीवन जीने का मार्ग है। इसे अपना कर अनेक असाध्य रोगों से मुक्ति संभव है
Yog Divine 🙏🧘♀🙏
#योग हमारे जीवन की #शक्ति, ध्यान करने की क्षमता और #उत्पादकता को बढ़ाता है योग मनुष्य के शरीर, #मन और #भावना को #स्थिर और #नियंत्रित भी करता।
योग जीने की कला है , और योग आसन एक वैज्ञानिक पद्यति यही एक ऐसा व्यायाम है, जो हमारे आंतरिक शरीर पर प्रभाव डालता है, एवं अंदर के अंगों को सक्रिय करता है वा सरीर की रोग प्रधिरोधक शाक्ति को बढ़ता है।
अन्तत: #योग और #प्रकृति ही हमारे #सुरक्षा #कवच हैं। हमनें इसे कमजोर किया है और अब हम ही इसे फिर से मजबूत बनाएंगे।। योग अपनाएंगे
हम अपना एक घंटा अगर योग को देते है तो, योग हमे काम करने के अतिरिक्त चार घंटे देता है।
इसलिए योग को अपने जीवन का हिस्सा झारखंडबनाये ।
स्वस्थ रहे मस्त रहे।
#आसन कब करें?🧘♂️🧘♂️
आसन सुबह के समय करना ही सबसे अच्छा होता है। सुबह आपके पास समय नहीं है, तो शाम या रात को खाना खाने से आधा घंटा पहले भी कर सकते हैं। यह ध्यान रखें कि आपका पेट न भरा हो। भोजन करने के 3-4 घंटे बाद और हल्के स्नैक्स लेने के 1 घंटें बाद योगासन कर सकते हैं। चाय-छाछ आदि पीने के आधे घंटे बाद और पानी पीने के 10-15 मिनट बाद आसन करना बेहतर रहता है।
#सावधानियां ।
योग में विधि, निरंतरता, एकाग्रता और सावधानी जरूरी नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते
कमर दर्द हो तो आगे न झुकें, पीछे झुक सकते है।
अगर हार्निया हो तो पीछे न झुकें।
दिल की बीमारी हो या उच्च रक्तचाप हो तो तेजी के साथ योगासन नहीं करना चाहिए। शरीर कमजोर है, तो फिर आराम से करें।
८ साल से कम उम्र के बच्चे योगासन न करें। ८ साल से ज्यादा उम्र के बच्चे हर तरह के योगासन कर सकते हैं।
गर्भावस्था के दौरान मुश्किल आसन और कपालभाति बिल्कुल भी न करें। महिलाएं मासिक धर्म खत्म होने के बाद, प्रसवोपरांत 3 महीने बाद और सिजेरियन ऑपरेशन के 6 महीने बाद ही योगासन कर सकती हैं।
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