कृष्ण की बाल लीलाएं पूजनीय है और गीता में दिया संदेश अनुसरणीय है ,गीता के मार्ग पर चलो 🎯🏹⛳🙏
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कहां है मानवता
सनातनी हिंदू संगठित हो , हिंदू ताकतवर हो बेखौफ हो निडर हो निर्भीक हो अपने देश में
27/07/2026
मैं इसे 🐷के नाम से जानता हूं और आप🤔🫠😘
26/07/2026
सीता का पति ही हर बार परीक्षा क्यूं दे आएशा के पति पर भी बात होनी चाहिए 🤔🧿👁️
25/07/2026
महामानव 🫶🧿🫶
24/07/2026
पहचान गये हो तो नाम बताओ❓
बड़ा बेशर्म सम्प्रदाय है यह
16/07/2026
इन तीनों में सबसे ज्यादा भजन कौन उठा रहा है 🤣😜👁️
#बूझोतोजानें
चीन 60किमी अंदर
15/07/2026
हर हर महादेव 🕉️🔱🚩।
14/07/2026
कहते हैं कि सच्चा प्रेम शब्दों का मोहताज नहीं होता, वह हर परिस्थिति में अपना एहसास करा देता है। मध्य प्रदेश के बैतूल से इंसान और उसके पालतू साथी के अटूट रिश्ते की ऐसी मार्मिक तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया।
शहर के सिविल लाइन निवासी प्रदीप जैन (67) का भोपाल स्थित एम्स अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। वे पिछले आठ दिनों से अस्वस्थ थे।
उनका पार्थिव शरीर बैतूल लाया गया, जहां परिजन, रिश्तेदार और शुभचिंतक अंतिम दर्शन के लिए जुटे। लेकिन इस अंतिम विदाई के दौरान जो सबसे गमगीन नजर आया, वह था उनका 15 वर्षों से साथ निभा रहा पालतू डॉगी 'डुग्गू'।
जैसे ही प्रदीप जैन का पार्थिव शरीर घर पहुंचा, डुग्गू उनके पास से हटने को तैयार नहीं था। परिजनों ने अंतिम संस्कार की तैयारियों के दौरान उसे दूसरे कमरे में बंद कर दिया, लेकिन वह पूरी रात बेचैन रहा। उसकी करुण आवाजें मानो अपने प्रिय मालिक को पुकार रही थीं। वह बार-बार बाहर निकलने की कोशिश करता रहा, जैसे उसे एहसास हो गया हो कि उसका सबसे प्रिय साथी अब कभी लौटकर नहीं आएगा।
जब सुबह अंतिम यात्रा निकली तो डुग्गू भी किसी तरह बाहर आ गया और अपने मालिक की अर्थी के पीछे-पीछे चल पड़ा। कुछ ही कदम चलने के बाद अचानक उसकी सांसें उखड़ने लगीं और देखते ही देखते उसने भी वहीं दम तोड़ दिया।
दृश्य देखकर अंतिम यात्रा में शामिल लोग स्तब्ध रह गए। किसी को विश्वास नहीं हो रहा था कि 15 वर्षों तक अपने मालिक का साथ निभाने वाला यह बेजुबान साथी, आखिरी सफर में भी उन्हें अकेला छोड़ने को तैयार नहीं था।
डुग्गू की मृत्यु के बाद परिजनों ने उसे भी परिवार के सदस्य की तरह सम्मान दिया। उसकी भी अर्थी सजाई गई और दोनों की अंतिम यात्रा साथ-साथ गंज मोक्षधाम पहुंची।
प्रदीप जैन का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया, जबकि डुग्गू को श्मशान परिसर के समीप पूरे सम्मान के साथ दफनाया गया। यह भावुक दृश्य देखकर वहां मौजूद कई लोगों की आंखें भर आईं।
बैतूल में इंसान और एक बेजुबान जीव के बीच प्रेम, अपनापन और वफादारी की यह घटना हर किसी के दिल को छू गई। यह सिर्फ एक पालतू कुत्ते की कहानी नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिसाल है जिसमें न कोई स्वार्थ था, न कोई अपेक्षा—सिर्फ अटूट प्रेम और आजीवन साथ निभाने का वादा था। डुग्गू ने साबित कर दिया कि वफादारी केवल शब्द नहीं, बल्कि एक ऐसा एहसास है, जो आखिरी सांस तक निभाया जाता है।
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