उपचार का पहला संकेत... उपचार नहीं होता।
हर परिवर्तन दिखाई नहीं देता।
कभी-कभी सबसे गहरी प्रक्रिया वहीं शुरू होती है जहाँ शरीर केवल सुन रहा होता है।
इस रील में स्पाइनल कॉर्ड फ़्रीक्वेंसी का उपयोग किया गया है। इसे अंत तक सुनें और बिना किसी अपेक्षा के केवल अपने अनुभव पर ध्यान दें।
यदि अंत तक सुनने के बाद आपको कोई बदलाव, शांति या अलग अनुभव महसूस हो, तो केवल एक शब्द में अपना अनुभव लिखें।
Shreem chaitanyaa yoga
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🌺 Soul Healer & Consciousness Guide
✨ Kundalini & Chakra Awakening
✨ Mahavidhya Tantra Anushthana
✨ Consciousness Healing
Awaken Your Inner Chaitanyaa 🌻
🟣 SHREEM CHAITANYAA YOGA 🟡
15/07/2026
🌺 गुप्त नवरात्रि – प्रथम दिवस 🌻
कुछ साधनाएँ दिखाई नहीं देतीं, पर जीवन बदल देती हैं।
जय माँ भुवनेश्वरी।
🌺 चैतन्य स्वामी
SHREEM CHAITANYAA YOGA
"यदि #शून्य सचमुच कुछ नहीं है, तो फिर उसके आने से #आयाम क्यों बदल जाता है?"
कल अचानक एक विचार आया।
क्या होगा यदि जो दिखाई दे रहा है, वह सम्पूर्ण न हो?
नहीं...
मेरा अर्थ यह नहीं कि वह गलत है।
मेरा अर्थ है—
क्या होगा यदि उसके साथ एक और दृष्टिकोण उपस्थित हो, जो अभी दिखाई नहीं दे रहा?
जैसे 10 में शून्य दिखाई देता है।
11 में नहीं दिखाई देता।
लेकिन क्या वास्तव में अनुपस्थित है?
या केवल दृष्टि से ओझल है?
तब मुझे लगा...
शायद जीवन की अधिकांश उलझनें यहीं से जन्म लेती हैं।
हम जो देख पाते हैं, उसे सम्पूर्ण मान लेते हैं।
और जो दिखाई नहीं देता, उसे अस्तित्वहीन।
जबकि संभव है अदृश्य ही आधार हो।
जैसे जड़ दिखाई नहीं देती, फिर भी वृक्ष उसी पर खड़ा है।
जैसे मौन दिखाई नहीं देता, फिर भी शब्द उसी से जन्म लेते हैं।
जैसे शून्य दिखाई नहीं देता, फिर भी आयाम उसी से बदल जाता है।
तब प्रश्न यह नहीं रह जाता कि
"सत्य क्या है?"
प्रश्न यह हो जाता है कि
"मैं किस कोण से देख रहा हूँ?"
और उससे भी गहरा प्रश्न—
"कौन सा कोण अभी मेरी दृष्टि से छूटा हुआ है?"
शायद साधना का अर्थ नया सत्य खोज लेना नहीं है।
शायद साधना का अर्थ है—
उन दृष्टिकोणों के लिए उपलब्ध हो जाना, जो अभी तक दिखाई नहीं दे रहे।
क्योंकि अस्तित्व में रहस्य कम नहीं हैं।
हमारी दृष्टि सीमित है।
और शायद...
दूसरा दृष्टिकोण अभी भी यहीं है।
हमारी आँखों के सामने।
बस दिखाई नहीं दे रहा।
🙏 क्या पता...
मां भुवनेश्वरी ने आपको यह संदेश किसी कारण से दिखाया हो।
🌺 जय मां श्री भुवनेश्वरी 🌺
मां भुवनेश्वरी मंदिर निर्माण के इस दिव्य कार्य में अपना यथाशक्ति सहयोग अवश्य दें।
कभी-कभी ईश्वर सेवा के रूप में ही हमारे द्वार पर आते हैं।
इस संदेश को अपने स्वजनों तक भी पहुँचाएँ, ताकि अधिक से अधिक लोग इस पुण्य कार्य का भाग बन सकें।
🪷 मां भुवनेश्वरी परमेश्वरी सभी पर अपनी कृपा बरसाएँ।
फेसबुक प्रोफराम किशोर लाल बाबाrQY/
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हरि ॐ तत्सत्।
#सनातन
सुनो... Your This 🕊️
शायद तुम्हें अभी
किसी सलाह की नहीं,
एक विराम की आवश्यकता है।
🌺
कुछ क्षण के लिए
सब छोड़ दो।
🌺
बस सुनो।
एक पक्षी।
एक स्वर।
एक शांत कंपन।
🌺
कभी-कभी प्रकृति
वह उपचार कर देती है
जिसे शब्द नहीं कर पाते।
🌺
432 Hz की यह ध्वनि
तुम्हें कुछ सिखाने नहीं आई।
यह केवल याद दिलाने आई है—
कि शांति कहीं बाहर नहीं,
अब भी तुम्हारे भीतर है।
🌺
आँखें बंद करो।
सुनो।
और स्वयं को
कुछ क्षणों के लिए
प्रकृति के हवाले कर दो।
🌺
चैतन्य स्वामी
SHREEM CHAITANYAA YOGA 🌻
🕊️
06/07/2026
यदि इन दिनों...
मन थोड़ा थका हुआ महसूस करता है,
तो स्वयं पर कठोर मत होइए।
जीवन कभी-कभी ऐसा भी होता है।
बाहर से सब कुछ ठीक दिखाई देता है,
फिर भी भीतर
कुछ शांत नहीं होता।
और यह भी ठीक है।
हम दिनभर
लोगों से मिलते हैं,
बातें करते हैं,
अपनी जिम्मेदारियाँ निभाते हैं।
लेकिन कभी-कभी
स्वयं से मिले बिना ही
दिन, सप्ताह और महीने बीत जाते हैं।
शायद इसलिए मन
थोड़ा रुकना चाहता है।
थोड़ा सुना जाना चाहता है।
थोड़ा महसूस किया जाना चाहता है।
एक दुनिया बाहर है,
एक दुनिया भीतर।
बाहर की दुनिया में
हम अपना जीवन जीते हैं।
भीतर की दुनिया में
हम अपने जीवन को महसूस करते हैं।
जब भीतर कोई पीड़ा होती है,
तो बाहर की सबसे सुंदर चीज़ें भी
हमें वैसी नहीं छू पातीं।
और जब भीतर शांति उतरती है,
तो साधारण-सी हवा,
एक मुस्कान,
एक सुबह,
भी सुंदर लगने लगती है।
इसलिए आज
सब कुछ ठीक करने की कोशिश मत कीजिए।
केवल कुछ क्षण
अपने साथ बैठ जाइए।
बिना किसी निर्णय के।
बिना कुछ बदले।
बिना स्वयं को समझाए।
कभी-कभी...
उपचार किसी समाधान से नहीं,
अपने प्रति थोड़ी-सी
करुणा से आरम्भ होता है।
🌺
आत्मबोधः सर्वप्रश्नानां परान्तः।
चैतन्य स्वामी
Shreem Chaitanyaa Yoga
01/07/2026
#क्या #होगा #अगर #आज #कुछ #भी #न #सुलझाया #जाए?
हर चीज़ को संभालते-संभालते थक गए हो?
तो शायद यह लेख तुम्हारे लिए है।
👇
आज समझने की छुट्टी है
कभी-कभी ऐसा लगता है कि यदि हम थोड़ा ढीले पड़ गए, तो सब बिखर जाएगा।
इसलिए हम पकड़कर रखते हैं—
रिश्तों को, परिस्थितियों को, अपने विचारों को, यहाँ तक कि स्वयं को भी।
और इस पकड़ में धीरे-धीरे थकान जमा होने लगती है।
फिर किसी साधारण से क्षण में अचानक कुछ दिखाई देता है...
साँस तो बिना पूछे भी चल रही है।
हृदय को हमारी सलाह की आवश्यकता नहीं।
सूरज रोज़ उग रहा है।
विचार आ रहे हैं, जा रहे हैं।
हँसी भी हो रही है, आँसू भी।
और जीवन...
हमारी अनुमति के बिना भी घटित हो रहा है।
तभी भीतर कहीं एक छोटी-सी मुस्कान जन्म लेती है—
> "अच्छा... तो मैं इतना भी ज़रूरी नहीं था।"
और आश्चर्य की बात है, यह जानकर दुःख नहीं होता।
बल्कि एक अजीब-सी राहत मिलती है।
जैसे कंधों पर रखा कोई अदृश्य बोझ धीरे से उतर गया हो।
शायद शांति का अर्थ सब कुछ समझ लेना नहीं है।
शायद शांति का अर्थ है—
कुछ देर के लिए सब कुछ चलाने की कोशिश छोड़ देना।
तो आज...
समझने की छुट्टी।
सुलझाने की भी।
बस थोड़ी देर जीवन को स्वयं घटित होने दो।
🌺
चैतन्य स्वामी
Shreem Chaitanyaa Yoga
28/06/2026
#कभी #कभी #कोई #व्यक्ति #हमारे #जीवन #का #हिस्सा #बने #बिना #भी #याद #रह #जाता #है...
एक महिला रोज़ सुबह अपने घर की बालकनी में पौधों को पानी देती थी।
उसी समय सामने वाले घर की बालकनी में एक बुज़ुर्ग व्यक्ति दिखाई देते थे।
न कभी बातचीत हुई।
न कभी परिचय।
बस दूर से एक हल्की-सी मुस्कान।
सालों तक यही क्रम चलता रहा।
फिर एक सुबह...
बालकनी खाली थी।
उसने सोचा,
शायद आज देर हो गई होगी।
अगले दिन भी खाली।
फिर अगले दिन।
कुछ समय बाद उस घर में नए लोग आ गए।
जीवन अपनी गति से चलता रहा।
पौधे बढ़ते रहे।
मौसम बदलते रहे।
लेकिन कई महीनों तक...
हर सुबह पानी देने से पहले,
उसकी नज़र अनायास उसी बालकनी की ओर उठ जाती थी।
जहाँ अब कोई नहीं था।
शायद हर रिश्ता शब्दों से नहीं बनता।
कुछ संबंध केवल उपस्थिति से बनते हैं।
और जब वे चले जाते हैं...
तब पता चलता है कि वे थे।
चित्र: #ब्रह्मकमल
🌺
चैतन्य स्वामी
SHREEM CHAITANYAA YOGA
#चैतन्यउपचार #जीवन #मानवीयता #संबंध #चेतना #उपचार
25/06/2026
#क्या #हो...🤔
यदि तुम्हारी हर बहस,
हर मान्यता,
हर निष्कर्ष,
एक ही जगह से जन्म ले रहे हों—
तुम्हारे दृष्टिकोण से।
तो फिर...
क्या तुम सत्य देख रहे हो?
या
केवल
अपना दृष्टिकोण?
🙃
बस...
इतना देखकर देखना।
🌻
चैतन्य स्वामी
SHREEM CHAITANYAA YOGA
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