09/09/2019
Aabsar
THIS IS @MAZING...REALLY.!!! THIS IS A VERY AMAZING PLACE
09/09/2019
28/08/2019
ट्रम्प - " हा हा हा ....सरपंच साची ही बोलै हो , ओ मोदीड़ो बदमाश है ....बेटो मन्नै कैहवै - चौसंगी लिया ....लाहौर गै बाड़ छापस्यां "
Pc:hanuman pareek
Desi Jugad...
01/04/2019
सरस्वती विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय आबसर/12th कक्षा विदाई समारोह 31/3/2019 subsubscrib subscribscrib subscrib subscrib subscrib subscrib subscrib subscrib subscrib
15/02/2019
black day for india.
07/11/2018
May this Diwali bring you happiness and prosperity. May Goddess Lakshmi bless you and give you strength to achieve success in whatever you do 🙏 . ️
दीवाली की हार्दिक शुभकामनाएं ।
आज फिर से गॉव की याद आ गई।
अबसर गांव की कुछ यादेँ।
बो अबसर गांव को फाटक आळो खेल्डो।
काई काई खेलणियो ही जान सक है।
बो अबसर गाव को ताल।
क्रिकेट खेलणियो ही जान सक है।
बो आबसर गाव को शिव् मंदीर्।
नगारा बजाणियो ही जान सक है।
बो अबसर गाव को लालतोडों पिपळ गट्टो।
रात की 2 बजे ताणी बेठणियो ही जाण सक है।
बो आबसर गाव को बासी धोरो।
घी की थैली स्यु तिसलणियो ही जाण सक है।
बा अबसर गाव की बडोड़ी स्कूल।
बीम पढणियो ही जाण सक है।
बा गोदाम म नेमीचंद स्वामी की दूकान।
खातो चलाणियो ही जाण सक है।
बो अबसर गाव को बासी तळाव।
बीम तो न्हायो जाको ही जान सक है।
बा श्रवण स्वामी की दूकान ।
कचोरी खायो जाको ही जान सक है।
बा परमेश (बाणियो) की दूकान।
पान खायो जको ही जाण सक है।
बे इन्दरचंद सांखला का भजन।
सुनणियो ही जाण सक है।
बा नंदू स्वामी (नंदू रेड़ी)की रेड़ी।
निम्बुरस की फांक खाणियो ही जान सक है।
बा छोटकी स्कूल।
सतोळियो खेलणियो ही जान सक है।
बा आबसर की पंचायत।
ताश खेलणियो ही जान सक है।
बे आबसर की गळ्या ।
फिरणियो ही जान सक है।
बे भंवरदास पुजारी जी का मंदिर म हेल्ला।
सुनाणियो ही जान सक है।
बो बिचले गुवाड़ को घिनड।
घालणीयो ही जाण सक है।
बा अबसर की दादागिरी।
खालिया, भानिसर,सिमसिया, धातरि का छोरा ही जान सक है।
बो अबसर को पहलवान सुन्दर।
काम करवाणियो ही जान सक है।
बे आबसर म बाराती आवणा।
बान कुटणियो ही जान सक है।
बो अबसर को चिकणो ताल।
बीम तिसलणियो ही जान सक है।
बो लाध बाबा ळो ठेक्को।
बीम जाणियों ही जान सक है।
बो पंथवारि वाळो खेल्डो।
बिन पटकणियो ही जान सक है।
बा आबसार की गैंग।
बीम रेणीयो ही जान सक है।
बा नारायण जी की शिव मंदिर म स्कूल।
बीम पढणियो ही जान सक है।
बे अबसर क शिव मंदिर म गांजलिया।
बठ बेठणियो ही जान सक है।
बे डोसीजी का मीठा मिन सत्तू।
खाणियो ही जान सक है।
बा अबसर म किशनजी खटीक की बोडी वाली बस।
चढ्यो जको ही जान सक है।
बा तलाव आळी दादी।
रोटी खाई जाको ही जान सक है।
बा अबसर की गटरा दादी।
मटकों ल्यायो जाको ही जाण सक है।
बे आबसर की स्कूल का प्रोग्राम।
देखणियो ही जान सक है।
(और अंतिम में 1 छोटी सी बात।)
बो ढोलकियो आबसर को।
ठुमका पर नाच्यो जको ही जान सक है।
जो मेने ये कविता लिखी है ये एकदम हकीकत है।
और इनमे से 2या3 लाइने आपको आज के समय में मिलेगी।
बाकी की सब पुरानी यादे है।
जिस जिस को याद है वो 1 बार जरूर कमेंट बॉक्स में अपनी राय दे।
(ढोलकियो आबसर को)
धन्यवाद
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