कुछ लम्हे , कुछ यादें

कुछ लम्हे , कुछ यादें

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Love

18/03/2025

मैं बर्फ के पास कभी आग को लाकर देखूं
जी चाहता है मैं खुद को गले लगाकर देखूं

जैसे समझाता है कोई किसी टूटे शख्स को
वैसे ही मैं एक बार खुद को समझाकर देखूं

कहते हैं कि अल्फाज़ दवा का काम करते हैं
आज खुद को अल्फाजों में उलझाकर देखूं

देखना है किसको है परवाह मेरे अश्कों की
महफिल में एक बार खुद को रुलाकर देखूं

तमाशा बनता है तो बन जाये; एक बार मेरा
कुछ राज खुद के ; अपनों को सुनाकर देखूं

कहते हैं अपने से ज्यादा चोट खाए को देखो
आज खुद की तस्वीर आईने में लगाकर देखूं

04/12/2024

तू हंसके जी या रोके जी एक उम्र तो तुझको जीना है जो झूठ के पीछे भागे तू हर मोड़ पर झूठ को सहना है जब आज नहीं कल मरना है जब आज नहीं कल मरना है किस बात से इतना डरना है किस बात से इतना डरना है चल खुशियों से मिलते हैं चल वापस जीरो पे चलते हैं

04/10/2024
01/01/2024

सब्र कर बैठा हूं, जैसा तेरा फ़र्ज़ नहीं
मुझे तेरी ज़रूरत, तुझे कोई ग़रज़ नहीं
खोया मेने अपनी हर प्यारी चीज़ को
तेरा चला जाना कोई मेरा पहला दर्द नहीं

01/01/2024

1) हंसी की तिजारत कर रहा था शहर में
रहातें ढूंढ रहा था गैरो में
मुझे आने में देर हुई, माफ़ करना
अपनों के तोड़े कांच द जोड़ों में

new year

13/12/2023
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