नवयुवक मंडल शरौंथा

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जय देवता नारायण जी। 🙏✨🕉️  #जयदेवता
07/09/2026

जय देवता नारायण जी। 🙏✨🕉️ #जयदेवता

07/09/2026
चले हम चार धाम की राह,हर युग की है इसमें चाह।पहुँचे पहले बद्रीनाथ,जहाँ तपस्वी नर-नारायण साथ।गंगोत्री यमुनोत्री हैं उद्गम...
02/09/2026

चले हम चार धाम की राह,हर युग की है इसमें चाह।
पहुँचे पहले बद्रीनाथ,जहाँ तपस्वी नर-नारायण साथ।

गंगोत्री यमुनोत्री हैं उद्गम धाम,केदारनाथ बद्रीनाथ देव धाम।
दर्शन से भक्त जाते हैं बैकुंठ धाम,पवित्र जल में समाया ज्ञान।

यमुनोत्री मैया को पूजे सारा सकल जहां,चारों धाम की यात्रा का पाए हर इंसान।
अलकनंदा नदी पर है धरती का बैकुंठ धाम,भक्तों बड़ी महान है भगवान की गाथा।

हर हर गंगे जय मां गंगे तेरी सदा जयकार हो,कृपा से भक्तों का उद्धार हो।

यह छायाचित्र 2015 चारधाम यात्रा का है।

जय छत्रधारी नारायण देवता।
जय बदरी विशाल।

जय बद्री विशाल प्रभु, कृपा करो भगवान।दीनन के तुम नाथ हो, सब जग के हो प्राण॥जय छत्रधारी देवता नारायण।जय बदरी विशाल।
29/08/2026

जय बद्री विशाल प्रभु, कृपा करो भगवान।
दीनन के तुम नाथ हो, सब जग के हो प्राण॥

जय छत्रधारी देवता नारायण।
जय बदरी विशाल।

बहुत ही निदंनीय।सच मे आज का युवा convent कुछ ज्यादा ही है। क्या हम अच्छी शिक्षा देने व उसे मतलबी बनाने मे हद से उपर गुजर...
08/08/2026

बहुत ही निदंनीय।

सच मे आज का युवा convent कुछ ज्यादा ही है। क्या हम अच्छी शिक्षा देने व उसे मतलबी बनाने मे हद से उपर गुजर रहे हैं । इसका जवाब शायद हां ही होना चाहिए।

मुझे लगता है जिस विषय पर तीन दिन पहले एक पोस्ट शेयर की थी उसके प्रति आप सभी जनमानस का एक भी तर्क तक दर्ज नहीं हुआ।

इसका मतलब आप भी उसी समाज का हिस्सा बनने की राह पर तो नहीं है।

आप किसी के पुत्र व बेटी होंगे, कया आपको नहीं लगता कि जो हमारा अपने माता पिता के साथ व्यवहार करने का तरीका.है।
सही है या गलत है ?

आज की युवा पीढ़ी को मौबाइल फोन रखने व हद से ज्यादा इस्तेमाल करने की लत लग गई है जिससे आम आदमी इस दलदल से बाहर नहीं निकल पा रहा है।

मोबाइल फोन के इस्तेमाल से फालतू की चीजें देखने मै पैसा व समय की बरबादी, अपने आप को एक अलग से समाज के निर्माण का अध्याय लिखना शुरू कर रहे हो।

इसलिए समय रहते इन चीजों को दरकिनार करते हुए अपने पारिवारिक जीवन व समाज के प्रति दायित्व, प्रेम प्यार , सनातन संस्कृति की ओर ध्यान देने की जरुरत है।

ये रील इत्यादि मे आप जितने सुन्दर दिखते हैं वास्तव मे असली चेहरा तो आपने छुपा रखा है, वो चेहरा है सेवा।अपने माता पिता की सेवा करें वो भी निस्वार्थ भाव से।

अगर तुम अपने माता पिता की सेवा करते हो तो आप अपने बुढापे के लिए सहारा बना रहे हो।

शर्त यह है कि वो शिक्षा अपने बच्चों को जरूर दें। वो भी उसी तरह आपकी देखभाल करेगा जिस शिक्षा के कारण आपने अपने माता पिता की सेवा की थी।

अपनी राय जरूर दे।

05/08/2026

ये कैसे रिश्ते? वृदाश्रम में मशहूर व्यापारी की मौत, मिलने नहीं आईं 3 बेटियां, VIDEO कॉल पर देखा अंतिम संस्कार।

आचार्य चाणक्य के अनुसार कलयुग में धन ही सबसे बड़ा बल है। जिसके पास पैसा है, उसी को समाज में गुणवान, ज्ञानी और सम्मानित व्यक्ति माना जाता है।

धनवान ही विद्वान: कलयुग में जिस मनुष्य के पास धन होता है, समाज उसे ही योग्य और ज्ञानी समझता है। गरीब व्यक्ति के ज्ञान का कोई मूल्य नहीं रहता।

सच्चे रिश्तों की परख: विपत्ति और संकट के समय ही सच्चे मित्र, भाई और जीवनसाथी की पहचान होती है।

रिश्तों से ऊपर स्वार्थ: इस युग में लोग स्वार्थ के लिए संबंध रखते हैं। जब तक काम है, तब तक अपनापन दिखाते है

कया फायदा ऐसी शोहरत का ,ऐसी संपत्ति का, शिक्षा का,जो हम आज की युवा पीढ़ी को दे रहे है कि पुत्र व बेटी के होते हुए भी मां व बाप को बुढापे मे ये दिन देखने को मिलते हैं।

समाज मे इस प्रकार की अनेकों घटनाएं घटित हो रही हैं, पर पैसों के बल पर सार्वजनिक नहीं हो पाती है।

बहुत ही निन्दनीय।

।। भागवत में लिखी ये बातें कलयुग में हो रही हैं सच ।।

ततश्चानुदिनं धर्मः सत्यं शौचं क्षमा दया। कालेन बलिना राजन् नङ्‌क्ष्यत्यायुर्बलं स्मृतिः ।। कलयुग में धर्म, स्वच्छता, सत्यवादिता, स्मृति, शारीरक शक्ति, दया भाव और जीवन की अवधि दिन-ब-दिन घटती जाएगी।

वित्तमेव कलौ नॄणां जन्माचारगुणोदयः। धर्मन्याय व्यवस्थायां कारणं बलमेव हि।। कलयुग में वही व्यक्ति गुणी माना जायेगा जिसके पास ज्यादा धन है। न्याय और कानून सिर्फ एक शक्ति के आधार पे होगा।

दाम्पत्येऽभिरुचि
अवृत्त्या न्यायदौर्बल्यं पाण्डित्ये चापलं वचः।। घूस देने वाले व्यक्ति ही न्याय पा सकेंगे और जो धन नहीं खर्च पायेगा उसे न्याय के लिए दर-दर की ठोकरे खानी होंगी।

आप भी इस विषय पर अपनी राय जरूर रखें।

देव संस्कृति ःहिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने हजारों वर्षों तक इस क्षेत्र में बद्री (एक बेर) के रूप में ध...
04/08/2026

देव संस्कृति ः

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने हजारों वर्षों तक इस क्षेत्र में बद्री (एक बेर) के रूप में ध्यान किया, और इसी कारण इस स्थान को बद्री-विशाल के नाम से जाना जाने लगा । ऐसा कहा जाता है कि देवताओं और राक्षसों ने एक बार अमरत्व के अमृत की खोज में समुद्र मंथन करने में सहायता के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना की थी।

बद्री विशाल, जिन्हें भगवान बद्रीनाथ के नाम से भी जाना जाता है, गढ़वाल हिमालय में फैले भगवान विष्णु को समर्पित सात पवित्र तीर्थों में से प्रथम और सबसे प्रमुख के रूप में पूजनीय हैं।

जय बद्री विशाल! यह भगवान विष्णु के बद्रीनाथ धाम का पवित्र जयकारा और प्रसिद्ध युद्धघोष है, जिसका उपयोग भारतीय सेना की गढ़वाल राइफल्स के जवान भी पूरी, श्रद्धा, वीरता और जोश के साथ करते हैं।

भगवान विष्णु का रूप: बद्रीनाथ में विराजमान भगवान नारायण को ही 'बद्री विशाल' कहा जाता है।

सेना का जयघोष: गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंट का यह आधिकारिक युद्धघोष है, जो रणक्षेत्र में नया साहस भरता है।

आस्था का प्रतीक: उत्तराखंड की देवभूमि में स्थित इस धाम के दर्शन मात्र से भक्तों के सारे कष्ट दूर होते हैं।

यह एक पुराना व ऐतिहासिक मिलन का छाया चित्र है जो रोहडू यात्रा के समय शीकडू महाराज जी के साथ बीरनु घोडी के मालिक जिसमें गयारह गांव आते हैं।

मान्यताओ के अनुसार छत्रधारी नारायण देवता जी कभी भी अपने दो भाईयों रूद्र देवता व गोली नाग देवता जी के अलावा किसी और देवताओं से मिलन नहीं करते हैं ये मिलन इतिहास मे शीकडू देवता जी के साथ दूसरी बार हुआ है।

बद्रीनाथ धाम मे सोने के छतर से नवाजे गए हमारे आराध्य छत्रधारी देवता नारायण जी की अगले वर्ष चार धाम यात्रा प्रस्तावित है।

दोनों महाराज की असीम कृपा आप सभी पर बनी रहे ।

जय शीकडू देवता।
जय बदरी विशाल।
जय देवता नारायण।

31/07/2026

शिमला: बिजट महाराज मंदिर से 8 से 10 लाख के सोने के आभूषण गायब, भंडारी पर मामला दर्ज।

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