Trilok puri production house.

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09/03/2023

तुमसे जो सीखा है ज़िन्दगी,
वो मेरे किसी काम न आया,
जो भी मेरे काम का है,
वो बतला दे,
कहाँ मिलेगा ज़िन्दगी ।
आचार्य अमित

01/01/2023

तुम ही
तो हो
जिसने
हम होना
सिखाया है
गर तुम
तुम ही न रहोगे
तो फिर
हम-हम कहां रहेंगे
आचार्य अमित

30/11/2022

मैं बाहों में
पसरने का आदि नही हुँ
मैं क़दमों में
बिखरने का
हुनर जानता हुँ
जो लोग मेरी
बात नही मानते
मैं उनकी भी बातें
शिद्दत से मानता हुँ
यह अलग बात उनकी
जो सौदागर है
धर्म के जाति के
भाषा के मुबाह्शों के
रंग के भेद के
लिंगानुपात के अनुच्छेद के
सामान्य सी बात को
असमान्य बना देते है
मैं उनकी भी सदाक़त का
हुनर जानता हुं
मतों सहमतों से
जो असहमत है रहते
बातों का शिकवा
जो चुगली से कहते
जो लोन दे रहे है
चन्द काग़ज़ के टुकड़े
और बदलें में ले रहे है
ज़िंदा मांसलता के लोथड़े
जो किसानों के नाम
ज़मीदारों को सुदृढ़ कर रहे है
जिनकी चाटुकारिता से
कर्ज़मंद बेबस लाचार मर रहे है
मैं उनके दिलों की भी
ख़बर जानता हुँ
वो खुदा तो नही है
पर खुदा हो रहे है
वो काटेंगे उसको
जो वो बो रहे है
अदावत का सदक़ा
सबको है मिलता
किसी को पहले
किसी को बाद में
आज किसी नरभक्षी
वहशत के पुजारी ने
एक मासूम कुसुम को
कुचल दिया मसलकर
हम नामर्दों के समाज में
महिला हो रही है कुंठित
यह कुठा जो उनको
सौंपी गई है देकर
विरासत की धरोहर
एक दिन लौटाएगी वो
उन हिजड़ों को
जो बन रहे है मर्द
मैं ऐसे दोगलों की
नस-नस जानता हुँ........
तुम किसी को भी मानो
न भूलों मग़र इंसानियत
घर के बाहर भी अक़्सर
होता है एक घर
वो घर भी किसी मन मन्दिर शिवाला
किसी का है मस्ज़िद वो किसी का गिरजा
कोई सज़दा करता है
उसे बना गुरुद्वारा
कोई भूल बैठा
अपनी माँ का ही चेहरा
मग़र मैं अपनी माँ बहन का
चेहरा जानता हुँ जो बसता है
हर औरत के चेहरे में
हर ममता के मंदिर में
मै ऐसी दुआओं की
बस एक नज़र चाहता हुँ
बस एक नज़र चाहता हुँ.......
आचार्य अमित

13/11/2022

तुम्हें उम्मीद कहूँ
या हौसला कहूँ
नही जानता क्या कहूँ
इतना ही समझ पाया हुँ
तुम्हारे वज़ूद को
जहां चले जाते हो
अंधेरे उजाले हो जाते है
उदासीन चेहरे खिल उठते है
पतझर बसन्त हो जाते है
फ़िज़ाओं में चारों और
एक भीनी सी खुशबू
बिखर जाती है
पग-पग रहगुज़र
मंज़िल को और पास ले आती है
ऐसा लगता है मानों
तेरी मुस्कुराहट में
ज़िन्दगी मुस्कुराती है.....
आचार्य अमित

23/10/2022

Ganpati bappa apke ghardware deepawali par riddhi - siddhi ke sath kamyabi aur khushiyon KO barish karayein....

13/10/2022

Learn from yesterday,
live for today,
hope for tomorrow.
The important thing
is not to stop questioning.
- Albert Einstein

12/10/2022

मेरे इंतज़ार का सिला हो तुम
रब की दुआ से मिले हो तुम ।
आचार्य अमित

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