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The Meditation Guru
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मित्रो,
इस पेज का मुख्य उद्देश्य आप सभी को वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों द्वारा रोगों के निदान की जानकारियाँ सुलभ कराना है। ये जानकारियाँ भी पेज के अनुभवी मेम्बर्स ही उपल्बध करायेँगे, इस लिऐ पेज को अपना परिवार मानकर ही चलेँ। सादर धन्यवाद . . .
26/02/2024
मेडिटेशन गुरु, कानपुर के तत्वाधान में सुल्तानपुर वन प्रभाग के फील्ड एवं ऑफिस कर्मचारियों हेतु निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन प्रभागीय निदेशक कार्यालय परिसर में सम्पन्न हुआ, जिसमें डी.एफ.ओ. सुल्तानपुर श्री आर. के. त्रिपाठी, योग गुरु श्री अनुराग त्रिपाठी एवं श्रीमती रोली त्रिपाठी जी उपस्थित रहे।
02/07/2023
Meditation . .... . 😊
Meditation is the journey of our consciousness towards the Self.
Sleep is unconscious Meditation & Meditation is conscious sleep.
We receive some amount of Cosmic Energy in sleep and in deep silence. We receive abundant Cosmic Energy in Meditation.
Meditation is the journey of our consciousness from:
Body to Mind,
Mind to Intellect,
Intellect to Self,
and Beyond.
To do Meditation, the first thing is Posture.
We may sit in any posture. Posture must be comfortable and stable.
We may sit either on the floor or on a chair.
Cross your legs clasp the fingers.
Close your eyes gently.
Relax, relax.
Then, Observe your normal Breath
Do not chant any Mantra, do not think of any God.
Just witness the Breath.
If any thoughts come, do not go behind the thoughts, do not negate the thoughts
Just come back observe the Breath.
Witness the Breath.
Be the Breath.
Just Be.
This is the WAY. This is the Meditation Technique.
Then one reaches:
No Thought and No Breath state.
This is the Meditative State.
By more and more Meditation, we receive abundant Cosmic Energy.
Our Energy body gets cleansed, Third Eye get activated, and further perfected, Astral Travel happens, we understand Life After Life and many more. .... . 😊
29/03/2017
प्रकृति ने Drum Sticks (सहिंजन, सहजन, शिग्रु, मुनगा) को एक बेमिसाल उपहार बनाया है।
ये ऐसी वनस्पति है जिसकी पत्तियों एवं फलियों में 300 से अधिक रोगों की रोकथाम के गुण, 9 विटामिन्स समूह, 46 एंटी आक्सीडेंटस, 36 दर्द निवारक और 18 तरह के एमिनो एसिड मिलते हैं।
वैसे तो सहिंजन के गुणों का पूरा ब्यौरा आयुर्वेद में उपलब्ध है, लेकिन इसकी लोकप्रियता में अप्रत्याशित दिलचस्पी तब से बढ़ी है जब से आधुनिक शोधों ने इसे बेहद प्रभावकारी पाया. फलस्वरूप, सहिंजन ने एक बड़े बाज़ार को खड़ा कर दिया जो इसे दुनिया के हर कोने में बेचने में लगा है. दुनिया भर में बढ़ते रुझान के मद्देनज़र, भारतीय बागबानी बोर्ड के प्रोजेक्ट अनुरूप तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय ने पीकेएम-1 और पीकेएम-2 नाम से सहिंजन की दो प्रजातियां विकसित की हैं। पीकेएम-1 दक्षिण भारत के कृषि जलवायु क्षेत्र के अनुकूल है।
भारतीय बागवानी बोर्ड ने किसानों को इस कैश क्रॉप से जुड़ने के लिये योजनायें भी चला रखी हैं. जिनके अंतर्गत एनएचआरडीएफ बीज मुहैया कराने के साथ ही खेती के उन्नत तरीकों के बारे में भी बताया जाता है।
प्रकृति का ये नायाब तोहफा बड़ी आसानी तथा बिना किसी विशेष देखभाल के सर्वत्र पनप जाता है. इसे चमत्कार कहें या प्रकृति का मानवता के लिये वरदान. कुपोषण, एनीमिया (खून की कमी) में अति लाभकारी सहिंजन सर्वसुलभ और हर जगह पैदा होने वाली वनस्पति है।
शहरी उपभोक्ताओं की अनभिज्ञता के कारण उत्तर भारत में सहिंजन का उपयोग इतना प्रचलित नहीं जबकि दक्षिण भारत व कई पूर्वी एशिया के देशों में सहिंजन कई व्यंजनों एवं घरेलु नुस्खों में उपयोग किया जाता है. दक्षिण भारत में साल भर फली देने वाले पेड़ होते है. इसे सांबर में डाला जाता है . वहीँ उत्तर भारत में यह साल में एक बार ही फली देता है. सर्दियां जाने के बाद इसके फूलों की भी सब्जी बना कर खाई जाती है. फिर इसकी नर्म फलियों की सब्जी बनाई जाती है. इसके बाद इसके पेड़ों की छटाई कर दी जाती है।
सहिंजन के पौष्टिक गुणों की तुलना
विटामिन सी- संतरे से सात गुना।
विटामिन ए- गाजर से चार गुना।
कैलशियम- दूध से चार गुना।
पोटेशियम- केले से तीन गुना।
प्रोटीन- दही की तुलना में तीन गुना।
विटामिन E- बादाम से 3 गुना अधिक
सहिंजन के अलग-अलग भागों में 300 से अधिक रोगों के रोकथाम के गुण हैं।
1. कमजोर याद्दाश्त
2. शुगर (मधुमेह)
3. ब्लड प्रेशर (B.P.)
4. दमा
5. मोटापा (Obesity)
6. त्वचा / चर्म रोग
7. लीवर से जुडी कोई भी परेशानी
8. जोड़ों का दर्द
9. माइग्रेन
10. थाइरोइड
11. किडनी/पथरी
12. अनीमिया (खून की कमी)
13. कमजोर हड्डियां
14. एलर्जी (Elergy)
15. सर्विकल (Survical)
16. बवासीर (Piles) / फिशर
17. मानसीक तनाव (Stress)
18. बुजुर्गों/बच्चों के लिए
19. गर्भवती महिलाओं के लिए
20. धूम्रपान / तम्बाकू वालो के लिए
21.कामकाजी लोगों के लिए
22. शराब वालों के लिए
23. हृदय रोगी।
24.कॅन्सर
25.अलसर।
26.नासूर।
27.यूरि क एसि ड का बढ़ना ।
28.लकवा
29.मि र्गी।(Mirgi)
30.अलमाइजर
31.खांसी।
32.प्रोस्टेट
33.साईनस
34.पेट में गैस बनना।
35.पैर के तलवे मे जलन।
36.आ खों से संबंधि त रोग
37.साटिका(satika)
38.धात
39.स्वेद प्रदर
40.मासिक(M.C.)धर्म अनियमित
41.कमर में दर्द
42.सोराइसि स
43.Lukoderma
44.थाइराइड
45.फाइलेरिया
46.एडस(AIDS)
47.स्वाइन flu. 48.बालों का झड़ना
49.प्राजनन क्षमता
50.पागलपन
51. sexual समस्या आदि
01/12/2016
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28/09/2016
डेंगू का रामबाण इलाज
1. गिलोय
गिलोय बॉडी को इंफेक्शन से बचाने में मदद करता है। इसके तने को उबालकर हर्बल ड्रिंक की तरह पीने से डेंगू से छुटकारा मिलता है।
2. पपीते के पत्ते
पपीते के पत्तों का जूस बनाकर कर पीने से डेंगू अौर बॉडी से टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद करते हैं।
3. मेथी के पत्ते
यह पत्तियां डेंगू के बुखार को कम करने के लिए सहायक हैं। मेथी की पत्तियों को पानी में मिलाकर उसका जूस पीएं। इसके अलावा, मेथी पाऊडर को भी पानी में मिलाकर पी सकते हैं।
4. गोल्डनसील
इस हर्ब का इस्तेमाल दवाई बनाने के लिए किया जाता है। इस हर्ब में डेंगू बुखार को बहुत तेजी से खत्म कर शरीर में से डेंगू के वायरस को खत्म करने की क्षमता होती है। इसका चूर्ण या जूस पीकर लाभ उठाया जा सकता है।
5. हल्दी
डेंगू बुखार होने पर हल्दी को दूध में मिलाकर पीने से अाराम मिलता है।
28/08/2016
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