Shorts Masala
Bored with the daily life??come here and make a change..
27/06/2015
भारत का प्रतिभा पलायन (brain drain )
जब अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन रिटायर हो रहे थे तो राष्ट्रपति के तौर पर अपने अंतिम भाषण में उन्होंने कहा कि " सोवियत संघ के ख़त्म होने के बाद हमारे दो ही दुश्मन बचे हैं, एक चीन और दूसरा भारत " | रोनाल्ड रीगन के बाद जो राष्ट्रपति आये उसने जो पहले दिन का भाषण दिया संसद में, उसमे उसने कहा कि "मिस्टर रोनाल्ड रीगन ने अपने आर्थिक और विदेश नीति के बारे में जो वक्तव्य दिया, उसी पर हमारी सरकार काम करेगी " | अमेरिका में क्या होता है कि राष्ट्रपति कोई भी हो जाये, नीतियाँ नहीं बदलती, तो रोनाल्ड रीगन ने जो कहा जॉर्ज बुश, बिल क्लिंटन, जोर्ज बुश और ओबामा उसी राह पर चले और आगे आने वाले राष्ट्रपति उसी राह पर चलेगे अगर अमेरिका की स्थिति यही बनी रही तो |
तो दुश्मन को बर्बाद करने के कई तरीके होते हैं और अमेरिका उन सभी तरीकों को भारत पर आजमाता है | अमेरिका जो सबसे खतरनाक तरीका अपना रहा है हमको बर्बाद करने के लिए और वो हमको समझ में नहीं आ रहा है, खास कर पढ़े लिखे लोगों को | अमेरिका ने एक ऐसा जाल बिछाया है जिसके अंतर्गत भारत में जितने भी अच्छे स्तर के प्रतिभा हो उसको अमेरिका खींच लो, भारत में मत रहने दो | अब इसके लिए अमेरिका ने क्या किया है कि हमारे देश के अन्दर जितने बेहतरीन तकनीकी संस्थान हैं, जैसे IIT, IIM, AIIMS, आदि, उनमे से जितने अच्छे प्रतिभा हैं वो सब अमेरिका भाग जाते हैं |
अमेरिका ने और युरोप के देशों ने अपने यहाँ के ब्रेन ड्रेन (प्रतिभा पलायन) को रोकने के लिए तमाम तरह के नियम बनाए हैं और उनके यहाँ अलग अलग देशों में अलग अलग कानून हैं कि कैसे अपने देश की प्रतिभाओं को बाहर जाने से रोका जाये | उधर अमेरिका और यूरोप के अधिकांश देशों में ये परंपरा है कि आपको कमाने के लिए अगर विदेश जाना है तो फ़ौज की सर्विस करनी पड़ेगी, सीधा सा मतलब ये है कि आपको बाहर नहीं जाना है और उन्ही देशो में ये गोल्डेन रुल है कि अगर उनके यहाँ बहुतायत में ऐसे लोग होंगे तो ही उनको बाहर जाने देने के लिए अनुमति के बारे में सोचा जायेगा | और दूसरी तरफ तीसरी दुनिया (3rd World Countries) मे जो सबसे अच्छे दिमाग है उन्हें सस्ते दाम मे खरीदने के लिए उन्होने दूसरे नियम भी बनाए | हमारे देश का क्रीम (दिमाग के स्तर पर) उन्हे सस्ते दाम मे मिल सके इसके लिए हमारे यहाँ IIT खोले गये, ये जो IIT खड़े हुए हैं हमारे देश मे वो एक अमेरिकी योजना के तहत हुई थी |
हमारे देश का क्रीम (दिमाग के स्तर पर) उन्हे सस्ते दाम मे मिल सके इसके लिए अमेरिका ने एक योजना के तहत आर्थिक सहायता दी थी IIT खोलने के लिए | आप पूछेंगे कि अमेरिका हमारे यहाँ IIT खोलने के लिए पैसा क्यों लगाएगा ? वो अपने यहाँ ऐसे संस्थान नहीं खोल लेगा ? क्यों नहीं खोल लेगा बिलकुल खोल लेगा लेकिन वैसे संस्थान से इंजिनियर पैदा करने मे उसे जो खर्च आएगा उसके 1/6 खर्च मे वो यहाँ से इंजिनियर तैयार कर लेगा | और इन संस्थानों में पढने वाले विद्यार्थियों का दिमाग ऐसा सेट कर दिया जाता है कि वो केवल अमेरिका/युरोप की तरफ देखता है | उनके लिए पहले से एक माहौल बना दिया जाता है, पढ़ते-पढ़ते | और माहौल क्या बनाया जाता है कि जो प्रोफ़ेसर उनको पढ़ाते हैं वहां वो दिन रात एक ही बात उनके दिमाग में डालते रहते हैं कि "बोलो अमेरिका में कहाँ जाना है" तो वो विद्यार्थी जब पढ़ के तैयार होता है तो उसका एक ही मिशन होता है कि "चलो अमेरिका" | IITs मे जो सिलेबस पढाया जाता है वो अमेरिका के हिसाब से तैयार होता है, कभी ये देश के अंदर इस्तेमाल की कोशिश करें तो 10% से 20% ही इस देश के काम का होगा बाकी 80% अमेरिका/युरोप के हिसाब से होगा |
मतलब कि ये पहले से ही व्यवस्था होती है कि हमारे यहाँ के बेहतरीन दिमाग अमेरिका जाएँ | ये सारी की सारी सब्सिडी अमेरिका की तरफ से हमारे IITs को मिलती है नहीं तो IIT से बी.टेक. करना इतना सस्ता नहीं होता | इस तरह से हमारा हर साल ब्रेन ड्रेन से 25 अरब डॉलर का नुकसान होता है और अमेरिका को अपने देश की तुलना मे इंजिनियर 1/3 सस्ते दाम मे मिल जाते हैं. क्योंकि हमारा मुर्ख दिमाग़ बहुत जल्दी डॉलर्स को रूपये मे बदलता है | इस तरह से अमेरिका हर साल अपना 150-200 अरब डॉलर बचाता है. और हम…………………. अब आप कहेंगे की हम क्यों नहीं ब्रेन ड्रेन रोकने के लिए क़ानून बनाते हैं ? तो हमारे नेताओं को डर है कि जो रिश्वत उन्हे हर साल मिलता है वो बंद हो जाएगा और IIT को जो अमेरिकी धन मिलता है वो भी रोक दिया जाएगा | इस तरह से हमारे यहाँ का बेहतरीन दिमाग अमेरिका चला जाता है और हमारे यहाँ तकनीकी क्षेत्र में पिछड़ापन ही फैला रहता है | अमेरिका को घाटा ये हुआ है कि उसके इंटेलेक्ट मे काफ़ी कमी आई है पिछले 25 सालों मे | आप अमेरिकी विश्वविद्यालयों के टॉपर्स की सूचि उठा के देखेंगे तो वहाँ टॉपर या तो एशियन लड़के/लड़कियां हो रहे हैं या लैटिन अमेरिकन | खैर अमेरिका से हमे तो कुछ लेना है नहीं | और अब ये हो रहा है की वहाँ के लोग भी एशियाई प्रतिभा का विरोध करने लगे हैं |
इसी तरह हमारे संस्थान यहाँ सबसे अच्छे डॉक्टर निकालते हैं एम्स में से या किसी और अच्छे संस्थान से तो वो भी अमेरिका भागने को तैयार होते है | इसी तरह आईआईएम से निकलने वाले सबसे बेहतरीन विद्यार्थी भी अमेरिका भागने को तैयार होते हैं | तो अमेरिका ने एक जाल फ़ेंक रखा है, जैसे शिकारी फेंकता है कि हर वो अच्छी प्रतिभा जो कुछ कर सकता है इस देश में रहकर अपने राष्ट्र के लिए, अपने समाज के लिए, वो भारत से अमेरिका भाग जाता है |
इसको तकनीकी भाषा में आप ब्रेन ड्रेन कहते है, मैं उसे भारत की तकनीकी का सत्यानाश मानता हूँ, क्योंकि ये सबसे अच्छा दिमाग हमारे देश में नहीं टिकेगा तब तो हमारी तकनीकी इसी तरह हमेशा पीछे रहती जाएगी | आप सीधे समझिये न कि जो विद्यार्थी पढ़कर तैयार हुआ, वही विद्यार्थी अगर भारत में रुके तो क्या-क्या नहीं करेगा अपने दिमाग का इस्तेमाल कर के, लेकिन वो दिमाग अगर यहाँ नहीं रुकेगा, अमेरिका चला जायेगा तो वो जो कुछ करेगा, अमेरिका के लिए करेगा, अमरीकी सरकार के लिए करेगा और हम बेवकूफों की तरह क्या मान के बैठे जाते हैं कि "देखो डॉलर तो आ रहा है", अरे डॉलर जितना आता है उससे ज्यादा तो नुकसान हो जाता है और हमको क्या लगता है कि अमेरिका जाने से ज्यादा रुपया मिलता है, हम हमेशा बेवकूफी का हिसाब लगाते हैं, आज अमेरिका का एक डॉलर 55 रूपये के बराबर है और किसी को 100 डॉलर मिलते हैं तो कहेंगे कि 5500 रुपया मिल रहा है | अरे, उनके लिए एक डॉलर एक रूपये के बराबर होता है और वहां खर्च भी उसी अनुपात में होता है | हम कभी दिमाग नहीं लगाते, हमेशा कैल्कुलेसन करते हैं |
आज उनका एक डॉलर 55 रूपये का है, कल 70 का हो जायेगा या कभी 100 रूपये का हो जायेगा तो हमारा हिसाब उसी तरह लगता रहेगा | उस हिसाब को हम जोड़ते हैं तो लगता है कि बड़ा भारी फायदा है लेकिन वास्तव में है उसमे नुकसान | यहाँ लगभग 10 लाख रूपये में एक इंजिनियर तैयार किया जाता है इस उम्मीद में कि समय आने पर वो राष्ट्र के काम में लगेगा, देश के काम में लगेगा, राष्ट्र को सहारा देगा, वो अचानक भाग के अमेरिका चला जाता है, तो सहारा तो वो अमेरिका को दे रहा है और अमेरिका कौन है तो वो दुश्मन है, तो दुश्मन को हम अपना दिमाग सप्लाई कर रहे हैं |
हमारे यहाँ से आजकल जो लड़के लड़कियां वहां जा रहे हैं उनको वहाँ कच्चा माल कहा जाता है और उनके सप्लाई का धंधा बहुत जोरो से चल रहा है | ऐसे ही सॉफ्टवेर इंजिनियर के रूप में बॉडी शोपिंग की जा रही है और वहां इन सोफ्टवेयर इंजिनियर लोगों का जो हाल है वो खाड़ी देशों (Middle East) में जाने वाले मजदूरों से भी बदतर है | जैसे हमारे यहाँ रेलों में 3 टायर होते हैं वैसे ही 5 टायर, 6 टायर के बिस्तर वाले कमरों में ये रहते हैं | अमेरिका दुश्मन है और उसी दुश्मन की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के काम में हमारे देश के लोग लगे हैं |
आप बताइए कि इससे खुबसूरत दुष्चक्र क्या होगा कि आपका दुश्मन आपको ही पीट रहा है आपकी ही गोटी से | अमेरिका कभी भी इस देश की तकनीकी को विकसित नहीं होने देना चाहता | इस देश के वैज्ञानिक यहाँ रुक जायेंगे, इंजिनियर यहाँ रुक जायेंगे, डॉक्टर यहाँ रुकेंगे, मैनेजर यहाँ रुकेंगे तो भारत में रुक कर कोई ना कोई बड़ा काम करेंगे, वो ना हो पाए, इसलिए अमेरिका ये कर रहा है | और अमेरिका को क्या फायदा है तो उनको सस्ती कीमत पर अच्छे नौकर काम करने को मिल जाते हैं |
हमारे यहाँ के इंजिनियर, डॉक्टर, मैनेजर कम पैसे पर काम करने को तैयार हैं वहां पर और वो भी ज्यादा समय तक | यहाँ अगर किसी लड़के को कहो कि 10 बजे से शाम 5 बजे तक काम करो तो मुंह बनाएगा और वहां अमेरिका में सवेरे 8 बजे से रात के 8 बजे तक काम करता है तो तकलीफ नहीं होती है | कोई भी भारतीय अमेरिका गया है तो वो सवेरे सात बजे से लेकर रात के आठ बजे तक काम ना करे तो उसको जिंदगी चलानी भी मुश्किल है |
और अमेरिका में भारत के लोगों के साथ कैसा व्यव्हार होता है ये भी जान लीजिये, अमेरिका मे यहाँ के लोगों को हमेशा दूसरी या तीसरी श्रेणी के नागरिक के तौर पर ही गिना जाता है | हम यहाँ बहुत खुश होते हैं की कोई भारतीय इस पद पर है या उस पद पर है लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और होती है | हमारे यहाँ के लोग कितने ही बुद्धिशाली हो या कितने ही बेसिक रिसर्च का काम किए हो लेकिन उनको कभी भी Higher Authority नहीं बनाया जाता है वहां, मतलब उनका बॉस हमेशा अमेरिकन ही रहेगा चाहे वो कितना ही मुर्ख क्यों ना हो | आनंद मोहन चक्रवर्ती का क्या हाल हुआ सब को मालूम होगा, पहले वो यहाँ CSIR मे काम करते थे, अमेरिका मे बहुत जल्दी बहुत नाम कमाया लेकिन जिस जगह पर उन्हे पहुचना चाहिए था वहाँ नहीं पहुच पाए, हरगोबिन्द खुराना को कौन नहीं जानता आपको भी याद होंगे, उनको भी कभी अपने संस्थान का निदेशक नहीं बनाया गया | नवम्बर 2011 में उनकी मृत्यु हो गयी, कितने अमरीकियों ने उनकी मृत्यु पर दुःख जताया और भारत के लोगों को तो हरगोबिन्द खुराना का नाम ही नहीं मालूम है, अपनी जमीन छोड़ने से यही होता है | ऐसे बहुत से भारतीय हैं, इन प्रतिभाशाली लोगों के बाहर चले जाने से हमे क्या घाटा होता है, जानते हैं आप ? हम फंडामेंटल रिसर्च मे बहुत पीछे चले जाते हैं, जब तक हमारे देश मे बेसिक रिसर्च नहीं होगी तो हम अप्लाइड फील्ड मे कुछ नहीं कर सकते हैं, सिवाए दूसरो के नकल करने के | मतलब हमारा नुकसान ही नुकसान और अमेरिका और युरोप का फायदा ही फायदा |
सबसे बड़ी बात क्या है, हमारे देश मे सबसे बड़ा स्किल्ड मैंन पावर है चीन के बाद, हमारे पास 65 हज़ार वैज्ञानिक हैं, दुनिया के सबसे ज़्यादा इंजिनियरिंग कॉलेज हमारे देश मे हैं, अमेरिका से 4-5 गुना ज़्यादा इंजिनियरिंग कॉलेज हैं भारत मे, अमेरिका से ज़्यादा हाई-टेक रिसर्च इन्स्टिट्यूट हैं भारत मे, अमेरिका से ज़्यादा मेडिकल कॉलेज हैं भारत मे, हमारे यहाँ पॉलिटेक्निक, ITI की संख्या ज़्यादा है, नॅशनल लॅबोरेटरीस 44 से ज़्यादा हैं जो CSIR के कंट्रोल मे हैं, इतना सब होते हुए भी हम क्यों पीछे हैं ? हम क्यों नहीं नोबेल पुरस्कार विजेता पैदा कर पाते ?
हमारी सबसे बड़ी कमी क्या है कि हम किसी भी आदमी को उसके डिग्री या पोस्ट से मापते हैं | हमारा सारा एजुकेशन सिस्टम डिग्री के खेल मे फँसा हुआ है इसलिए कई बार बिना डिग्री के वैज्ञानिक हमारे पास होते हुए भी हम उनका सम्मान नहीं कर पाते, उनको जो इज्ज़त मिलनी चाहिए वो हम नहीं दे पाते | जहाँ नोबेल पुरस्कार विजेता पैदा हो रहे हैं वहाँ की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह डिग्री से बाहर है | हमारे यहाँ जो शिक्षा व्यवस्था है वो अँग्रेज़ों के ज़माने का है उन्होने ही डिग्री और इंटेलेक्ट को जोड़ के हमारे सारे तकनीकी संरचना (टेक्नोलॉजिकल इनफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम) को बर्बाद कर दिया | अँग्रेज़ों के ज़माने मे ये नियम था कि अगर आप उनके संस्थानों से डिग्री ले के नहीं निकले हैं तो आपकी पहचान नहीं होगी |
चुकी उनके संस्थानों से कोई डिग्री लेता नहीं था तो उनकी पहचान नहीं होती थी | बाद मे उनके यहाँ से डिग्री लेना शुरू हुआ और आप देखते होंगे कि हमारे यहाँ बहुत से बैरिस्टर हुए उस ज़माने मे जिन्होंने लन्दन से बैरिस्टर की डिग्री ली थी | उनके तकनीकी संस्थाओं मे अगर आप चले जाएँ डिग्री लेने के लिए तो पढाई ऐसी होती थी की आप कोई बेसिक रिसर्च नहीं कर सकते थे, और संस्थान से बाहर रह के रिसर्च कर सकते हैं तो आपके पास डिग्री नहीं होगी और आपके पास डिग्री नहीं है तो आपका रेकग्निशन नहीं है | हमारे देश में बहुत सारे उच्च शिक्षा के केंद्र रहे 1840 -1850 तक लेकिन अंग्रेजों की नीतियों की वजह से सब की सब समाप्त हो गयी और हमारे देश में किसी भी शासक ने इसे पुनर्स्थापित करने का नहीं सोचा | और उन Higher Learning Institutes में ऐसे ऐसे विषय पढाये जाते थे जो आज भी भारत में तो कम से कम नहीं ही पढाया जाता है |
आपने धैर्यपूर्वक पढ़ा इसके लिए धन्यवाद् और अच्छा लगे तो इसे फॉरवर्ड कीजिये, आप अगर और भारतीय भाषाएँ जानते हों तो इसे उस भाषा में अनुवादित कीजिये (अंग्रेजी छोड़ कर), अपने अपने ब्लॉग पर डालिए, मेरा नाम हटाइए अपना नाम डालिए मुझे कोई आपत्ति नहीं है | मतलब बस इतना ही है की ज्ञान का प्रवाह होते रहने दीजिये |
27/06/2015
सोशल वेबवाइट FB यानी facebook चलाने वालों मे एक फीसदी लोगों को भी यह पता नहीं होगा कि इसके फाउंडर मार्क जुकरबर्ग नहीं बल्कि अप्रवासी भारतीय दिव्य नरेंद्र है। दिव्य नरेंद्र हिंदुस्तानियों के लिए ज्यादा जाना-पहचाना नाम नहीं है।
महज 29 साल के दिव्य नरेंद्र अमरीका में रहने वाले अप्रावासी भारतीय हैं। उनके माता-पिता काफी समय पहले से अमरीका में ही आ बसे हैं। दिव्य का जन्म 18 मार्च 1982 को न्यूयार्क में हुआ था। जाहिर है कि दिव्य के पास भी अमरीकी नागरिकता है।पेशे से उनके माता-पिता डॉक्टर हैं। परंपरावादी। अंतर्मुखी। दूसरे भारतीय माता-पिता की तरह वे भी दिव्य को डॉक्टर बनाना चाहते थे, पर दिव्य को यह मंजूर नहीं था। उनके अंदर एक एंटरप्रिन्योर बनने का सपना था। तमाम संघर्षों से जूझते हुए वह ऐसा करने में सफल भी हुए।और 2008 के अमेरिकी कोर्ट के फैसले के बाद यह बात पक्की भी हो गई कि दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक का आइडिया दिव्य नरेंद्र का था।
दरअसल फेसबुक का जन्म हॉर्वर्ड कनेक्शन सोशल साइट की निर्माण प्रक्रिया के दौरान हुआ। दिव्य हॉर्वर्ड कनेक्शन प्रॉजेक्ट पर काफी आगे बढ़ चुके थे। उसके लंबे समय बाद जुकरबर्ग मौखिक समझौते के तहत उसमें शामिल हुए। पूरी चालाकी से उन्होंने इस प्रॉजेक्ट को हाईजैक कर लिया और बाद में बाकायदा फेसबुक नाम से डोमेन रजिस्टर्ड कर उस प्रॉजेक्ट को अमली जामा पहना दिया। इस बीच दिव्य और उनके सहयोगियों की जुकरबर्ग से तीखी नोकझोंक हुई। यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने मामले में हस्तक्षेप किया और दिव्य को कोर्ट जाने की सलाह दी।
दिव्य ने जुकरबर्ग के खिलाफ 2004 में अमेरिका की एक अदालत में मुकदमा कर दिया। फैसला दिव्य और उनके दोस्तों के पक्ष में आया। जुकरबर्ग को हर्जाने के तौर पर 650 लाख डॉलर चुकाने पड़े, लेकिन दिव्य इससे संतुष्ट नहीं हुए। उनका तर्क था कि उस समय फेसबुक के शेयरों की जो बाजार में कीमत थी, उन्हें उसके हिसाब से हर्जाना नहीं दिया गया।
उनका कहना था कि हर्जाने का राशि फेसबुक की मौजूदा बाजार कीमत के आधार पर तय की जानी चाहिए। हाल ही में गोल्डमैन स्नैच ने फेसबुक की बाजार कीमत 50 बिलियन डॉलर आंकी थी। उन्होंने एक बार फिर 2008 मे मुकदमा दायर किया, लेकिन अमरीकी कोर्ट ने पिछले फैसले को ही बरकरार रखा। अमरीकी कोर्ट के फैसले के आईने में देखा जाए तो जो प्रसिद्धि आज मार्क जुकरबर्ग को मिली है, उसके सही हकदार facebook के असली निर्माता दिव्य नरेंद्र थे।
तो अंत जो लोग हमारे असली भारतीय इतिहास को जानते है वो बहुत आसानी से समझ जाएंगे कि भारतीयों द्वारा किए गए आविष्कारों को चोरी कर अपने नाम से दुनिया मे फैलाना अंग्रेज़ो की पुरानी आदत है ! वो बेशक गुरुत्वकर्षण सिद्धांत के नियम हो ,मर्करी बनाना हो ,कागज बनाना हो ,पलास्टिक सर्जरी करना हो या बापू तलपडे द्वारा हवाई जहाज उड़ाना हो या जगदीश चंद्र बसु द्वारा टेलीफोन का निर्माण करना हो ! और ऐसे सैंकड़ों आविष्कार हो ! या अंत मे भाई दिव्य नरेंद्र द्वारा facebook का निर्माण करना हो ! सब अंग्रेज़ो ने भारतीयो से चोरी कर अपने नाम से चिपकाया हुआ है !
इस जानकरी को हर भारतीय तक पहुंचाये !
भारतीय होने पर गर्व करे !
अधिक से अधिक share करें !!
हमने दुनिया को और क्या क्या सिखाया है जानने के लिए click करें !
http://www.youtube.com/watch?v=ERpKXAY7vmI
27/06/2015
REALITY OF PIZZA AND CHOCOLATE
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पिज्ज़ा और चाकलेट मे डाला जाने वाला एक पदार्थ RENNET यानि की एक प्रकार का enzyme जिसे हम हिन्दी में जामन भी कहते है। ये enzyme एक नवजात या यूं कहे जिस गाय के बछड़े ने अभी कुछ समय पहले ही इस दुनिया में जन्म लिया है उसके पेट के चौथे हिस्से में जुगाली करने से बनता है। इसके अतिरिक्त ये कुछ और जानवरो को बच्चो जैसे की बकरी और भेड़ के। पेट के चौथे हिस्से में मिलने वाला RENNET बहुत सारे enzymes से मिल कर बना होता है, जो इन्हे माँ का दूध पचाने में मदद करता है।
RENNET enzyme PIZZA के cheese को तैयार करने के लिए उपयोग में लाया जाता है। और यह हमें सिर्फ एक ही सूरत में प्राप्त हो सकता है, या तो हम जुगाली करें या उस गाय के बछड़े को मार कर उसके पेट को काट कर उसमे से उस enzyme RENNET को निकाला जाए। ये सब मांस के उत्पादन का एक बहुत बड़ा हिस्सा है। कभी कभार RENNET की मात्रा कम होती है और उसके साथ साथ PEPSIN होता है जो की प्रचुर मात्रा में होता है, जो की सिर्फ खास प्रकार के दूध (चाकलेट मे प्रयोग होने वाला )या पनीर (PIZZA CHEESE) बनाने के ही काम आता है।
प्रत्येक जुगाली करने वाला प्राणी अपनी प्रजाति के दूध को पचाने के लिए ही RENNET बनाता है। और ये PIZZA cheese बनाने वाली कंपनिया और चाकलेट बनाने वाली कंपनियाँ इस NZYME RENNET को पाने के लिए ना जाने कितने ही मासूम बछड़ो की हर रोज़ बलि चढ़ा देती है।CHEESE PIZZA को बनाने का ये एकमात्र उपाय है, मैं उन सभी भाइयों से अनुरोध करूंगा की जो भी पिज्जा या चाकलेट खाते है वो एक बार इन्हे खाने खाने से पहले उसमे डाले जाने वाले पदार्थों के बारें में अवशय जान लें। अगर हो सके तो अगली बार PIZZA खाने से पहले Pizza वाले से पनीर को बनाने की विधि के बारें में जरूर पूछे। और आपको याद होगा कुछ दिन पहले चाकलेट बनाने वाली बहुत बढ़ी विदेशी कंपनी ने खुद स्वीकार किया था की उनकी चाकलेट मे गाय के बछड़े का मांस होता है !
अगर किसी को भी मेरी बातों पर थोड़ा सा भी शक है तो आप लोग खुद नीचे दिये गए लिंक पर जाकर देख सकते है .
(Copy करें new Tab मे खोलें)
w w w . w i s e g e e k . o r g /w h a t - i s - r e n n e t .h t m
अगर नहीं पढ़ सकते तो सिर्फ गूगल में इतना लिख कर ही खोजें आपको अपने आप सच्चाई का पता चल जाएगा “calf slaughter images for the rennet”
गाय के कत्ल के बाद और क्या क्या बनाया जाता है देखें !
LINK - https://www.youtube.com/watch?v=733RlrQ42YU
06/03/2014
A must Read & Share everyone!
A Painful story " Sleeping between parents "
It’s a true story of Guy, who was just 7 years old & lost his parents in one accident. He was very upset those day Bcoz he still didn’t know where his parents has Gone, Some are saying your parents are in heaven & some says they are doing rest for some days underground.
It is heard that he use to sleep in between his parents everyday on bed, but when he saw people are burying their parents in ground, he took his bedding in between their Graves. One day he was very tensed that his parents is not talking to him. Then he took Yellow pages Directory of the City. And called the Operator.
"Hello Operator, does Heaven have a phone number? My Mommy went to Heaven, but I need her here today :’( My tummy hurts and I fell down, I need her right away, Operator can you tell me how to find her in this book.
I still use to sleep in between my parents But now they both don’t speak with me , I think they are not taking proper care of me. but I really don't know why.
Maybe if I call her, she will hurry home to me. Is Heaven very far away, is it across the sea? She's been gone a long, long time she needs to come home now! I really need to reach her, but I simply don't know how. Help me find the number please, is it listed under "Heaven"? I can't read these big big words, I am only seven.
Hearing all this operator who has just lost her son, started crying.
Guy said I'm sorry operator, I didn't mean to make you cry, Is your tummy hurting too ??, or is there something in your eye?
Operator said very warmly, beta no I am well just I have pain in my throat that’s y it seems liking crying. I want to help you But I don’t have heavens number , If I would have heavens number I would hav talked to my son
Guy said Oh your son is also in heaven, You please don’t worry, If I call my church maybe they will know, As Mommy said when we need help that's where we should go. I found the number to my church tacked up on the wall. Thank you operator, I'll give them a call"
Then he called Church & narrated whole story & asked them to please tell my Mummy that I am well now, But there is one operator who's son is there in heaven only, tell him that her mummy is not well please come fast.
Moral :-Guys, sometimes we think that we are in worst condition in this whole world & we are suffering at most & we need Blessing more then any one, But True worship is a prayer for those who need Blessings more then us.
If we will ask happiness for others to God, He will defiantly help & bless us with all who need them. ( Dekho wo ladka appna Gamm bhulgya Aur sabse pehle usne Operator ki wish ko agge rakha)
If we think we Dont have lovers Or God has Made us Gay & has done something wrong with us, Then think abt those who dont have parents .
Just trust God, be thankful for what we have & remember god for blessings of every one.
Words By Guru Granth Sahab “ tere Bhahane sarvat da Bhallha
06/03/2014
share it guys...........its our rights...................
Top 8 Countries With World’s Fastest Internet!
1. Hong Kong – 65.1Mbps
2. South Korea – 53.5Mbps
3. Japan – 48.8Mbps
4. Romania – 47.5Mbps
5. Singapore – 45.6Mbps
6. Latvia – 44.6Mbps
7. Switzerland – 41.4Mbps
8. Israel – 40.1. Mbps
Look Up Your Birthday And See What You Are...
January 01 - 09 ~ Dog
January 10 - 24 ~ Mouse
January 25 - 31 ~ Lion
February 01 - 05 ~ Cat
February 06 - 14 ~ Dove
February 15 - 21 ~ Turtle
February 22 - 28 ~ Panther
March 01 - 12 ~ Monkey
March 13 - 15 ~ Lion
March 16 - 23 ~ Mouse
March 24 - 31 ~ Cat
April 01 - 03 ~ Dog
April 04 - 14 ~ Panther
April 15 - 26 ~ Mouse
April 27 - 30 ~ Turtle
May 01 - 13 ~ Monkey
May 14 - 21 ~ Dove
May 22 - 31 ~ Lion
June 01 - 03 ~ Mouse
June 04 - 14 ~ Turtle
June 15 - 20 ~ Dog
June 21 - 24 ~ Monkey
June 25 - 30 ~ Cat
July 01 - 09 ~ Mouse
July 10 - 15 ~ Dog
July 16 - 26 ~ Dove
July 27 - 31 ~ Cat
August 01 - 15 ~ Monkey
August 16 - 25 ~ Mouse
August 26 - 31 ~ Turtle
September 01 - 14 ~ Dove
September 15 - 27 ~ Cat
September 28 - 30 ~ Dog
October 01 - 15 ~ Monkey
October 16 - 27 ~ Turtle
October 28 - 31 ~ Panther
November 01 - 16 ~ Lion
November 17 - 30 ~ Cat
December 01 - 16 ~ Dog
December 17 - 25 ~ Monkey
December 26 - 31 ~ Dove
If you are a
Dog : A very loyal and sweet person. Your loyalty can never be doubted. You are quite honest and sincere when it comes to your attitude towards working. You are a very simple person, indeed. Absolutely hassle free, humble and down-to-earth!! That explains the reason why your friends cling on to you! You have a good taste for clothes. If your wardrobe is not updated with what is trendy, you sure are depressed. Popular and easy-going. You have a little group of dignified friends, all of them being quality-personified. Repost This If It's True For You.!!
If you are a Mouse : Always up to some sort of a mischief! The mischievous gleam in your eyes is what makes you so cute and attractive to everyone. You are an extremely fun-to-be-with kind of person. No wonder people seek for your company and look forward to include you for all get-together's. However, you are sensitive which is a drawback. People need to select their words while talking to you. If someone tries to fiddle around and play with words while dealing with you, it is enough to invite your wrath. God bless the person then!Repost This If It's True For You.!!
If you are a Lion : Quite contradictory to your name, you are a peace loving person. You best try to avoid a situation wherein you are required to fight. An outdoor person, you dislike sitting at one place for a long duration. Popular and easy-going. You are a born leader, and have it in you how to tactfully derive work from people. People love the way you always treat them. You love being loved, and when you receive your share of limelight from someone, you are all theirs!!!!Repost This If It's True For You.!!
If you are a Cat : An extremely lovable, adorable person, sometimes shy, with a passion for quick wit. At times, you prefer quietness. You love exploring various things and going into depth of each thing. Under normal circumstances you're cool but when given a reason to, you are like a volcano waiting to erupt. You're a fashion bird. People look forward to you as an icon associated with fashion. Basically, you mingle along freely but don't like talking much to strangers. People feel very easy in your company. You observe care in choosing your friends.Repost This If It's True For You.!!
If you are a Turtle : You are near to perfect and nice at heart. The examples of your kindness are always circulated in groups of people. You, too, love peace. You wouldn't like to retaliate even to a person who is in the wrong. You are loved due to this. You do not wish to talk behind one's back. People love the way you always treat them. You can give, give and give love, and the best part is that you do not expect it back in return. You are generous enough. Seeing things in a practical light is what remains the best trait of you guys.Repost This If It's True For You.!!
If you are a Dove : You symbolize a very happy-go-lucky approach in life. Whatever the surroundings may be, grim or cheerful, you remain unaffected. In fact, you spread cheer wherever you go. You are the leader of your group of friends and good at consoling people in their times of need. You dislike hypocrisy and tend to shirk away from hypocrites. They can never be in your good books, no matter what. You are very methodical and organized in your work. No amount of mess, hence, can ever encompass you. Beware, it is easy for you to fall in love....Repost This If It's True For You.!!
If you are a Panther : You are mysterious. You are someone who can handle pressure with ease, and can handle any atmosphere without going berserk. You can be mean at times, and love to gossip with your selected group. Very prim and proper. You like all situations and things to be in the way you desire, which, sometimes is not possible. As a result, you may lose out in some relationships. But otherwise, you love to help people out from difficult and tight spots when they really need you.Repost This If It's True For You.!!
If you are a Monkey : Very impatient and hyper!!! You want things to be done as quick as possible. At heart, you are quite simple and love if you are the center of attraction. That way, you people are unique. You would like to keep yourself safe from all the angles. Shall your name be dragged or featured in any sort of a controversy, you then go all panicky. Therefore, you take your precautions from the very beginning. When you foresee anything wrong, your sixth sense is what saves you from falling in traps. Quite a money minded bunch you people are!! Repost This If It's True For You.!!
17/01/2014
पुरानी पेंट रफू करा कर पहनते जाते है,
Branded नई shirt देने पे आँखे दिखाते है
टूटे चश्मे से ही अख़बार पढने का लुत्फ़ उठाते है,
Topaz के ब्लेड से दाढ़ी बनाते है
पिताजी आज भी पैसे बचाते है ….
कपड़े का पुराना थैला लिये दूर की मंडी तक जाते है,
बहुत मोल-भाव करके फल-सब्जी लाते है
आटा नही खरीदते, गेहूँ पिसवाते है..
पिताजी आज भी पैसे बचाते है…
स्टेशन से घर पैदल ही आते है
रिक्सा लेने से कतराते है
सेहत का हवाला देते जाते है
बढती महंगाई पे चिंता जताते है
पिताजी आज भी पैसे बचाते है ....
पूरी गर्मी पंखे में बिताते है,
सर्दियां आने पर रजाई में दुबक जाते है
AC/Heater को सेहत का दुश्मन बताते है,
लाइट खुली छूटने पे नाराज हो जाते है
पिताजी आज भी पैसे बचाते है....
माँ के हाथ के खाने में रमते जाते है,
बाहर खाने में आनाकानी मचाते है
साफ़-सफाई का हवाला देते जाते है,
मिर्च, मसाले और तेल से घबराते है
पिताजी आज भी पैसे बचाते है…
गुजरे कल के किस्से सुनाते है,
कैसे ये सब जोड़ा गर्व से बताते है
पुराने दिनों की याद दिलाते है,
बचत की अहमियत समझाते है
हमारी हर मांग आज भी फ़ौरन पूरी करते जाते है
पिताजी हमारे लिए ही पैसे बचाते है ...
Must Read..:)
Ek ladka ek ladki ko bahut chahta tha.
ladke ne purpose kia aur ladki boli,
Teri 1 month ki pocket money mera roz ka
kharcha hai ...
I cnt love u.
Phir b wo usko chahta rha.
aur 10 saal baad wo 1 mall me mile,
ladki ne kaha mera husband 1 bahut bdi company
me job karta hai uski salary 1,00,000/- per
month hai
aur wo bahut hoshiyar hai.,
ye sunkar ladke ki ankh me ansu nikal aye.
Thodi der me ladki ka husband aya uski nazar us
ladke par padi aur kaha Sir aap yaha???
Usne apni wife se kaha ye meri company ke
malik hai
aur 1 saal ka 2,000/- crorre ka turnover hai aur
kaha....
Sir 1 ladki ko bahut chahte hai isliye aj tak
shadi nai ki..
Its true love...
Zindgi bas ek pal ki mohtaj nai hoti bas waqat
use bna deta hai.....
A sad love story: Ek ladke ko apni junior se pyar ho gaya.
Ladke ne purpose kia to ladki ne inkaar kar diya aur directr se shikayat kar di.
directr ne kaafi daanta or 1 week k liye clg se nikaal dia.
Jab Ladka 1 hafte baad wapis clg aya to Ladki ko us se pyar ho gya.
Ladki ne uski kitaab me likha
"I m sorry & i love u too."
Ladke ne koi response ni diya.
Isi tarah 4 saal guzar gaye..
MORAL:
LADKE KITAAB KHOLTE HI NAHI....'!
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