*मेरी बात सुनो, समझो और करो !!!*
अरसे से उनको सुनने की हसरत थी। क्या कह रहे थे वह? यही न कि मेरी बात सुनो, समझो और करो। आखिर उनसे आगे सोचा ही नहीं गया है।
शायद ऐसे ही किसी लम्हे में जर्मन दार्शनिक शोपेनहावर ने महसूस किया होगा, ‘ज्यादातर लोग जहां तक देख पाते हैं, उसे ही दुनिया समझ लेते हैं। कुछ लोग उसे नहीं मानते। हमें उनके साथ होना चाहिए।’ 19 वीं सदी के महान दार्शनिक हैं वह। भारतीय दर्शन से बहुत प्रभावित रहे हैं।
हमारी सोच ही दुनिया को छोटा या बड़ा बनाती है। ऐसा भी होता है कि हम अपने को बड़ा समझते हैं और दुनिया छोटी हो जाती है। कभी हम अपने को छोटा समझते हैं और दुनिया बड़ी हो जाती है। जिंदगी जीने के लिए बड़प्पन जरूरी होता है। और बिना सोच के बड़प्पन नहीं आता।
हम बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। और लगातार छोटे होते चले जाते हैं। हम छोटी-छोटी चीजें करते हैं और बडे़े होते चले जाते हैं। हम एक तरह से सोचते हैं। और सोचते-सोचते उसी को सब कुछ मान लेते हैं। हम खुद को इतना बड़ा कर लेते हैं कि अपने आगे हर चीज छोटी नजर आती है। वही धीरे-धीरे हमारी दुनिया होने लगती है। हम उसके आगे न देखना चाहते हैं, और न सुनना चाहते हैं। लेकिन हमारे देखने और सुनने से ही तो वह पूरी दुनिया नहीं हो जाती। वह तो जो है, सो है। हम खुद ही खुशफहमी या गलतफहमी में रहना चाहें, तो रह सकते हैं। यह तो एक जोखिम है, जो खुद को ही खत्म करता है।
*Happy Ashtmi*
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Marital Care-Pre Marriage Education
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17/10/2020
02/10/2020
बालमन के पास जाएं
कक्षा में टीचर ने बताया, ‘मैंने किसी को फेल नहीं किया है।’ यह सुनते ही सभी बच्चे चहक उठे। शिक्षक ने आगे कहा, ‘और मैंने किसी को पास भी नहीं किया है।’ अब सभी विद्यार्थी हक्के-बक्के थे। टीचर ने उन्हें समझाया कि मैंने न किसी को पास किया है, और न फेल। जो कुछ किया है, तुम सबने खुद किया है। कोई किसी को न पास करता है, और न फेल, हमारी मेहनत यह तय करती है। यह भावना हममें बुढ़ापे तक बरकरार रहनी चाहिए, ताकि जिंदगी में सुकून बना रहे।
जर्मन दार्शनिक फ्रेडरिक नीत्शे के शब्दों में, ‘हरेक इंसान में एक बच्चा छिपा रहता है, जो मदमस्त रहना चाहता है। लेकिन हमारी बुद्धि, हमारा तजुर्बा और विवेक इस बच्चे को दबाए रखते हैं।’ जैसे-जैसे हम जवान होते जाते हैं, संस्कार-सलाहों को तवज्जो देने लगते हैं और अपने भीतर के बच्चे को नजरअंदाज करते जाते हैं। दिल का बच्चा कहीं गुम हो जाता है।
दिल से बच्चा बने रहने के लिए किसी भी नियंत्रण से बाहर निकलना होगा, किसी टीका-टिप्पणी की परवाह किए बगैर। इसके लिए ऐसे लोगों के साथ रहना होगा, जो जैसे हैं, वैसे ही रहने को प्रोत्साहित करते रहें। अमेरिकी लेखिका जोन चित्तिस्तर समझाती हैं, ‘अपने भीतर के बच्चे को पालने-पोसने का केवल एक ही तरीका है। आप खुद उसके अभिभावक और मित्र बनें।’
नोबेल विजेता साहित्यकार जॉर्ज बर्नार्ड शॉ कहते थे कि हम खेलना-कूदना इसलिए बंद कर देते हैं, क्योंकि बूढे़ हो जाते हैं, दरअसल हम बूढे़ ही इसलिए होते हैं, क्योंकि खेलना-कूदना बंद कर देते हैं। इसीलिए जब-जब जिंदगी तनाव और चिंता से घिरने लगे, तब-तब अपने बालमन के पास लौटने में भलाई है।
Ref-hindustan
लग्न कराने वाला पंडित संस्कृतनिष्ठ हिंदी बहुत अच्छी बोलता है और तलाक कराने वाला वकील अंग्रेजी बहुत अच्छी बोलता है।
धोखा न जाने किस भाषा में हो जाये ।
13/09/2020
People Grow conducted Workshop for Jyoti Nivas College Bangalore (NSS Students) on "12 Rules to become best version of yourself" on 12th September 2020 by Ms. Radhika Pundir- Corporate Soft Skill Trainer
Great Support and feedback received from college's Teachers and Students.
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12/09/2020
People Grow conducted a workshop on "12 Rules to become best version of yourself" by Ms. Radhika Pundir-Corporate Soft Skills Trainer for PNGI on 11th September 2020.
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