04/05/2025
नैना.....
नया हू पर नादान नही, कोशिश है सीखने की, मैं copy & paste वाला इंसान नही...
04/05/2025
नैना.....
आज अचानक एक बात हो गई
पुराने एक परिचित से मुलाकात हो गई
महखाने की कसक लिए दोनों निकल पड़े
पहुंचते ही जनाब ने दो ले ली खड़े खड़े
कुर्सी आई तो तशरीफ रखने ही वाले थे
की वो फिसलने लगे अभी तो सिर्फ दो ही डाले थे
समझ आ गई कि आज ज्यादा हो न पायेगा
वर्ना आए तो मर्जी से था पर जा न पायेगा
अजीब है ये दो घुट लाल दिखने वाला पानी
बेरंगो में भी भर देता है ये रंग आसमानी
अंदर जाते ही मैं मैं नहीं रहता
पुराने छुपे दर्दों को अपने आप ही कहता
हर बार यही कहता हु अपने आप से
की अगली बार थोड़ी हिसाब से
कभी ऐसा हो तो ये दर्द भी बाहर कैसे आएगा
घुटन भरी दुनिया में ये दिल बस घुट घुट के ही मर जाएगा...
𝓢𝓾𝓶𝓲𝓽 𝓴𝓲 𝓴𝓪𝓵𝓪𝓶 𝓼𝓮 नया हू पर नादान नही, कोशिश है सीखने की, मैं copy & paste वाला इंसान नही...
जिसका मन मस्त है
उसके पास समस्त है
दिल ही है जिससे मन हारता है
नही तो हर कोई इसे मारता है
अच्छा तो मुझे भी लगता है तेरा साथ
तू मुस्कुराती है तो अच्छी लगती है हर बात
बस डर सा लगता है कि कुछ ज्यादा न हो जाए
राजा की पोशाक पहना ये मन फिर महज एक प्यादा न हो जाए
अजीब है न ये मन, ऐसा होता है थोड़े
की गले लग जाए तेरे बस सब फिक्र छोड़े