ALI ZEHRA

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22/05/2026

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04/05/2026

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31/05/2024

Karbala Ki Yaad Dila Di.. 💔

31/05/2024

Pura Zarur Suniye 💕

29/05/2024
27/05/2024

सबीना और राकेश जी हां दोनो शादी करने आए थे कचहरी में संजोग से मैं उन्हें मिल गया दोनो बोले कि भैय्या आप हमारा help करवा दीजिये, इतना कह कर लड़का चला गया समोसा और पानी लेने , मैंने लड़की से पूछा कि क्या नाम है तुम्हारा तो बोली कि सबीना, मैंने बोला कि लड़के का नाम , तो बोली कि राकेश, हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं एक दूसरे के बिना जिंदा नही रह पाएंगे , हमारे घर वाले राज़ी नही होंगे इसलिए आज कोर्ट मैरिज कर लेंगे और कुछ दिन बाद कोई हम दोनों का कुछ नही बिगाड़ पाएगा, सुनकर अच्छा लगा मुझे की वाकई प्यार ऐसा होता है, फिर मैंने पूछा कि तुम लड़के के बारे में अच्छे से जानती हो न ? वो बोली कि मैं सिर्फ राकेश को जानती हूं इनपर खुद से ज़्यादा विश्वास है, मैंने पत्रकार वाला दिमाग लगाकर बोला, की मैं एक बात कहूँ मानोगी, वो बोली कि कहिये , मैंने कहा कि बस दो दिन रुक जाओ, मैं उसके पूरे खानदान का detail पता करवा लेता हूँ फिर , saturday को आना मैं खुद शादी करवा दूंगा तुम दोनों की और प्रशासन से भी help करवाऊंगा ताकि बाद में तुम दोनों को कोई आंच न आए, कुछ देर सोचने के बाद उसने कहा-- ठीक है भैय्या !
इतने में लड़का आया पानी लेकर तो मैंने कहा कि आज शादी नही हो पाएगी क्योंकि इलेक्शन के वजह से सब कर्मचारी व्यस्त है ( झूठ बोला) saturday को तुम दोनों सुबह10 बजे आ जाना मैं शादी करवा दूंगा , लड़की बोली कि हां भैय्या जल्दी जल्दी में आज मेरा आधार कार्ड घर ही छूट गया ( वो भी बहाना कर दी) अंततः दोनो अपने अपने घर चले गए, मैंने लड़के के आधार कार्ड की फोटोकॉपी लड़की से ले ली थी जिसपर उसका पूरा पता था, फिर अगले दिन सुबह जब उसके गांव पहुंचा और पता किया तो दंग रह गया-- राकेश की शादी दो साल पहले ही हो चुकी थी और एक 8 महीने की बेटी भी है उसे, दो मुकदमे चलते हैं उसपर और चरसी आदमी है ! खैर आज जब दोनों आए और दोनो के सामने ये सब खुलासा किया तो पहले तो लड़का साफ इंकार किया लेकिन जब उसके बीवी और बच्ची को सामने लाया तो फिर उन्हें देख पहले तो1गुस्से में लाल होकर बीवी को मारने गया इतने में मैंने उसका हाथ पकड़ कर दो थप्पड़ खिंच कर लगाया और वही मौजूद दो होम गार्ड के हवाले कर दिया , सबीना के पैरों तले मानो ज़मीन खिशक गई हो , सन्न हो गई थी मानो लकवा मार दिया हो, उसकी अम्मी को भी पहले से सब बता दिया था मैंने और उनको साथ लाया था लेकिन वो ये सब छुप कर देख रही थीं , फिर उनको बुलाया उन्हें देखते ही सबीना उनसे लिपट कर आधे घण्टे से रोये जा रही है , दोनो को एक बोतल पानी देकर ऑटो में बैठाया और उसकी अम्मी से ये कसम लिया कि एक लफ्ज आप सबीना को नही बोलेंगी और न ये सब उसके अब्बू से बताएंगी फिर उनको रवाना करके ये post लिख रहा हूँ !!

~Nasim Siddiqui Journalist भाई

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06/10/2018

📚 गुनाहों की किताब 📚
क़िस्सा एक गुनाहगार शख़्स का.....

बग़दाद में एक बहुत ही गुनहगार शख़्स रहता था लेकिन उसकी माँ बड़ी नेक औरत थी.
उस आदमी की ये आदत थी के उस्से जब भी कोई गुनाह होता था उसे एक किताब में लिख लेता था.

एक रात जब वो अपने दिन भर के गुनाहों को किताब में लिख रहा था तब दरवाज़े पर दस्तक हुई.
दरवाज़ा खोल कर देखा तो एक बेहद ख़ुबसुरत लड़की दरवाज़े पर अपने बच्चे के साथ खड़ी थी.

किस्से मिलना है आपको क्या चाहिये.?

औरत ने कहा मेरे पास यतीम बच्चे हैं तीन दिन से भुखे हैं ख़ुदा के वास्ते हमें कुछ खाने के लिये दे दो.

लड़की का हुसन देख कर उस आदमी की नियत ख़राब हो गई थी.
अच्छा चलो अंदर आओ . लड़की अंदर आई तो उसने दरवाज़ा बंद कर दिया,

लड़की समझ गई थी के इसकी नियत ख़राब हो गई है.
उस आदमी ने औरत को ज़बरदस्ती अपनी तरफ खिंचा तो लड़की ने अल्लाह को याद करते हुए ज़ोर से कहा.
ऐ मुसिबतों को दुर करने वाले दो जहां के मालिक मुझे इस इंसान से बचा.

फिर लड़की उस इंसान की तरफ मुड़ी और कहा.
अपनी मौत को भुल जाने वाले ऐ इंसान क्या तुम्हें मरना नही है.?
क्या तु ये भुल गया के तुझसे भी ताक़तवर इंसान को मौत खा गई.?
बड़े से बड़े मालदार को भी दुनिया में सिर्फ रोज़ी ही नसीब हुई है उनके सारे बड़े बड़े घर हवेली सब दुनिया में ही रह गए हैं और कल तु भी मर कर मट्टी में दफन हो जाएगा.
ऐ मेरे रब मेरी फरयाद सुन और ईस इंसान से मुझे बचा.

उस आदमी ने जब ये फरियाद सुनी तो बहुत रोया और उस लड़की और उसके बच्चों को खाना खिलाया और बहुत सा खाने का सामान दे कर उन्हें जाने दिया.

लड़की को रुख़्सत करते हुए वो बोला मैं बहुत गुनाहगार हुं अपने बच्चों से कहना मेरे लिये दुआ करें.
के अल्लाह मुझे माफ करे. और जितने भी गुनाह मैने अब तक किताब में लिखा है वो माफ हो कर किताब से मिट जाए.

उस लड़की ने जाते हुए उस आदमी को बहुत दुआएं दी.
लड़की के जाने के बाद वो अपने आज के इस गुनाह को किताब में लिखने चला के मैने आज एक बेबस लड़की से ज़िना करने की कोशिश की.

गुनाह लिखने के लिये जैसे ही उसने किताब खोली तो देखा के कुछ लिखा हुआ ही नही है
उसने पुरी किताब छान मारी लेकिन कहीं कुछ लिखा हुआ नही मिला गुनाहों के सारे रिकॉर्ड गायब हो गए थें. उसके सारे गुनाह मिटा दिये जा चुके थें. वो गुनाहों से पाक हो चुका था.

उसने अल्लाह का शुक्र अदा किया और माँ के पास जा कर बैठ गया और कहने लगा अल्लाह ने उस लड़की के साथ मुझे गुनाह करने से रोका और मेरे दिलों को फेर दिया.

उसके बाद उस आदमी ने फौरन वज़ु किया और सज़दा शुक्र में गिर पडा. उसने अल्लाह से दुआ की के,
अल्लाह जैसे आपने मेरे गुनाह मिटा दिये वैसे ही मुझे अपने पास बुला ले.

जब सज़दा काफी लंबा हो गया तो उसकी माँ ने उसे थोड़ा हिलाया तो देखा की उसकी रुह परवाज़ कर चुकी थी उसका इंतेक़ाल हो चुका था...!!!
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:- ईस वाक़ये से हमें ये सबक मिलता है कि अगर हम सच्चे दिल से अपने गुनाहो की तोबा करते हे तो अल्लाह हमारे तमाम गुनाहो को मिटा देता है. और हमारा ईमान पर खात्मा नसीब होता है।

मेरी दुआ है अल्लाह से...या अल्लाह हम सब गुनाह गारो को माफ़ फ़रमा और हमारा ईमान पर खात्मा नसीब फर्मा...आमीन।

27/06/2015

नमाज का तरीका

नियत :-
नियत की मैने दो रकात नमाज सुन्नत वकत फजर का खास वास्ते अल्लाह ताला के लिए मुह मेरा काबा शरीफ कि तरफ
अल्लाहु अकबर ।

सना :-
सुबहाना कल्ला हुम्मा वाबैहमदेका वा ताबारा कसमोका वा तआला जददो का वा लाईलाह गैरूका ।

आऊजु बिल्लाहि मिनश शेतानिर्रजीम ।

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

अलहमदु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन, अर्रहमानिर्रहीम मालिकी यवमिद्दीन, इय्याका नअबुदू वइय्याका नसताइन, इहदि नस्सिरातल मुस्तकीम, सिरातल लजीना अन अमता अलेयहिम गयरिल मगदुबि अलयहिम वलदद्वाल्लीन । (आमीन)

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

कुल याअय्युहल काफिरुना लाआबुदूमातअबुदून, वला अन्तुम आबिदुना माआबुद, वला आना आबिदुम मा आबत्तुम, वला अन्तुम आबिदुना मा आबुद लकूम दीनुकूम वलियदिन.

( अल्लाहु अक्बर )

सुब्हाना रब्बीयल अजिम ।→3,5,7

समिअल्लाहु लिमन हमिदह ।

रब्बाना लक्लहम्द ।

( अल्लाहु अक्बर.... )

सुब्हाना रब्बीयल आला ।→3,5,7

( अल्लाहु अक्बर )2

सुब्हाना रब्बीयल आला ।→3,5,7

( अल्लाहु अक्बर ....)

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

अलहमदु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन, अर्रहमानिर्रहीम, मालिकि यवमिद्दीन, इय्याका नअबुदु वइय्याका नसताइन, इहदि नस्सिरातल मुस्तकीम, सिरातल लजीना अन अमता अलैयहिम गयरिल मगदुबि अलयहिम वलदद्वाल्लीन, (आमीन)

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

कुलहुवल्लाहु अहद, अल्लाहुस्समद, लमयलिद वलम युलद, वलम यकुललहु कुफूवन अहद, ।

( अल्लाहु अक्बर )

सुब्हाना रब्बीयल अजिम ।→3,5,7

समिअल्लाहु लिमन हमिदह ।

रब्बाना लक्ल हमद ।

(अल्लाहु अक्बर....)

सुब्हाना रब्बीयल आला ।→3,5,7

( अल्लाहु अक्बर ) 2

सुब्हाना रब्बीयल आला ।→3,5,7

( अल्लाहु अक्बर )

अत्तहीयातु लिल्लाहि वस्सलावातु वत्तय्यिबातु अस्सलामु अलैका अय्युहन नबीयु वा रहमतुल्लाहि वा बरकातुहू अस्सलामु अलैना वा अला ऐबादिल्लाहिस्सालिहीन अश्हदु अल्लाइलाहा इल्लल्लाहु वा अश्हदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू वा रसूलुहू ।

अल्लाहुम्मा सल्लिअला मुहम्मदिव वा आला आलि मुहम्मदिन कमासल्लैता आला इब्राहीमा वा आला आलि इब्राहीमा इन्नाका हमीदुम मजीद,
अल्लाहुम्मा बारिक आला मुहम्मदिव वा आला आलि मुहम्मदिन कमाबारकता आला इब्राहीमा वा आला आलि इब्राहीमा इन्नाका हमीदुम मजीद, ।

अल्लाहुम्मा रब्बाना आतैयना फिददुनिया हसनतव वा फिल आखेरते बसनतव वाकीना अजाबन्नार,

अस्सलामु अलैकुम वा रहमतुल्ला ।→
अस्सलामु अलैकुम वा रहमतुल्ला ।←

सुब्हान अल्लाह →33
अल्हमदु लिल्लाह →33
अल्लाहु अक्बर →34

लाइलाहा इल्लल्लाहु मुहम्मदर रसुलूल्लाह ।

☆ ☆
☆........दुआ मै याद.......☆

10/06/2015

ैं
“कब्र” ज़िन्दगी मौत के
बाद
मौत का मज़ा चख लेने के बाद
इन्सान की पहली मंज़िल कब्र हैं|
कब्र की मन्ज़िल कितनी भयानक हैं
इस बाद का अन्दाज़ा नबी
सल्लललाहो अलेहे वसल्लम की इस
दुआ से लगाया जा सकता हैं के नबी
सल्लललाहो अलेहे वसल्लम दुआ करते
थे – ऐ अल्लाह मैं तेरी पनाह
मांगता हूं कब्र के अज़ाब से|
(बुखारी)
इस दिलफ़रेब, आरामदेह और ऐश व
इशरत भरी ज़िन्दगी के बाद आने
वाले तमाम मरहले इन्तिहाई
कठिन, तकलीफ़देह और भयानक हैं|
सबसे पहला मरहला मौत का हैं|
मौत वो कड़वा घूंट हैं जिसे हर
जानदार को पीना हैं| अल्लाह
कुरान मे इरशाद फ़रमाता हैं – हर
जानदार को मौत का मज़ा चखना
हैं| (सूरह अल इमरान 3/185)
एक दूसरी जगह अल्लाह ने इरशाद
फ़रमाया – अल्लाह की ज़ात के
सिवा हर चीज़ हलाक होने वाली
हैं| (सूरह कसस 28/88)
मरने के बाद कोई इन्सान वापस
नही पलटता इसलिये ठीक-
ठीक
मरने की कौफ़ियत बताना तो
नामुमकिन हैं अलबत्ता कुरान और
हदीस मे मौत की शिद्दत और
सख्ती का जो तज़किरा आया हैं
उससे अन्दाज़ा यह होता हैं की
दुनियावी ज़िन्दगी की
सारी
मुसीबते व तकलीफ़े, सारे रंज व गम
और सारी मुश्किल व परेशानी अगर
जमा कर दी जाये तो भी मौत की
तकलीफ़ और सख्ती उनसे
कही
ज़्यादा होगी| इस सख्ती के बारे मे
अल्लाह कुरान मे इरशाद फ़रमाता
हैं – और मौत की सख्ती हक लेकर आ
पहुंची| (सूरह काफ़ 50/19)
इसी सख्ती और शिद्दत के बारे मे
ब्यान फ़रमाते हुये अल्लाह
फ़रमाता हैं – जब जान हलक तक
पहुंचती है तो कहा जाता हैं की
कोई झाड़-फ़ूंक करने वाला हैं?
आदमी यह समझता हैं कि जुदाई का
वक्त आ गया हैं उस वक्त पिंडली
पिंडली के साथ मिल जाती हैं|
(सूरह कियामह 75/26-29)
अल्लाह के रसूल सल्लललाहो अलेहे
वसल्लम का इरशाद मुबारक हैं –
मौत की तकलीफ़ बहुत शदीद
हैं|

25/03/2015

Quran paak me ishara hai... Jhoot
bolne walo par allah
ki lanat h... 1 april ko jaan bujh
kar
jhoot bola jayega or jhoot
bolkar khushi manai
jayegi .... Yaani musalmaan ab
allah
ki lanat pe b khushi
manayege.... ***(ho sake to 1 april
se
pahle ye sms sab ko shere
karo or jhoot bolne se har
musalman ko bachao)

21/03/2015

मुसलमानों !
कोई तुम्हारी किताबों को आकर
नहीं पड़ेगा की अल्लाह और उसके रसूल ने क्या कहा है
और
क्या लिखा है।
लोग तुम्हे पढेंगे तुम्हारे अख़लाक़ देखेंगे तुम्हारी
दयानतदारी देखेंगे
और समझ जायेंगे अल्लाह और उसके रसूल ने क्या कहा
है।
तो अगर लोगो को इस्लाम का पैगाम देना चाहते है
तो वो पैगाम पहले अपनी जिंदगियों में उतारिये।
वरना कितनी भी बोलो इस्लाम की अच्छाइयां
शायद
ही कोई समझेगा।

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