27/08/2026
#राहुल_गाँधी कभी भी #रेशमा_फातिमा को स्टेज पर नहीं बुलाएंगे.... न उसे माइक देंगे... न बात करेंगे
जब वह सिर्फ 16 साल की थी, तब उसकी माँ के भाई—यानी उसके अपने मामा—जो 38 साल के थे, ने उससे शादी करने के लिए कहा। रेशमा ने साफ मना कर दिया। इसके बाद वह आदमी तेजाब लेकर आया और उसके चेहरे पर फेंक दिया। रेशमा ने अपने हाथों और शरीर से उसका मुकाबला किया और उसे अपना काम पूरा नहीं करने दिया।
ज़रा सोचिए, वह आदमी कौन था। कोई अनजान आदमी नहीं, न ही पड़ोस का कोई ऐसा लड़का जिसे उसने शादी के लिए मना किया था। वह उसका अपना मामा था—उसकी उम्र से दोगुने से भी ज्यादा उम्र का आदमी, जो उसके घर आता-जाता था और उसके परिवार के साथ बैठकर खाना खाता था।
रेशमा ने उसे शादी के लिए मना कर दिया। उसके माहौल में, जहाँ 16 साल की लड़कियों से यह उम्मीद भी नहीं की जाती कि वे अपनी शादी को लेकर अपनी राय रखें, वहाँ परिवार के एक बड़े आदमी को मना करना अपने आप में बहुत हिम्मत की बात थी।
उस आदमी ने तय कर लिया कि रेशमा को 'ना' कहने की सज़ा मिलेगी। और तेजाब का इस्तेमाल भी इसी मकसद से किया जाता है—महिला को मारने के लिए नहीं, बल्कि उसका चेहरा बिगाड़ देने के लिए, ताकि वह जिंदगी भर अपने चेहरे पर उस 'ना' की कीमत ढोती रहे।
लेकिन रेशमा न तो भागी और न ही डरकर जड़ हो गई। उसने अपने हमलावर का डटकर मुकाबला किया और उसे रोक दिया।
उसे बच्चों को दिए जाने वाले देश के सर्वोच्च राष्ट्रीय वीरता सम्मानों में से भारत पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
इसके बाद रेशमा ने दो ऐसे सवाल पूछे, जिनका जवाब पूरे देश को देना चाहिए।
पहला सवाल था—उसे तेजाब इतनी आसानी से मिला कैसे?
तेजाब की बिक्री पर नियम-कायदे हैं, फिर भी वह सस्ता और आसानी से दुकानों पर मिल जाता है।
दूसरा सवाल और भी सीधा था, लेकिन उसका जवाब देना शायद ज्यादा मुश्किल है।
उस आदमी ने उसके चेहरे पर सिर्फ इसलिए तेजाब डाल दिया क्योंकि रेशमा ने उसे शादी के लिए मना कर दिया था।
तो रेशमा ने पूछा—क्या आज भी किसी लड़की को किसी रिश्ते या शादी के लिए 'ना' कहने का अधिकार नहीं है?
इस सवाल का जवाब आज भी हमारे समाज को देना बाकी है।
#यहभारतकीबातहै