06/11/2013
ASTU Happy Life Foundation
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ASTU HAPPY LIFE FOUNDATION is a non-profit organization, which strives to promote the universal values of peace, brotherhood and equality with the help of meditation, Motivation, workshop, yoga, reiki, & counseling .
06/11/2013
02/11/2013
दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें
धन वैभव दें लक्ष्मी और सरस्वती दें ज्ञान ।
गणपति जी संकट हरें, मिले नेह सम्मान ।।
ईश्वर से प्रार्थना है कि वो आपको और आपके परिवार को
इस दीपावली शान्ति, शक्ति, संपत्ति, स्वरुप, संयम,
सादगी, सफलता, समृद्दि, संस्कार, स्वास्थ्य, सम्मान,
सरस्वती और स्नेह प्रदान करे ।
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01/11/2013
मनुष्य शक्ति या धन से सामर्थ्यवान नहीं हो सकता। विद्या ही उसे हर काम के लिए समर्थ बनाती है। संसार में ज्ञान के समान और कोई बल नहीं है।
Sometimes the right thing is to say something. Sometimes the right thing is to not say something. Knowing which is appropriate at the moment is a key to success.
All things in life are temporary. If they are going well, enjoy them, they will not last forever.
If they are going wrong, don't worry, they can't last long..
एक बार एक गाँव की सीमा पर एक घोड़े पर सवार यात्री पहुंचा. वहां खेत में काम कर रहे किसान को देखकर उसने पूछा, ‘भाई, यह गाँव कैसा है ? मुझे बहुत दूर तक जाना है इसलिए कुछ दिनों के लिए मैं यहाँ रुकना चाहता हूँ. ‘ किसान ने यात्री से पूछा, ‘ आप यहाँ से पहले जहाँ से आये हैं वह जगह कैसी थी ? ‘
यात्री ने उत्तर दिया, ‘ इससे पहले मैं एक गाँव में ही था. वहां के लोग बड़े ही झगड़ालू थे. बात-बात में लड़ना उनकी आदत थी. इसलिए मैं वहां ज्यादा समय के लिए नहीं रुक सका. ‘
किसान ने कहा , ‘मेरी सलाह है आपको कि आप यहाँ भी ना रुके क्योंकि यहाँ के लोग तो और भी ज्यादा बुरे हैं. ‘ यात्री यह सुनकर तुरंत वहां से चला गया. उसके जाने के कुछ समय पश्चात एक और यात्री वहां आया. उसने भी किसान से यही पूछा , ‘यह गाँव कैसा है ? क्या मैं यहाँ रुक सकता हूँ ? ‘ किसान ने उससे भी यही पूछा कि आप जिस जगह से आये हैं वह जगह कैसी थी ? यात्री ने कहा , ‘वह गाँव और वहां के लोग बहुत अच्छे थे. अगर मुझे आगे ना जाना होता तो मैं वहीं रुक जाता. मुझे दूर तक जाना है इसलिए बीच में रुकना चाहता हूँ. ‘ किसान तुरंत बोला, ‘ मित्र आपका इस गाँव में स्वागत है. यहाँ के लोग और भी ज्यादा अच्छे हैं. आप यहाँ रुक सकते हैं. ‘
पास ही के खेत में एक और किसान काम कर रहा था. उसने पहले किसान से पूछा, ‘भाई, तुमने पहले यात्री को तो गाँव के लोगों का बर्ताव बुरा बताया और दुसरे को अच्छा. ऐसा क्यों ? पहले किसान ने उत्तर दिया, ‘ भाई, पहला यात्री नफरत लेकर आया था इसलिए वह जहाँ भी जाएगा नफरत ही फैलाएगा. दूसरा अपने साथ प्रेम लेकर आया था इसलिए जहाँ भी जाएगा और रहेगा हमेशा प्रेम ही देगा. अगर पहला यात्री यहाँ रुकता तो उसका हमारे गाँव पर बुरा प्रभाव पड़ता इसलिए मैं नहीं चाहता था कि वह यहाँ रुके.
दूसरा किसान पहले की बात से सहमत हो अपने काम में लग गया.
एक बार की बात है की एक आदमी जो पेशे से दुकानदार था बड़ा दुखी रहता था क्यूंकी उसका बेटा बहुत आलसी और गेरजिम्मेदार था वह हमेशा दोस्तों के साथ मस्ती करता रहता था | जबकि वह अपने पुत्र को एक मेहनती इंसान बनाना चाहता था | वह काफ़ी बार अपने पुत्र को डाँटता था लेकिन पुत्र उसकी बात पे ध्यान नहीं देता था | एक दिन उसने अपने पुत्र से कहा कि आज तुम घर से बाहर जाओ और शाम तक कुछ अपनी मेहनत से कमा के लाओ नहीं तो आज शाम को खाना नहीं मिलेगा |
लड़का पहुत परेशान हो गया वह रोते हुए अपनी माँ के पास गया और उन्हें रोते हुए सारी बात बताई माँ का दिल पासीज गया और उसने उसे एक सोने का सिक्का दिया कि जाओ और शाम को पिताजी को दिखा देना | लड़के ने वैसे ही किया शाम को जब पिता ने पूछा की क्या कमा कर लाए हो तो उसने वो सोने का सिक्का दिखा दिया| पिता यह देखकर सारी बात समझ गया | उसने पुत्र से वो सिक्का कुएँ मे डालने को कहा, लड़के ने खुशी खुशी सिक्का कुएँ में फेंक दिया | अगले दिन पिता ने माँ को अपने मायके भेज दिया और लड़के को फिर से कमा के लाने को कहा | अबकी बार लड़का रोते हुए बड़ी बहन के पास गया तो बहन ने दस रुपये दे दिए | लड़के ने फिर शाम को पैसे लाकर पिता को दिखा दिए| पिता ने कहा कि जाकर कुएँ में डाल दो लड़के ने फिर डाल दिए |
अब पिता ने बहन को भी उसके ससुराल भेज दिया| अब फिर लड़के से कमा के लाने को कहा| अब तो लड़के के पास कोई चारा नहीं था वह रोता हुआ बाजार गया और वहाँ उसे एक सेठ ने कुछ लकड़ियाँ अपने घर ढोने के लिए कहा और कहा कि बदले में दो रुपये देगा | लड़के ने लकड़ियाँ उठाईं और सेठ के साथ चल पड़ा रास्ते में चलते चलते उसके पैरों में छाले पड़ गये और हाथ पैर भी दर्द करने लगे | शाम को जब पिताजी को दो रुपये दिखाए तो पिता ने फिर कहा की बेटा कुएँ मे डाल दो तो लड़का गुस्सा होते हुए बोला कि मैने इतनी मेहनत से पैसे कमाए हैं और आप कुएँ में डालने को बोल रहे हैं | पिता ने मुस्कुराते हुए कहा कि यही तो मैं तुम्हें सीखाना चाहता था तुमने सोने का सिक्का तो कुएँ में फेंक दिया लेकिन दो रुपये फेंकने में डर रहे हो क्यूंकी ये तुमने मेहनत से कमाएँ हैं |
अबकी बार पिता ने दुकान की चाबी निकल कर बेटे के हाथ में देदी और बोले की आज वास्तव में तुम इसके लायक हुए हो| क्यूंकी आज तुम्हें मेहनत का अहसास हो गया है
एक बार एक संत जंगल में ध्यानमग्न बैठे थे, वह आस पास की गतिविधियों से बिल्कुल बेख़बर होकर भगवान की तपस्या कर रहे थे | तभी वहाँ से एक अमीर आदमी गुज़रा और वो संत को देखकर बहुत प्रभावित हुआ |
जब संत ने आँखे खोली तो वह उनके आगे हाथ जोड़कर खड़ा हो गया और अपने थेले से 1000 सोने के सिक्के निकाल कर बोला कि महाराज मेरी तरफ से ये सिक्के स्वीकार करें मुझे उम्मीद है कि आप इनका उपयोग अच्छे कामों में ही करेंगे| संत उसे देखकर मुस्कुराए और बोले कि क्या तुम अमीर आदमी हो? वह बोला हाँ | संत ने कहा कि क्या तुम्हारे पास और धन है, वह बोला हाँ घर पे मेरे पास और बहुत सारा धन है मैं बहुत अमीर हूँ |
संत बोले की क्या तुम और ज़्यादा अमीर बनाना चाहते हो वह बोला हाँ मैं रोज भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि मुझे और धन दें मैं और अमीर हो जायूँ |
यह सुनकर संत ने उसे सिक्के वापस देते हुए कहा कि यह अपना धन वापस लो मैं भिखारी से कभी कुछ नहीं लेता| वह आदमी अपना अपमान सुनकर गुस्सा हो गया कि आप ये क्या बोल रहे हैं | संत बोले की मैं तो भगवान का भक्त हूँ मेरे पास सबकुछ है मुझे किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं लेकिन तुम तो रोज भगवान से धन माँगते हो तो अमीर तो मैं हू तुम तो भिखारी हो |
तो मित्रों, अमीर की दौलत उसका चरित्र होता है नाकी धन |
एक बार एक बिज़नेसमैन जो कल तक एक सफल उद्धोगपति था अचानक किसी परेशानी से उसका बिज़नेस डूब गया और उस पर बैंक का कर्ज़ा भी हो गया और अब उसके पास कोई चारा नहीं बचा था| बैंक और सारे लेनदार उसे लगातार पैसे की भरपाई के लिए बोल रहे थे| अब तो उसे अपनी जिंदगी अंधेरे में नज़र आ रही थी| एक बार सुबह पार्क में घूमते हुए उसे एक बूढ़ा व्यक्ति दिखाई दिया| वो बूढ़ा उसके पास आया और उसे परेशान देखकर उससे परेशानी का कारण पूछा |
बिज़नेसमैन ने सारी परेशानी व्रद्ध को बताई, बूढ़े व्यक्ति ने अपनी जेब से अपनी चेकबुक निकाली और एक चेक साइन कर के उसको दिया और कहा कि इससे तुम अपना बिज़नेस फिर से शुरू कर सकते हो और एक साल बाद मुझे ठीक इसी जगह इसी समय मिलना और मुझे मेरे पैसे वापस कर देना | यह कहते हुए बूढ़ा वहाँ से दूर चला गया| बिज़नेसमैन ने जब अपने हाथ में रखे चेक पर नज़र डाली तो वह हैरान रह गया क्यूंकी वो बूढ़ा कोई मामूली व्यक्ति नहीं था उस चेक पर सर वारेन बफ़ेट(एक मशहूर अमेरिकन उद्धयोगपति) के साइन थे और चेक की रकम थी $500,000| उसको खुद पर यकीन नहीं हुआ कि खुद वारेन बफ़ेट ने आकर मेरी परेशानी हल की है | फिर उसने सोचा की ये रकम बैंक और लेनदारों को देने की बजाए वो पहले अपने बिज़नेस को बचाने के लिए संघर्ष करेगा और इमरजेंसी में ही उस चेक का प्रयोग करेगा |
अब तो बिना किसी डर के वह फिर से अपना बिज़नेस बचाने में जुट गया क्यूंकी उसे पता था कि अगर कोई परेशानी होगी तो मैं चेक की मदद से बच सकता हूँ | बस फिर क्या था उसने जी तोड़ मेहनत की और एक बार फिर से अपने बिज़नेस को वापस खड़ा कर दिया | आज उस बात को एक साल पूरा हो चुका था और वह चेक भी आज तक ऐसे ही सही सलामत था |
अपना वादा पूरा करने के लिए बिज़नेसमैन जब पार्क में गया तो उसे वहाँ वही बूढ़ा व्यक्ति दिखाई दिया| जैसे ही वह उसके पास आया अचानक एक नर्स पीछे से आई और व्रद्ध को पकड़ के ले गयी और कहा कि वह एक पागलख़ाने से भागा हुआ पागल है जो खुद को हमेशा वारेन बफ़ेट बताता है, यह कहकर नर्स व्रद्ध को ले गयी|
अब वह आदमी एक दम आश्चर्य में था क्यूकी वह बूढ़ा ना तो बफ़ेट था और ना ही वह चेक असली था, जिस पर उसे इतना विश्वास था | उसकी आँखों में आँसू छलक आए क्यूकी उसने आज एक नकली रकम की वजह से जागे अपने आत्मविश्वास से आज सफलता प्राप्त कर ली थी जबकि वह पैसा कुछ था ही नहीं |
तो मित्रों, दुनियाँ मे कुछ भी असंभव नहीं है बस अपना आत्मविश्वश जगाने की ज़रूरत है और एक बार जब आप आत्मविश्वास से भरपूर हो जाएँगे तो दुनियाँ की कोई बंदिश आपको नहीं रोक सकती |
एक बार चार मित्र अपने कॉलेज के समय के प्रोफेसर से मिलने पहुँचे, प्रोफ़ेसर अब बूढ़े हो चुके थे| चारों छात्रों को देखकर प्रोफ़ेसर बड़े खुश हुए | कुछ देर बातें करने के बाद प्रोफ़ेसर उनके लिए चाय बनाने के लिए अंदर गये | वे चारों अपनी अपनी परेशानियाँ एक दूसरे को बता रहे थे कोई बोल रहा था मेरी सैलरी बहुत कम है, कोई बोल रहा था कि मेरे पास गाड़ी नहीं है कोई कहता मुझ पर बहुत कर्ज़ा है उनकी बातें सुन कर लग रहा था कि कोई भी अपने जीवन से खुश नहीं है| सारे के सारे अपनी अपनी किस्मत को दोष दे रहे थे |
प्रोफेसर उनकी ये बातें सुन रहे थे, उन्होनें चार सुंदर कप लिए जिनमें से एक सोने का बना था और दूसरा चाँदी का इसी तरह तीसरा काँच का बहुत सुंदर कप था लेकिन चौथ कप बिल्कुल सदा था | प्रोफ़ेसर ने चारों की आगे चाय रखी तो सभी ने एक एक कप उठा लिया प्रोफ़ेसर ने देखा कि सोने वाला कप सबसे पहले उठा लिया गया उसके बाद एक ने चाँदी का उठाया तीसरे ने काँच का और चौथे वाले पे सदा वाला कप बचा|
प्रोफ़ेसर ये देख कर मुस्कुरा उठे, चारों मित्र उनसे उनकी मुस्कुराहट का कारण पूछने लगे तो प्रोफ़ेसर ने बताया कि मैं तुम लोगों की बातें सुन रहा था इसीलिए मैनें जानबूझकर सारे कप अलग अलग लिए थे| वे चारों कुछ समझे नहीं तो उन्होनें विस्तार से समझाया कि ये चाय जीवन की तरह है और ये कप चाय पीने का ज़रिया मात्र है | सबको पीनी तो चाय ही है लेकिन फिर भी सबसे पहले सोने का कप उठाया गया फिर चाँदी का जबकि मिट्टी के कप में भी वही चाय है जो सोन के कप में | उसी तरह जीवन भी एक चाय है जो सबके लिए समान है लेकिन लोग कप रूपी संसारिक चीज़ों जैसे अच्छी जॉब अच्छी सॅलरी, गाड़ी, बंगला आदि के पीछे भागते हुए सारा जीवन दुख में निकल देते हैं और जीवन रूपी चाय का आनंद नहीं ले पाते |
तो मित्रों, क्या फ़र्क पड़ता है कि कप मिट्टी का हो या सोने का पीनी तो हमें आख़िर चाय ही है तो उसी तरह संसारिक चीज़ों के मोह में क्यूँ अपना जीवन बर्बाद करते हो| जीवन का आनंद लो यही इस कहानी की शिक्षा है ….
Life is hard and the choices we have to make in life are even harder, that's why we all need someone in our lives to help us thru the hard times
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