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01/06/2022

केदारनाथ मंदिर की 100 साल पुरानी फोटो..!!

28/05/2022

A rare and vintage photo of which was called "Well of Knowledge" taken in 1870 inside the original 🎪🕉🚩

Photos from MODIfying India's post 28/05/2022

चलिए केदारनाथ धाम बाबा की नगरी के दर्शन करें
🌹हर हर महादेव 🙏

26/05/2022

Rare and Ancient Bhagwan Ganesh sculpture carved on the Rocks at Raghunandan Hills (Unakoti), Tripura.

Photos from MODIfying India's post 25/05/2022

आओ लॉजिक पर बात करते है !😊

क्या चिल्ला रहे हो ?
अंदर फुव्हारा है?

अच्छा ठीक !
पहला !
किसी बन्द स्थान पर चारों तरफ से पैक स्थान पर फुव्हारा कही और देखा है?
फुव्हारा बाग,बग़ीजो में लगा रहता है हरियाली के बीच,
फुव्हारा ऊपर से पैक का कोई दूसरा उदाहरण है?
( तस्वीर 1)

दूसरा !🔱

मान लो फुव्हारा है ,तो उसमें पानी ऊपर फेंकने की क्या व्यवस्था थी?
बिजली तो तब था नही,अब मुसलमान वास्तुकारी और महलों का उदाहरण देंगे !
ठीक !
तो उन महलों में एक काफी ऊंचे स्थान पर बड़ी सी टंकी होती थी जिसमे पानी भरे जाते थे और उसी के प्रेशर से फुव्हारा के पानी को फेका जाता था !
क्या ज्ञानवापी के मस्जिद परिसर में कोई ऐसी ऊँचाई पर स्थित टंकी है?
हा परिसर की खुदाई करवाकर ऐसी किसी पाइप को खोजा जाना चाहिए
(तस्वीर 2)

तीसरा !🙏
सबसे बड़ी बात हिन्दू धर्म मे नंदी का मुख सदैव महादेव का सामने होता है जो कि काशी विश्वनाथ मंदिर में आपको दिख जाएगा जहाँ नंदी का मुह मस्जिद परिसर की तरफ है,जाहिर से बात है वो फुव्हारा देखने के लिए नही होगा !😊
(तस्वीर 3)🔱
तस्वीर एक मे आपको हिन्दू आर्किटेक्चर की दीवाल खूब अच्छे से दिख जाएगी और गुम्बद जिस छत पर टिकी है उसे भी देखेगे तो और क्लियर होगा !

खैर कुछ दिन में और क्लियर हो जाएगा जब आपके तथाकथित फुव्हारे में से बीच मे कोई पाइप जाने जैसी सरंचना नही होगी!

हमे पता है
इसके बाद भी आप कुतर्क करेगें !

23/05/2022

बंगाल की अदीना मस्जिद के अंदर का दृश्य।

Photos from MODIfying India's post 23/05/2022

न्यूज़ चैनल Aaj Tak, India Today, Zee News के एंकर अब स्टूडियों में रचित एनिमेटेड मंदिरों को भी आदर सम्मान देने लगे हैं।

तीनों अलग अलग न्यूज चैनल हैं और एंकर्स के पैर में जूते या चप्पल नहीं हैं। अच्छा लगा देख कर। झुकती है दुनिया बस झुकाने वाला चाहिए।

यह हिंदुओं के जागने और हिन्दुओ की एकजुटता का ही परिणाम है कि अब आस्थाओं का सम्मान शुरू हो गया है ।

हर हर महादेव❣️
#वाराणसी

23/05/2022

#आपको_ताजमहल_अजूबा_लगता_है,तो यह पढ़िए बारिश की पूर्व सूचना देता है कानपुर का जगन्नाथ मंदिर ।

क्या आप कल्पना कर सकते हैं किसी ऐसे भवन की जिसकी छत चिलचिलाती धूप में टपकने लगे बारिश की शुरुआत होते ही जिसकी छत से पानी टपकना बंद हो जाए

ये घटना है तो हैरान कर देने वाली लेकिन सच है उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कहे जाने वाले कानपुर जनपद के भीतरगांव विकास खंड से ठीक तीन किलोमीटर की दूरी पर एक गांव है बेहटा

यहीं पर है धूप में छत से पानी की बूंदों के टपकने और बारिश में छत के रिसाव के बंद होने का रहस्य

यह घटनाक्रम किसी आम ईमारत या भवन में नहीं बल्कि यह होता है भगवान जगन्नाथ के अति प्राचीन मंदिर में
छत टपकने से हो जाती है बारिश की आहट -

ग्रामीण बताते हैं कि बारिश होने के छह-सात दिन पहले मंदिर की छत से पानी की बूंदे टपकने लगती हैं इतना ही नहीं जिस आकार की बूंदे टपकती हैं उसी आधार पर बारिश होती है

अब तो लोग मंदिर की छत टपकने के संदेश को समझकर जमीनों को जोतने के लिए निकल पड़ते हैं हैरानी में डालने वाली बात यह भी है कि जैसे ही बारिश शुरु होती है छत अंदर से पूरी तरह सूख जाती है

वैज्ञानिक भी नहीं जान पाए रहस्य -
मंदिर की प्राचीनता व छत टपकने के रहस्य के बारे में मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पुरातत्व विशेषज्ञ एवं वैज्ञानिक कई दफा आए लेकिन इसके रहस्य को नहीं जान पाए हैं अभी तक बस इतना पता चल पाया है कि मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य 11वीं सदी में किया गया

मंदिर की बनावट बौद्ध मठ की तरह है। इसकी दिवारें 14 फीट मोटी हैं जिससे इसके सम्राट अशोक के शासन काल में बनाए जाने के अनुमान लगाए जा रहे हैं वहीं मंदिर के बाहर मोर का निशान व चक्र बने होने से चक्रवर्ती सम्राट हर्षवर्धन के कार्यकाल में बने होने के कयास भी लगाए जाते हैं लेकिन इसके निर्माण का ठीक-ठीक अनुमान अभी नहीं लग पाया है

भगवान जगन्नाथ का यह मंदिर अति प्राचीन है मंदिर में भगवान जगन्नाथ बलदाऊ व सुभद्रा की काले चिकने पत्थरों की मूर्तियां विराजमान हैं प्रांगण में सूर्यदेव और पद्मनाभम की मूर्तियां भी हैं जगन्नाथ पुरी की तरह यहां भी स्थानीय लोगों द्वारा भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकाली जाती है लोगों की आस्था मंदिर के साथ गहरे से जुड़ी है लोग दर्शन करने के लिए आते रहते हैं ।🥰🥰

23/05/2022

भारत के बड़े नक्शे और श्रीलंका के मध्य जो नीले रंग का बिंदु दिख रहा ना ये सभी फोटोज वही की है। श्रीलंका करीब 15 किलोमीटर ही दूर है यहां से।
धनुष्कोडी से 4 किलोमीटर आगे अरिचल मुनई आजू बाजू सिर्फ समंदर तेज़ चलती हुई हवा और हवा के साथ उड़ती रेत।
वैसे इस जगह को घोस्ट टाउन भी कहते है अरे भाई जहां इंसान रह ही नही सकते वहां भूत रहते होंगे ना।
रामेश्वरम जाय तो समय निकाल कर 20 किलोमीटर का यह सफर जरूर तयः करें जिंदगी में अहसास होगा कि ऐसी जगह भी है जहां शौक से हम जाते है पर जितनी जल्दी हो वापस लौटने की सोचने लगते है ना जाने कोई बड़ी लहर आये तो आजू बाजू चारों ओर कही भागने का रास्ता भी नही बचेगा।

23/05/2022

एक ऐसा मंदिर जिसे इंसानों ने नहीं बल्कि भूतों ने बनाया था? भगवान शिव का प्राचीन मंदिर । मुस्लिम शासकों ने इसे तोड़ने के लिए गोले तक दागे, लेकिन ग्वालियर चंबल अंचल के बीहड़ों में बना सिहोनिया का ककनमठ मंदिर आज भी लटकते हुए पत्थरों से बना हुआ है । चंबल के बीहड़ में बना ये मंदिर 10 किलोमीटर दूर से ही दिखाई देता है. जैसे-जैसे इस मंदिर के नजदीक जाते हैं इसका एक एक पत्थर लटकते हुए भी दिखाई देने लगता है. जितना नजदीक जाएंगे मन में उतनी ही दहशत लगने लगती है. लेकिन किसी की मजाल है, जो इसके लटकते हुए पत्थरों को भी हिला सके. आस-पास बने कई छोटे-छोटे मंदिर नष्ट हो गए हैं, लेकिन इस मंदिर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. मंदिर के बारे में कमाल की बात तो यह है कि जिन पत्थरों से यह मंदिर बना है, आस-पास के इलाके में ये पत्थर नहीं मिलता है.

इस मंदिर को लेकर कई तरह की किवदंतियां हैं. पूरे अंचल में एक किवदंती सबसे ज्यादा मशहूर है कि मंदिर का निर्माण भूतों ने किया था. लेकिन मंदिर में एक प्राचीन शिवलिंग विराजमान है, जिसके पीछे यह तर्क दिया जाता है कि भगवान शिव का एक नाम भूतनाथ भी है. भोलेनाथ ना सिर्फ देवी-देवताओं और इंसानों के भगवान हैं बल्कि उनको भूत-प्रेत व दानव भी भगवान मानकर पूजते हैं. पुराणों में लिखा है कि भगवान शिव की शादी में देवी-देवताओं के अलावा भूत-प्रेत भी बाराती बनकर आए थे और इस मंदिर का निर्माण भी भूतों ने किया है.

कहा जाता है कि रात में यहां वो नजारा दिखता है, जिसे देखकर किसी भी इंसान की रूह कांप जाएगी. ककनमठ मंदिर का इतिहास करीब एक हज़ार साल हजार पुराना है. बेजोड़ स्थापत्य कला का उदाहरण ये मंदिर पत्थरों को एक दूसरे से सटा कर बनाया गया है. मंदिर का संतुलन पत्थरों पर इस तरह बना है कि बड़े-बड़े तूफान और आंधी भी इसे हिला नहीं पाई. कुछ लोग यह मानते हैं कि कोई चमत्कारिक अदृश्य शक्ति है जो मंदिर की रक्षा करती है. इस मंदिर के बीचो बीच शिव लिंग स्थापित है. 120 फीट ऊंचे इस मंदिर का उपरी सिरा और गर्भ गृह सैकड़ों साल बाद भी सुरक्षित है.

इस मंदिर को देखने में लगता है कि यह कभी भी गिर सकता है.. लेकिन ककनमठ मंदिर सैकडों सालों से इसी तरह टिका हुआ है यह एक अदभुत करिश्मा है. इसकी एक औऱ ये विशेषता है..कि इस मंदिर के आस पास के सभी मंदिर टूट गए हैं , लेकिन ककनमठ मंदिर आज भी सुरक्षित है. मुरैना में स्थित ककनमठ मंदिर पर्यटकों के लिए विशेष स्थल है. यहां की कला और मंदिर की बड़ी-बड़ी शिलाओं को देख कर पर्यटक भी इस मंदिर की तारीफ करने से खुद को नहीं रोक पाते. मंदिर की दीवारों पर देवी-देवताओं की प्रतिमायें पर्यटकों को खजुराहो की याद दिलाती हैं. मगर प्रशासन की उपेक्षा के चलते पर्यटक यदा-कदा यहां आ तो जाते हैं.

19/05/2022

यह आंध्रप्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के रविवल्सा गांव में 20 मीटर ऊंचा और 3 मीटर चौड़ा स्वयंभू शिवलिंग है। यह शिवलिंग त्रेतायुग का बताया जाता है। यह सदियों से लगातार बढ़ रहा है।

हर हर महादेव...🙏🌺🙏

18/05/2022

अगर घर के बगल में लगातार पानी बह रह हो तो घर के दीवारों में दरार आ जाती है या दीवार खराब होने लगती है, लेकिन 1700 सालों से यह मंदिर पानी में डूबा हुआ है और नदी की धारा भी उसके बगल से ही होकर बहती है, फिर भी मंदिर को कुछ भी नही हुआ है, न जाने कौन सी तकनीक से यह मंदिर बनाया गया है।

घटारानी देवी मंदिर , छत्तीसगढ़

मै यहां कभी गया तो नहीं हूं लेकिन एक बार जाऊंगा जरूर ..

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