15/02/2026
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15/02/2026
25/01/2026
वीर तुम बढ़े चलो
थार-फॉर्च्यूनर लेकर चढ़े चलो
स्नोफॉल का मज़ा रहे
चाय-पकौड़े से सजा रहे,
जाम कभी खुले नहीं
पहिये आगे बढ़े नहीं
वीर तुम अड़े रहो
ट्रैफिक में पड़े रहो,
आगे वालों की लताड़ हो
पीछे वालों की दहाड़ हो
तुम निडर डटो वहीं
सीट से उठो नहीं,
मुँह गरजते रहें
अपशब्द बरसते रहें
बीवी भी भड़क उठे
बच्चा भी तड़प उठे,
वीर तुम अड़े रहो
पहाड़ पर पड़े रहो
प्रातः हो कि रात हो
ठंडी में बजता हर दाँत हो,
300 का एक आलू पराठा हो
मावठे का पानी हाड़ कँपाता हो
वीर तुम अड़े रहो
स्टीयरिंग में जड़े रहो,
एक महिंद्रा लिए हुए
एक प्रण किए हुए
फेसबुक के प्रोग्राम के लिये
अपने इंस्टाग्राम के लिए,
माउंटेंस कॉलिंग, एडवेंचर अवेट्स
वान्डरलस्ट लिए चलो
हड्डियां ठंड से भरीं
ज़ुबान गालियों से भरी,
बर्फ़ है, यह ठंड है
यह बड़ी प्रचंड है
यत्न कर निकाल लो
ये समय निकाल लो,
वीर तुम बढ़े चलो
थार-फॉर्च्यूनर लेकर चढ़े चलो...
17/01/2026
ज़िम्बाब्वे में एक डकैती के दौरान, चोर ने बैंक में मौजूद सभी लोगों से चिल्लाकर कहा:
“हिलो मत! पैसा सरकार का है – तुम्हारी जान तुम्हारी है।”
बैंक में मौजूद सभी लोग चुपचाप लेट गए।
इसे कहते हैं “सोचने का तरीका बदलना” – पारंपरिक मानसिकता को बदलना।
जब एक महिला मेज पर उत्तेजक मुद्रा में लेट गई, तो चोर चिल्लाया:
“कृपया सभ्य बनो! यह डकैती है, बलात्कार नहीं!”
इसे कहते हैं “पेशेवर होना।” केवल उसी काम पर ध्यान केंद्रित करो जिसके लिए तुम्हें प्रशिक्षित किया गया है!
जब लुटेरे घर लौटे, तो छोटे चोर (जिसके पास एमबीए की डिग्री थी) ने बड़े चोर (जिसने केवल छठी कक्षा तक पढ़ाई की थी) से कहा:
“बड़े भाई, चलो गिनते हैं कि हमें कितना मिला।”
बूढ़े चोर ने जवाब दिया:
“तुम कितने बेवकूफ हो! इतना सारा पैसा है—गिनने में तो बहुत समय लग जाएगा। आज रात टीवी पर खबर आ जाएगी कि हमने कितना चुराया है।”
इसे कहते हैं “अनुभव।” आजकल अनुभव शैक्षणिक योग्यताओं से कहीं अधिक मूल्यवान है!
लुटेरे के जाने के बाद, बैंक मैनेजर ने सुपरवाइजर को जल्दी से पुलिस को बुलाने को कहा। लेकिन सुपरवाइजर ने कहा:
“रुको! चलो बैंक से 10 मिलियन डॉलर खुद निकाल लेते हैं और इसे उन 70 मिलियन डॉलर में जोड़ देते हैं जो हम पहले ही गबन कर चुके हैं।”
इसे कहते हैं “हालात के साथ चलना।” प्रतिकूल स्थिति को लाभ में बदलना!
फिर सुपरवाइजर ने कहा:
“कितना अच्छा होता अगर हर महीने एक डकैती होती।”
इसे कहते हैं “ऊब मिटाना।” व्यक्तिगत खुशी काम से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
अगले दिन खबर आई कि बैंक से 10 करोड़ डॉलर चोरी हो गए हैं।
लुटेरों ने खूब गिनती की, लेकिन उन्हें सिर्फ 2 करोड़ डॉलर ही मिले।
गुस्से में आकर उन्होंने शिकायत की:
“हमने अपनी जान जोखिम में डाली और हमें सिर्फ 2 करोड़ डॉलर मिले। बैंक मैनेजर ने तो पलक झपकते ही 8 करोड़ डॉलर ले लिए! लगता है चोर बनने से बेहतर है शिक्षित होना।”
इसे कहते हैं “ज्ञान सोने के बराबर कीमती है।”
इसी बीच, बैंक मैनेजर मुस्कुराया, राहत महसूस करते हुए कि शेयर बाजार में हुए उसके नुकसान की भरपाई अब चोरी से हो गई है।
इसे कहते हैं “मौके का फायदा उठाना।” जोखिम उठाने की हिम्मत रखनी चाहिए क्योंकि इसी में जीवन का आनंद है।
😄😄😄😄😄
13/12/2025
30/10/2025
Into the Worldcup FINAL ❤️❤️❤️❤️
#फुंगशुक #वांगडू उर्फ #सोनम #वांगचुक
पहले फिल्म बना कर इस व्यक्ति को पॉपुलर किया गया फिर इसने कुछ छोटे बड़े पर्यावरण संरक्षण के प्रयोग कर सबका ध्यान खींचा... तमाम लिबरल, इको सिस्टम ने इसे आंखों का तारा बनाया...
अब ये अपने असली रंग में आता है और पिछले वर्ष ये लद्दाख को संपूर्ण राज्य और पूर्ण स्वायत्तता की मांग लेकर दिल्ली कूच कर जाता है...
पिछली बार ये दिल्ली तक पहुंचा और प्रधानमंत्री जी ने इसे इसकी मांगो हेतु विचार करने को कह कर इसे वापस भेजा...
अब ये फिर से लेह में अनशन पर बैठ गया और आज इसने लद्दाख के लोगों को लेह आमंत्रित किया और प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यालय में आगजनी और पुलिस से मारपीट कराई... पुलिस वाहन फूंके गये
चीन और पाकिस्तान से जुड़े लद्दाख को स्वायत्तता कैसे संभव है?
6वीं सूची में याने कानून बनाने का अधिकार कैसे दिया जा सकता है? जबकि
अभी भी लद्दाख के पास अपनी कौंसिल है, अपना सांसद है वो राष्ट्र विमर्श में बराबरी से शामिल होते हैं... सोनम वांगचुक जार्ज सोरोस गैंग का ही हिस्सा है और नया टूल किट पर काम कर रहा है।
लेह लद्दाख के लोगों की प्रमुख मांग यू टी की ही थी और सरकार ने धारा 370 हटाने के साथ पूरा भी कर दिया है।
लेकिन कुछ लोग शांति चाहते कहां है?
यही सोनम वांगचुक पता नहीं किस बिल में घुसा पड़ा हुआ था जब लेह लद्दाख का पूरा अधिकार कश्मीर घाटी के जिहादी लूट खा रहे थे। लेकिन 2019 से ही निकल कर सरकार विरोधी माहोल बना रहा है, हिंसा भड़का रहा है, मतलब साफ है अशांति। पहले कहां थे भाई जब लद्दाख धारा 370 के कारण उपेक्षित सिसक रहा था ?
आज भारत विरोधी शक्तियों से टुकड़े चाट कर लद्दाख को अशांत कर रहा है!
2019 के पहले कितनी भूख हड़ताल की थी?
1947 से लद्दाख जम्मू कश्मीर का हिस्सा रहा तो कुछ भी नहीं मिलता था, आज केंद्र शासित होने के बाद स्वास्थ, शिक्षा, रोजगार सभी दिखा में काम हो रहा है, इंफ्रा का जाल बिछ रहा है, देश भर से टूरिस्ट पहुंच रहे हैं... ऐसे हालत में एक व्यक्ति द्वारा ये सब हरकते स्फूर्त नहीं बल्कि किसी एजेंडा का हिस्सा लगती है...
सरकार कड़ाई से सीमांत प्रदेश में विरोध से निपटे🇮🇳
इदर अपना पप्पू बोल रहा की रन चोरी हुए है पाकिस्तान नहीं हार सकता है भारत से😂😂😂
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