Vikash umpire
I am Vikash Maury, a cricket umpire with the Delhi District Cricket Association (DDCA).
Since 2018, I have officiated local leagues, district matches, and tournaments, committed to fair, accurate, and professional decision-making.
ढूंढ कर बताओ
भाजपा के आने के बाद मीडिया ने महंगाई बेरोजगारी का मुद्दा कब उठाया...??🤔😏
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जैसे ही ज्ञान होगा की वैदिक धर्म की कहानी करोडो साल नहीं बल्कि 900 साल पुरानी है और सभी ग्रन्थ मुगलो के राज मे और अंग्रेजो के समय मे लिखें गए है,,, सारी की सारी नकल जनता समझ जाएगी की किसे छुपाया गया है,, किसकी नकल की गयी,, जिसकी नकल किया, उसे ही नष्ट कर दिया,,
ढोंगी से सत्य शोधक बनने के लिए बड़ी हिम्मत लगती है,,
06/06/2026
“अफसरों की वफादारी संविधान की जगह सत्ताधारियों के प्रति है और वे कानून के राज को परेशानी समझते हैं” : इलाहाबाद हाईकोर्ट
गाजियाबाद में एक सिविल-कमर्शियल धोखाधड़ी मामले में पुलिस ने फरवरी 2023 में गैंगस्टर एक्ट लगा दिया था, जिसमें 35 वर्षीय गृहिणी ललिता त्यागी को बिना किसी सबूत के गिरफ्तार कर लगभग 80 दिनों तक जेल में रखा गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूरी कार्यवाही रद्द कर दी और गाजियाबाद के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को कड़ी चेतावनी दी।
इसी मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की-
जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने कहा कि उत्तर प्रदेश ऐतिहासिक रूप से राजनेताओं और नौकरशाहों की "सामंती मानसिकता" से चलता रहा है। इससे लंबे समय से संवैधानिक शासन को जनसेवा के बजाय व्यक्तिगत प्रभुत्व का साधन बना दिया गया है।
बेंच ने कहा कि अधिकारी वर्ग का एक बड़ा हिस्सा कानून के शासन को संवैधानिक दायित्व के बजाय "कामकाज में रुकावट" मानता है।
जस्टिस दिवाकर ने यह भी कहा कि अधिकारियों की "ऊपर की ओर वफादारी संविधान के प्रति नहीं, बल्कि सत्ताधारी सरकार के प्रति होती है"। उन्होंने कहा कि फील्ड अधिकारी, जो तबादला-पोस्टिंग के खेल से अच्छी तरह वाकिफ होते हैं, अपना व्यवहार "राजनीतिक आकाओं को खुश करने" के हिसाब से तय करते हैं।
बेंच ने कहा,“संवैधानिक कामकाज को किसी व्यक्ति की अपनी जरूरतों या सुविधा का बंधक नहीं बनाया जा सकता। सरकारी तंत्र को कानून और संविधान के प्रति जवाबदेह होना चाहिए, न कि किसी सत्ताधारी व्यवस्था के प्रति।”
06/06/2026
लाखों छात्र सालों तक पढ़ाई करते हैं, प्रतियोगी परीक्षाओं में संघर्ष करते हैं, फिर भी नौकरी की कोई गारंटी नहीं होती।
दूसरी तरफ़, फर्जी डिग्री और संदिग्ध दस्तावेज़ों के सहारे लोग सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था तक पहुँच जाते हैं और सालों तक किसी को भनक तक नहीं लगती।
14 फर्जी डॉक्टरों का पकड़ा जाना खबर है, लेकिन उससे बड़ी खबर यह है कि वे इतने सालों तक सिस्टम का हिस्सा बने रहे।
अगर एक अख़बार की पड़ताल में ये गड़बड़ियाँ सामने आ सकती हैं, तो जिन संस्थाओं पर सत्यापन और निगरानी की जिम्मेदारी थी, उनकी नज़र आखिर कहाँ थी?
14 फर्जी डॉक्टर पकड़े गए, लेकिन इतने सालों तक उन्हें सरकारी सिस्टम में बने रहने किसने दिया?
#सहारनपुर 10 साल की बेटी से दुष्कर्म करने वाले ब्राह्मण को बचाने के लिए हनुमान चालीसा पढ़ा जाने वाला हमारा बेशर्म राष्ट्र भारत है।।
जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन से अब तक न ANI की कोई ख़बर, न IANS की कोई रिपोर्ट।
दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी मल्टीमीडिया न्यूज़ एजेंसी और "अडानी की न्यूज़ एजेंसी"—दोनों की ख़ामोशी काफ़ी कुछ कह रही है।
लगता है अभी ऊपर से निर्देश नहीं आए हैं। मास्टर के इशारे का इंतज़ार जारी है।
हमारे देश में इतनी मज़बूत सरकार चल रही है कि-हर चुनाव से पहले आतंकवादी हमला हो जाता है, हर परीक्षा से पहले पेपर लीक हो जाता है,
हर इमरजेंसी में PM विदेश निकल जाते हैं, और जनता सड़क पर निकल जाती है।
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