*पायी चालण्याचे हे फायदे वाचून व्हाल थक्क!*
अनेकजण सांगतात की, पायी चालल्याचे अनेक फायदे आहेत. अनेकजण चालण्याचे फायदे माहीत असूनही चालणे टाळतात. पण आजच्या लाइफस्टाइलमध्ये चालणे फारच गरजेचे झाले आहे. नुकत्याच करण्यात आलेल्या एका अभ्यासातून समोर आले आहे की, वेगात चालण्याने डिप्रेशनपासून मुक्ती मिळते. वेगात चालण्याने रुग्णालयात अॅडमिट होण्याची आणि तिथे जास्त काळ राहावं लागण्याची भीती कमी होते.
हळू चालणा-यांच्या तुलनेत वेगाने चालणा-यांची तीन वर्षात रुग्णालयात अॅडमिट होण्याची 37 टक्के शक्यता कमी आढळली आहे. चालणे वयोवृद्धांमध्ये अधिक लोकप्रिय आहे. तरुणांनी पण याचा फायदा घ्यावा. हा व्यायाम एकही पैसा खर्च न करता आणि कोणत्याही प्रशिक्षणाशिवाय केला जाऊ शकतो.
*वेगाने चालण्याचे फायदे -*
*1)* आठवड्यातून 2 तास चालण्याने ब्रेन स्ट्रोक शक्यता 30 टक्के कमी होते.
*2)* रोज 30 ते 60 मिनिटे पायी चालण्याने हार्ट अटॅकची शक्यता कमी असते.
*3)* रोज 30 ते 40 मिनिटे पायी चालल्याने मधुमेहाचा धोका 29 टक्के कमी होतो.
*4)* दिवसातून 30 मिनिटे पायी चालल्याने डिप्रेशनची शक्यता 36 टक्के कमी असते.
*5)* रोज कमीत कमी १ तास पायी चालल्याने जाडेपणा कमी होतो.
*6)* सकाळी चालण्यामुळे सकाळच्या वातावरणातील शुद्ध ऑक्सिजनचा शरीराला पुरवठा होतो.
*7)* हाडांच्या मजबुतीसाठी आवश्यक असलेले डी जीवनसत्त्व सकाळच्या कोवळ्या उन्हातून मिळते.
*8)* चालण्यामुळे एकाच वेळी शारीरिक व मानसिक व्यायामही होतो.
*9)* सतत काम करून तन-मनाला आलेला थकवाही चालण्यामुळे दूर होतो.
*10)* चालण्यामुळे तणाव आणि चिडचिडपणा दूर होण्यास मदत.
*11)* चालण्यामुळे झोपही चांगली लागते.
*12)* मन एकाग्रतेसाठी व चिंतनासाठीही चालणे फायदेशीर ठरते.
*13)* वजन कमी करायचे असल्यास हा व्यायामप्रकार उत्तम.
*14)* चालण्यामुळे शरीरातील जास्तीचे उष्मांक जाळते.
*15)* चालण्यामुळे शरीरातील चरबीचे प्रमाण कमी करते.
*16)* दररोज एक तास चालल्यास संधिवाताचा त्रास कमी होऊ शकतो, असं संशोधनातून समोर आलंय.
*17)* चालण्यामुळे पचनक्रिया सुधारते, मलबद्धतेसारखे, पचनाचे विकार कमी होतात.
*18)* झपझप चालण्यामुळे हृदयाची गती वाढतो.
*19)* नियमित चालण्याची सवय असणारयांमध्ये ह्रदयविकाराने मृत्यू येण्याचे प्रमाण ५० टक्के पेक्षा कमी असते.
*20)* नियमित चालण्याने फुप्फुसाची कार्यक्षमता वाढते.
*21)* नियमित चालण्यामुळे पाठीचे दुखणे, हृदयरोग, मधुमेह, उच्च रक्तदाब, श्वासाच्या त्रासावर नियंत्रण मिळवता येते.
*22)* नियमित चालण्यामुळे चयापचय संस्था सुधारते. अंतस्त्रावी ग्रंथीचे कार्य सुधारते.
*23)* हाडांची मजबुतीही चालण्यामुळे वाढते.
*24)* नियमित चालण्यामुळे कंबर, मांड्या, पायाचे स्नायू मजबूत होतात.
*25)* मोतीबिंदूची शक्यता कमी होते.
*26)* नियमित चालण्यामुळे काही विशिष्ट प्रकारच्या कॅन्सर पासून बचाव होतो.
*27)* नियमित चालण्यामुळे रोगप्रतिकारक शक्ती मजबूत करण्यासाठी उपयोग.
*28)* चालण्यातून नैराश्याची पातळी खाली येण्यास मदत तर होते.
*29)* दररोज ३० मिनिटे नियमित चालण्यामुळे सरासरी आयुष्य ३ वर्षांनी वाढते.
*30)* नियमित चालणे ही दीर्घायुष्याची गुरुकिल्ली आहे.
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कौन-सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या-क्या लाभ और हानि होती है ?
सोना
सोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, शक्तिशाली और मजबूत बनते हैं, और साथ-साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ाता है।
चाँदी
चाँदी एक ठण्डी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठण्डक पहुँचाती है। शरीर को शांत रखती है इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आखें स्वस्थ रहती हैं, आँखों की रौशनी बढ़ती है, और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है।
काँसा
काँसे के बर्तन में भोजन करने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी वस्तु नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजें इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है, जो नुकसान देती है। काँसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल 3 प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।
ताँबा
ताँबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर सम्बन्धी समस्या दूर होती है, ताँबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है, इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है, ताँबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है।
पीतल
पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती। पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल 7 प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं।
लोहा
लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से शरीर की शक्ति बढ़ती है, लोहतत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ाता है। लोहा कई रोगों को खत्म करता है, पाण्डुरोग मिटाता है, शरीर में सूजन और पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है। लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।
स्टील
स्टील के बर्तन नुक्सान दायक नहीं होते क्योंकि ये न तो गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से इसलिए नुक्सान नहीं होता है इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी नहीं पहुँचता।
एलुमिनियम
एल्युमिनियम बोक्साईट का बना होता है। इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है। यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे हड्डियाँ कमजोर होती हैं, मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुँचती है। उसके साथ-साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है। एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। एलुमिनियम का प्रयोग अंग्रेजों ने कैदियों के लिए किया था कि इसके बने बर्तनों में भोजन करने से ये कैदी रोगी होकर मर जायँ।
मिट्टी
मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में समय थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त है, मिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे 100 प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है।
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26/07/2017
26/06/2016
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15/06/2016
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