मैं बर्फ के पास कभी आग को लाकर देखूं
जी चाहता है मैं खुद को गले लगाकर देखूं
जैसे समझाता है कोई किसी टूटे शख्स को
वैसे ही मैं एक बार खुद को समझाकर देखूं
कहते हैं कि अल्फाज़ दवा का काम करते हैं
आज खुद को अल्फाजों में उलझाकर देखूं
देखना है किसको है परवाह मेरे अश्कों की
महफिल में एक बार खुद को रुलाकर देखूं
तमाशा बनता है तो बन जाये; एक बार मेरा
कुछ राज खुद के ; अपनों को सुनाकर देखूं
कहते हैं अपने से ज्यादा चोट खाए को देखो
आज खुद की तस्वीर आईने में लगाकर देखूं
कुछ लम्हे , कुछ यादें
Love
तू हंसके जी या रोके जी एक उम्र तो तुझको जीना है जो झूठ के पीछे भागे तू हर मोड़ पर झूठ को सहना है जब आज नहीं कल मरना है जब आज नहीं कल मरना है किस बात से इतना डरना है किस बात से इतना डरना है चल खुशियों से मिलते हैं चल वापस जीरो पे चलते हैं
04/10/2024
सब्र कर बैठा हूं, जैसा तेरा फ़र्ज़ नहीं
मुझे तेरी ज़रूरत, तुझे कोई ग़रज़ नहीं
खोया मेने अपनी हर प्यारी चीज़ को
तेरा चला जाना कोई मेरा पहला दर्द नहीं
1) हंसी की तिजारत कर रहा था शहर में
रहातें ढूंढ रहा था गैरो में
मुझे आने में देर हुई, माफ़ करना
अपनों के तोड़े कांच द जोड़ों में
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