Rakesh Kumar jain

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25/06/2026

बगरू रोड महापुरा रिंग रोड के पास टैंकर पलटा

25/06/2026

"जब तक साथ थे तो 'कंधे से कंधा मिलाने वाले साथी', और जब अपनी ही सरकार को आईना दिखाया तो 'भेड़-बकरी' और 'निकम्मा'?

20/08/2024

हिमालय की बर्फीली चोटियों के बीच भारतीय सेना का एक विशेष ऑपरेशन चल रहा था। आसमान में गूंजते हेलीकॉप्टर की गड़गड़ाहट और उसके पंखों से उठता बर्फ का गुबार एक अद्वितीय दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। हेलीकॉप्टर में बैठे विशेष बलों के सैनिक पूरी तैयारी में थे। उनका मिशन था—एक गुप्त शत्रु ठिकाने को ध्वस्त करना, जो दुश्मन के क्षेत्र में छुपा हुआ था।

हेलीकॉप्टर बर्फ से ढकी चोटियों के ऊपर मंडरा रहा था। चारों तरफ घना कोहरा और बर्फीले पहाड़ों का जाल, जिसने ऑपरेशन को और भी कठिन बना दिया था। लेकिन ये सैनिक, जो अपने देश के लिए जान तक देने को तैयार थे, किसी भी चुनौती से पीछे हटने वाले नहीं थे।

जैसे ही हेलीकॉप्टर ने उचित स्थान पाया, रस्सियों को नीचे फेंका गया। एक-एक कर सैनिक रस्सी के सहारे नीचे उतरने लगे। हवा में झूलते हुए, उनके हाथों में बंदूकें तैयार थीं, और उनकी आंखें हर संभावित खतरे पर नजर रखे हुए थीं।

नीचे उतरते ही उन्होंने तुरंत चारों ओर का मुआयना किया और बिना वक्त गवांए अपने मिशन की ओर बढ़ने लगे। उनकी चाल चुपचाप और तेज थी, जैसे तेंदुआ अपने शिकार की ओर बढ़ता है। दुश्मन को भनक भी नहीं लगी कि भारतीय सेना के ये बहादुर सैनिक उनके ठिकाने के इतने करीब पहुंच चुके थे।

अचानक, एक दुश्मन गार्ड की नजर इन पर पड़ी। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सैनिकों ने बिजली की तेजी से कार्रवाई की और गार्ड को शांत कर दिया। इसके बाद वे चुपचाप आगे बढ़ते रहे, एक-एक दुश्मन को बिना कोई शोर किए समाप्त करते हुए।

अंततः, वे उस स्थान तक पहुंच गए जहां दुश्मन का मुख्य ठिकाना था। वहां एक बड़ा शस्त्रागार था, जिसे नष्ट करना उनके मिशन का मुख्य उद्देश्य था। उन्होंने बम लगाए और अपनी कार्यवाही को पूरा करते हुए वहां से सुरक्षित निकलने की योजना बनाई।

बम फटते ही एक जोरदार धमाका हुआ, जिसने दुश्मन के ठिकाने को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। मिशन सफल हुआ, और सैनिकों ने तुरंत हेलीकॉप्टर के पास वापसी की, जो उन्हें लेने के लिए तैयार खड़ा था।

यह एक ऐसा अभियान था, जिसने न केवल दुश्मन के हौसले पस्त कर दिए, बल्कि हिमालय की ऊंचाइयों में भारतीय सेना की बहादुरी का एक नया अध्याय भी लिख दिया।
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20/08/2024

**कहानी: रोहन की यात्रा**

रोहन एक छोटे से गाँव का लड़का था। गाँव की संकरी गलियाँ, मिट्टी के घर, और धूल भरी सड़कें उसकी जिंदगी का हिस्सा थीं। उसके माता-पिता गरीब थे, लेकिन उनकी सादगी और मेहनत ने उसे एक मजबूत आधार दिया। वह हमेशा सपनों में खोया रहता, सोचता कि एक दिन वह अपने गाँव को एक नई दिशा देगा।

समय बीतता गया, और रोहन ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से पढ़ाई पूरी की। शहर में अपनी कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद उसने एक सफल व्यवसायी के रूप में पहचान बनाई। आज, वह एक विशाल और चमकदार शहर की ऊँची इमारतों के बीच खड़ा था। उसका चेहरा गर्व और सोच में डूबा हुआ था, क्योंकि उसने अपनी मेहनत से वह मुकाम हासिल किया था, जो उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।

गाँव की ओर लौटते समय, रोहन ने सोचा कि उसका गाँव और उसके लोग उसके सफर का हिस्सा थे। वह अपने पुराने गाँव के सामने खड़ा था, जहाँ उसकी परिश्रम की कहानियाँ और सपनों की राह अब सच हो चुकी थी। उसके चारों ओर कुछ गाँववाले खड़े थे, जिनकी आँखों में प्रशंसा और आभार था। उनकी आँखों में चमक और उनकी मुस्कान ने रोहन को यह महसूस कराया कि उसने अपने सपनों को पूरा करने के साथ-साथ अपने गाँव के लिए भी कुछ किया है।

रोहन ने अपने गाँव को आशा और प्रेरणा का संदेश दिया। उसने देखा कि गाँव के लोग अब उसकी सफलता से प्रेरित होकर अपने सपनों की ओर बढ़ रहे थे। उसकी सफलता का मतलब केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी, बल्कि यह उसके गाँव के विकास और बदलाव का प्रतीक भी था।

इस प्रकार, रोहन की यात्रा ने साबित कर दिया कि मेहनत और समर्पण से किसी भी कठिनाइयों को पार किया जा सकता है। उसने अपने गाँव को प्रेरणा दी और एक नई दिशा दी, जिससे उसकी सफलता केवल उसके लिए नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के लिए एक मिसाल बन गई।

20/08/2024

# # # कहानी: "सीमा पर वीरता"

भारत और पाकिस्तान की सीमा के पास, एक छोटा सा गांव था, जहां सैनिकों की एक टुकड़ी तैनात थी। यह टुकड़ी भारतीय सेना का हिस्सा थी, जिनका मिशन था देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

सर्दियों की एक रात, जब हिमालय की ठंडी हवाएं बह रही थीं, कैप्टन अर्जुन और उनकी टीम को सूचना मिली कि सीमा पर कुछ संदिग्ध गतिविधियां हो रही हैं। उन्होंने तुरंत अपनी रणनीति बनाई और गांव के पास के जंगलों की ओर बढ़ने का फैसला किया।

जैसे ही वे जंगल में दाखिल हुए, अर्जुन ने अपनी टीम को दो हिस्सों में बांट दिया। एक हिस्सा गांव की रक्षा में तैनात रहा, जबकि दूसरा हिस्सा उनके साथ आगे बढ़ा। रास्ते में, उन्होंने रेडियो संपर्क के जरिए अपने हेडक्वार्टर को स्थिति की जानकारी दी।

जंगल में गहराई तक जाने पर, उन्हें कुछ आवाजें सुनाई दीं। उनकी सतर्कता बढ़ गई। धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए, उन्होंने देखा कि कुछ लोग सीमा पार करने की कोशिश कर रहे थे। अर्जुन ने अपनी टीम को ध्यान से आगे बढ़ने का संकेत दिया।

एक निर्णायक क्षण में, उन्होंने अपनी रणनीति के अनुसार दुश्मनों को चारों और से घेर लिया। थोड़ी देर बाद, गोलीबारी शुरू हो गई। अर्जुन की टीम ने बहादुरी से मुकाबला किया और अंततः सारे घुसपैठियों को पकड़ लिया।

इस वीरता और सूझबूझ के कारण, गांव सुरक्षित रहा और सीमा पर शांति बनी रही। अर्जुन और उनकी टीम की इस बहादुरी को सेना द्वारा सम्मानित किया गया और उनके गांव के लोग उन पर गर्व महसूस करने लगे।

इस तरह, कैप्टन अर्जुन और उनकी टीम ने न सिर्फ अपने कर्तव्य का पालन किया बल्कि यह साबित किया कि सच्ची वीरता और देशभक्ति से बड़ी कोई ताकत नहीं होती।

20/08/2024

एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में एक रंग-बिरंगी बाजार सजती थी। इस बाजार में हर तरह के फल, सब्जियाँ और कपड़े बिकते थे। यहाँ की रौनक देखते ही बनती थी, जहाँ हर कोई अपने-अपने काम में व्यस्त था।

गाँव की एक महिला, जिसका नाम सीता था, हर हफ्ते बाजार में अपने घर के लिए फल और सब्जियाँ खरीदने आती थी। वह हमेशा अपने साथ एक सफेद गाय को लेकर आती, जो उसके लिए बहुत खास थी। सीता की गाय न केवल उसके लिए दूध देती थी, बल्कि वह बाजार में भी सबका ध्यान आकर्षित करती थी।

एक दिन, जब सीता बाजार में अपने सामान की खरीदारी कर रही थी, उसने देखा कि उसकी गाय एक छोटे से बच्चे के पास गई है। बच्चा उसे प्यार से सहला रहा था। सीता ने मुस्कुराते हुए देखा कि बच्चे की माँ उसे रोकने की कोशिश कर रही थी, लेकिन गाय ने उसे इतना प्यार से लपेट लिया कि सबको हंसी आ गई।

बाज़ार में लोग उस दृश्य को देखकर खुश हो गए। सीता ने सोचा कि यह नज़ारा गाँव के सहयोग और प्रेम का प्रतीक है। उसने सब्जियाँ और फल खरीदकर अपने घर की ओर लौटने का फैसला किया।

गाँव में लौटते समय, सीता ने महसूस किया कि छोटी-छोटी खुशियाँ ही जीवन को सार्थक बनाती हैं। उसने सोचा कि उसका गाँव हमेशा प्रेम और एकता से भरा रहेगा, जैसे इस बाजार की रौनक।

वह अपने घर पहुँची, और अपने परिवार के साथ उन खुशियों को साझा किया, जो उसने बाजार में पाई थीं। उस दिन से, सीता ने ठान लिया कि वह हमेशा अपने गाँव की मिठास और एकता को बनाए रखेगी।

और इस तरह, सीता और उसकी गाय ने अपने गाँव में प्रेम और खुशियों की एक नई कहानी लिखी।

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