आकाश जैन Akash Jain

आकाश जैन Akash Jain

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LIFE & BUSINESS: Research | Consultant | Advisor | Teacher | Coach | MENTAL HEALTH EXPERT. Diploma In Export Import, (BILAMS), Kolkata.

A THINKER

Born in Kolkata

School - Frank Anthony Public School & B.D.M.International, Kolkata

College - (B.A.Hons) - Political Scince, Economics, Journalism; from Calcutta University. Co-founder of a Boutique Advertising Agency:

Senior Consultant:

Brand | Advertising | Marketing | Business Managament|

Services: Resea

27/04/2026

शीर्षक: जैन समाज जनगणना के प्रथम-दूसरे चरण को लेकर इतना क्यों confused है लिंक: https://youtu.be/PP9sB0FMkt0

LIFE & BUSINESS: Teacher | Coach | Mental Health Expert. [email protected] 9910997482

AKASH JAIN 25/04/2026

Let Every JAIN Count (LEJC) | Census जनगणना 2026-27 | Duty of Every JAIN | Short Documentary |
Video:

AKASH JAIN 1 like. "Let Every JAIN Count (LEJC) | Census जनगणना 2026-27 | Duty of Every JAIN | Documentary |"

16/04/2026

एक viewer ने पूछा प्रश्न | क्या सुनार जैन बन सकते हैं?
वीडियो: https://youtu.be/eCq9yffdgp0

LIFE, MENTAL HEALTH & WELLNESS: Coach | Teacher | Advisor |
Consultation: 📱+91 9910997482 [email protected] | Gurugram (NCR)

Post from JAIN CULTURE 16/04/2026

डिजिटल पुस्तक
शीर्षक: "सम्राट खारवेल का ऐतिहासिक शिलालेख"
हाथीगुम्फा-अभिलेख, मूलपाठ, भावानुवाद एवं तथ्यात्मक-विवेचन | (कुल पृष्ठ-49)
पोस्ट:

Post from JAIN CULTURE डिजिटल पुस्तक शीर्षक: "सम्राट खारवेल का ऐतिहासिक शिलालेख" हाथीगुम्फा-अभिलेख, मूलपाठ, भावानुवाद एवं तथ्यात्मक-विव.....

Post from AKASH JAIN 16/04/2026

डिजिटल पुस्तक:- शीर्षक- "भरत और भारत" | (कुल पृष्ठ-58) ]
https://youtube.com/post/UgkxY6SpzYdResuK5-qTHaTqGxVj6zxAbRIg pdf पुस्तक डाउनलोड लिंक
लेखक - डॉ. प्रेम सागर जैन | प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, हिंदी-विभाग, दिगंबर जैन कॉलेज, बड़ौत, (उत्तर प्रदेश)

Post from AKASH JAIN डिजिटल पुस्तक:- शीर्षक- "भरत और भारत" | (कुल पृष्ठ-58) ] .pdf पुस्तक डाउनलोड लिंक - https://jmp.sh/rF9vC032 [दशकों पूर्व प्रकाशित लेखक - डॉ. प्....

16/04/2026

शीर्षक: ज्योतिष विद्या और कुंडली
वीडियो: https://youtu.be/yCJMgrPy6b8

#ज्योतिष #जन्मकुंडली

Post from JAIN CULTURE 07/04/2026

डिजिटल पुस्तक:- शीर्षक: "खंडेलवाल जैन समाज का वृहद इतिहास" |
लेखक-संपादक: डॉ कस्तूरचंद कास्लीवाल | पृष्ठ - 368 | प्रकाशक: जैन इतिहास प्रकाशन संस्थान, बरकत नगर, जयपुर |
पुस्तक पढ़ने और डाउनलोड के लिए इस पोस्ट पर कृपया क्लिक करें:

Post from JAIN CULTURE डिजिटल पुस्तक:- शीर्षक: "खंडेलवाल जैन समाज का वृहद इतिहास" | लेखक-संपादक: डॉ कस्तूरचंद कास्लीवाल | पृष्ठ - 368 | प्रकाशक: ज....

06/04/2026

भारतीय जनगणना National Census 2026-27 | "Let Every Jain Count" (LEJC) | Educational Video |
वीडियो: https://youtu.be/vJbOAFoTRsI

01/04/2026

Boook Review & Suggestion: "Fundamentals of Jainism" | Pravin K Shah | Download Link: https://jmp.sh/YrDDoCzx

28/03/2026

बिहार: प्राकृत शोध संस्थान, बासोकुंड, वैशाली को बंद करने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने हेतु निवेदन

विषय संबंधित समस्या को इस पत्र के माध्यम से समझने का प्रयास करें |

सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री महोदय
बिहार सरकार
पटना, बिहार

विषय: प्राकृत शोध संस्थान, बासोकुंड, वैशाली को बंद करने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने हेतु निवेदन।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपका ध्यान प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान, बासोकुंड, वैशाली (बिहार) से संबंधित एक अत्यंत महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक विषय की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।

जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जन्मस्थली क्षेत्र वैशाली के बासोकुंड में स्थित इस संस्थान की स्थापना 1950 के दशक में बिहार सरकार के सहयोग तथा जैन समाज के प्रयासों से हुई थी। इस संस्थान के भवन निर्माण के लिए स्वर्गीय श्री साहू शांति प्रसाद जैन द्वारा ₹6.25 लाख की उदार राशि दानस्वरूप प्रदान की गई थी। उस समय यह राशि अत्यंत महत्वपूर्ण थी और इसी के माध्यम से इस संस्थान की स्थापना एवं विकास संभव हुआ। इस संस्थान का शिलान्यास 23 अप्रैल 1956 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा किया गया था।

तब से यह संस्थान प्राकृत भाषा, जैन दर्शन तथा प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन एवं शोध का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। पिछले कई दशकों में यहाँ से जैनोलॉजी एवं प्राकृत अध्ययन के अनेक प्रतिष्ठित विद्वान निकले हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त की है। इस संस्थान में न केवल जैन समुदाय के विद्यार्थी बल्कि अन्य समुदायों के छात्र तथा विदेशों से आए शोधार्थी भी अध्ययन करते रहे हैं।

हाल ही में यह जानकारी प्राप्त हुई है कि बिहार सरकार इस संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों को बंद करने तथा इसके भवन एवं परिसर को शिक्षा विभाग से हटाकर निदेशालय संग्रहालय, कला एवं संस्कृति विभाग को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव किया है।

राजभवन से जारी पत्र में पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण का उल्लेख किया गया है, किंतु विनम्रतापूर्वक निवेदन है कि संस्थान के पुस्तकालय में ऐसी कोई पांडुलिपियाँ उपलब्ध नहीं हैं। अतः यह कारण वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता प्रतीत होता है।

यह भी उल्लेखनीय है कि जिस अवधि में इस संस्थान की स्थापना हुई थी, उसी समय बिहार में तीन भाषाई शोध संस्थान स्थापित किए गए थे:
• संस्कृत शोध संस्थान, दरभंगा
• पाली शोध संस्थान, नालंदा
• प्राकृत शोध संस्थान, बासोकुंड, वैशाली

इनमें से संस्कृत एवं पाली संस्थान आज भी बिहार सरकार के सहयोग से संचालित हो रहे हैं, जबकि प्राकृत शोध संस्थान, जो कि प्राकृत भाषा एवं जैन दर्शन के अध्ययन के लिए स्थापित पहला सरकारी संस्थान था, उसे बंद करने का प्रस्ताव अत्यंत चिंताजनक है।

एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि पिछले लगभग 20 वर्षों से इस संस्थान में बिहार सरकार द्वारा नियमित रूप से प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की गई है। इसके कारण संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियाँ धीरे-धीरे प्रभावित हुईं और संस्थान पूर्ण रूप से सक्रिय नहीं रह सका। अतः संस्थान की वर्तमान स्थिति का कारण इसकी आवश्यकता का अभाव नहीं, बल्कि दीर्घकाल तक पर्याप्त शैक्षणिक एवं प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति न होना है। यदि आवश्यक प्राध्यापकों और कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए तो यह संस्थान पुनः प्रभावी रूप से प्राकृत भाषा एवं जैन दर्शन के अध्ययन-शोध का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

इस संस्थान के ऐतिहासिक महत्व, शैक्षणिक योगदान तथा इसकी स्थापना में जैन समाज एवं स्वर्गीय श्री साहू शांति प्रसाद जैन के महत्वपूर्ण योगदान को ध्यान में रखते हुए आपसे विनम्र अनुरोध है कि कृपया इस संस्थान को बंद करने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की कृपा करें।

संस्थान की गतिविधियों को समाप्त करने के स्थान पर इसे प्राकृत भाषा एवं जैन अध्ययन के एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय शोध केंद्र के रूप में और अधिक सुदृढ़ एवं विकसित किया जा सकता है।

अतः आपसे सादर निवेदन है कि कृपया इस विषय में हस्तक्षेप कर इस ऐतिहासिक संस्थान को संरक्षित रखने तथा इसकी शैक्षणिक गतिविधियों को भविष्य में भी जारी रखने हेतु आवश्यक निर्देश देने की कृपा करें।

भवदीय,

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