Sanjay With You

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14/01/2024

🥇लम्हा🥇

🥇अन्ना राजन जॉर्ज पहली महिला आईएएस अफसर🥇

हमें कर दिखाने का मौका तो दीजिए

लोगों को विश्वास ही नहीं होता था कि एक महिला सब-कलेक्टर कैसे? उन दिनों कलेक्टर को अक्सर लाठीचार्ज या गोली चलाने का फैसला लेना पड़ता था। पता नहीं, एक महिला ऐसे फैसले कैसे लेगी? ऐसे में, खुद को साबित करना जरूरी था।

वह भी लाजवाब जमाना था, देश आजाद हो गया था। तब तोला भर सोने की अंगूठी के लिए करीब सौ रुपये लग जाते थे और आईएएस की परीक्षा में बैठने के लिए 140 रुपये का शुल्क चुकाना पड़ता था। बीस की हो चुकी यह मलयाली युवती क्लर्क की नौकरी करती थीं और तनख्वाह इतनी नहीं थी कि परीक्षा का फॉर्म भर सकें। वह सोचती थीं कि स्नातक करने के बावजूद क्या वह महज क्लर्क रह जाएंगी ? नए आजाद हुए देश में सबसे बड़ी नौकरी के लिए प्रयास में क्या हर्ज है। एक चार संघ लोकसेवा आयोग की परीक्षा में बैठकर देखें, कुछ न होगा, तो तजुर्बा होगा। आगे बढ़ने का इरादा पक्का था, तो कदम-कदम पर चुनौतियों से टकराना भी तय था। एक दोस्त की मम्मी ने फॉर्म भरने के पैसे दिए थे। युवती ने पहली ही बार में कामयाबी हासिल कर ली। साक्षात्कार का मौका आया, तो भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहने का इरादा जताया। साक्षात्कार लेने बैठे आयोग के प्रमुख ने हतोत्साहित किया, 'युवती हो, भारतीय प्रशासनिक सेवा में मुश्किल होगी, विदेश सेवा या केंद्रीय सेवाओं में से कोई चुन लो?' पर वह अड़ गईं, प्रशासनिक सेवा में ही जाना है। आयोग के सभी सदस्य अचंभित थे कि बुरे से बुरे हालात देखने पड़त हैं, कड़े से कड़े फैसले लेने पड़ते हैं, किसी लड़की से ये सब कैसे होगा ? भला हो, महान संविधान निर्माताओं का, जिन्होंने देश में कानून बना दिया था कि रोजगार में लड़का-लड़की के बीच भेद नहीं किया जाएगा। लड़की अड़ गई, तभी वह देश की पहली आईएएस बनी और पहुंच गई अपने काडर प्रदेश तमिलनाडु। वहां मिल गए दिग्गज नेता और मुख्यमंत्री सी राजगोपालाचारी। आईएएस रूप में युवती को देख चौंक गए। यह कैसे सब-कलेक्टर, कलेक्टर बनेगी, कैसे फील्ड डयूटी में जाएगी ? उन्होंने समझाया कि सचिवालय में कोई काम संभाल लो, जिला जाने की नौबत नहीं आएगी, पर यहां भी वह युवती अड गई- नहीं, मुझे आप किसी जिले में ही भेजिए, कृपया, भेदभाव न कीजिए। खैर, राजगोपालाचारी जी ने उन्हें अपने ही जिले होसर में सब-कलेक्टर तैनात कर दिया। लोगों को विश्वास ही नहीं होता था कि एक महिला सब-कलेक्टर कैसे ? उन दिनों कलेक्टर को अक्सर लाठीचार्ज या गोली चलाने का फैसला लेना पड़ता था। पता नहीं, एक महिला ऐसे फैसले कैसे लेगी? ऐसे में, खुद को साबित करना जरूरी था और मौके की तलाश थी। मौका जल्दी ही सामने आया। एक सुबह बंगले के बाहर शोर मच गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए। सब-कलेक्टर साहिबा जल्दी-जल्दी नहाकर निकलीं। छह हाथियों के एक समूह ने गांव पर हमला बोल दिया था, भगाए नहीं भाग रहे थे। ग्रामीणों को जब कुछन सूझा, तो मदद के लिए सब-कलेक्टर के यहां पहुंच गए, पर सामने एक महिला को देख बड़े निराश हुए, यह कैसे फैसला लेंगी, कैसे समाधान करेंगी? पल भर के लिए सब-कलेक्टर भी स्तब्ध हो गईं, पर कुछ

ही पल में उनके दिमाग ने काम करना शुरू किया। हाथियों पर गोली नहीं चलवा सकते, यह ठीक नहीं है। हालांकि, ऐसे मौकों पर जानवरों को मार गिराने का आदेश उन दिनों बहुत आम हुआ करता था। अचानक दिमाग में सूझा कि अगर शोर किया जाए, तो हाथी भाग सकते हैं। आदेश दिया कि जिसे जो मिले, जोर- गोर से बजाओ, सब मिलकर शोर करो। ग्रामीण टीन, बर्तन इत्यादि लेकर शोर करने लगे। वह भी ग्रामीणों के साथ शामिल हो गईं, हाथियों के दल का मुखिया शोर सुन दूर चल पड़ा। लोग खुश हुए, तो जोश और बढ़ गया। फिर क्या था, वे हाथियों को जंगल तक छोड़ आए। ताथियों की जान भी बच गई औरामीणों की समस्या का भी समाधान हो गया।

तब तमिलनाडु में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में इस खबर के साथ खुशी की लहर दौड़ गई कि एक कलेक्टर आई हैं अन्ना राजम जॉर्ज। सबने माना कि महिलाएं, भी कलेक्टर के रूप में कारगर हो सकती हैं। महिलाओं की यह में रोड़े बिछाने वाले तमाम पुरुषवादी अफसरों को भी एहसास हो गया कि आईएएस के रूप में महिलाओं की पदस्थापना गलत नहीं होगी। अन्ना को चेन्नई से नई दिल्ली तक प्रशासनिक सेवा में खूब मौके मिले और उन्होंने कभी निराश नहीं किया। अब हर साल दसियों युवतियों का चयन आईएएस के लिए होता है और अन्ना राजम जॉर्ज (1927-2018) की याद अनायास आती है।

भूलना नहीं चाहिए कि अपने देश में एक समय वह भी था, जब अन्ना राजम जॉर्ज की सेवा शतों में यह शामिल था कि अगर वह विवाह कर लेंगी, तो उनकी नौकरी चली जाएगी। ऐसी नौबत न आई। अन्ना ने जल्दी ही खुद को काबिल साबित कर दिया और अविवाहित रहने की शर्त हमेशा के लिए इतिहास हो गई ////हिंदुस्तान

07/01/2024

🛐इनसे सीखें🛐
सपनों की उम्र नहीं होती

इस बार की शख्सीयत...
रश्मि शर्मा डीएसपी

हमारे आसपास ऐसे बहुत से लोग हैं, जिनकी जिंदगी से हम अपने जीवन के लिए प्रेरणा ले सकते हैं। इस कॉलम में हम हर हफ्ते आपको मिलाएंगे कुछ ऐसी ही शख्सीयतों से

सपने देखने की कोई उम्र नहीं होती और हौसला हो, तो सपने

कभी भी पूरे किए जा सकते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की रहने वाली रश्मि शर्मा के साथ, जिन्होंने इंफोसिस की अपनी उच्च वेतन वाली नौकरी छोड़ बेटे की देखभाल करते हुए सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और अब पुलिस उपाधीक्षक यानी डीएसपी का पद हासिल किया है। आपको बता दें कि रश्मि शर्मा ने हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की है। मूल रूप से सरकाघाट की रहने वाली रश्मि का सपना था सिविल सर्विस में जाने का, लेकिन वे अपने पहले प्रयास में असफल रहीं। फिर कंप्यूटर साइंस में बीटेक करके वे एक निजी कंपनी में काम. करने लगीं, मगर अपने सपने का पीछा नहीं छोड़ा। 2011 में रश्मि की शादी हो गई। घर-परिवार, बच्चा और ऑफिस, ऐसे में किसी परीक्षा

जोशीले बोल...

• उच्च वेतन वाली नौकरी छोड़कर किसी कठिन लक्ष्य के लिए प्रयास करना आसान नहीं। लेकिन सफलता के लिए रिस्क लेना और भरपूर प्रयास करना दो जरूरी तत्व है।

दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत की बदौलत अपने सपने को साकार किया जा सकता है।

• अगर परिवार का साथ मिले, तो मुश्किल रास्ते भी आसान हो जाते हैं।

की तैयारी करना संभव तो नहीं था। इसलिए बच्चे की देखभाल के लिए उन्होंने 2020 में अपने करियर से ब्रेक लिया और इसी दौरान इन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी पर केंद्रित करने का फैसला किया। इस काम में उनके पति और ससुराल वालों ने पूरा सहयोग दिया, जिससे उन्हें परीक्षा की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करने का मौका मिला। उनके समर्पण का परिणाम ही है कि आज वे डीएसपी बन गई हैं। फीचर डेस्क

+श्रोत हिंदुस्तान फुरसत

21/05/2021

आज सुबह लगभग 11:00 बजे तहसील सहावर जनपद कासगंज में एक व्यक्ति को कुत्ते ने बहुत बुरी तरह काट लिया तभी हमारे भाई का, हरिओम चाहर उनकी मदद की और उपचार के लिए सीएससी तक पहुंचाया।।
पुलिस बाले अच्छे होते हैं।।।
#खाकी

18/05/2021

Anjan*
आज की सबसे लाज़वाब तस्वीर....
काका से पूंछा "राशन चाहिए आपको??? काका ने कहा "जरूरत नहीं है अभी , जब ना होगा बता दूंगा।"😊
मानवता को नोचने वाले गिद्धों को कुछ सीखना चाहिए। जो 500 की दवाई को 5000 में बेचने को काम कर रहे है।
चलते चलते पूंछा "मास्क???? काका ने कहा घर भूल गया। मैंने आदर से दिया उन्होंने रख लिया।🙏

18/05/2021

कोई ना दे हमें खुश रहने की दुआ, तो भी कोई बात नहीं
वैसे भी हम खुशियाँ रखते नहीं, बाँट दिया करते है...!!!
#खाकी

09/05/2021

#मातृदिवस #खाकी

हर रिश्ते में मिलावट देखी,

कच्चे रंगों की सजावट देखी,

लेकिन सालों साल देखा है मां को,

उसके चेहरे पर ना कभी थकावट देखी,

ना ममता में कभी मिलावट देखी।
मैं खाकी हूँ।

08/05/2021

कठिन वक़्त की आस हूँ,
हर वक़्त तुम्हारे पास हूँ,
बुलाओ, मैं दौड़ी आती हूँ, हाँ
मैं खाकी हूँ।
#उत्तर_प्रदेश_पुलिस

Photos from Sanjay With You's post 06/05/2021

भूख और थकान
की बात ही क्या,
कभी आहत हूँ,
कभी चोटिल हूँ,
और कभी तिरंगे में लिपटी,
रोती सिसकती छाती हूँ,
मैं खाकी हूँ।

06/05/2021


न जाने कौन तय करता हैं
जिंदगी- ए -राह,
कोई प्यार के सफर मेँ होता हैं।
कोई कर्तब्यो क़ी दौड़ लगता हैं।।

02/05/2021

मेरे असली हीरो....

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