19/12/2025
प्राचीन भारतीय ग्रंथ भगवद्गीता को चीनी विद्वानों ने आधुनिक विश्व के लिए ‘ज्ञान का अमृत’ तथा ‘भारतीय सभ्यता का लघु इतिहास’ करार दिया है। प्रसिद्ध चीनी विद्वानों ने कहा कि यह आधुनिक युग में लोगों के समक्ष उभरने वाली आध्यात्मिक एवं भौतिक दुविधाओं का समाधान प्रस्तुत करती है। यह इस प्राचीन ग्रंथ की सार्वजनिक प्रशंसा का एक दुर्लभ उदाहरण है। भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित ‘संगमम - भारतीय दार्शनिक परंपराओं का संगम’ विषयक संगोष्ठी में भगवद्गीता पर चर्चा करते हुए 88 वर्षीय प्रोफेसर झांग बाओशेंग ने कहा कि एक जीवंत नैतिक एवं आध्यात्मिक प्रतीक के रूप में हर स्थान पर उन्होंने भगवान कृष्ण की उपस्थिति महसूस की। ऐसे अनुभवों से उन्होंने देखा कि गीता कोई दूरस्थ धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह भारतीय मनोविज्ञान, नैतिकता एवं सामाजिक जीवन पर जीवंत प्रभाव डालता है। उन्होंने इसे भारतीय आत्मा का ‘सांस्कृतिक नृविज्ञान’ कहा।
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