Yogasanaup

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Photos from Yogasanaup's post 13/01/2022

ॐ #आजादी_का_अमृत_महोत्सव पर्व पर,वीर शहीदो के सम्मान में वैश्विक स्तर पर चलाए जा रहे #75करोड़_सूर्यनमस्कार अभियान की प्रस्तुति
जिला- वाराणसी



#75करोड़सूर्यनमस्कार
#योगप्रदेश_उत्तरप्रेश

03/01/2022

ओउम्।।
#सूर्यनमस्कार_एक_परिचय :-
▪︎सूर्य नमस्कार में 12 मुद्राओं में किया जाने वाला योग है।
▪︎ सूर्य नमस्कार अभ्यास से साधक का शरीर निरोग और स्वस्थ होकर तेजस्वी होता है।
▪︎सूर्य नमस्कार की इन मुद्राओं में शरीर को कमर से पूरी तरह आगे और पीछे की ओर स्ट्रेच किया जाता है।
▪︎सूर्य नमस्कार को करते समय 12 मंत्रों का उच्चरण किया जाता है।
▪︎सूर्य नमस्कार पूरे शरीर में ऑक्सीजन का संचार होता है और रक्त प्रवाह अच्छा होता है।
▪︎ब्लड प्रेशर में आरामदायक होता है,
▪︎वजन कम होता है।
▪︎ सूर्य नमस्कार करने से कई रोगों से छुटकारा मिलता है।
#सूर्य_नमस्कार_के_फायदे-
- एनर्जी लेवल बढ़ाने में मददगार
- रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
- पाचन तंत्र बेहतर रहता है
- शरीर में लचीलापन आता है
- स्मरण शक्ति मजबूत होती है
- वजन बढ़ाने के लिए कारगर
- शरीर को डिटॉक्स करता है
- त्वचा में निखार आता है
- तनाव की समस्या दूर होती है

⏩ #सूर्य_नमस्कार_की_12_मुद्राओं के मंत्र ⏬

१• ॐ #मित्राय_नमः।

२• ॐ #रवये_नमः।

३• ॐ #सूर्याय_नमः।

४• ॐ #भानवे_नमः।

५• ॐ #खगाय_नमः।

६• ॐ #पूष्णे_नमः।

७• ॐ #हिरण्यगर्भाय_नमः।

८• ॐ #मरीचये_नमः।

९• ॐ #आदित्याय_नमः।

१०• ॐ #सवित्रे_नमः।

११• ॐ #अर्काय_नमः।

१२• ॐ #भास्कराय_नमः।

ॐ #श्रीसवितृसूर्यनारायणाय_नमः।

आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने।
आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते ॥

▪︎जो लोग #प्रतिदिन_सूर्य_नमस्कार_करते हैं, उनकी आयु, प्रज्ञा, बल, वीर्य और तेज बढ़ता है।

1 #प्रणाम_मुद्रा
सूर्य नमस्‍कार की शुरुआत प्रणाम मुद्रा से होती है। इसे करने के लिए सबसे पहले सावधान की मुद्रा में खड़े होकर अपने दोनों हाथों को कंधे के समानांतर उठाते हुए दोनों हथेलियों को ऊपर की ओर ले जाए। हाथों के अगले भाग को एक-दूसरे से चिपका लीजिए फिर हाथों को उसी स्थिति में सामने की ओर लाकर नीचे की ओर गोल घूमते हुए नमस्कार की मुद्रा में खड़े हो जाइए।

2 #हस्त_उत्तानासन
सांस भरते हुए दोनों हाथों को कानों के पास सटाते हुए ऊपर की ओर स्‍ट्रेच करें और कमर से पीछे की ओर झुकते हुए भुजाओं और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं। इस आसन के दौरान गहरी और लंबी सांस भरने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है। इसके अलावा इसके अभ्यास से हृदय का स्वास्थ्य बरकरार रहता है। पूरा शरीर, फेफड़े, मस्तिष्क अधिक मात्रा में ऑक्सीजन प्राप्त करते हैं।

3 #पाद_हस्तासन
तीसरी अवस्‍था में सांस को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकिए। इस आसन में हम अपने दोनों हाथों से अपने पैर के अंगूठे को पकड़ते हैं, और पैर के टखने भी पकड़े जाते हैं। चूंकि हाथों से पैरों को पकड़कर यह आसन किया जाता है इसलिए इसे पदहस्‍तासन कहा जाता है। पाद_हस्तासन खड़े होकर किया जाता है।

5 #अश्व_संचालन_आसन
अश्व_मुद्रा को करते समय पैर का पंजा खड़ा हुआ रहना चाहिए। इस आसन को करने के लिए हाथों को जमीन पर टिकाकर सांस लेते हुए दाहिने पैर को पीछे की तरफ ले जाइए। उसके बाद सीने को आगे खीचते हुए गर्दन को ऊपर उठाएं। अश्व_मुद्रा आसन के अभ्यास के समय कमर झुके नहीं इसके लिए मेरूदंड सीधा और लम्बवत रखना चाहिए।

6 #पर्वतासन
पर्वतासन मुद्रा को । सांस को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए हुए बाएं पैर को भी पीछे की तरफ ले जाइए। ध्‍यान रखें कि आपके दोनों पैरों की एड़ियां आपस में मिली हों। नितम्ब को ऊपर उठाइए ताकि सारा शरीर केवल दोनों घुटनों के बल स्थित रहे। शरीर को पीछे की ओर खिंचाव दीजिए और एड़ियों को जमीन पर मिलाकर गर्दन को झुकाइए।

6 #अष्टांग_नमस्कार
अष्टांग स्थिति में सांस लेते हुए शरीर को जमीन के बराबर में साष्टांग दंडवत करें और घुटने, सीने और ठोड़ी को जमीन पर लगा दीजिए। जांघों को थोड़ा ऊपर उठाते हुए सांस को छोडें।

7 #भुजंगासन
भुजंगासन स्थिति में धीरे-धीरे सांस को भरते हुए सीने को आगे की ओर खींचते हुए हाथों को सीधा कीजिए। गर्दन को पीछे की ओर ले जाएं ता‍की घुटने जमीन को छूते तथा पैरों के पंजे खड़े रहें। इसे भुजंगासन भी कहते हैं।

8 #पर्वतासन
इसमें श्वास को धीरे-धीरे बाहर छोड़ते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं। दोनों पैरों की एड़ियां परस्पर मिली हुई हों। पीछे की ओर शरीर को खिंचाव दें और एड़ियों को जमीन पर मिलाने का प्रयास करें। नितम्बों को अधिक से अधिक ऊपर उठाएं।

9 #अश्व_संचालन_आसन
सांस को भरते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं। छाती को खींचकर आगे की ओर तानें। गर्दन को अधिक पीछे की ओर झुकाएं। टांग तनी हुई सीधी पीछे की ओर खिंचाव और पैर का पंजा खड़ा हुआ। इस स्थिति में कुछ समय रुकें।

10 #हस्तासन
स्थिति में सांस को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकें। हाथ गर्दन और कानों से सटे हुए और नीचे पैरों के दाएं-बाएं जमीन को स्पर्श करने चाहिए। ध्‍यान रखें कि घुटने सीधे रहें और माथा घुटनों को स्पर्श करना चाहिए। कुछ क्षण इसी स्थिति में रुकें।

11 #अर्दचक्रासन
सांस भरते हुए दोनों हाथों को ऊपर ले जाएं। इस स्थिति में हाथों को पीछे की ओर ले जाये और साथ ही गर्दन तथा कमर को भी पीछे की ओर झुकाएं अर्थात अर्धचक्रासन की मुद्रा में आ जाएं।

12 #प्रणाम_आसन
#सूर्य_नमस्कार_की_मुद्रा।
बारह मुद्राओं के बाद पुन: विश्राम की स्थिति में खड़े हो जाएं। अब सूर्य नमस्कार को पुन: करें। सूर्य नमस्कार शुरुआत में 4-5 बार करना चाहिए और धीरे-धीरे इसे बढ़ाकर 12-15 तक ले जाएं

साभार :-
कुलदीप योगी
SMC डायरेक्टर
UPYSA ( NYSF )

25/12/2021

ओउम् ।।
जय हिन्द
वन्दे मातरम् 🇮🇳
भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित #आजादी_का_अमृत_महोत्सव के उपलक्ष्य में #75करोड़_सूर्यनमस्कार का विश्व कीर्तिमान बनाने हेतु परम पूज्य योग ऋषि #स्वामी_रामदेव जी महाराज जी के आवाहन पर राष्ट्रीय योगासन खेल संघ, शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार, आयुष मंत्रालय भारत सरकार, चिकित्सा एवं खेल मंत्रालय भारत सरकार द्वारा संयुक्त रूप से किए जा रहे आयोजन में प्रतिभागिता हेतु पंजीकरण प्रक्रिया की वीडियो ...
https://youtu.be/ELyncEdknmE
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Regards :-
SMC Director
UPYSA (NYSF)

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