05/10/2025
🎬 New Chapter 1 – एक अद्भुत सनातन गाथा 🌿🔥
ऋषभ शेट्टी द्वारा निर्देशित कांतारा न्यू चैप्टर 1 सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि सनातन धर्म की परंपराओं, आस्था और धर्म-धर्म के संघर्ष की एक जीवंत गाथा है। 🙏
इस फिल्म ने साबित कर दिया है कि बिना वल्गैरिटी, गंदगी या सुपरस्टार के भी एक उत्कृष्ट सिनेमा बनाया जा सकता है। 🎥✨
ऋषभ शेट्टी ने अपनी कला से एक बार फिर यह दिखाया है कि भक्ति, परंपरा और भारतीय संस्कृति को भी भव्य और मनोरंजक रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। 🇮🇳
🌕 "कांतारा न्यू चैप्टर 1" –
एक ऐसी फिल्म जो आत्मा को छू जाती है,
धर्म और प्रकृति के बीच के पवित्र संबंध को महसूस कराती है। 🌳
📢 आप सभी को यह फिल्म ज़रूर देखनी चाहिए!
05/10/2025
🟧 स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष समारोह 2025 🟧
🚩 100 वर्ष पूर्ण होने के इस गौरवशाली अवसर पर...
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष स्थापना एवं दशहरा समारोह के उपलक्ष्य में
महाकाली बस्ती के स्वयंसेवकों का भव्य एकत्रीकरण एवं पथ संचालन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
🇮🇳 यह आयोजन हमारे संगठन की समर्पण भावना, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के अमर संकल्प का प्रतीक रहा।
स्वयंसेवकों की अनुशासित पंक्तियाँ और देशभक्ति से ओत-प्रोत वातावरण ने उपस्थित जनसमूह को गर्व और प्रेरणा से भर दिया।
🙏 सभी स्वयंसेवकों एवं उपस्थित नागरिकों का हार्दिक धन्यवाद जिन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर को भव्यता प्रदान की।
🚩 जय हिंद, जय भारत! 🚩
09/08/2025
🌸💖 तृण धरि ओट कहत बैदेही… 💖🌸
लोकश्रुति है कि अशोक वाटिका में रावण के अवांछित सामीप्य से बचने के लिए माँ सीता ने अपने और रावण के बीच एक छोटा-सा तिनका रख दिया और चेतावनी दी –
"यदि सामर्थ्य है तो इस तिनके को पार कर के दिखा।"
यह सिर्फ एक तिनका नहीं था, बल्कि भूमिजा सीता का अटूट विश्वास था।
जैसे वे भूमि से उत्पन्न हुईं, वैसे ही वह तिनका भी भूमि से ही उत्पन्न था।
माँ सीता ने उस तिनके में अपना सहोदर – भूमि से उपजा भाई – देखा और जानती थीं कि किसी भाई की उपस्थिति में कोई भी दुराचारी उनकी बहन को छू नहीं सकता।
इस रक्षाबंधन पर, ईश्वर सभी बहनों को भाई के रूप में ऐसा ही अविचल भरोसा दे और सभी भाइयों को उस भरोसे की रक्षा करने की अनंत सामर्थ्य प्रदान करे।
✨💫
मेरी और से आप सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏❤️
आपकी आंखों में हमेशा विश्वास, प्यार और सुरक्षा की रोशनी बनी रहे।
#रक्षाबंधन #भाईबहनकाप्यार #भूमिजा
11/07/2024
श्री हनुमान जी
रामकथा में हनुमान जी सागर पार करने ही वाले हैं। ऐसा प्रयास करने वाले वे अकेले हनुमान नहीं हैं, चलते तो बहुत हैं।
प्रतिदिन कितने ही हनुमान, संसार सागर में, इस मनुष्य देह रूपी लंका की, अन्त:करण रूपी अशोक वाटिका में, मोह रूपी रावण द्वारा बंदी बनाई गई, भक्ति रूपी सीता की खोज के लिए, भगवन्नाम रूपी मुद्रिका, मुंह में डाल कर निकलते हैं।
भगवान् बड़ी आशा से, जल भरी आंखों से, वह नाम अंगूठी, उन को देते हैं कि ये अवश्य ही मनुष्य देह पाकर, भक्ति की खोज करेंगे।
पर कितनों ने छलांग लगाने का ही साहस नहीं किया, अपना स्वरूप भूत बल भूलें बैठें रहें। कितनों ने छलांग तो लगाई पर नाम अंगूठी मुंह से सागर में ही गिरा दी।
कितने मनोरथ के मैनाक पर अटक गए। कितनों को प्रतिष्ठा रूपी सुरसा निगल गई। कितनों को राग-द्वेष रूपी सिंघिका खा गई। तो कितनों को अविद्यारूपी लंकिनी ने बंदी बना लिया।
कुछ जो बचते बचाते पहुंचे, उनमें से कितने ही लंका की चकाचौंध में लुभाएं गए। किसी ने वहीं विवाह कर घर बसा लिया। कोई दुकान खोल बैठ गया। किसी ने वहां के दुःख देखकर, कष्ट निवारण केन्द्र, अनाथालय, वृद्धाश्रम, अस्पताल, विद्यालय, कालेज आदि खोल लिएं। तो कोई किन्हीं को भगवान् की कथा सुनाकर, रिझाकर और गीत संगीत की मंडली इकठ्ठी कर, महामण्डलेश्वर और न मालूम कौन कौन सी पदवियां पाकर जम गया।
कोई विरला, अपनें लक्ष्य को निरंतर याद रख, चलता ही चला गया, अटका नहीं, भटका नहीं, घबराया नहीं, भरमाया नहीं; सीधे अन्त:करण अशोक वाटिका में घुस गया, भक्ति को खोजा और लंका को आग लगाकर, भगवान् के चरणों में वापिस, सही सलामत, बेदाग पहुंच गया।
बस, वही राम का प्यारा है, वही अमर है, चिरंजीवी है,असली संत है, असली हनुमान है।
अस्तु
08/06/2016
दुर्योधन और राहुल गांधी -
दोनों ही अयोग्य होने पर भी सिर्फ राजपरिवार में पैदा होने के कारन शासन पर अपना अधिकार समझते हैं।
भीष्म और आडवाणी -
कभी भी सत्तारूढ़ नही हो सके फिर भी सबसे ज्यादा सम्मान मिला। उसके बाद भी जीवन के अंतिम पड़ाव पे सबसे ज्यादा असहाय दिखते हैं।
अर्जुन और नरेंद्र मोदी-
दोनों योग्यता से धर्मं के मार्ग पर चलते हुए शीर्ष पर पहुचे जहाँ उनको एहसास हुआ की धर्म का पालन कर पाना कितना कठिन होता है।
कर्ण और मनमोहन सिंह -
बुद्धिमान और योग्य होते हुए भी अधर्म का पक्ष लेने के कारण जीवन में वांछित सफलता न पा सके।
जयद्रथ और केजरीवाल-
दोनों अति महत्वाकांक्षी एक ने अर्जुन का विरोध किया दूसरे ने मोदी का। हालांकि इनको राज्य तो प्राप्त हुआ लेकिन घटिया राजनीतिक सोच के कारण बाद में इनकी बुराई ही हुयी।
शकुनि और दिग्विजय-
दोनों ही अपने स्वार्थ के लिए अयोग्य मालिको की जीवनभर चाटुकारिता करते रहे।
धृतराष्ट्र और सोनिया -
अपने पुत्र प्रेम में अंधे है।
श्रीकृष्ण और कलाम-
भारत में दोनों को बहुत सम्मान दिया जाता है परन्तु न उनकी शिक्षाओं को कोई मानता है और न उनके बताये रास्ते का अनुसरण करता है।
--यह है भारत और महाभारत
08/06/2016
-:"हमारा देश एक और मौका परस्त अनेक":-
कुछ मौकापरस्त सरकार विरोधी पहले मोदी जी का विरोध कांग्रेस के वेनर तले कर रहे थे, पर देखा कि ये तो डुबता हुआ जहाज हैं, तो विरोध करने के लिए तथाकथित हरामखोर (ईमानदार) खुजली वाल के झन्डे के तले विरोध चालू कर दिया, जब विरोध बेअसर लगा तो तुच्छ जातिवाद राजनीति करना चालू कर दी।। कभी जिन्होंने तथाकथित सेकुलर लोगों का विरोध नहीं किया जिन्होंने आरक्षण लागू करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी उनका विरोध छोड तथाकथित स्वयंभू जयचन्द सवर्ण समाज को आरक्षण के नाम पर तोडकर सवर्णो के नेता बन रहे हैं। सवर्ण हमेशा समझदार एवं स्वाभिमानी रहा जो अपनी प्रतिभा की दम पर नाम कमाता हैं न कि आरक्षण की खेरात पर।। समाज को देश हित के लिए जोड़े न कि स्वार्थ के लिए तोडे।
16/06/2015
हमे ऊँगली करने वालो का हाथ न रहेगा
जय श्री राम