12/09/2026
शरीर और पेट की आंतरिक गर्मी शांत करे
इसे शहद, दूध, मलाई या ठंडे पानी के साथ लिया जा सकता है।
कामदुधा रस (Kamdudha Ras) एक प्रमुख आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से शरीर में बढ़े हुए 'पित्त दोष' को शांत करने और पेट व पाचन से जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से मुक्ता भस्म, प्रवाल भस्म, शुक्ति भस्म, शंख भस्म और गिलोय सत्त्व जैसी शीतलता प्रदान करने वाली सामग्रियां होती हैं।
कामदुधा रस के प्रमुख फायदे:
* एसिडिटी और सीने में जलन से राहत: यह पेट के अतिरिक्त एसिड (Hydrochloric acid) को बेअसर करता है, जिससे खट्टी डकारें, सीने में जलन (Heartburn) और एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याओं में तुरंत आराम मिलता है।
* पेट के छाले (Ulcers): इसके ठंडे और शामक गुणों के कारण यह पेप्टिक अल्सर और पेट की सूजन (Gastritis) को ठीक करने में मदद करता है।
* पाचन संबंधी समस्याएं: मतली (Nausea), उल्टी, पेट में ऐंठन और दस्त (Dysentery) जैसी परेशानियों को दूर करने में यह कारगर है।
* शरीर की गर्मी और जलन शांत करना: अगर हाथ-पांव में जलन, आंखों में जलन या पेशाब में जलन की समस्या हो, तो कामदुधा रस शरीर के तापमान और आंतरिक गर्मी को संतुलित करता है।
* सिरदर्द और माइग्रेन: पित्त दोष के कारण होने वाले सिरदर्द या माइग्रेन में यह सिर की गर्मी शांत कर राहत प्रदान करता है।
* मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन: शरीर और दिमाग को शीतलता प्रदान कर यह अत्यधिक गुस्सा, चिंता, चिड़चिड़ापन और अनिद्रा (Sleep disorders) को कम करने में मदद करता है।
* रक्तस्राव (Bleeding disorders): बवासीर (Piles) में खून आना, नाक से नकसीर फूटना या महिलाओं में अत्यधिक मासिक धर्म (Menorrhagia) की स्थिति में यह रक्तस्राव को रोकने में सहायक होता है।
सेवन विधि:
* सामान्य खुराक: आमतौर पर इसकी 125 mg से 250 mg की मात्रा दिन में 1-2 बार ली जाती है।
* अनुपान (किसके साथ लें): इसे शहद, दूध, मलाई या ठंडे पानी के साथ लिया जा सकता है।
ध्यान दें: किसी भी आयुर्वेदिक भस्म या औषधि का सेवन शुरू करने से पहले अपनी प्रकृति और स्थिति के अनुसार सही खुराक जानने के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक (Vaidya) की सलाह अवश्य लें।