समय के पास इतना समय नहीं कि आपको दोबारा समय दे सके..
Renu Aroygyam
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स्वस्थ जीवन की ओर एक कदम🌿🌹🕉️ | योग,🧘🏾♂️💪🏾 #फिटनेस और हेल्थ टिप्स हर दिन एक नया वीडियो जो आप सभी को स्वस्थ रखने की कामना करती है
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मैं भारत सरकार के #आयुष मंत्रालय द्वारा योग प्रमाणित शिक्षिका हूं
यदि आपको जिंदगी में बहुत ज्यादा सफल होना है तो आपको बहुत ज्यादा ध्यान के साथ मेहनत करने की जरुरत है।
आपका एक दोष आपके सभी गुणों को नष्ट कर सकता है।
मानव शरीर में साढे तीन लाख नाड़ीयां प्रधान है उनमें से 14 नाड़ीयाँ प्रमुख मानी गई हैं
वे यह है-👇🏾
चौदह प्रमुख नाड़ियाँ
शरीर की 14 प्रमुख नाड़ियों में से:
सुषुम्ना
इड़ा
पिंगला
गांधारी
हस्तिजिह्वा
कुहू
सरस्वती
पूषा
शंखिनी
पयस्विनी
वारुणा
अलम्बुषा
विश्वोदरी
यशस्विनी
महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
तीन सबसे प्रमुख नाड़ियाँ
शिव संहिता के अनुसार:
इड़ा (बाईं ओर)
पिंगला (दाईं ओर)
सुषुम्ना (मध्य मार्ग)
इन तीनों में सुषुम्ना नाड़ी सबसे श्रेष्ठ मानी गई है।
सुषुम्ना का महत्व
ग्रंथ में कहा गया है कि:
"योगियों की सबसे प्रिय नाड़ी सुषुम्ना है।"
जब प्राण सुषुम्ना में प्रवाहित होने लगता है, तब ध्यान, धारणा और समाधि की अवस्था प्राप्त करने में सहायता मिलती है।
नाड़ियों का स्थान
ये नाड़ियाँ मेरुदण्ड (रीढ़) के क्षेत्र में स्थित मानी गई हैं।
इड़ा को चन्द्र स्वरूप,
पिंगला को सूर्य स्वरूप,
और सुषुम्ना को अग्नि स्वरूप कहा गया है।
चित्रा नाड़ी वर्णन" में बताया गया है कि:
सुषुम्ना के भीतर चित्रा नाड़ी स्थित है।
यह अत्यन्त सूक्ष्म और शुद्ध मानी जाती है।
इसी मार्ग में ब्रह्मरन्ध्र की ओर जाने वाला सूक्ष्म पथ बताया गया है।
योगशास्त्र के अनुसार इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना तीन प्रमुख नाड़ियाँ हैं। इनमें सुषुम्ना सर्वोच्च मानी जाती है। 🧘🏾♂️🧘🏾♂️🧘🏾♂️🧘🏾♂️🕉️💕🙏🏾
गिलोय के प्रमुख फायदे
रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाने में सहायक
शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा को मजबूत करने में मदद कर सकती है।
बुखार में लाभकारी
आयुर्वेद में गिलोय का उपयोग बार-बार होने वाले बुखार और मौसमी संक्रमणों में किया जाता है।
रक्त शुद्ध करने में सहायक
त्वचा को स्वस्थ रखने और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद कर सकती है।
डायबिटीज में सहायक
जोड़ों के दर्द में लाभकारी
इसके सूजनरोधी (Anti-inflammatory) गुण गठिया और जोड़ों के दर्द में राहत देने में सहायक हो सकते हैं।
लिवर के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी
यकृत (लिवर) के कार्यों को समर्थन देने में मदद कर सकती है।
सेवन कैसे करें?
गिलोय का रस: 10–20 मि.ली.
गिलोय का काढ़ा: 20–30 मि.ली.
गिलोय पाउडर: 3–5 ग्राम (विशेषज्ञ की सलाह अनुसार)
सावधानियाँ
गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
यदि आप डायबिटीज की दवा लेते हैं, तो गिलोय रक्त शर्करा को और कम कर सकती है, इसलिए सावधानी रखें।
किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का लंबे समय तक नियमित सेवन करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।
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