Art of Living Jagraon

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Art of Living Courses to make life healthy and tension free..

07/03/2026

आर्ट ऑफ लिविंग टीम जगराओं

🌸🌸🌸 हिंदू धर्म में पूजा-पाठ में प्रकृति (Nature) को बहुत महत्व दिया जाता है। यह मान्यता है कि प्रकृति ही भगवान का रूप है। इसलिए पूजा में प्रकृति के तत्वों को शामिल किया जाता है। मुख्य तरीके इस प्रकार हैं:
1. पंचतत्व की पूजा
हिंदू धर्म में शरीर और संसार पंचतत्व से बने माने जाते हैं:
पृथ्वी (मिट्टी)
जल (पानी)
अग्नि (आग)
वायु (हवा)
आकाश (Space)
पूजा में दीपक (अग्नि), जल, फूल, धूप आदि से इन तत्वों का सम्मान किया जाता है।
2. पेड़-पौधों की पूजा
कई पेड़-पौधे पवित्र माने जाते हैं:
Tulsi – घर में पूजा की जाती है, शुद्धता का प्रतीक।
Peepal – भगवान विष्णु का वास माना जाता है।
Banyan Tree – दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक।
Bael के पत्ते Shiva को अर्पित किए जाते हैं।
3. नदियों की पूजा
नदियों को माता माना जाता है। जैसे:
Ganga
Yamuna
इन नदियों में स्नान और आरती करना पवित्र माना जाता है।
4. सूर्य और चंद्र की पूजा
Surya को जल चढ़ाया जाता है।
Chandra को भी व्रत और त्योहारों में महत्व दिया जाता है।
5. जानवरों का सम्मान
कुछ जानवरों को भी पवित्र माना जाता है:
Cow – गौ माता, पालन-पोषण का प्रतीक।
Snake – नाग देवता की पूजा।
Monkey – Hanuman से जुड़ा।
6. पर्व और प्रकृति
कई त्योहार प्रकृति से जुड़े हैं, जैसे:
Makar Sankranti – सूर्य की दिशा बदलने का पर्व
Chhath Puja – सूर्य और जल की पूजा
Vasant Panchami – बसंत ऋतु का स्वागत
✅ निष्कर्ष:
हिंदू धर्म सिखाता है कि प्रकृति ही ईश्वर का रूप है, इसलिए पेड़-पौधे, नदियाँ, सूर्य, पशु-पक्षी सबका सम्मान और संरक्षण करना भी पूजा का हिस्सा है।
Jgd 🌷

31/07/2024

अगर किसी की कुण्डली में कोई दोष है, किसी के घर में, व्यपार में, रिश्तों में, सेहत में किसी प्रकार की समस्या आ रही है, या किसी प्रकार की विशेष, इच्छा पूर्ण नही हो रही हो तो रूद्र पूजा में यजमान बनके संकल्प लेने से वह दोष, समस्या दूर होती है और इच्छा की पूर्ति होती है, यजमान को पूजा के बाद रूद्र अभिषेक किया हुआ रूदाश्र भी दिया जाता है

अधिक जानकारी के लिये संपर्क करें:
मोहित अग्रवाल
आर्ट ऑफ लिविंग, जगराओं
094633 14747

02/12/2023

रक्त बनाने वाला प्राकृतिक परमाणु गेहूँ का ज्वारा
21/112023
🔥
गेहूँ का ज्वारा अर्थात गेहूँ के छोटे-छोटे पौधों की हरी-हरी पत्ती, जिसमे है शुद्ध रक्त बनाने की अद्भुत शक्ति. तभी तो इन ज्वारो के रस को "ग्रीन ब्लड" कहा गया है. इसे ग्रीन ब्लड कहने का एक कारणयह भी है कि रासायनिक संरचना पर ध्यानाकर्षण किया जाए तो गेहूँ के ज्वारे के रस और मानव मानव रुधिर दोनों का ही पी.एच. फैक्टर 7.4 ही है जिसके कारण इसके रस का सेवन करने से इसका रक्त में अभिशोषण शीघ्र हो जाता है, जिससे रक्ताल्पता(एनीमिया) और पीलिया(जांडिस)रोगी के लिए यह ईश्वर प्रदत्त अमृत हो जाता है. गेहूँ के ज्वारे के रस का नियमित सेवन और नाड़ी शोधन प्रणायाम से मानव शारीर के समस्त नाड़ियों का शोधन होकर मनुष्य समस्त प्रकार के रक्तविकारों से मुक्त हो जाता है. गेहूँ के ज्वारे में पर्याप्त मात्रा में क्लोरोफिल पाया जाता है जो तेजी से रक्त बनता है इसीलिए तो इसे प्राकृतिक परमाणु की संज्ञा भी दी गयी है. गेहूँ के पत्तियों के रस में विटामिन बी.सी. और ई प्रचुर मात्रा में पाया जाता है.

गेहूँ घास के सेवन से कोष्ठबद्धता, एसिडिटी , गठिया, भगंदर, मधुमेह, बवासीर, खासी, दमा, नेत्ररोग,म्यूकस, उच्चरक्तचाप, वायु विकार इत्यादि में भी अप्रत्याशित लाभ होता है. इसके रस के सेवन से अपार शारीरिक शक्ति कि वृद्धि होती है तथा मूत्राशय कि पथरी के लिए तो यह रामबाण है. गेहूँ के ज्वारे से रस निकालते समय यह ध्यान रहे कि पत्तियों में से जड़ वाला सफेद हिस्सा काट कर फेंक दे. केवल हरे हिस्से का ही रस सेवन कर लेना ही विशेष लाभकारी होता है. रस निकालने के पहले ज्वारे को धो भी लेना चाहिए. यह ध्यान रहे कि जिस ज्वारे से रस निकाला जाय उसकी ऊंचाई अधिकतम पांच से छः इंच ही हो.
❤️🙏❤️

Sandeep Dhaula - ਆਹ ਬਾਈ ਨੇ ਘਰ ਨੂੰ ਬਣਾਇਆ ਜੰਗਲ | SIRLEKH 19/10/2023

पक्षी प्रेमी इस वीडियो को आखिर तक देखें

Sandeep Dhaula - ਆਹ ਬਾਈ ਨੇ ਘਰ ਨੂੰ ਬਣਾਇਆ ਜੰਗਲ | SIRLEKH Sandeep Dhaula - ਆਹ ਬਾਈ ਨੇ ਘਰ ਨੂੰ ਬਣਾਇਆ ਜੰਗਲ | SIRLEKHਰੁੱਖਾਂ-ਬੂਟਿਆਂ ਅਤੇ ਪੰਛੀਆਂ ਦੇ ਫਾਇਦੇ ਆਹ ਪਿੰਡ ਤੋਂ ਸਿੱਖੋ ਆਹ ਬਾਈ ਨੇ ਘਰ ਨੂੰ ਬਣਾਇਆ ਜੰਗ.....

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