04/08/2026
राजनीति में पक्ष बदलना आसान है, लेकिन सिद्धांत बदलना नहीं।
जब अलग-अलग राज्यों में छात्र अपनी आवाज़ उठा रहे हैं, तब सबसे बड़ा सवाल यह नहीं कि कौन सत्ता में है, बल्कि यह है कि क्या हर नागरिक और हर छात्र के अधिकारों के लिए एक जैसा रवैया अपनाया जा रहा है?
अगर हमारे विचार केवल इस आधार पर बदलते हैं कि सत्ता में कौन है, तो हमें खुद से सवाल पूछना चाहिए।
लोकतंत्र की असली ताकत किसी पार्टी में नहीं, बल्कि जनता की जागरूकता और समान दृष्टिकोण में होती है।
💬 आपकी राय क्या है?
क्या देश में मुद्दों पर एक समान दृष्टिकोण होना चाहिए, या सत्ता बदलने के साथ समर्थन भी बदलना स्वाभाविक है?
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