Yoga with Atreye

Call Directions Contact the business

Yoga with Atreye yoga instructor

17/05/2026
25/06/2023

🙏🙏🧘🧎🙏🙏

योग :-
योग का वर्णन वेदों में, फिर उपनिषदों में और फिर गीता में मिलता है, लेकिन पतंजलि और गुरु गोरखनाथ ने योग के बिखरे हुए ज्ञान को व्यवस्थित रूप से लिपिबद्ध किया। योग हिन्दू धर्म के छह दर्शनों में से एक है। ये छह दर्शन हैं- 1.न्याय 2.वैशेषिक 3.मीमांसा 4.सांख्य 5.वेदांत और 6.योग।

योग के मुख्य अंग:- यम, नियम, अंग संचालन, आसन, क्रिया, बंध, मुद्रा, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। इसके अलावा योग के प्रकार, योगाभ्यास की बाधाएं, योग का इतिहास, योग के प्रमुख ग्रंथ।

योग के प्रकार:- 1.राजयोग, 2.हठयोग, 3.लययोग, 4. ज्ञानयोग, 5.कर्मयोग और 6. भक्तियोग। इसके अलावा बहिरंग योग, नाद योग, मंत्र योग, तंत्र योग, कुंडलिनी योग, साधना योग, क्रिया योग, सहज योग, मुद्रायोग, और स्वरयोग आदि योग के अनेक आयामों की चर्चा की जाती है। लेकिन सभी उक्त छह में समाहित हैं।

1.पांच यम:- 1.अहिंसा, 2.सत्य, 3.अस्तेय, 4.ब्रह्मचर्य और 5.अपरिग्रह।

2.पांच नियम:- 1.शौच, 2.संतोष, 3.तप, 4.स्वाध्याय और 5.ईश्वर प्राणिधान।

3.अंग संचालन:- 1.शवासन, 2.मकरासन, 3.दंडासन और 4. नमस्कार मुद्रा में अंग संचालन किया जाता है जिसे सूक्ष्म व्यायाम कहते हैं। इसके अंतर्गत आंखें, कोहनी, घुटने, कमर, अंगुलियां, पंजे, मुंह आदि अंगों की एक्सरसाइज की जाती है।

4.प्रमुख बंध:- 1.महाबंध, 2.मूलबंध, 3.जालन्धरबंध और 4.उड्डियान।

5.प्रमुख आसन:- किसी भी आसन की शुरुआत लेटकर अर्थात शवासन (चित्त लेटकर) और मकरासन (औंधा लेटकर) में और बैठकर अर्थात दंडासन और वज्रासन में, खड़े होकर अर्थात सावधान मुद्रा या नमस्कार मुद्रा से होती है। यहां सभी तरह के आसन के नाम दिए गए हैं।

1.सूर्यनमस्कार, 2.आकर्णधनुष्टंकारासन, 3.उत्कटासन, 4.उत्तान कुक्कुटासन, 5.उत्तानपादासन, 6.उपधानासन, 7.ऊर्ध्वताड़ासन, 8.एकपाद ग्रीवासन, 9.कटि उत्तानासन

10.कन्धरासन, 11.कर्ण पीड़ासन, 12.कुक्कुटासन, 13.कुर्मासन, 14.कोणासन, 15.गरुड़ासन 16.गर्भासन, 17.गोमुखासन, 18.गोरक्षासन, 19.चक्रासन, 20.जानुशिरासन, 21.तोलांगुलासन 22.त्रिकोणासन, 23.दीर्घ नौकासन, 24.द्विचक्रिकासन, 25.द्विपादग्रीवासन, 26.ध्रुवासन 27.नटराजासन, 28.पक्ष्यासन, 29.पर्वतासन, 31.पशुविश्रामासन, 32.पादवृत्तासन 33.पादांगुष्टासन, 33.पादांगुष्ठनासास्पर्शासन, 35.पूर्ण मत्स्येन्द्रासन, 36.पॄष्ठतानासन 37.प्रसृतहस्त वृश्चिकासन, 38.बकासन, 39.बध्दपद्मासन, 40.बालासन, 41.ब्रह्मचर्यासन 42.भूनमनासन, 43.मंडूकासन, 44.मर्कटासन, 45.मार्जारासन, 46.योगनिद्रा, 47.योगमुद्रासन, 48.वातायनासन, 49.वृक्षासन, 50.वृश्चिकासन, 51.शंखासन, 52.शशकासन

53.सिंहासन, 55.सिद्धासन, 56.सुप्त गर्भासन, 57.सेतुबंधासन, 58.स्कंधपादासन, 59.हस्तपादांगुष्ठासन, 60.भद्रासन, 61.शीर्षासन, 62.सूर्य नमस्कार, 63.कटिचक्रासन, 64.पादहस्तासन, 65.अर्धचन्द्रासन, 66.ताड़ासन, 67.पूर्णधनुरासन, 68.अर्धधनुरासन, 69.विपरीत नौकासन, 70.शलभासन, 71.भुजंगासन, 72.मकरासन, 73.पवन मुक्तासन, 74.नौकासन, 75.हलासन, 76.सर्वांगासन, 77.विपरीतकर्णी आसन, 78.शवासन, 79.मयूरासन, 80.ब्रह्म मुद्रा, 81.पश्चिमोत्तनासन, 82.उष्ट्रासन, 83.वक्रासन, 84.अर्ध-मत्स्येन्द्रासन, 85.मत्स्यासन, 86.सुप्त-वज्रासन, 87.वज्रासन, 88.पद्मासन आदि।

6.जानिए प्राणायाम क्या है:-

प्राणायाम के पंचक:- 1.व्यान, 2.समान, 3.अपान, 4.उदान और 5.प्राण।

प्राणायाम के प्रकार:- 1.पूरक, 2.कुम्भक और 3.रेचक। इसे ही हठयोगी अभ्यांतर वृत्ति, स्तम्भ वृत्ति और बाह्य वृत्ति कहते हैं। अर्थात श्वास को लेना, रोकना और छोड़ना। अंतर रोकने को आंतरिक कुम्भक और बाहर रोकने को बाह्म कुम्भक कहते हैं।

प्रमुख प्राणायाम:- 1.नाड़ीशोधन, 2.भ्रस्त्रिका, 3.उज्जाई, 4.भ्रामरी, 5.कपालभाती, 6.केवली, 7.कुंभक, 8.दीर्घ, 9.शीतकारी, 10.शीतली, 11.मूर्छा, 12.सूर्यभेदन, 13.चंद्रभेदन, 14.प्रणव, 15.अग्निसार, 16.उद्गीथ, 17.नासाग्र, 18.प्लावनी, 19.शितायु आदि।

अन्य प्राणायाम:- 1.अनुलोम-विलोम प्राणायाम, 2.अग्नि प्रदीप्त प्राणायाम, 3.अग्नि प्रसारण प्राणायाम, 4.एकांड स्तम्भ प्राणायाम, 5.सीत्कारी प्राणायाम, 6.सर्वद्वारबद्व प्राणायाम, 7.सर्वांग स्तम्भ प्राणायाम, 8.सम्त व्याहृति प्राणायाम, 9.चतुर्मुखी प्राणायाम, 10.प्रच्छर्दन प्राणायाम, 11.चन्द्रभेदन प्राणायाम, 12.यन्त्रगमन प्राणायाम, 13.वामरेचन प्राणायाम,

14.दक्षिण रेचन प्राणायाम, 15.शक्ति प्रयोग प्राणायाम, 16.त्रिबन्धरेचक प्राणायाम, 17.कपाल भाति प्राणायाम, 18.हृदय स्तम्भ प्राणायाम, 19.मध्य रेचन प्राणायाम,

20.त्रिबन्ध कुम्भक प्राणायाम, 21.ऊर्ध्वमुख भस्त्रिका प्राणायाम, 22.मुखपूरक कुम्भक प्राणायाम, 23.वायुवीय कुम्भक प्राणायाम, 24.वक्षस्थल रेचन प्राणायाम, 25.दीर्घ श्वास-प्रश्वास प्राणायाम, 26.प्राह्याभ्न्वर कुम्भक प्राणायाम, 27.षन्मुखी रेचन प्राणायाम 28.कण्ठ वातउदा पूरक प्राणायाम, 29.सुख प्रसारण पूरक कुम्भक प्राणायाम,

30.नाड़ी शोधन प्राणायाम व नाड़ी अवरोध प्राणायाम आदि।

7.योग क्रियाएं जानिएं:-

प्रमुख 13 क्रियाएं:- 1.नेती- सूत्र नेति, घॄत नेति, 2.धौति- वमन धौति, वस्त्र धौति, दण्ड धौति, 3.गजकरणी, 4.बस्ती- जल बस्ति, 5.कुंजर, 6.न्यौली, 7.त्राटक, 8.कपालभाति, 9.धौंकनी, 10.गणेश क्रिया, 11.बाधी, 12.लघु शंख प्रक्षालन और 13.शंख प्रक्षालयन।

8.मुद्राएं कई हैं:-

*6 आसन मुद्राएं:- 1.व्रक्त मुद्रा, 2.अश्विनी मुद्रा, 3.महामुद्रा, 4.योग मुद्रा, 5.विपरीत करणी मुद्रा, 6.शोभवनी मुद्रा।

*पंच राजयोग मुद्राएं- 1.चाचरी, 2.खेचरी, 3.भोचरी, 4.अगोचरी, 5.उन्न्युनी मुद्रा।

*10 हस्त मुद्राएं:- उक्त के अलावा हस्त मुद्राओं में प्रमुख दस मुद्राओं का महत्व है जो निम्न है: -1.ज्ञान मुद्रा, 2.पृथवि मुद्रा, 3.वरुण मुद्रा, 4.वायु मुद्रा, 5.शून्य मुद्रा, 6.सूर्य मुद्रा, 7.प्राण मुद्रा, 8.लिंग मुद्रा, 9.अपान मुद्रा, 10.अपान वायु मुद्रा।

*अन्य मुद्राएं : 1.सुरभी मुद्रा, 2.ब्रह्ममुद्रा, 3.अभयमुद्रा, 4.भूमि मुद्रा, 5.भूमि स्पर्शमुद्रा, 6.धर्मचक्रमुद्रा, 7.वज्रमुद्रा, 8.वितर्कमुद्रा, 8.जनाना मुद्रा, 10.कर्णमुद्रा, 11.शरणागतमुद्रा, 12.ध्यान मुद्रा, 13.सुची मुद्रा, 14.ओम मुद्रा, 15.जनाना और चीन मुद्रा, 16.अंगुलियां मुद्रा 17.महात्रिक मुद्रा, 18.कुबेर मुद्रा, 19.चीन मुद्रा, 20.वरद मुद्रा, 21.मकर मुद्रा, 22.शंख मुद्रा, 23.रुद्र मुद्रा, 24.पुष्पपूत मुद्रा, 25.वज्र मुद्रा, 26श्वांस मुद्रा, 27.हास्य बुद्धा मुद्रा, 28.योग मुद्रा, 29.गणेश मुद्रा 30.डॉयनेमिक मुद्रा, 31.मातंगी मुद्रा, 32.गरुड़ मुद्रा, 33.कुंडलिनी मुद्रा, 34.शिव लिंग मुद्रा, 35.ब्रह्मा मुद्रा, 36.मुकुल मुद्रा, 37.महर्षि मुद्रा, 38.योनी मुद्रा, 39.पुशन मुद्रा, 40.कालेश्वर मुद्रा, 41.गूढ़ मुद्रा, 42.मेरुदंड मुद्रा, 43.हाकिनी मुद्रा, 45.कमल मुद्रा, 46.पाचन मुद्रा, 47.विषहरण मुद्रा या निर्विषिकरण मुद्रा, 48.आकाश मुद्रा, 49.हृदय मुद्रा, 50.जाल मुद्रा आदि।

9.प्रत्याहार: इंद्रियों को विषयों से हटाने का नाम ही प्रत्याहार है। इंद्रियां मनुष्य को बाहरी विषयों में उलझाए रखती है।। प्रत्याहार के अभ्यास से साधक अन्तर्मुखिता की स्थिति प्राप्त करता है। जैसे एक कछुआ अपने अंगों को समेट लेता है उसी प्रकार प्रत्याहरी मनुष्य की स्थिति होती है। यम नियम, आसान, प्राणायाम को साधने से प्रत्याहार की स्थिति घटित होने लगती है।

10.धारणा: चित्त को एक स्थान विशेष पर केंद्रित करना ही धारणा है। प्रत्याहार के सधने से धारणा स्वत: ही घटित होती है। धारणा धारण किया हुआ चित्त कैसी भी धारणा या कल्पना करता है, तो वैसे ही घटित होने लगता है। यदि ऐसे व्यक्ति किसी एक कागज को हाथ में लेकर यह सोचे की यह जल जाए तो ऐसा हो जाता है।

11.ध्यान : जब ध्येय वस्तु का चिंतन करते हुए चित्त तद्रूप हो जाता है तो उसे ध्यान कहते हैं। पूर्ण ध्यान की स्थिति में किसी अन्य वस्तु का ज्ञान अथवा उसकी स्मृति चित्त में प्रविष्ट नहीं होती।

ध्यान के रूढ़ प्रकार:- स्थूल ध्यान, ज्योतिर्ध्यान और सूक्ष्म ध्यान।

ध्यान विधियां:- श्वास ध्यान, साक्षी भाव, नासाग्र ध्यान, विपश्यना ध्यान आदि हजारों ध्यान विधियां हैं।

12.समाधि: यह चित्त की अवस्था है जिसमें चित्त ध्येय वस्तु के चिंतन में पूरी तरह लीन हो जाता है। योग दर्शन समाधि के द्वारा ही मोक्ष प्राप्ति को संभव मानता है।

समाधि की भी दो श्रेणियां हैं : 1.सम्प्रज्ञात और 2.असम्प्रज्ञात। सम्प्रज्ञात समाधि वितर्क, विचार, आनंद और अस्मितानुगत होती है। असम्प्रज्ञात में सात्विक, राजस और तामस सभी वृत्तियों का निरोध हो जाता है। इसे बौद्ध धर्म में संबोधि, जैन धर्म में केवल्य और हिन्दू धर्म में मोक्ष प्राप्त करना कहते हैं। इस सामान्य भाषा में मुक्ति कहते हैं।

पुराणों में मुक्ति के 6 प्रकार बताएं गए है जो इस प्रकार हैं- 1.साष्ट्रि, (ऐश्वर्य), 2.सालोक्य (लोक की प्राप्ति), 3.सारूप (ब्रह्मस्वरूप), 4.सामीप्य, (ब्रह्म के पास), 5.साम्य (ब्रह्म जैसी समानता) 6.लीनता या सायुज्य (ब्रह्म में लीन होकर ब्रह्म हो जाना)।

*योगाभ्यास की बाधाएं: आहार, प्रयास, प्रजल्प, नियमाग्रह, जनसंग और लौल्य। इसी को सामान्य भाषा में आहार अर्थात अतिभोजन, प्रयास अर्थात आसनों के साथ जोर-जबरदस्ती, प्रजल्प अर्थात अभ्यास का दिखावा, नियामाग्रह अर्थात योग करने के कड़े नियम बनाना, जनसंग अर्थात अधिक जनसंपर्क और अंत में लौल्य का मतलब शारीरिक और मानसिक चंचलता।

1.राजयोग:- यम, नियम, आसन, प्राणायम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि यह पतंजलि के राजयोग के आठ अंग हैं। इन्हें अष्टांग योग भी कहा जाता है।

2.हठयोग:- षट्कर्म, आसन, मुद्रा, प्रत्याहार, ध्यान और समाधि- ये हठयोग के सात अंग है, लेकिन हठयोगी का जोर आसन एवं कुंडलिनी जागृति के लिए आसन, बंध, मुद्रा और प्राणायम पर अधिक रहता है। यही क्रिया योग है।

3.लययोग:- यम, नियम, स्थूल क्रिया, सूक्ष्म क्रिया, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। उक्त आठ लययोग के अंग है।

4.ज्ञानयोग :- साक्षीभाव द्वारा विशुद्ध आत्मा का ज्ञान प्राप्त करना ही ज्ञान योग है। यही ध्यानयोग है।

5.कर्मयोग:- कर्म करना ही कर्म योग है। इसका उद्येश्य है कर्मों में कुशलता लाना। यही सहज योग है।

6.भक्तियोग : - भक्त श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन रूप- इन नौ अंगों को नवधा भक्ति कहा जाता है। भक्ति योगानुसार व्यक्ति सालोक्य, सामीप्य, सारूप तथा सायुज्य-मुक्ति को प्राप्त होता है, जिसे क्रमबद्ध मुक्ति कहा जाता है।

*कुंडलिनी योग : कुंडलिनी शक्ति सुषुम्ना नाड़ी में नाभि के निचले हिस्से में सोई हुई अवस्था में रहती है, जो ध्यान के गहराने के साथ ही सभी चक्रों से गुजरती हुई सहस्रार चक्र तक पहुंचती है। ये चक्र 7 होते हैं:- मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा और सहस्रार। 72 हजार नाड़ियों में से प्रमुख रूप से तीन है: इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना। इड़ा और पिंगला नासिका के दोनों छिद्रों से जुड़ी है जबकि सुषुम्ना भ्रकुटी के बीच के स्थान से। स्वरयोग इड़ा और पिंगला के विषय में विस्तृत जानकारी देते हुए स्वरों को परिवर्तित करने, रोग दूर करने, सिद्धि प्राप्त करने और भविष्यवाणी करने जैसी शक्तियाँ प्राप्त करने के विषय में गहन मार्गदर्शन होता है। दोनों नासिका से सांस चलने का अर्थ है कि उस समय सुषुम्ना क्रियाशील है। ध्यान, प्रार्थना, जप, चिंतन और उत्कृष्ट कार्य करने के लिए यही समय सर्वश्रेष्ठ होता है।

योग का संक्षिप्त इतिहास (History of Yoga) : योग का उपदेश सर्वप्रथम हिरण्यगर्भ ब्रह्मा ने सनकादिकों को, पश्चात विवस्वान (सूर्य) को दिया। बाद में यह दो शखाओं में विभक्त हो गया। एक ब्रह्मयोग और दूसरा कर्मयोग। ब्रह्मयोग की परम्परा सनक, सनन्दन, सनातन, कपिल, आसुरि, वोढु और पच्चंशिख नारद-शुकादिकों ने शुरू की थी। यह ब्रह्मयोग लोगों के बीच में ज्ञान, अध्यात्म और सांख्य योग नाम से प्रसिद्ध हुआ।

दूसरी कर्मयोग की परम्परा विवस्वान की है। विवस्वान ने मनु को, मनु ने इक्ष्वाकु को, इक्ष्वाकु ने राजर्षियों एवं प्रजाओं को योग का उपदेश दिया। उक्त सभी बातों का वेद और पुराणों में उल्लेख मिलता है। वेद को संसार की प्रथम पुस्तक माना जाता है जिसका उत्पत्ति काल लगभग 10000 वर्ष पूर्व का माना जाता है। पुरातत्ववेत्ताओं अनुसार योग की उत्पत्ति 5000 ई.पू. में हुई। गुरु-शिष्य परम्परा के द्वारा योग का ज्ञान परम्परागत तौर पर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को मिलता रहा।

भारतीय योग जानकारों के अनुसार योग की उत्पत्ति भारत में लगभग 5000 वर्ष से भी अधिक समय पहले हुई थी। योग की सबसे आश्चर्यजनक खोज 1920 के शुरुआत में हुई। 1920 में पुरातत्व वैज्ञानिकों ने 'सिंधु सरस्वती सभ्यता' को खोजा था जिसमें प्राचीन हिंदू धर्म और योग की परंपरा होने के सबूत मिलते हैं। सिंधु घाटी सभ्यता को 3300-1700 बी.सी.ई. पूराना माना जाता है।

योग ग्रंथ योग सूत्र (Yoga Sutras Books) : वेद, उपनिषद्, भगवद गीता, हठ योग प्रदीपिका, योग दर्शन, शिव संहिता और विभिन्न तंत्र ग्रंथों में योग विद्या का उल्लेख मिलता है। सभी को आधार बनाकर पतंजलि ने योग सूत्र लिखा। योग पर लिखा गया सर्वप्रथम सुव्यव्यवस्थित ग्रंथ है- योगसूत्र। योगसूत्र को पांतजलि ने 200 ई.पूर्व लिखा था। इस ग्रंथ पर अब तक हजारों भाष्य लिखे गए हैं, लेकिन कुछ खास भाष्यों का यहां उल्लेख लिखते हैं।

व्यास भाष्य: व्यास भाष्य का रचना काल 200-400 ईसा पूर्व का माना जाता है। महर्षि पतंजलि का ग्रंथ योग सूत्र योग की सभी विद्याओं का ठीक-ठीक संग्रह माना जाता है। इसी रचना पर व्यासजी के 'व्यास भाष्य' को योग सूत्र पर लिखा प्रथम प्रामाणिक भाष्य माना जाता है। व्यास द्वारा महर्षि पतंजलि के योग सूत्र पर दी गई विस्तृत लेकिन सुव्यवस्थित व्याख्या।

तत्त्ववैशारदी : पतंजलि योगसूत्र के व्यास भाष्य के प्रामाणिक व्याख्याकार के रूप में वाचस्पति मिश्र का 'तत्त्ववैशारदी' प्रमुख ग्रंथ माना जाता है। वाचस्पति मिश्र ने योगसूत्र एवं व्यास भाष्य दोनों पर ही अपनी व्याख्या दी है। तत्त्ववैशारदी का रचना काल 841 ईसा पश्चात माना जाता है।

योगवार्तिक : विज्ञानभिक्षु का समय विद्वानों के द्वारा 16वीं शताब्दी के मध्य में माना जाता है। योगसूत्र पर महत्वपूर्ण व्याख्या विज्ञानभिक्षु की प्राप्त होती है जिसका नाम ‘योगवार्तिक’ है।

भोजवृत्ति : भोज के राज्य का समय 1075-1110 विक्रम संवत माना जाता है। धरेश्वर भोज के नाम से प्रसिद्ध व्यक्ति ने योग सूत्र पर जो 'भोजवृत्ति नामक ग्रंथ लिखा है वह भोजवृत्ति योगविद्वजनों के बीच समादरणीय एवं प्रसिद्ध माना जाता है। कुछ इतिहासकार इसे 16वीं सदी का ग्रंथ मानते हैं

Fat to fit with Yoga with Atreye
02/10/2022

Fat to fit with Yoga with Atreye

28/07/2022

सात मंजिला देह मिली है,
सात चक्रों से सजा मकान,
क्यों विश्वास नहीं करते हो,
वृथा गवाते मन और प्राण,

मूलाधार शक्ति का स्थान
कुंडली मारे लिपटा साप,
ध्यान साधना से फुफकारे
ऊर्जा चढ़ती फिर सिरताने,

छह पंखुड़ियों का दल पंकज,
स्वाधिष्ठान है चक्र महान,
आत्मविश्वास से भर देता ,
जब चक्र करता उत्थान,

पीत वर्ण मणिपुर चक्र है
जागे दे संपदा अपार,
कमल है दस पंखुड़ी वाला,
जो जगाता दृढ़ विश्वास,

हृदय का चक्र मध्य छाती में,
प्रेम भाव बढ़ता जाग,
मन भवरा शांत हो जाता,
प्रकृति से जुड़ जाता भाव,

चक्र विशुद्ध कंठ स्थान,
करे निडर निर्भय ये जान,
आंठो सिद्धि नवनिधिया,
सात सुरों का उदगम स्थान,

में कौन हु का उत्तर देता,
है शिव नेत्र कहे पुराण,
कुंडली सहसार सुस्मना,
त्रिवेणी संगम सा स्थान,

सहस्रार मोक्ष का स्थान है,
पूर्ण साधना परम विश्राम,
परम मिलन शिवशक्ति का,
परम समाधि मुक्तिधाम,

समय रहे जाग जा बंदे,
समय का घोड़ा बिना लगाम,
अंत समय ना पछताएगा,
सात मंजिला सजा मकान...

🕉️ शिवोऽहम् शिवोऽहम् 🙏🙏

नश्वर शरीर लियेमैं कित कित डोल रहाखुद को ईश्वर समझआडम्बर घोल रहाव्यथाओं से विचलित होक्या क्या बोल रहाक्यूं इस मिथ्या संस...
12/02/2022

नश्वर शरीर लिये
मैं कित कित डोल रहा
खुद को ईश्वर समझ
आडम्बर घोल रहा
व्यथाओं से विचलित हो
क्या क्या बोल रहा
क्यूं इस मिथ्या संसार में
इत उत डोल रहा
समझ आयी जब इस मिथ्या की
मैं ध्यान मग्न हुआ
शिव में रम शिव हो
मैं शिव शिव बोल रहा🙏

Happy International Yoga Day. Add yoga in your life. Join Yogatreya - Yoga Journey with Atreya  Online Virtual Yoga Stud...
21/06/2021

Happy International Yoga Day.
Add yoga in your life. Join Yogatreya - Yoga Journey with Atreya Online Virtual Yoga Studio to start your journey to NEW YOU.

Nirantar prayas k aage Ashma b jukhta hai. Phir es naadan sarir ki kya Aukaat😎
20/02/2021

Nirantar prayas k aage Ashma b jukhta hai. Phir es naadan sarir ki kya Aukaat😎

Yoga dhara
30/11/2020

Yoga dhara

Mayurasan  : मयूरासन : Peacock Posture >Summary:Mayurasana is an advanced arm balancing asana that tones and detoxifies ...
29/11/2020

Mayurasan : मयूरासन : Peacock Posture

>Summary:
Mayurasana is an advanced arm balancing asana that tones and detoxifies the body, promotes mental health, and energizes the solar plexus chakra.
To perform this pose, the practitioner sits on the heels with the knees spread wide. The palms are placed firmly on the floor between the thighs with the fingers pointing toward the back of the body. The arms are bent so that the torso rests on the upper arms. The legs stretch and fully straighten behind the torso so that the whole body balances on the arms.
This asana is also called peacock pose in English.
Sanskrit: मयूरासन; Mayur – Peacock, Asana – Pose; Pronounced As – my-yer-ahs-anna
According to the Hindu texts, the peacock symbolizes love and immortality. This asana is said to resemble a peacock when it struts around with its feathers down. The Peacock Pose has a whole lot of benefits, and although it looks complicated, with a little practice, it is quite easy to do.


>Technique:
Step 1. Begin by sitting on your heels. Make sure your knees are wide apart.
Step 2.Place your hands on the floor, and let your fingers point towards your body. Gently bend your elbows and press them towards your abdomen.
Step 3.You must keep your belly firm. To do this, drop your head on the floor, and work up the strength in your stomach.
Step 4.Stretch your legs out, such that your knees are straight, and the upper part of your feet are facing the floor.
Step 5.Your shoulder blades must be firm and pushed into your back. Tighten your buttocks and raise your head. Set your gaze forward.
Step 6.Shift your body weight forward and lift your legs off the floor. Your body must be lifted with the weight on the hands. It should be parallel to the floor.
Step 7.Hold the pose for about 10 seconds initially. With practice, you should be able to hold it for up to one minute.
Step 8.To release, drop your head and feet on the ground. Relax.

>Note:
Point of concentration should be Manipurak Chakra

>Benefits:
These are some amazing benefits of Mayurasana.
1. The Gherand Samhita says that the Peacock Pose cancels toxins. It detoxifies the body and also helps to get rid of tumours and fevers.
2. It helps tone the digestive organs and increases blood circulation in the abdominal area, therefore making it stronger.
3. This asana energizes the pancreas, stomach, liver, spleen, kidneys, and intestines.
4. It also helps fight diabetes and piles.
5. This asana strengthens and tones the reproductive system, therefore reducing all menstrual and menopause dysfunctions. It also improves sexual activity.
6. It helps to make the shoulders, elbows, wrist, and spine stronger.
7. It helps improve posture.
8. This asana calms the mind and reduces stress and anxiety.
9. It improves concentration as well as coordination between the mind and the body.

>Caution/Points to remember:
These are a few points of caution you must keep in mind before you do this asana.
1. It is best to avoid this asana if you have an injury in your wrist, shoulder or elbow.
2. Avoid this asana in case you have the following conditions:
• Heart diseases
• Hernia
• High blood pressure
• Eye, ear, and nose infections
• Problems in the intestine
• Brain tumour
• Menstruation
• Pregnancy
3. This asana is said to detoxify your system and release toxins. If you feel unwell during the pose, release the asana immediately.


>Beginner’s Tip:

As a beginner, you might find it hard to balance yourself in this asana. To get the asana right, use blocks to support your head and ankles till you get a hang of the asana.>Preparatory Poses:
>Preparatory Poses
• Chaturanga Dandasana
• Eka Pada Sirsasana

>Follow-Up Poses
• Adho Mukha Svanasana
• Bālāsana
• Bhujapidasana
• Eka Hasta Bhujasana
• Dwi Hasta Bhujasana
• Visvamitrasana

>Advanced Pose Variations


To intensify the pose, you could try the Pincha Mayurasana or the Feathered Peacock Pose. It is done as a culmination of all the elements to get your forearm balance right.
# I will explain its advance posture i.e. Pincha Mayuasan in my further posts.

>The Science Behind The Mayurasana
When you look at how this asana is done, you might feel that all you need is arm strength. But the real secret behind mastering this pose lies in your belly.
Just like the other arm balancing poses, this asana also needs you to be incredibly strong. But along with strength, you also need patience because only with practice will you be able to develop that relationship with gravity that is required to master this pose. To do that, you need to have a good foundation, which will include working of your forearms, hands, and belly. You will have to consider your arms as your legs and push your elbows into your belly. This might be uncomfortable initially, but this is what you need to finish this pose with perfection. When you do this, you will notice your abdominal muscles strengthen under your abs. This strength will give you stability in the pose.

FOR ANY FURTHER QUERIES FEEL FREE TO CONTACT ME

#योग #पतंजलि


> सारांश:
मयूरासन एक उन्नत भुजा है जो आसन को संतुलित करती है और शरीर को डिटॉक्स करती है, मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है और सौर जालक चक्र को सक्रिय करती है।
इस मुद्रा को करने के लिए, व्यवसायी घुटने के बल एड़ी पर बैठता है। शरीर के पीछे की ओर इशारा करते हुए हथेलियों को जांघों के बीच फर्श पर मजबूती से रखा जाता है। भुजाएँ मुड़ी हुई होती हैं ताकि धड़ ऊपरी भुजाओं पर टिका रहे। पैर खिंचाव और पूरी तरह से धड़ के पीछे सीधा हो जाता है ताकि पूरे शरीर को बाहों पर संतुलित किया जाए।
इस आसन को अंग्रेजी में मोर पोज भी कहा जाता है।
संस्कृत: मयूरासन; मयूर - मयूर, आसन - मुद्रा; उच्चारण के रूप में - my-yer-ahs-anna
हिंदू ग्रंथों के अनुसार, मोर प्यार और अमरता का प्रतीक है। यह आसन एक मोर के सदृश कहा जाता है जब वह अपने पंखों के साथ चारों ओर चक्कर लगाता है। मयूर पोज़ के पूरे लाभ हैं, और यद्यपि यह जटिल है, थोड़ा अभ्यास के साथ, यह करना काफी आसान है।

> तकनीक:
चरण 1. अपनी एड़ी पर बैठकर शुरू करें। सुनिश्चित करें कि आपके घुटने चौड़े हैं।
चरण 2. अपने हाथों को फर्श पर रखें, और अपनी उंगलियों को अपने शरीर की ओर जाने दें। धीरे से अपनी कोहनी मोड़ें और उन्हें अपने पेट की ओर दबाएं।
स्टेप 3. आपको अपना पेट दृढ़ रखना चाहिए। ऐसा करने के लिए, अपने सिर को फर्श पर गिराएं, और अपने पेट में ताकत का काम करें।
चरण 4. अपने पैरों को बाहर लाएं, जैसे कि आपके घुटने सीधे हैं, और आपके पैरों का ऊपरी हिस्सा फर्श का सामना कर रहा है।
चरण 5. आपका कंधे ब्लेड दृढ़ होना चाहिए और आपकी पीठ में धकेल दिया जाना चाहिए। अपने नितंबों को कस लें और अपना सिर ऊपर उठाएं। अपने टकटकी आगे सेट करें।
चरण 6. अपने शरीर के वजन को आगे बढ़ाएं और अपने पैरों को फर्श से उठाएं। आपके शरीर को हाथों पर भार के साथ उठाया जाना चाहिए। यह फर्श के समानांतर होना चाहिए।
स्टेप 7. शुरू में लगभग 10 सेकंड के लिए पोज दें। अभ्यास के साथ, आपको इसे एक मिनट तक रखने में सक्षम होना चाहिए।
चरण 8. जारी करने के लिए, अपने सिर और पैरों को जमीन पर छोड़ दें। आराम करें।

> ध्यान दें:
एकाग्रता का बिंदु मणिपुर चक्र होना चाहिए

> लाभ:
ये मयूरासन के कुछ आश्चर्यजनक लाभ हैं।
1. घेरंड संहिता में कहा गया है कि मयूर पोज कैंसर के विषाक्त पदार्थों को निकालता है। यह शरीर को डिटॉक्स करता है और ट्यूमर और बुखार से छुटकारा पाने में भी मदद करता है।
2. यह पाचन अंगों को टोन करने में मदद करता है और पेट क्षेत्र में रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है, इसलिए यह मजबूत बनाता है।
3. यह आसन अग्न्याशय, पेट, यकृत, प्लीहा, गुर्दे और आंतों को सक्रिय करता है।
4. यह मधुमेह और बवासीर से लड़ने में भी मदद करता है।
5. यह आसन प्रजनन प्रणाली को मजबूत करता है और इसलिए सभी मासिक धर्म और रजोनिवृत्ति की बीमारियों को कम करता है। यह यौन गतिविधियों में भी सुधार करता है।
6. यह कंधों, कोहनी, कलाई और रीढ़ को मजबूत बनाने में मदद करता है।
7. यह आसन को बेहतर बनाने में मदद करता है।
8. यह आसन मन को शांत करता है और तनाव और चिंता को कम करता है।
9. यह मन और शरीर के बीच समन्वय के साथ-साथ एकाग्रता में सुधार करता है।

> याद रखने की सावधानी / अंक:
ये कुछ आसन हैं जिन्हें आपको इस आसन को करने से पहले ध्यान में रखना चाहिए।
1. अगर आपको अपनी कलाई, कंधे या कोहनी में चोट लगी है तो इस आसन से बचना सबसे अच्छा है।
2. इस आसन से बचें अगर आपको निम्नलिखित स्थितियाँ हैं:
• दिल के रोग
• हरनिया
• उच्च रक्त चाप
• आंख, कान और नाक का संक्रमण
• आंत में समस्या
• दिमागी ट्यूमर
• माहवारी
• गर्भावस्था
3. यह आसन आपके सिस्टम को डिटॉक्सीफाई करने और विषाक्त पदार्थों को छोड़ने के लिए कहा जाता है। यदि आप मुद्रा के दौरान अस्वस्थ महसूस करते हैं, तो आसन को तुरंत जारी करें।


> शुरुआत टिप:

एक शुरुआत के रूप में, आपको इस आसन में खुद को संतुलित करना मुश्किल हो सकता है। आसन को सही करने के लिए, अपने सिर और टखनों को सहारा देने के लिए तब तक ब्लॉकों का उपयोग करें जब तक आपको आसन का एक लटकन नहीं मिल जाता।

> तैयारी की खुराक
• चतुरंग दंडासन
• ईका पाडा सिरसासना

> अनुवर्ती खुराक
• अधो मुख संवासन
• बाल आसन
• एका हस् त भुजसाना
• द्वै हस् त भुजसना
• विश्वामित्र आसन

> उन्नत मुद्रा परिवर्तन


मुद्रा को तीव्र करने के लिए, आप पिंचा मयूरासन या पंख वाले मयूर मुद्रा की कोशिश कर सकते हैं। यह सभी तत्वों की एक परिणति के रूप में किया जाता है ताकि आपका प्रकोष्ठ संतुलन सही हो सके।
# मैं इसकी अग्रिम मुद्रा यानि पिंचा मयूआसन को अपने आगे के पोस्टों में समझाऊंगा।

> मयूरासन के पीछे का विज्ञान
जब आप देखते हैं कि यह आसन कैसे किया जाता है, तो आप महसूस कर सकते हैं कि आपको केवल हाथ की ताकत की आवश्यकता है। लेकिन इस मुद्रा में महारत हासिल करने के पीछे का असली रहस्य आपके पेट में है।
दूसरे हाथ संतुलन की तरह, यह आसन भी आप अविश्वसनीय रूप से मजबूत होने की जरूरत है। लेकिन ताकत के साथ-साथ आपको धैर्य की भी आवश्यकता होती है क्योंकि केवल अभ्यास से ही आप गुरुत्वाकर्षण के साथ उस संबंध को विकसित कर पाएंगे जो इस मुद्रा में महारत हासिल करने के लिए आवश्यक है। ऐसा करने के लिए, आपके पास एक अच्छी नींव होनी चाहिए, जिसमें आपके अग्र-भुजाओं, हाथों और पेट का काम करना शामिल होगा। आपको अपनी बाहों को अपने पैरों के रूप में मानना होगा और अपनी कोहनी को अपने पेट में धकेलना होगा। यह शुरुआत में असहज हो सकता है, लेकिन यही है कि आपको इस मुद्रा को पूर्णता के साथ समाप्त करने की आवश्यकता है। जब आप ऐसा करते हैं, तो आप देखेंगे कि पेट के नीचे आपके पेट की मांसपेशियां मजबूत होंगी। यह ताकत आपको मुद्रा में स्थिरता प्रदान करेगी।

किसी भी अन्य प्रश्नों के लिए मुझे संपर्क करने के लिए स्वतंत्र महसूस करें

Address

Delhi
110053

Telephone

+919212808063

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Yoga with Atreye posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Yoga with Atreye:

Shortcuts

Share